Inspirational stories

एक बार एक महात्माजी अपने कुछ शिष्यों के साथ जंगल में आश्रम बनाकर रहते थें, एक दिन कहीं से एक बिल्ली का बच्चा रास्ता भटककर आश्रम में आ गया । महात्माजी ने उस भूखे प्यासे बिल्ली के बच्चे को दूध-रोटी
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महात्मा जी की बिल्ली

खिलाया । वह बच्चा वहीं आश्रम में रहकर पलने लगा। लेकिन उसके आने के बाद महात्माजी को एक समस्या उत्पन्न हो गयी कि जब वे सायं ध्यान में बैठते तो वह बच्चा कभी उनकी गोद में चढ़ जाता, कभी कन्धे या सिर पर बैठ जाता । तो महात्माजी ने अपने एक शिष्य को बुलाकर कहा देखो मैं जब सायं ध्यान पर बैठू, उससे पूर्व तुम इस बच्चे को दूर एक पेड़ से बॉध आया करो। अब तो यह नियम हो गया, महात्माजी के ध्यान पर बैठने से पूर्व वह बिल्ली का बच्चा पेड़ से बॉधा जाने लगा । एक दिन महात्माजी की मृत्यु हो गयी तो उनका एक प्रिय काबिल शिष्य उनकी गद्दी पर बैठा । वह भी जब ध्यान पर बैठता तो उससे पूर्व बिल्ली का बच्चा पेड़ पर बॉधा जाता । फिर एक दिन तो अनर्थ हो गया, बहुत बड़ी समस्या आ खड़ी हुयी कि बिल्ली ही खत्म हो गयी। सारे शिष्यों की मीटिंग हुयी, सबने विचार विमर्श किया कि बड़े महात्माजी जब तक बिल्ली पेड़ से न बॉधी जाये, तब तक ध्यान पर नहीं बैठते थे। अत: पास के गॉवों से कहीं से भी एक बिल्ली लायी जाये। आखिरकार काफी ढॅूढने के बाद एक बिल्ली मिली, जिसे पेड़ पर बॉधने के बाद महात्माजी ध्यान पर बैठे।विश्वास मानें, उसके बाद जाने कितनी बिल्लियॉ मर चुकी और न जाने कितने महात्माजी मर चुके। लेकिन आज भी जब तक पेड़ पर बिल्ली न बॉधी जाये, तब तक महात्माजी ध्यान पर नहीं बैठते हैं। कभी उनसे पूछो तो कहते हैं यह तो परम्परा है। हमारे पुराने सारे गुरुजी करते रहे, वे सब गलत तो नहीं हो सकते । कुछ भी हो जाये हम अपनी परम्परा नहीं छोड़ सकते।यह तो हुयी उन महात्माजी और उनके शिष्यों की बात । पर कहीं न कहीं हम सबने भी एक नहीं; अनेकों ऐसी बिल्लियॉ पाल रखी हैं । कभी गौर किया है इन बिल्लियों पर ?सैकड़ों वर्षो से हम सब ऐसे ही और कुछ अनजाने तथा कुछ चन्द स्वार्थी तत्वों द्वारा निर्मित परम्पराओं के जाल में जकड़े हुए हैं।
ज़रुरत इस बात की है कि हम ऐसी परम्पराओं और अॅधविश्वासों को अब और ना पनपने दें , और अगली बार ऐसी किसी चीज पर यकीन करने से पहले सोच लें की कहीं हम जाने – अनजाने कोई अन्धविश्वास रुपी बिल्ली तो नहीं पाल रहे ?​
 
एक समय की बात है , एक गाँव में एक आदमी आया और उसने गाँव वालों से कहा कि वो बन्दर खरीदने आया है , और वो एक बन्दर के 10 रुपये देगा . चूँकि गाँव में बहुत सारे बन्दर थे इसलिए गाँव वा
ले तुरंत ही इस काम में लग गए .
उस आदमी ने 10 रूपये की rate से 1000 बन्दर खरीद लिए अब बंदरों की supply काफी घट गयी और धीरे धीरे गाँव वालों ने बन्दर पकड़ने का प्रयास बंद कर दिया . ऐसा होने पर उस आदमी ने फिर घोषणा की कि अब वो 20 रूपये में एक बन्दर खरीदेगा . ऐसा सुनते ही गाँव वाले फिर से बंदरों को पकड़ने में लग गए .
बहुत जल्द बंदरों की संख्या इतनी घाट गयी की लोग ये काम छोड़ अपने खेती -बारी में लगने लगे . अब एक बन्दर के लिए 25 रुपये दिए जाने लगे , पर उनकी तादाद इतनी कम हो चुकी थी की पकड़ना तो दूर उन्हें देखने के लिए भी बहुत मेहनत करनी पड़ती थी .

तब उस आदमी ने घोषणा की कि वो एक बन्दर के 50 रूपये देगा . पर इस बार उसकी जगह बन्दर awsखरीदने का काम उसका assistant करेगा क्योंकि उसे किसी ज़रूरी काम से कुछ दिनों के लिए शहर जाना पद रहा है . उस आदमी की गैरमौजूदगी में assistant ने गाँव वालों से कहा कि वो पिंजड़े में बंद बंदरों को 35 रुपये में उससे खरीद लें और जब उसका मालिक वापस आये तो उसे 50 रुपये में बेंच दें .

फिर क्या था गाँव वाले ने अपनी जमा पूँजी बदारों को खरीदने में लगा दी . और उसके बाद ना कभी वो आदमी दिखा ना ही उसका assistant, बस चारो तरफ बन्दर ही बन्दर थे .

दोस्तों कुछ ऐसा ही होता है जब Speak Asia जैसी company अपना business फैलाती है . बिना ज्यादा मेहनत के जब पैसा आता दीखता है तो अच्छे-अच्छे लोगों की आँखें चौंधिया जाती हैं और वो अपने तर्क सांगत दिमाग की ना सुनकर लालच में फँस जाते हैं . जब बहुत आसानी से पैसा आता दीखता है तो कहीं ना कहीं आपके अन्दर से आवाज़ आती है कि कहीं कुछ गड़बड़ है , पर हम ये सोच के पैसे लगा देते हैं की अगर company 6 महीने और नहीं भागी तो भी मेरा पैसा निकल जायेगा .

कई लोगों का पैसा निकल भी जाता है , पर जहाँ एक आदमी को फायदा होता है वहीँ 10 लोगों का नुकसान भी होता है यानि यदि आप अपने लाभ के लिए किसी ऐसी company से जुड़ते हैं तो आप कई लोगों का नुकसान भी कराते हैं . और अधिकतर नुकसान उठाने वाले लोग आपके करीबी होते हैं . इसलिए कभी भी ऐसे लुभावने वादों में मत आइये ; आप पैसे तो गवाएंगे ही साथ में रिश्तों में भी दरार पड़ जायेगी .

