ravinderjeet
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"जाट जाती ने अपनी लड़ाकू प्रवर्ती को अभी तक कायम रखा हे " --- इतिहासकार सी.वि.वेध
"जट्टों ने तिब्बत ,यूनान ,अरब , इरान, तुर्किस्तान ,जर्मनी , साइबेरिया ,स्केंदिवेनिया, इंग्लेंड,ग्रीक, रोम व् मिश्र आदि में कुशलता ,दर्डता और साहस के साथ राज किया और वहां कि भूमि को विकासवादी उत्तपादन के योग्य बनाया था " -----इतिहासकार शिवदास गुप्ता |(पाराचिन भारत के उप्निवेस १९७६)
गलती तो आज भी करण लाग रे सें , वे भी वे, जो आपणे आप ने पढ़े लिखे कहवें सें .|फेर बच्ग्या के , सारी दुनिया पै ऐ तो राज़ कर लिया i इस शिवदास गुप्ता साहब नै न्यू नहीं बताई के इतना लंबा चौड़ा राजपाट छोड़ के सारे जाट आड़े क्यों आगे i आधे वहीँ रह जाते तो आज सारी दुनिया में म्हारा ऐ राज़ होता i यो नौकरियां खातर reservation भी नहीं मांगना पड़ता I अगर या बात साच सै तो बड़ी गलती करी म्हारे बुजुर्गां नैं i
"गणित में शून्या का प्रयोग जाट ही अरब से यूरोप लाये थे,यूरप के स्पेन तथा इटली की संस्क्रति मोर जट्टों की देन हे" | ---- अंग्रेजी पुस्तक (राईज ऑफ़ इस्लाम )
पहलम भारत तें अरब गया , उड़े तें जो लोग यूरप गए उन् ने वे अरबी समझे , भारत के यूरोप की गेल्याँ सीधे व्यापारिक सम्बन्ध ना थे | जो जाट यूरप अरब होते होए गए , वे अरबी समझे गए , एर यूरोपियन आं ने उस्सा-ए लिख दिया |ravinder ji, यु शुन्य तो भारत की देन सै...!!!
अरब तक क्यूकर गया यु .!!!
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