jat duniyaa ki najar mey

महाबला महावीर्या, महासत्य पराक्रमाः
सर्वाग्रे क्षत्रिया जट्*टा देवकल्*पा दृढ़-व्रता: || 15 ||

Jatta are symbol of sacrifice, bravery and industry. They are, like gods, firm of determination and of all the kshatriyā, the Jatta people are the prime rulers of the earth."-----shloka-15 of Deva Samhita
 
धन्यवाद रविंदर भाई ,आज फिर इस रागनी को जाटलैंड पर पढ़कर बहुत ख़ुशी हुई /
http://www.jatland.com/forums/showt...iprakash-dalal-guskanni-aale&highlight=lutere

तश्वीर भाई या बात जानकर ख़ुशी मिली अक आप भी ऐसे कवि योधा के गाम के सो | अछ्याँ की संगत की रंगत भी अछि-ए होया करे |
 
हरयाणा के बीच में एक गाम धनान्णा ,
सुधि बांधें पागडी क्षत्रिपण का बाणा |
नाशे भेजे भड़कते घुडीयन का हिनयाना,
बापोडा मत जानियो यो स गाम धनाआणा |

---- मास्टर हवासिंह ,गाम धनाना ,जिला भिवानी ,हरयाणा
 
"आगरा क्षेत्र के किसान (जाट )सारे हिदुस्तान में अपने विद्रोह ,साहस और वीरता के लिए प्रशिध थे"| -- इतिहासकार अबुल फजल
 
"सिंध से लेकर चम्ब्बल तक सम्पूर्ण जाट क्षेत्र में जातीय तत्व को सर्वाधिक महत्व पूर्ण माना हे |"----------इतिहासकार यदुनाथ सरकार (सरकार , फा. ओऊ.द. मु.एम्पायर .ई २५१ )
 
"सभी कृषक समुदाय मुगलों की दमनकारी वयवस्था से पीड़ित थे , परन्तु उनमे जट्टों के समान अदम्य साहस , दुर्दमनीय आतम्शक्ति, उदात्शोर्य और जातीय एकता के गुण नहीं थे|"--------इतिहासकार डा. दिवेदी ( द जट्स , २३ )
 
" इन् लोगों में (जट्टों में ) स्वाधीनता के प्रति एक प्रकार की सार्वत्रिक ललक हे जिस के कारण ये किसी प्रभुत्व से के दबाव से मुक्त हो कर रहना चाहते हैं |"----------फादर ऍफ़ .एक्स .वेन्डेल (लेख )
 
"खाप वयवस्था लोकतंत्र के सिधान्तों पर आधारित हे जो जट्टों में स्वतंत्रता ,समानता ,और भाईचारे की भावना को द्रडमूल कर कर देती हे |"---------- फादर ऍफ़ .एक्स .वेन्डेल (लेख )
 
"सातवी सदी के जट्टों में समानता का भाव था "----चचनामा (,दाऊद पोता ,४७-४८,६१,२१४-२१५)
 
"स्वतंत्रता अवम स्वशाषित लोकशाही के प्रति अपनी गहरी आस्था के लिए जाट प्राचीन काल से ही उल्लेखनिए रहे हैं|"-----------मी.बिंगले , (शिख्स पे. १६ )
 
"स्वतंत्रता और समानता की भावना से ओतप्रोत जाट और जाटसिखों के आंदोलनों के कारन प्रथक क्षेत्रिया गणराज्य बने ,परन्तु जाट इसमें पहले सफल हुए |"-------- सतिश्चंदर ,मेदिवेल इंडिया ii ,पे.२९०
 
Mera bhai ek aur question hai..

What is the veracity of your claims in above posts about Jat's pride and Honor. It is better to provide authentic references to support your argument. Otherwise anyone can write blah blah blah. There has to be some credible resource/reference to support your claims.
mere dhore s inke sare 'credible resource/reference' ebke bhiwani aawe jad dekh liye :)
 
" जाट हारा नहीं कभी रण में तीर तोप तलवारों से ,
जाट तो हारा हैं , गद्दारों से दरबारों से |"

" इस कौम का ईलाही दुखड़ा किसे सुनाऊ ?
डर हैं के इसके गम में घुल घुल के न मर जाऊँ || "
...........................चौ.छोटूराम ओहल्याण
 