तो अब जब कभी कोई आपसे बिना मेहनत के पैसा कमाने की बात करे आप उसे इस Monkey Business की कहानी सुना दीजिये और अपना पल्ला झाड लीजिये
 
मुँह से निकले शब्द वापस नहीं आते

एक किसान की एक दिन अपने पड़ोसी से खूब जमकर लड़ाई हुई। बाद में जब उसे अपनी गलती का अहसास हुआ, तो उसे ख़ुद पर शर्म आई। वह इतना शर्मसार हुआ कि एक साधु के पास पहुँचा और पूछा, ‘‘मैं अपनी गलती का प्रायश्चित करना चाहता हूँ।’’ साधु ने कहा कि पंखों से भरा एक थैला लाओ और उसे शहर के बीचों-बीच उड़ा दो। किसान ने ठीक वैसा ही किया, जैसा कि साधु ने उससे कहा था और फिर साधु के पास लौट आया।
लौटने पर साधु ने उससे कहा, ‘‘अब जाओ और जितने भी पंख उड़े हैं उन्हें बटोर कर थैले में भर लाओ।’’ नादान किसान जब वैसा करने पहुँचा तो उसे मालूम हुआ कि यह काम मुश्किल नहीं बल्कि असंभव है। खैर, खाली थैला ले, वह वापस साधु के पास आ गया। यह देख साधु ने उससे कहा, ‘
‘ऐसा ही मुँह से निकले शब्दों के साथ भी होता है।’’
 
एक चूहा था। उसे बिल्ली से बड़ा डर लगता था। हालांकि यह स्वाभाविक है कि चूहे को बिल्ली से डर लगे, पर इस चूहे को कुछ ज्यादा ही डर लगता था। अपने सुरक्षित बिल में सोते हुए भी सपने में उसे बिल्ली नजर आती। हल्की-सी आहट से उसे बिल्ली के आने का अंदेशा होने लगता। सीधी-सी बात यह कि बिल्ली से भयभीत चूहा चौबीसों घंटे घुट-घुटकर जीता था।

ऐसे में एक दिन एक बड़े जादूगर से उसकी मुलाक़ात हो गई। फिर तो चूहे के भाग ही खुल गए। जादूगर को उस पर दया आ गई, तो उसने उसे चूहे से बिल्ली बना दिया। बिल्ली बना चूहा उस समय तो बड़ा ख़ुश हुआ, पर कुछ दिनों बाद फिर जादूगर के पास पहुंच गया, यह शिकायत लेकर कि कुत्ता उसे बहुत परेशान करता है।

जादूगर ने उसे कुत्ता बना दिया। कुछ दिन तो ठीक रहा, फिर कुत्ते के रूप में भी उसे परेशानी शुरू हो गई। अब उसे शेर-चीतों का बड़ा डर रहता। इस दफ़ा जादूगर ने सोचा कि पूरा इलाज कर दिया जाए, सो उसने कुत्ते का रूप पा चुके चूहे को शेर ही बना दिया। जादूगर ने साचा कि शेर जंगल का राजा है, सबसे शक्तिशाली प्राणी है, इसलिए उसे किसी से डर नहीं लगेगा।

लेकिन नहीं। शेर बनकर भी चूहा कांपता ही रहा। अब उसे किसी और जंगली जीव से डरने की जरूरत नहीं थी, पर बेचारे को शिकारियों से बड़ा डर लगता। आख़िर वह एक बार फिर जादूगर के पास पहुंच गया। लेकिन इस बार जादूगर ने उसे शिकारी नहीं बनाया। उसने उसे चूहा ही बना दिया। जादूगर ने कहा- ‘चूंकि तेरा दिल ही चूहे का है, इसलिए तू हमेशा डरेगा ही।’

सबक : डर कहीं बाहर नहीं होता, वह हमारे भीतर ही होता है। स्वार्थ की अधिकता और आत्म-विश्वास की कमी से हम डरते हैं। इसलिए अपने डर को जीतना है, तो पहले ख़ुद को जीतना पड़ेगा।

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एक चूहा था। उसे बिल्ली से बड़ा डर लगता था। हालांकि यह स्वाभाविक है कि चूहे को बिल्ली से डर लगे, पर इस चूहे को कुछ ज्यादा ही डर लगता था। अपने सुरक्षित बिल में सोते हुए भी सपने में उसे बिल्ली नजर आती। हल्की-सी आहट से उसे बिल्ली के आने का अंदेशा होने लगता। सीधी-सी बात यह कि बिल्ली से भयभीत चूहा चौबीसों घंटे घुट-घुटकर जीता था।

ऐसे में एक दिन एक बड़े जादूगर से उसकी मुलाक़ात हो गई। फिर तो चूहे के भाग ही खुल गए। जादूगर को उस पर दया आ गई, तो उसने उसे चूहे से बिल्ली बना दिया। बिल्ली बना चूहा उस समय तो बड़ा ख़ुश हुआ, पर कुछ दिनों बाद फिर जादूगर के पास पहुंच गया, यह शिकायत लेकर कि कुत्ता उसे बहुत परेशान करता है।

जादूगर ने उसे कुत्ता बना दिया। कुछ दिन तो ठीक रहा, फिर कुत्ते के रूप में भी उसे परेशानी शुरू हो गई। अब उसे शेर-चीतों का बड़ा डर रहता। इस दफ़ा जादूगर ने सोचा कि पूरा इलाज कर दिया जाए, सो उसने कुत्ते का रूप पा चुके चूहे को शेर ही बना दिया। जादूगर ने साचा कि शेर जंगल का राजा है, सबसे शक्तिशाली प्राणी है, इसलिए उसे किसी से डर नहीं लगेगा।

लेकिन नहीं। शेर बनकर भी चूहा कांपता ही रहा। अब उसे किसी और जंगली जीव से डरने की जरूरत नहीं थी, पर बेचारे को शिकारियों से बड़ा डर लगता। आख़िर वह एक बार फिर जादूगर के पास पहुंच गया। लेकिन इस बार जादूगर ने उसे शिकारी नहीं बनाया। उसने उसे चूहा ही बना दिया। जादूगर ने कहा- ‘चूंकि तेरा दिल ही चूहे का है, इसलिए तू हमेशा डरेगा ही।’

सबक : डर कहीं बाहर नहीं होता, वह हमारे भीतर ही होता है। स्वार्थ की अधिकता और आत्म-विश्वास की कमी से हम डरते हैं। इसलिए अपने डर को जीतना है, तो पहले ख़ुद को जीतना पड़ेगा।


Zabardast drastant pesh karane ke liye badhai !!!
 
