Jatland is generally limited to Hindu JATS ???????????

हम रहबर-ऐ-आज़म चौधरी छोटूराम को अपनी कौम के भगवान् का दर्जा देते हैं । हर साल उनकी जयंतिया मनाई जाती हैं बड़े बड़े भाषण होते हैं चौधरी साहब को आदर्श मानने की बाते की जाती हैं परन्तु जब ज़मीनी हकीक़त पर चौधरी साहब के आदर्शो को अपनाने की बात आती हैं तो लोग तरह तरह के तर्क देते हैं । कौम के इस भगवान् के दिए हुए ज्ञान के बारे में कहते हैं की ये तो बीते ज़माने की बात हैं । चौधरी छोटूराम कोई व्यक्ति नहीं थे वो तो एक सोच थी और आज हमारी कौम जिस मुकाम पर हैं वह सब उस सोच की वजह से हैं । सवाल करते हैं की इस सोच का हत्यारा कौन ? और फिर दोष धरते हैं दूसरों पर , असल में इस सोच का हत्यारा और कोई नहीं खुद हम हैं हमारी कौम का पढ़ा लिखा वर्ग हैं । चौधरी साहब कहते थे की इंसान दिन में चाहे तो तीन बार आस्था बदल सकता हैं परन्तु जाति नहीं बदल सकता । लाहोर में जब जिन्नाह ने अपने पैर पसारने शुरू किये थे तब वहा के मुसलमानों में एक अफरा तफरी का माहौल बन गया था । इस पर चौधरी साहब ने लाहौर में एक रैली कि और मुस्लमान जाटों से पूछा की तुम पहले मुसलमान हो या जाट , इस पर वहा मौजूद मुस्लिम जाटों ने कहा की हम पहले जाट हैं बाद में मुस्लिम । इस घटना के बाद जिन्नाह को लाहौर से निकलना मुश्किल हो गया था । जब तक चौधरी साहब जिए जिन्नाह ने शायद ही लाहौर का रुख किया हो । चौधरी साहब अक्सर एक शेर कहा करते थे...
'' माना की मजहब जान हैं इंसान की ,
इसी के दम से कायम शान हैं इंसान की ,
रंग-ऐ-कौमियत मगर इससे बदल सकता नहीं '
खून आबाई रग-ओ-तन से निकल सकता नहीं ।''
(आबाई - पूर्वज )
जो एकता की माला उन्होंने बनाई थी वह टूट गई । जाटों ने अपने आप को कहीं आस्था के नाम पर बाँट लिया , कहीं पार्टीबाजी के नाम पर , कहीं क्षेत्रवाद के नाम पर तो कहीं बोली के नाम पर । उस महान सोच को बिलकुल दफ़न कर दिया । आस्था के नाम पर बंटे जाटों से कहा जाता हैं की क्यों एक दुसरे को इस खोखली आस्था के नाम पर बाँट रहे हो तो एक दुसरे पर दोष धरते हैं की वो जाट नहीं हमे छोड़ गए । कहा जाता हैं की उनको उस आस्था में कुछ दिखा होगा तभी गए होंगे पर जाति को तो मत बांटो तो कहेंगे की हम कहा बाँट रहे हैं हम तो अपने आप को जाट मानते हैं वो लोग नहीं मानते खुद को जाट , वो लोग पहले आस्था की बात करते हैं । जबकि हकीक़त तो यह हैं सब कबूतर वाली कर रहे हैं जैसे कबूतर बिल्ली को आती देख आँख बंद कर लेता हैं और सोचता हैं की अब बिल्ली उसे नहीं देख पाएगी वैसा ही हम कर रहे हैं । एक दुसरे पर आरोप लगाते हैं खुद की कमी नहीं देखते जिसका फायदा दुसरे उठाते हैं । हम हिन्दू हैं हमने जाति से पहले हिन्दू वाले नजरिये से देखा होगा तभी तो हमे दुसरे भाइयों का मजहब पहले दिखाई दिया जाति नहीं । इस पहले आप पहले आप के चक्कर में जाट पहले की काफी मार खा चुके हैं बहुत कुछ खो चूके हैं इसलिए पहल हमे खुद से करनी होगी तभी कौमी एकता होगी । जब तक दो होंगे बोल-कबोल होंगे , एक होंगे तो न बोल होंगे न कबोल और ना ही किसी दुसरे की हमारे बारे में कुछ कहने की हिम्मत होगी। आये दिन हमारी खापो के खिलाफ खुलम खुला बोला जा रहा , आये दिन कोई ऐरा गैरा नाथू खेरा जाटों के खिलाफ बोल जाता हैं , यह सब इसलिए हैं क्योंकि हमने एक दुसरे को बाँट रखा हैं । वैसे हमारी देशी बोली में धर्म का अर्थ कर्तव्य से हैं , कोई भी गलत काम हो जाए तो हम यही कहते हैं की फैलाना काम करण का धर्म नहीं था । इसलिए हमे इन आस्था जैसे खोखले चक्करों में न पड़ हमारी कौमी एकता पर ध्यान देना चाहिए। कौम की तरक्की एकता में ही हैं और एकता होगी तभी वह महांन सोच जिन्दा होगी । जब दलित भाई 35-40 साल बाद आंबेडकर को जिन्दा कर सकते हैं तो फिर हम रहबर-ऐ-आज़म दीनबंधु चौधरी सर छोटूराम को जिन्दा क्यों नहीं कर सकते ? हमारी यह कौमी एकता चौधरी छोटूराम को सच्ची श्रदांजलि होगी ।
"हमें अपने पराये की पहचान नहीं , अपनों पर फब्ती कसते हैं ।
मरघट में छोड़ मलाल को , अपनों पर काठी कसते हैं ।"