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"स्वतंत्रता तथा समानता की जाट भावना ने हिन्दू धरम में ब्रहामन वाद के सम्मुख झुकने से इनकार कर दिया | जाट जन्मजात शर्मिक एवम योधा था | वह कमर में तलवार बाँध कर खेत में हल चलाता था | अपने घर बार की रक्षआ के लिए ,वह किसी क्षत्रिया की अपेक्षआ कहीं अधिक लडाइयां लड़ता था , क्योंकि किसी क्षत्रिय के विपरीत ,अकर्मणकारियों के आने पर जाट अपने गाँव को छोड़ कर शायद ही कभी भागता हो | यदि हिन्दुस्तान की तरफ जाते किसी विजेता की ओर से जाट और उसकी स्त्रियों के साथ दुर्वय्वाह्र किया जाता तो उसका बदला वह उसके काफिलों को लूटकर लेता था | उसकी अपनी विशेस ढंग की देशभक्ति विदेशियों के प्रति शत्रुता पूर्ण ओर साथ ही अपने उन देशवाशियों के प्रति दयापूर्ण ,यहाँ तक की तिरस्कारपूर्ण थी जिनका भाग्य बहुत कुछ उसके साहस और धेर्य पर अवलंबित था |" ---------खुशवंत सिंह (हिस्ट्री आफ द शिख्स ,१ , १५-१६ )
 
"उत्तर दोआब के स्गोतरिय (खाप) जाट समूह मध्य काल में अपने अपने सेनिक ,राजनेतिक ,धार्मिक ,सामाजिक अवंम आर्थिक विषय स्वयं ही संभालते थे |" ----------डा. प्रधान (द पालिटिकल सिसटम आफ जट्स आफ नार्दन इंडिया , V , vi )
 
"यमुना के दोनों ओर आगरा से दिल्ली तक एक बड़े भूभाग पर बसे ब्रजमंडल के जट्टों की पालों ( खापों ) ने अपनी बिरादरी की लोकतांत्रिक और जनजातीय स्वाधीन जीवन पद्धति को हडपने पर उतारू औरंगजेब की संकीरण और अत्यधिक केंद्रीकृत एकतंत्र वयवस्था को सीधी टक्कर दी और अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की |"------दिवेदी (द जट्स , २१ )
 
"जनवरी १६९० में सिनसिनी अवम मई १६९४ में चिकसाना के भीषण यूधों में किसानों( जट्टों ) के साथ उनकी स्त्रियों का भाग लेना तालमेल का जवलंत उधाहरण हे |"-------डा. वीर सिंह ( हिन्दुस्तान में जाट सत्ता ,२५ )

विशेष ----- इतिहास में पहली बार कंही लिखित में महिला रेजिमेंट होने का उल्लेख मिलता हे | और इसका श्रेय जट्टों को जाता हे | भाड़े के इतिहासकार जट्टों की इन् खूबियों का कंही भी जीकर नहीं करते |
 
" इन् हर्स्ट-पुष्ट अवम परुषआर्थी जट्टों में सर्वोत्तम सेनिक बनने की क्षमता हे |"---------- फादर वेंडल ( लेख ),( यदुनाथ सरकार ,फाल आफ दी मुग़ल इम्पायर ११ , २५३ )
 
" इस हाइड्रा (यौरप का एक काल्पनिक जल जंतु जिसके अनेकों सिर होते हैं औए एक के काटने पर और सिर उग आते हैं अर्थात जिनका उन्मूलन ना किया जा सके , ) के एक से अधिक सिर हैं जो काटने पड़ेंगे | यह कुख्यात प्रजाति (जाट ) पहले ही इतनी फेल चुकी हे और गहरी जडें जमा चुकी हे की इस से यह आशा करना व्यर्थ हे की यह किसी एक शाखा के कटने से ही नष्ट हो जायेगी | " -------फादर वेन्डेल (लेख ) द्विवेदी ,द जट्स , पे.३४.संधर्भ ७ .
 
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" सन १६९० की जनवरी में सिनसिनी के भयंकर यूद्ध में १५०० जाट ,७०० कछवाहे ,और २०० मुग़ल सेनिक मारे गए | इसमें लोंगश्री के नेत्र्तव में यूद्ध करते हुए साहसी २०० जाट स्त्रियाँ भी शहीद हुई थी |"------डा.जाँ दालोश ,डा. वीर सिंह ( हिन्दुस्तान में जाट सत्ता पे.३१,३२ )

विशेष :------ इस प्रकार विशव में पहली बार किसी सेना में महिला रेजिमेंट होने का वर्णन मिलता हे | जाट दुनिया की किसी भी संस्क्रती से वैचारिक और सामाजिक तौर पर हमेशा आगे रहे हैं |
 
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