एक किसान की एक दिन अपने पड़ोसी से खूब जमकर लड़ाई हुई। बाद में जब उसे अपनी गलती का अहसास हुआ, तो उसे ख़ुद पर शर्म आई। वह इतना शर्मसार हुआ कि एक साधु के पास पहुँचा और पूछा, ‘‘मैं अपनी गलती का प्रायश्चित करना चाहता हूँ।’’ साधु ने कहा कि पंखों से भरा एक थैला लाओ और उसे शहर के बीचों-बीच उड़ा दो। किसान ने ठीक वैसा ही किया, जैसा कि साधु ने उससे कहा था और फिर साधु के पास लौट आया।
लौटने पर साधु ने उससे कहा, ‘‘अब जाओ और जितने भी पंख उड़े हैं उन्हें बटोर कर थैले में भर लाओ।’’ नादान किसान जब वैसा करने पहुँचा तो उसे मालूम हुआ कि यह काम मुश्किल नहीं बल्कि असंभव है। खैर, खाली थैला ले, वह वापस साधु के पास आ गया। यह देख साधु ने उससे कहा, ‘
‘ऐसा ही मुँह से निकले शब्दों के साथ भी होता है।’’

Humein bolate aur likhate samaye is kahani ko yaad rakhna chahiye !!!
 
एक बार जरुर पढ़े..
हाथ मैं झोला लटकाए एक बुजुर्ग महिला बस मैं चडी, सीट
खाली नही देख एक दम से वह निराश हो गयी,
फिर भी जैसा कि बस मैं चड़ने वाला हर यात्री सोचता है
कि शायद किसी सीट पर अटकने की जगह मिल जाए, वह
भी पीछे की और चली,
तभी उसकी नजर एक सीट पर पड़ी , उस पर बस एक
ही युवक बेठा था, आंखों मैं संतोष की चमक आ गयी, पास
जाने पर जब उस पर कोई कपडा या कुछ सामान
नही दिखायी दिया।
उसने धम्म से शरीर को छोड़ दिया सीट पर,
अरे रे कहाँ बेठ रही हो, यहाँ सवारी आएगी,
आंखों मैं उभरी चमक घुप्प से गायब हो गयी , आगे और सीट
देखने की हिम्मत उसमें नही रही और वह वहीं सीटों के बीच
फर्श मैं ही बेठ गयी,
इसके बाद उस खाली सीट को देख कर कईं बार आंखों मैं
चमक आती रही और बुझती रही,
तभी एक collage में पढने वाली सुन्दर सी दिखने
वाली लड़की बस मैं चडी ,
अन्य लोगों को खड़ा देख उसने समझ लिया कि वह सीट
खाली नही है,
कोई आएगा, नीचे गया होगा, और वह
भी खड़ी हो गयी महिला के पास,
तभी आवाज आई बैठ जाइये न, यहाँ कोई नही आएगा,
इस आवाज पर लड़की ने मुड़कर देखा तो युवक उससे
ही मुखातिब था, उसने आश्चर्य से पूछा कोई नही आएगा,
जी नही,
युवक उसी मुस्कान के साथ बोला,
इस पर लड़की मुडी और नीचे बेठी उस बुजर्ग
महिला को बोली माँ जी आप ऊपर बैठ जाइये और उसने
इतना कह कर बुजर्ग महिला को सीट में बैठा दिया,
अब युवक का चेहरा देखने लायक था, वह लड़की को खा जाने
वाली नजरों से देख रहा था,
"दोस्तों याद रखे मानव कहलाना ही काफी नहीं है
आप के अन्दर मानवता का गुण होना भी जरुरी है" ♥
 
bhai----yeh toh real incident hai-----n I was witness of same ----that too in haryana roadways



एक बार जरुर पढ़े..
हाथ मैं झोला लटकाए एक बुजुर्ग महिला बस मैं चडी, सीट
खाली नही देख एक दम से वह निराश हो गयी,
फिर भी जैसा कि बस मैं चड़ने वाला हर यात्री सोचता है
कि शायद किसी सीट पर अटकने की जगह मिल जाए, वह
भी पीछे की और चली,
तभी उसकी नजर एक सीट पर पड़ी , उस पर बस एक
ही युवक बेठा था, आंखों मैं संतोष की चमक आ गयी, पास
जाने पर जब उस पर कोई कपडा या कुछ सामान
नही दिखायी दिया।
उसने धम्म से शरीर को छोड़ दिया सीट पर,
अरे रे कहाँ बेठ रही हो, यहाँ सवारी आएगी,
आंखों मैं उभरी चमक घुप्प से गायब हो गयी , आगे और सीट
देखने की हिम्मत उसमें नही रही और वह वहीं सीटों के बीच
फर्श मैं ही बेठ गयी,
इसके बाद उस खाली सीट को देख कर कईं बार आंखों मैं
चमक आती रही और बुझती रही,
तभी एक collage में पढने वाली सुन्दर सी दिखने
वाली लड़की बस मैं चडी ,
अन्य लोगों को खड़ा देख उसने समझ लिया कि वह सीट
खाली नही है,
कोई आएगा, नीचे गया होगा, और वह
भी खड़ी हो गयी महिला के पास,
तभी आवाज आई बैठ जाइये न, यहाँ कोई नही आएगा,
इस आवाज पर लड़की ने मुड़कर देखा तो युवक उससे
ही मुखातिब था, उसने आश्चर्य से पूछा कोई नही आएगा,
जी नही,
युवक उसी मुस्कान के साथ बोला,
इस पर लड़की मुडी और नीचे बेठी उस बुजर्ग
महिला को बोली माँ जी आप ऊपर बैठ जाइये और उसने
इतना कह कर बुजर्ग महिला को सीट में बैठा दिया,
अब युवक का चेहरा देखने लायक था, वह लड़की को खा जाने
वाली नजरों से देख रहा था,
"दोस्तों याद रखे मानव कहलाना ही काफी नहीं है
आप के अन्दर मानवता का गुण होना भी जरुरी है" ♥
 