इस एकता की पहल पर अमल इस साईट पर भी होना जरुरी हैं यहाँ सारा पढ़ा लिखा वर्ग हैं । इस साईट पर लिखे शब्दों " सिर्फ हिन्दू जाटों के लिए '' से हिन्दू शब्द हटा कर "सिर्फ जाटों के लिए " करना चाहिए । इसके लिए मॉडरेशन का बहाना सिवाए अपनी जिम्मेवारी से भागने के और कुछ नहीं हैं । सिर्फ इस साईट ही नहीं और भी जहाँ जो लोग इस प्रकार का लिखे हुए हैं उन्हें भी समझाना जरुरी हैं ।
 
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इस एकता की पहल पर अमल इस साईट पर भी होना जरुरी हैं यहाँ सारा पढ़ा लिखा वर्ग हैं । इस साईट पर लिखे शब्दों " सिर्फ हिन्दू जाटों के लिए '' से हिन्दू शब्द हटा कर "सिर्फ जाटों के लिए " करना चाहिए । इसके लिए मॉडरेशन का बहाना सिवाए अपनी जिम्मेवारी से भागने के और कुछ नहीं हैं । सिर्फ इस साईट ही नहीं और भी जहाँ जो लोग इस प्रकार का लिखे हुए हैं उन्हें भी समझाना जरुरी हैं ।

Agree, wholeheartedly.
 
रहबर-ऐ-आज़म पूरी ज़िंदगी कांग्रेस के खिलाफ़ रहे। उनको को आदर्श मानते हुए जाटों को कांग्रेस का समर्थन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। क्या आप इस बात पर सहमत होंगे?

हम रहबर-ऐ-आज़म चौधरी छोटूराम को अपनी कौम के भगवान् का दर्जा देते हैं । हर साल उनकी जयंतिया मनाई जाती हैं बड़े बड़े भाषण होते हैं चौधरी साहब को आदर्श मानने की बाते की जाती हैं
 
रहबर-ऐ-आज़म पूरी ज़िंदगी कांग्रेस के खिलाफ़ रहे। उनको को आदर्श मानते हुए जाटों को कांग्रेस का समर्थन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। क्या आप इस बात पर सहमत होंगे?
बिलकुल सहमत हु , परंतु उस वक़्त चौधरी साहब ने अपनी पार्टी बना कर जाटो को कांग्रेस के विरुद्ध एक विकल्प दिया था और अब भी हमे इसका विकल्प तलाशना होगा जो हमारी कौम के हक़ की बात कर सके |

यही समस्या हैं जाट की , बात हैं पहले जाट बनने की जाट एकता की और बात को ले जाते हैं पार्टीबाजी पर ....
 