पुराने जमाने की बात है। एक आदमी अपनी घोड़ियों पर
चूडि़यां लाद कर गांव-गांव घूम कर चूड़ियां बेचा करता था।
जब वह चूड़ियां बेचने ले जाता, तब अपनी घोड़ियों को बड़े
प्यार से हांकते हुए कहताथा, 'चल मेरी बहन, चल मेरी भाभी,
चल मेरी मां।' लोग जब यह सुनते थे तो उन्हें बड़ा आश्चर्य
होता था। एक दिन एक आदमी ने उस चूड़ी वाले को टोकते हुए
कहा, 'क्यों भाई यह क्याकह रहे हो, इन घोडि़यों से
तुम्हारा कैसा रिश्ता, यह तुम्हारी बहन और भाभी कैसे बन
गईं?'
पहले तो चूड़ी वाले ने हंसकर टालना चाहा फिर जब उस
व्यक्ति ने सवाल दोहराया तो चूड़ी वाले ने जवाब दिया,
'आप जानते ही हैं कि मेरा काम चूड़ी बेचने का है और
चूड़ियां हमेशा माता, बहन और भाभियां ही खरीदती हैं।
इसलिए मैं सावधानी रखता हूं कि मेरे मुंह से कहीं कोई
अपशब्द न निकल जाए। मेरी आदत बनी रहे कि हमेशा मुंह से
माता, बहन और भाभी ही निकलें। यही कारण है कि मैंने
घोड़ियों के साथ भी माता, बहन और
भाभियों का रिश्ता बना रखा है।
चूड़ी बेचने वाला अपनी बोली के कारण ही स्त्रियों में अत्यंत
लोकप्रिय था। उसकी चूड़ियां हाथों-हाथ बिक जाती थीं। एक
समय ऐसा आया जब लोग अपने
बच्चों को अच्छी भाषा सिखाने के लिए उसकी मिसाल देने
लगे। उसके बारे में बताते हुए अभिभावक अपने
बच्चों को समझाते कि आदत एक ऐसी प्रवृति है
जो व्यक्ति पर हावी हो जाती है। आदत पर अंकुश
रखना जरूरी है। चूड़ी बेचने वाला अपनी आदत के प्रति सजग
था इसलिए अपने जीवन में सफल हुआ।
 
bhai...ke jagah chhapega ya strory??:)
एक बार जरुर पढ़े..
हाथ मैं झोला लटकाए एक बुजुर्ग महिला बस मैं चडी, सीट
खाली नही देख एक दम से वह निराश हो गयी,
फिर भी जैसा कि बस मैं चड़ने वाला हर यात्री सोचता है
कि शायद किसी सीट पर अटकने की जगह मिल जाए, वह
भी पीछे की और चली,
तभी उसकी नजर एक सीट पर पड़ी , उस पर बस एक
ही युवक बेठा था, आंखों मैं संतोष की चमक आ गयी, पास
जाने पर जब उस पर कोई कपडा या कुछ सामान
नही दिखायी दिया।
उसने धम्म से शरीर को छोड़ दिया सीट पर,
अरे रे कहाँ बेठ रही हो, यहाँ सवारी आएगी,
आंखों मैं उभरी चमक घुप्प से गायब हो गयी , आगे और सीट
देखने की हिम्मत उसमें नही रही और वह वहीं सीटों के बीच
फर्श मैं ही बेठ गयी,
इसके बाद उस खाली सीट को देख कर कईं बार आंखों मैं
चमक आती रही और बुझती रही,
तभी एक collage में पढने वाली सुन्दर सी दिखने
वाली लड़की बस मैं चडी ,
अन्य लोगों को खड़ा देख उसने समझ लिया कि वह सीट
खाली नही है,
कोई आएगा, नीचे गया होगा, और वह
भी खड़ी हो गयी महिला के पास,
तभी आवाज आई बैठ जाइये न, यहाँ कोई नही आएगा,
इस आवाज पर लड़की ने मुड़कर देखा तो युवक उससे
ही मुखातिब था, उसने आश्चर्य से पूछा कोई नही आएगा,
जी नही,
युवक उसी मुस्कान के साथ बोला,
इस पर लड़की मुडी और नीचे बेठी उस बुजर्ग
महिला को बोली माँ जी आप ऊपर बैठ जाइये और उसने
इतना कह कर बुजर्ग महिला को सीट में बैठा दिया,
अब युवक का चेहरा देखने लायक था, वह लड़की को खा जाने
वाली नजरों से देख रहा था,
"दोस्तों याद रखे मानव कहलाना ही काफी नहीं है
आप के अन्दर मानवता का गुण होना भी जरुरी है" ♥
 
एक दिन एक किसान का गधा कुएँ में गिर गया ।वह गधा घंटों ज़ोर -ज़ोर से रोता रहा और किसान सुनता रहा और विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिऐ और क्या नहीं। अंततः उसने निर्णय लिया कि चूंकि गधा काफी बूढा हो चूका था,अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वाला नहीं था;और इसलिए उसे कुएँ में ही दफना देना चाहिऐ।

किसान ने अपने सभी पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया। सभी ने एक-एक फावड़ा पकड़ा और कुएँ में मिट्टी डालनी शुरू कर दी। जैसे ही गधे कि समझ में आया कि यह क्या हो रहा है ,वह और ज़ोर-ज़ोर से चीख़ चीख़ कर रोने लगा । और फिर ,अचानक वह आश्चर्यजनक रुप से शांत हो गया।

सब लोग चुपचाप कुएँ में मिट्टी डालते रहे। तभी किसान ने कुएँ में झाँका तो वह आश्चर्य से सन्न रह गया। अपनी पीठ पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह गधा एक आश्चर्यजनक हरकत कर रहा था। वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता था और फिर एक कदम बढ़ाकर उस पर चढ़ जाता था।

जैसे-जैसे किसान तथा उसके पड़ोसी उस पर फावड़ों से मिट्टी गिराते वैसे -वैसे वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को गिरा देता और एस सीढी ऊपर चढ़ आता । जल्दी ही सबको आश्चर्यचकित करते हुए वह गधा कुएँ के किनारे पर पहुंच गया और फिर कूदकर बाहर भाग गया।

ध्यान रखो ,तुम्हारे जीवन में भी तुम पर बहुत तरह कि मिट्टी फेंकी जायेगी ,बहुत तरह कि गंदगी तुम पर गिरेगी। जैसे कि ,तुम्हे आगे बढ़ने से रोकने के लिए कोई बेकार में ही तुम्हारी आलोचना करेगा ,कोई तुम्हारी सफलता से ईर्ष्या के कारण तुम्हे बेकार में ही भला बुरा कहेगा । कोई तुमसे आगे निकलने के लिए ऐसे रास्ते अपनाता हुआ दिखेगा जो तुम्हारे आदर्शों के विरुद्ध होंगे। ऐसे में तुम्हे हतोत्साहित होकर कुएँ में ही नहीं पड़े
रहना है बल्कि साहस के साथ हिल-हिल कर हर तरह कि गंदगी को गिरा देना है और उससे सीख लेकर,उसे सीढ़ी बनाकर,बिना अपने आदर्शों का त्याग किये अपने कदमों को आगे बढ़ाते जाना है।

अतः याद रखो !जीवन में सदा आगे बढ़ने के लिए
१)नकारात्मक विचारों को उनके विपरीत सकारात्मक विचारों से विस्थापित करते रहो।
२)आलोचनाओं से विचलित न हो बल्कि उन्हें उपयोग में लाकर अपनी उन्नति का मार्ग प्रशस्त करो।
 
एक बुजुर्ग राज मिस्त्री ने काम से रिटायर होने का फैसला लिया। उसने अपने मालिक को बताया कि वो अब भवन निर्माण काम छोड़ कर इत्मीनान से अपनी पत्नी, बच्चो व नाती पोतो के साथ आनंदपूर्वक जीवन जीना चाहता है। मैं जानता हूँ कि मुझे रूपये पैसे की कमी खलेगी फिर भी मैं अपने फैसले पर अटल हूँ और आप से उम्मीद करता हूँ कि आप मेरे फैसले का सम्मान करते हुए मेरा अबतक का सारा पैसा दे देंगे।


मालिक को एक अच्छे कर्मचारी के जाने का दुःख हो रहा था। मालिक ने कहा - क्या मैं तुम से व्यक्तिगत तौर पर एक काम करने के लिए कह सकता हूँ ?
मिस्त्री ने कहा - हाँ बिलकुल, बताइये क्या करना है।
मालिक - एक और घर बनाना है।
मिस्त्री घर बनाने में जुट गया परन्तु इस घर को बनाते हुए उसका मन नहीं लग रहा था जिसके कारण घर उतना सुंदर और मजबूत नहीं बना जितना वो मिस्त्री पहले बनाया करता था। जब घर का निर्माण कार्य समाप्त हो गया तो मालिक उस घर को देखने आया और उसने घर के मुख्य द्वार की चाबी उस मिस्त्री के हाथ सौंप दी और कहा कि ये घर हमारी तरफ से आपको उपहार है।

मिस्त्री चौंक गया। ये उसके लिए बड़े दुःख की बात थी कि यदि वह पहले जानता होता कि यह इमारत उसकी खुद की है तो उसने इसे अलग तरीके से बनाया होता।


हम इस तरह के विचारो के साथ बहुत से काम जीवन में करते है परन्तु केवल उनका ही एहसास करते है जो वापस हमारे पास आता है।
अक्सर हम अपने जीवन का निर्माण, अपनी सामर्थ व क्षमताओ से कमतर मेहनत करके बनाते है और एक दिन हमें एहसास होता है कि ये जो घर बनाया है इसमें हमें ही रहना है यदि कुछ और अच्छा किया होता तो आज जीवन कुछ अलग होता।


आप एक मिस्त्री है रोज आप घर की दिवार, छत, खिड़की आदि बना रहे है।
Life is a do-it-yourself project.
जिस दृष्टिकोण एवं विकल्प के साथ आप आज इस घर का निर्माण कर रहे है कल आपको ही रहना है। इसीलिए बुद्धिमानी से निर्माण करे।

जो हम करते है उसी के अनुरूप हमें मिलता है और जो हमारे पास है उसी के लायक हमने किया था।

 
एक दिन किसी कारण से स्कूल में छुट्टी की घोषणा होने के कारण, एक दर्जी का बेटा, अपने पापा की दुकान पर चला गया ।वहाँ जाकर वह बड़े ध्यान से अपने पापा को काम करते हुए देखने लगा । उसने देखा कि उसके पापा कैंची से कपड़े को काटते हैं और कैंची को पैर के पास टांग से दबा कर रख देते हैं । फिर सुई से उसको सीते हैं और सीने के बाद सु ई को अपनी टोपी पर लगा लेते हैं । जब उसने इसी क्रिया को चार-पाँच बार देखा तो उससे रहा नहीं गया, तो उसने अपने पापा से कहा कि वह एक बात उनसे पूछना चाहता है ? पापा ने कहा- बेटा बोलो क्या पूछना चाहते हो ? बेटा बोला- पापा मैं बड़ी देर से आपको देख रहा हूं , आप जब भी कपड़ा काटते हैं, उसके बाद कैंची को पैर के नीचे दबा देते हैं, और सुई से कपड़ा सीने के बाद, उसे टोपी पर लगा लेते हैं, ऐसा क्यों ? इसका जो उत्तर पापा ने दिया- उन दो पंक्तियाँ में मानों उसने ज़िन्दगी का सार समझा दिया ।

उत्तर था- ” बेटा, कैंची काटने का काम करती है, और सुई जोड़ने का काम करती है, और काटने वाले की जगह हमेशा नीची होती है परन्तु जोड़ने वाले की जगह हमेशा ऊपर होती है । यही कारण है कि मैं सुई को टोपी पर लगाता हूं और कैंची को पैर के नीचे रखता हूं ।”
 
एक बाज का अंडा मुर्गी के अण्डों के बीच आ गया. कुछ दिनों बाद उन अण्डों में से चूजे निकले, बाज का बच्चा भी उनमे से एक था.वो उन्ही के बीच बड़ा होने लगा. वो वही करता जो बाकी चूजे करते, मिटटी में इधर-उधर खेलता, दाना चुगता और दिन भर उन्हीकी तरह चूँ-चूँ करता. बाकी चूजों की तरह वो भी बस थोडा सा ही ऊपर उड़ पाता , और पंख फड़-फडाते हुए नीचे आ जाता . फिर एक दिन उसने एक बाज को खुले आकाश में उड़ते हुए देखा, बाज बड़े शान से बेधड़क उड़ रहा था. तब उसने बाकी चूजों से पूछा, कि-
” इतनी उचाई पर उड़ने वाला वो शानदार पक्षी कौन है?”

तब चूजों ने कहा-” अरे वो बाज है, पक्षियों का राजा, वो बहुत ही ताकतवर और विशाल है , लेकिन तुम उसकी तरह नहीं उड़ सकते क्योंकि तुम तो एक चूजे हो!”

बाज के बच्चे ने इसे सच मान लिया और कभी वैसा बनने की कोशिश नहीं की. वो ज़िन्दगी भर चूजों की तरह रहा, और एक दिन बिना अपनी असली ताकत पहचाने ही मर गया.
दोस्तों , हममें से बहुत से लोग उस बाज की तरह ही अपना असली potential जाने बिना एक second-class ज़िन्दगी जीते रहते हैं, हमारे आस-पास की mediocrity हमें भी mediocre बना देती है.हम में ये भूल जाते हैं कि हम आपार संभावनाओं से पूर्ण एक प्राणी हैं. हमारे लिए इस जग में कुछ भी असंभव नहीं है,पर फिर भी बस एक औसत जीवन जी के हम इतने बड़े मौके को गँवा देते हैं.