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बिलकुल सहमत हु , परंतु उस वक़्त चौधरी साहब ने अपनी पार्टी बना कर जाटो को कांग्रेस के विरुद्ध एक विकल्प दिया था और अब भी हमे इसका विकल्प तलाशना होगा जो हमारी कौम के हक़ की बात कर सके |

यही समस्या हैं जाट की , बात हैं पहले जाट बनने की जाट एकता की और बात को ले जाते हैं पार्टीबाजी पर ....



When one discusses Ch. Chhotu Ram, how one can avoid discussing polity and politics of the day.

If he is our ideal, then his teachings are as relevant today as they were during his life time.
 
When one discusses Ch. Chhotu Ram, how one can avoid discussing polity and politics of the day.

If he is our ideal, then his teachings are as relevant today as they were during his life time.

यदि जाटलैंड को हिन्दु और सिख जाटों तक लिमिटेड किया जाये तो अच्छा होगा .....
यदि मुसलमानो को इस साईट पर आमंत्रित किया जाता हैं तो इससे शर्मनाक कुछ भी न होगा।
फेर इस साईट सिर्फ माथा-फोड़ी के सिवाय और कुछ न देखने को मिलेगा,
 
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सही बात है भाई सलुरम , मैंने बहोत सी मुसलमानों की फोरम देखी है ( सभी ने देखी होंगी ), वहा पर वो लोग खुलमखुल्ला हिन्दुओ को ओर भारत को गलिया देते है | अगर उन्हें यहाँ आमंत्रित करते है तो सर फुटौवल के अलावा कुछ नहीं होगा | माना जाट जाट है पर मुसलमानों की मानसिकता हमसे बिलकुल अलग है (वो लोग सोचते है कि वो पहले मुसलमान है बाद में कुछ ओर)| हो सकता है कुछ ठीक ठाक मुसलमान भी हो पर अगर है तो दिया लेकर ढूंढने से ही मिलेंगे अगर मिले तो ?
 
आप सभी मुसलमानो की बात कर रहे हो या मुसलमान जाटों की ? रही बात सोचने की आप भी तो अपने आप को पहले हिन्दू सोच रहे हो बाद मे जाट, उनमे से भी कुछ लोग ऐसे ही होंगे जो मजहब वाले एंगल से पहले सोचते हैं बाद मे जाति |
एक शब्द हैं ''जाट एकता '' जिसकी हम बार बार रट लगाए रहते हैं , उस एकता का तात्पर्य मजहब पंथ के नाम पर बंटे जाट से है ना की आपकी हमारी एकता से हैं | अगर सब मजहब के जाट एक हो जाये तो इनकी आबादी देश मे 10 करोड़ के करीब हैं अगर बिखरे रहे तो फिर कोई गिनती नहीं |
जैसा की मैंने पहले भी लिखा हैं की हमारी ऐसी सोच ने ही उस महान सोच का कत्ल किया हैं |

माथा फोड़ी का बहाना बता कर सलूराम ने हिन्दू वाली कायरता दिखा दी , जाट होता तो माथा फोड़ी से नहीं डरता
;)
 
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आप सभी मुसलमानो की बात कर रहे हो या मुसलमान जाटों की ? रही बात सोचने की आप भी तो अपने आप को पहले हिन्दू सोच रहे हो बाद मे जाट, उनमे से भी कुछ लोग ऐसे ही होंगे जो मजहब वाले एंगल से पहले सोचते हैं बाद मे जाति |
एक शब्द हैं ''जाट एकता '' जिसकी हम बार बार रट लगाए रहते हैं , उस एकता का तात्पर्य मजहब पंथ के नाम पर बंटे जाट से है ना की आपकी हमारी एकता से हैं | अगर सब मजहब के जाट एक हो जाये तो इनकी आबादी देश मे 10 करोड़ के करीब हैं अगर बिखरे रहे तो फिर कोई गिनती नहीं |
जैसा की मैंने पहले भी लिखा हैं की हमारी ऐसी सोच ने ही उस महान सोच का कत्ल किया हैं |