आप चूजों की तरह मत बनिए , अपने आप पर ,अपनी काबिलियत पर भरोसा कीजिए. आप चाहे जहाँ हों, जिस परिवेश में हों, अपनी क्षमताओं को पहचानिए और आकाश की ऊँचाइयों पर उड़ कर दिखाइए क्योंकि यही आपकी वास्तविकता है.
 
My mom only had one eye. I hated her… She was such an embarrassment. She cooked for students and teachers to support the family.
There was this one day during elementary school where my mom came to say hello to me. I was so embarrassed.
How could she do this to me? I ignored her, threw her a hateful look and ran out. The next day at school one of my classmates said, ‘EEEE, your mo

m only has one eye!’
I wanted to bury myself. I also wanted my mom to just disappear. I confronted her that day and said, ‘ If you’re only gonna make me a laughing stock, why don’t you just die?’
My mom did not respond… I didn’t even stop to think for a second about what I had said, because I was full of anger. I was oblivious to her feelings.
I wanted out of that house, and have nothing to do with her. So I studied real hard, got a chance to go abroad to study.
Then, I got married. I bought a house of my own. I had kids of my own. I was happy with my life, my kids and the comforts. Then one day, my Mother came to visit me. She hadn’t seen me in years and she didn’t even meet her grandchildren.
When she stood by the door, my children laughed at her, and I yelled at her for coming over uninvited. I screamed at her, ‘How dare you come to my house and scare my children!’ GET OUT OFHERE! NOW!!!’
And to this, my mother quietly answered, ‘Oh, I’m so sorry. I may have gotten the wrong address,’ and she disappeared out of sight.
One day, a letter regarding a school reunion came to my house. So I lied to my wife that I was going on a business trip. After there union, I went to the old shack just out of curiosity.
My neighbours said that she died. I did not shed a single tear. They handed me a letter that she had wanted me to have.
‘My dearest son,
I think of you all the time. I’m sorry that I came to your house and scared your children.
I was so glad when I heard you were coming for the reunion. But I may not be able to even get out of bed to see you. I’m sorry that I was a constant embarrassment to you when you were growing up.
You see……..when you were very little, you got into an accident, and lost your eye. As a mother, I couldn’t stand watching you having to grow up with one eye. So I gave you mine.
I was so proud of my son who was seeing a whole new world for me, in my place, with that eye.
With all my love to you,
Your mother.’

MORAL LESSON:
Always LOVE your parents. They are a blessing to you.

NOTE:
We only have one mom, so love her, you will come to cry when she's gone.
 
एक लड़के के आपात आपरेशन के लिए एक फोन के बाद डाक्टर जल्दी जल्दी अस्पताल में प्रवेश करते हैं....उन्होंनेतुरंत अपने कपडे बदल कर सर्जिकल गाउन पहना, ऑपरेशन के लिए खुद को तैयार किया और ऑपरेशन थियेटर की तरफ चल पड़े...हॉल में प्रवेश करते ही उनकी नज़र लड़के की माँ पर जाती है...जो उनका इंतज़ार करती जान पड़ती थी और बहुत व्याकुल भी लग रही थी....

डॉक्टर को देखते ही लड़के की माँ एकदम गुस्से से बोली : आपने आने इतनी देर क्यों कर दी..? आपको पता नहीं है कि मेरे बेटे की हालत बहुत गंभीर है..? आपको अपनी जिम्मेदारी का अहसास है की नहीं..??
डॉक्टर मंद मंद मुस्कुराते हुए कहता है : मैं अपनी गलती के लिए आपसे माफ़ी मांगता हूँ...फोन आया तब मैं अस्पताल में नहीं था,जैसे ही खबर मिली मैं तुरंत अस्पताल के लिए निकल पड़ा..रास्ते में ट्रैफिक ज्यादा होने की वजह से थोड़ी देर हो गयी. अब आप निश्चिन्त रहो मैं आ गया हूँ भ
गवान की मर्ज़ी से सब ठीक हो जाएगा..अब आप विलाप करना छोड़ दो..''

इस पर लड़के की माँ और ज्यादा गुस्से से : विलाप करना छोड़ दूं मतलब..? आपके कहने का मतलब क्या है..? मेरे बच्चे को कुछ हो गया होता तो.? इसकी जगह आपका बच्चा होता तो आप क्या करते..?? डॉक्टर फिर मंद मंद मुस्कुराते हुए : शांत हो जाओ बहन, जीवन और मरण वो तो भगवान के हाथ में है, मैं तो बस एक मनुष्य हूँ, फिर भी मैं मेरे से जितना अच्चा प्रयास हो सकेगा वो मैं करूँगा..बाकी आपकी दुआ और भगवान की मर्ज़ी..! क्या अब आप मुझे ऑपरेशन थियेटर में जाने देंगीं.?? डॉक्टर ने फिर नर्स को कुछ सलाह दी और ऑपरेशन रूम में चले गए..

कुछ घंटे बाद डॉक्टर प्रफुल्लित मुस्कान लिए ऑपरेशन रूम से बाहर आकर लड़के की माँ से कहते हैं : भगवान का लाख लाख शुक्र है की आपका लड़का सही सलामत है, अब वो जल्दी से ठीक हो जाएगा और आपको ज्यादा जानकारी मेरा साथी डॉक्टर दे देगा..ऐसा कह कर डॉक्टर तुरंत वहां से चल पड़ते हैं..

लड़के की माँ ने तुरंत नर्स से पुछा : ये डॉक्टर साहब को इतनी जल्दी भी क्या थी.? मेरा लड़का होश में आ जाता तब तक तो रूक जाते तो क्या बिगड़ जाता उनका..? डॉक्टर तो बहुत घमंडी लगते हैं''
ये सुनकर नर्स की आँखों में आंसू आ गए और कहा : ''मैडम ! ये वही डॉक्टर हैं जिनका इकलौता लड़का आपके लड़के की अंधाधुंध ड्राइविंग की चपेट में आकर मारा गया है..उनको पता था की आपके लड़के के कारण ही उनके इकलौते लड़के की जान गयी है फिर भी उन्होंने तुम्हारे लड़के की जान बचाई है...और जल्दी वो इसलिए चले गए क्योंकि वे अपने लड़के की अंतिम क्रिया अधूरी छोड़ कर आ गए थे...

मोरल : ''कर्तव्य मेरा सर्वोपरि'
 
एक बेटा पढ़-लिख कर बहुत बड़ा आदमी बन गया । पिता के स्वर्गवास के बाद माँ ने हर तरह का काम करके उसे इस काबिल बना दिया था । शादी के बाद पत्नी को माँ से शिकायत रहने लगी के वो उन के स्टेटस मे फिट नहीं है । लोगों को बताने मे उन्हें संकोच होता की ये अनपढ़ उनकी माँ-सास है । बात बढ़ने पर बेटे ने एक दिन माँ से कहा-
" माँ_मै चाहता हूँ कि मै अब इस काबिल हो गया हूँ कि कोई भी क़र्ज़ अदा कर सकता हूँ । मै और तुम
दोनों सुखी रहें इसलिए आज तुम मुझ पर किये गए अब तक के सारे खर्च सूद और व्याज के साथ मिला कर बता दो । मै वो अदा कर दूंगा । फिर हम अलग-अलग सुखी रहेंगे ।
माँ ने सोच कर उत्तर दिया -
"बेटा_हिसाब ज़रा लम्बा है ,सोच कर बताना पडेगा।मुझे थोडा वक्त चाहिए ।"
बेटे ना कहा - " माँ _कोई ज़ल्दी नहीं है । दो-चार दिनों मे बात देना ।"
रात हुई, सब सो गए । माँ ने एक लोटे मे पानी लिया और बेटे के कमरे मे आई । बेटा जहाँ सो रहा था उसके एक ओर पानी डाल दिया । बेटे ने करवट ले ली । माँ ने दूसरी ओर भी पानी डाल दिया। बेटे ने जिस ओर भी करवट ली_माँ उसी ओर पानी डालती रही तब परेशान होकर बेटा उठ कर खीज कर बोला कि माँ ये क्या है ? मेरे पूरे बिस्तर को पानी-पानी क्यूँ कर डाला...?
माँ बोली-
" बेटा, तुने मुझसे पूरी ज़िन्दगी का हिसाब बनानें को कहा था । मै अभी ये हिसाब लगा रही थी कि मैंने कितनी रातें तेरे बचपन मे तेरे बिस्तर गीला कर देने से जागते हुए काटीं हैं । ये तो पहली रात है ओर तू अभी से घबरा गया ...? मैंने अभी हिसाब तो शुरू भी नहीं किया है जिसे तू अदा कर पाए।"
माँ कि इस बात ने बेटे के ह्रदय को झगझोड़ के रख दिया । फिर वो रात उसने सोचने मे ही गुज़ार दी । उसे ये अहसास हो गया था कि माँ का क़र्ज़ आजीवन नहीं उतरा जा सकता । माँ अगर शीतल छाया है पिता बरगद है जिसके नीचे बेटा उन्मुक्त भाव से जीवन बिताता है । माता अगर अपनी संतान के लिए हर दुःख उठाने को तैयार रहती है तो पिता सारे जीवन उन्हें पीता ही रहता है ।
माँ बाप का क़र्ज़ कभी अदा नहीं किया जा सकता । हम तो बस उनके किये गए कार्यों को आगे बढ़ा कर अपने हित मे काम कर रहे हैं ।
आखिर हमें भी तो अपने बच्चों से वही चाहिए ना ..
 
एक प्रसिद्द वक्ता ने अपनी सेमीनार में जब बोलना शुरू किया तो उसने अपने हाथ में एक हजार रूपये का नोट लिया

उस हाल में जहाँ लगभग २०० लोग बैठे थे उसने पूछा " ये नोट कौन लेना चाहेगा ?"

लोगों ने हाथ उठाने सुरु कर दिए थे

फिर उस वक्ता ने कहा " मैं ये नोट आप में से किसी एक को दूंगा पर पहले मुझे ये करने दे "
ये कहकर उसने नोट को मरोडना शुरू किया और उसको बुरी तरह से मरोड़ कर पूछा

"अब ये नोट किसे चाहिए", लोगों ने फिर हाथ उठा दिया

"ठीक है" उसने जवाब दिया "अब क्या कहेंगे "
ककर उसने नोट को नीचे गिराकर जुटे से बुरी तरह कुचल डाला . अब उसने नोट को जो कि बुरी तरह से तुडा-मुदा था और गन्दा भी हो चूका था उठाया और फिर पूछा कि कौन इस लेना चाहेगा

फिर लोगो ने हाथ उठा दिया

अब वो वक्ता बोला
"आज हम सब लोगों ने इस नोट से एक बहुत जरूरी सबक सीखा है
आप सभी इस नोट को चाहते हो बावजूद इसके कि मैंने इसके साथ क्या किया
क्योंकि इसकी कीमत अब भी १००० रूपये ही है "
"हमारी जिंदगी में कई बार परिस्थितियों और अपने निर्णयों कि वजह से हम गिरा हुआ , कुचला हुआ और गन्दा महसूस करते हैं . यहाँ तक कि हमारी जिंदगी बेकार है पर बावजूद इसके कि क्या हुआ है और क्या होगा हम कभी भी अपनी महत्ता नहीं खोते हैं"
 
एक छोटे से गाव मे तीन मित्र रहते थे | पहले दोस्त का नाम धर्मवीर था और दुसरे का कर्मवीर तीसरे का महावीर था | तीनो दोस्त बहुत अच्छे समझदार, मेहनती और बलवान थे | वो तीनो ही गरीबी और बेरोजगारी से परेशान थे | एक दिन उन्होंने सोचा कि क्यों नहीं हम कही और जाकर के मेहनत करके अपना भाग्य आजमाए |

ऐसा सोचकर तीनो अपने गाव से रवाना हो गए, चलते चलते रात का अँधेरा घिर गया तो उन्होंने एक बड़े वृक्ष के निचे रात बिताने का फैसला किया और ये तय किया कि हम तीनो मेसे कोई एक जागेगा और दो जाने सो जायेगे फिर एक जाना उठेगा और पहले वाला सो जायेगा फिर तीसरा उठेगा और दूसरा सो जायेगा ऐसा विचार करके कर्मवीर और महावीर सो गए | रात के पहले पहर मे अन्धकार घना था इसलिए दोनों को सोते ही गहरी नींद आ गयी और धर्मवीर सावधान कि मुद्रा मे जंगली खतरों को भाप कर पहरेदारी करने लगा इतने मे ही उस वृक्ष के ऊपर से एक व्यंतरदेव प्रगट हुवा और धर्मवीर को कहने लगा कि मै बहुत भूखा हु और तुम्हारे दोनों दोस्तों को खाना चाहता हु मगर तुम चाहो तो यहाँ से अपनी जान बचाकर जा सकते हो | इतना सुनते ही धर्मवीर को बहुत गुस्सा आया और उसने उस व्यंतर देव को लड़ने के लिए ललकारा और फिर दोनों के बिच काफी घमासान युद्ध होने लगा जेसे जेसे धर्मवीर को गुस्सा आता गया वेसे व्यंतरदेव का आकर बढ़ता गया और काफी देर बाद धर्मवीर कमजोर पड़ने लगा क्युकी व्यंतरदेव ने उसको उठा उठाकर पटकना शुरू कर दिया था इसी तरह से एक पहर बीत गया तो वो व्यंतरदेव अचानक गायब हो गया इधर धर्मवीर घायल होकर बेसुध हो गया था | थोड़ी ही देर मे कर्मवीर उठ गया उसने देखा कि धर्मवीर सोया हुवा है और उसकी हालत बहुत ख़राब है तो उसने सोचा कि जब ये उठेगा तो मे पूछ लूँगा |