माथा फोड़ी का बहाना बता कर सलूराम ने हिन्दू वाली कायरता दिखा दी , जाट होता तो माथा फोड़ी से नहीं डरता
;)

भाईसाहब अगर कोई मुझसे पूछता है कि कोन हो तो मेरा जवाब होता है कि जाट हू | ओर जवाब के बाद दूसरे बंदे कि प्रितिक्रिया होती है ओहो अच्छा ! जाट कहने के बाद में आज तक किसी ने ये नहीं कहा कि हिंदू या कोई ओर | इसका मतलब खुद में ही बहुत बड़ा है |

अगर केवल जाटो कि बात करे मजहब कि नहीं तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है , पर क्या मेरी पहली पोस्ट कि शुरू की लाइन सही नहीं है ? (This is an open forum, so i wont go in details against religion , cast etc....)
 
भाईसाहब अगर कोई मुझसे पूछता है कि कोन हो तो मेरा जवाब होता है कि जाट हू | ओर जवाब के बाद दूसरे बंदे कि प्रितिक्रिया होती है ओहो अच्छा ! जाट कहने के बाद में आज तक किसी ने ये नहीं कहा कि हिंदू या कोई ओर | इसका मतलब खुद में ही बहुत बड़ा है |

अगर केवल जाटो कि बात करे मजहब कि नहीं तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है , पर क्या मेरी पहली पोस्ट कि शुरू की लाइन सही नहीं है ? (This is an open forum, so i wont go in details against religion , cast etc....)
जहां तक पहली लाइन की बात हैं तो भाई आपने सिर्फ मुसलमानो की बात की हैं ऐसे तो फिर हिन्दू कौनसा उनके घाट घाल्य हैं | पर यहा बात हिन्दू मुसलमान की नहीं जाट की हैं ,सभी धर्मो को मानने वाले जाटों के कौमी एकता की हैं |
 
जहां तक पहली लाइन की बात हैं तो भाई आपने सिर्फ मुसलमानो की बात की हैं ऐसे तो फिर हिन्दू कौनसा उनके घाट घाल्य हैं | पर यहा बात हिन्दू मुसलमान की नहीं जाट की हैं ,सभी धर्मो को मानने वाले जाटों के कौमी एकता की हैं |

Ravinder ji, by now you would have easily gathered that an overwhelming majority of the forum members do not wish to be associated with Muslim Jats. People here do not wish to seek new opinions and interactions that will be available once the scope of this forum opens up.

Jatland is a gold mine for uniting all Jats of the world. There are countless issues which can be discussed without getting religion into the picture. But unfortunately narrow minded thinking will never make Jatland achieve its potential in this area.
 
जहां तक पहली लाइन की बात हैं तो भाई आपने सिर्फ मुसलमानो की बात की हैं ऐसे तो फिर हिन्दू कौनसा उनके घाट घाल्य हैं | पर यहा बात हिन्दू मुसलमान की नहीं जाट की हैं ,सभी धर्मो को मानने वाले जाटों के कौमी एकता की हैं |

प्रश्न ये उठता है कि क्या मुसलमान जाट इस बात को मान पाएंगे की वो जाट पहले है मुसलमान बाद में ?
 
प्रश्न ये उठता है कि क्या मुसलमान जाट इस बात को मान पाएंगे की वो जाट पहले है मुसलमान बाद में ?

Sandeep ji, Muslim Jaats se baat kiye bagair hum yeh kaise jaan payenge? For the sake of Jat unity we have to make an effort to involve them. And I must say, as members of this forum, its our responsibility to at least keep the forum open to membership, if not invite them proactively.
 