कुछ देर के बाद फिर वो व्यंतरदेव प्रगट हुवा और उसने कर्मवीर को भी वो ही बात कही तो कर्मवीर को भी बहुत गुस्सा आया और उसने व्यंतरदेव को ललकारा कि मेरे से लड़ो तो व्यंतरदेव ने कहा कि पहले अपने मित्र कि हालत देख ले मेने इसको भी ये ही बात कही थी मगर इसने भी तुम्हारी तरह ही मेरे को मुकाबले के लिए ललकारा था तो मेने इसको उठा उठा कर पटका और ये हालत कर दी है, इतना सुनते ही कर्मवीर को सब बात समझ आगई और बहुत गुस्सा आया और वो उस व्यंतरदेव से भीड़ गया बड़ा भारी द्वंध युद्ध हुवा जितना गुस्सा कर्मवीर को आता उस व्यंतरदेव का शारीर उतना ही बढ़ता रहता था और कर्मवीर कि शक्ति भी कम हो जाती थी | युद्ध होते होते एक पहर बीत गया इस बिच व्यंतरदेव ने कर्मवीर को भी खूब पटक पटक कर मार मारी और जेसे ही पहर ख़त्म हुवा वो गायब हो गया और कर्मवीर भी आधा मूर्छा और थकन से बेहोश हो गया |

अब तीसरा दोस्त जागा जिसका नाम महावीर था उसने देखा कि दोनों दोस्त सो रहे है मगर उनकी हालत ख़राब थी उसने कर्मवीर को कुछ पूछना चाहा मगर वो बेहोश होने के कारन कुछ खास नहीं बता सका | इतनी ही देर मे फिर वो व्यंतरदेव प्रगट हुवा और उसने भी वो ही बात महावीर को कही तो महावीर सारी कहानी तुरंत समझ गया और हंस कर उस व्यंतरदेव को कहने लगा कि हा भाई तुम ठीक कहते हो मुझे तो अपनी ही जान बचानी है मगर सारी रात खूब सोया हु और चलते चलते कल से बदन मे भी दर्द हो रहा है इसलिए पहले मे कुस्ती करूँगा तुम्हारे साथ और फिर चला जाऊंगा | इतना सुनते ही उस व्यंतरदेव को खूब गुस्सा आया और जब उसको गुस्सा आया तो उसका कद आधा हो गया ये देखकर महावीर ने हँसते हुए उसको और गुस्सा दिलाया अब हालत उल्टा था जेसे जेसे महावीर हँसता और उस व्यंतरदेव को गुस्सा दिलाता वो कद मे घटता जाता था और आक्रमण भी कर रहा था मगर महावीर चतुराई से उसका बचाव कर लेता था अंत मे एक समय ऐसा आया जब उस व्यंतरदेव का कद जमीं पर रेंगने वाले कीड़े के जितना ही रह गया तो महावीर ने उसको उठाया और अपनी धोती के एक कोने मे बाँध लिया | सवेरे जब दोनों दोस्तों को होंस आया और वो जागे तो उन्होंने महावीर को रात कि सारी घटना कह सुनाई कि हमारे साथ क्या हुवा था | तब महावीर ने कहा कि मेरे साथ भी ये ही हुवा मगर मै समझ गया कि ये तो कोई मुसीबत है और मेने इस मुसीबत का सामना हँसते हँसते किया तो धीरे धीरे मुसीबत कम होती गयी और अंत मे मेने इस पर काबू पा लिया और महावीर ने अपनी धोती मे से गाँठ खोलकर उस व्यंतरदेव को अपने मित्रो को बताया कि क्या ये ही है | तो उनके मित्रो ने कहा कि हा ये है मगर बताओ कि इसको केसे काबू किया तो महावीर ने कहा कि मे समझ गया था कि मुसीबत आ गयी है अब धेर्य से ही इसका सामना किया जा सकता है और मेने इसको काबुकर लिया और पूरी कहानी बता दी | और कहा कि क्रोध हमरा शत्रु है और संकट के समय यदि हम अपने पर काबू नहीं रख सकते तो फिर संकट और बढ़ता जायेगा और हमारी शक्ति क्षीण होती जाएगी |
प्रेरणा :-

इस कहानी से हमें ये ही प्रेरणा मिलती है कि हमको संकट के समय भी अपना धेर्य नहीं खोना चाहिए बल्कि शांति के साथ और धेर्य के साथ मुकाबला करेगे तो सभी प्रकार के संकट से हम पार पा सकते है और विजय हो सकते है|
 
एक छोटा सा लड़का एक स्टोर के टेलिफोन बूथ पर गया और एक नंबर डायल किया .
लड़का: "मैडम, क्या आप मुझे अपने लान में घास काटने का काम दे सकती हैं?"
औरत: (दूसरी ओर से) मेरे यहाँ पहले से ही यह काम कोई करता है."
लड़का: मैडम, मैं आपका यह काम आधी तनख्वाह पर कर दूंगा, प्लीज़ मुझे काम पर रख लो."
औरत: देखो, मैं अपने यहाँ काम करने वाले से संतुष्ट हूँ."
लड़का: मैडम, लान की घास काटने के साथ-साथ मैं मुफ्त में आपके फर्श की सफाई भी कर दिया करूंगा."
औरत: "नहीं, धन्यवाद."
लड़का: "ओके मैडम." और फ़ोन रख दिया.
स्टोर का मालिक उसे बात करते देख और सुन रहा था, उसके पास आया और बोला,
" बेटा, तुम्हारी बात सुन कर अच्छा लगा, क्या तुम मेरे स्टोर में काम करना चाहोगे?"
लड़का: "नहीं, धन्यबाद."
स्टोर का मालिक: " लेकिन अभी तो तुम नौकरी के लिए गिडगिडा रहे थे."
लड़का: " नहीं सर, मैं जहाँ काम करता हूँ, वहां सिर्फ अपने काम की जांच कर रहा था, मैं वही हूँ जो मैडम के यहाँ काम करता है."
इसे कहते हैं: Self appraisal ........
 
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