जो जाट एक दूसरे पर आरोप लगते हैं की मुस्लिम या सिक्ख अपने आप को मुस्लिम या सिक्ख मानते है जाट नहीं , उनकी जानकारी के लिए बता दु यदि मुस्लिम या सिक्ख अपने आप को सिर्फ मुस्लिम या सीख मानते तो ये लोग अपने वैवाहिक इस्तेहारों मे धर्म के साथ साथ अपनी जाति नहीं जोड़ते | कभी भी आप लोग दूसरे धर्मो के वैवाहिक इस्तेहार देख लेना सिक्ख जाट या सुन्नी जाट के लिए वर वधू चाहिए लिखा मिलेगा मतलब की जाति साथ मे जरूर लिखी मिलेगी| इससे बड़ा जाति प्रमाण पत्र और क्या होगा अगर अब भी आप लोग नहीं समझे तो क्या इलाज |
 
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जो जाट एक दूसरे पर आरोप लगते हैं की मुस्लिम या सिक्ख अपने आप को मुस्लिम या सिक्ख मानते है जाट नहीं , उनकी जानकारी के लिए बता दु यदि मुस्लिम या सिक्ख अपने आप को सिर्फ मुस्लिम या सीख मानते तो ये लोग अपने वैवाहिक इस्तेहारों मे धर्म के साथ साथ अपनी जाति नहीं जोड़ते | कभी भी आप लोग दूसरे धर्मो के वैवाहिक इस्तेहार देख लेना सिक्ख जाट या सुन्नी जाट के लिए वर वधू चाहिए लिखा मिलेगा मतलब की जाति साथ मे जरूर लिखी मिलेगी| इससे बड़ा जाति प्रमाण पत्र और क्या होगा अगर अब भी आप लोग नहीं समझे तो क्या इलाज |

जाती तो लिखी होगी पर ऐसे भी बहोत से सिख और मुस्लिम जाट हे जो जाती नहीं लिखते। पर ये बात तो बाकि जातियों में भी देखि जा सकती हे जैसे राजपूत या फेर अलग अलग पंथ। जैसे शिया, सुनी। सचाई तो ये हे के वो सिर्फ अपने ही धरम में शादी करते हे अगर जाती ही सब कुछ होती तो फेर वो अपना धरम भी न लिखते सिर्फ जाट लिखते इश्तिहार में.
 
जाती तो लिखी होगी पर ऐसे भी बहोत से सिख और मुस्लिम जाट हे जो जाती नहीं लिखते। पर ये बात तो बाकि जातियों में भी देखि जा सकती हे जैसे राजपूत या फेर अलग अलग पंथ। जैसे शिया, सुनी। सचाई तो ये हे के वो सिर्फ अपने ही धरम में शादी करते हे अगर जाती ही सब कुछ होती तो फेर वो अपना धरम भी न लिखते सिर्फ जाट लिखते इश्तिहार में.
धर्म मे नहीं , उस धर्म के अंदर अपनी जाति मे शादी करते हैं जैसे हम हिन्दू हिन्दू धर्म मे सिर्फ अपनी जाति मे शादी करते हैं ना की किसी भी हिन्दू से नाता जोड़ लेते हैं | एक धर्म के अंदर सकड़ों हजारो जातिया होती हैं | और मैं यही समझने की कोशिश कर रहा हु की लोगो ने हमे किस कदर बांटा हुआ हैं हमने धर्म बेशक बदल लिया हो पर रिश्ते उस धर्म मे भी अपनी ही बिरादरी मे करेंगे , दूसरे धर्मो मे अपनी जाति मे करते कतराएँगे |लोगो ने हमारी सोच को जाति से हटा कर धर्म की तरफ मोड दिया हैं | इन मुल्ले पंडो पाठियों ने हमे कबूतर बना रखा हैं | बार बार जिस जाट एकता कौमी एकता की दुहाई दी जाती हैं असल मे वो यहीं हैं अगर इसमे भी कोई तर्क खोजता हैं तो उससे बड़ा इस जाट एकता का दुश्मन कोई नहीं |
 
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इस और अपनी तरह का एक प्रयास निम्न है(कुछ दिन पहले पता लगा इसके बारे मे )


अंतराष्ट्रीय जाट बौद्धिक सम्मेलन 2013
दिनाक 9 फरवरी,2013
थीम :

पंथ निरपेक्ष जाट कौम के संगठन की आवश्यकता
स्थान :विश्व युवक केंद्र , चाणक्य पूरी , न्यू दिल्ली
(चीफ गेस्ट पाकिस्तान से बुलाये जा रहे हैं, और इसमे भरी मात्रा मे मुस्लिम जाट भागीदारी देखने को मिलती है)




आप सभी मुसलमानो की बात कर रहे हो या मुसलमान जाटों की ? रही बात सोचने की आप भी तो अपने आप को पहले हिन्दू सोच रहे हो बाद मे जाट, उनमे से भी कुछ लोग ऐसे ही होंगे जो मजहब वाले एंगल से पहले सोचते हैं बाद मे जाति |
एक शब्द हैं ''जाट एकता '' जिसकी हम बार बार रट लगाए रहते हैं , उस एकता का तात्पर्य मजहब पंथ के नाम पर बंटे जाट से है ना की आपकी हमारी एकता से हैं | अगर सब मजहब के जाट एक हो जाये तो इनकी आबादी देश मे 10 करोड़ के करीब हैं अगर बिखरे रहे तो फिर कोई गिनती नहीं |
जैसा की मैंने पहले भी लिखा हैं की हमारी ऐसी सोच ने ही उस महान सोच का कत्ल किया हैं |

माथा फोड़ी का बहाना बता कर सलूराम ने हिन्दू वाली कायरता दिखा दी , जाट होता तो माथा फोड़ी से नहीं डरता
;)
 
वोही तो में बताऊँ हूँ के उस धरम के अंदर अपनी जाती से शादी करते हे। तो पहले उनने धरम दिखे हे के नहीं? जाती दिखती तो धरम थोड़ी लिखते?
आदमी जिद ब्याह करे हे जो जितने चीज़े सामान हो सकती हे मिलाने की कोसिस करता हे जैसे पहले वे धरम मिलते हे फेर जाती। बाकि और बता दूँ मुल्ले जाटों ने बहोत सी अन्तर जातीय ब्याह कर रखे हें ये दो चार इश्तिहार देख के जमीनी हकीकत का पता नहीं चलता बाकि बहोत से इश्तिहार में ये भी लिखा होता हे caste no bar.
 
जैसी नजर वैसा नजरिया , मैंने पहले भी कहा हैं की हम (हिन्दू) भी तो पहले धर्म की नजर से देख रहे हैं तभी तो अगले का जाति से पहले धर्म दिखाई देता हैं । अकेले मुसलमान ही नहीं सभी ऐसा कर रहे हैं हम भी ऐसा ही करते हैं । आप तो ऐसे कह रहे हैं जैसे हिन्दू जाट अंतरजातीय विवाह करते ही नहीं , ऐसा तो मैंने बहुत से हिन्दू जाटों के वैवाहिक इस्तेहारो में भी 'कास्ट नो बार' लिखा देखा हैं । आस्था रीति-रिवाज तो धर्मो के अंदर भी भिन्न हैं यह तो एक गाँव से दुसरे गाँव में भी अलग अलग मिलेंगी इसलिए यह कोई बहस का मुद्दा नहीं हैं मुद्दा हैं कौमी एकता का । हम दूसरों के बहकावे में आकर अपने आप को धर्म देश राज्य बोली गाँव पाना ठोला आदि के नाम पर बांटते चले जाते हैं । हम बार बार जाट एकता का रोना रोते हैं पर इसके लिए करते कुछ नहीं जब करने की बात आती हैं तो बहाने खोजते हैं दुसरे में कमी निकालनी शुरू करते हैं की वो लोग ऐसा क्यों नहीं करते , दूसरा कोई नहीं करता शुरुआत खुद से करनी होती हैं बाकी सब बहाने होते हैं । बहाने वहीँ खोजता हैं जिसमे कुछ कमी होती हैं या कमजोर होता हैं ।
 
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