keshavdahiya
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बहुत संभावना है
मैं झूठा हूं
और मेरे आंसू भी
पर कोरे पन्नों पर आड़ी तिरछी खिंची रेखायें
और बनी हुई अजीब सी आकॄतियाँ
अगर समझ पाओ
तो झूठी नहीं हैं,
जैसे शब्द कभी झूठे नहीं होते
और ना उनसे बनी कवितायें,
हालांकि मैं लिखता हूं झूठी कवितायें भी,
पर वो ना समझ में आने वाले उलझे से गीत
झूठे नहीं हैं;
वो अहसास,
समन्दर मे सूरज के डूबने का,
और आन्सुओं के समन्दर बनने का,
बेवज़ह चीखना चिल्लाना,
नाराज़ होना,
या पागलों की तरह ठहाके लगाना,
झूठा नहीं है,
वे शिकायतें,
शायद झूठी हो सकती हैं,
स्वार्थ से उपजी हुइ कल्पनाएं,
झूठ हो सकता है वह बेबस चिल्लाना,
मगर वह उदास मौन झूठा नहीं है;
नहीं पता,
खुदा है या नहीं,
हो सकता है झूठ हो किसी ईश्वर की कल्पना,
झूठ हो कर्म-फल का सिद्धांत भी,
झूठ हो श्रीकॄष्ण और गीता,
पर ये दुखान्त कहानियाँ,
जिन्हें पढ़कर कुछ लोग रोते हैं
और कुछ बताते हैं अति-नाटकीय,
ये सब सच हैं;
बहुत संभावना है कि मैं झूठा हूं,
पर ये निर्दोष आत्मा,
प्यासी है,
झूठी नहीं.........
मैं झूठा हूं
और मेरे आंसू भी
पर कोरे पन्नों पर आड़ी तिरछी खिंची रेखायें
और बनी हुई अजीब सी आकॄतियाँ
अगर समझ पाओ
तो झूठी नहीं हैं,
जैसे शब्द कभी झूठे नहीं होते
और ना उनसे बनी कवितायें,
हालांकि मैं लिखता हूं झूठी कवितायें भी,
पर वो ना समझ में आने वाले उलझे से गीत
झूठे नहीं हैं;
वो अहसास,
समन्दर मे सूरज के डूबने का,
और आन्सुओं के समन्दर बनने का,
बेवज़ह चीखना चिल्लाना,
नाराज़ होना,
या पागलों की तरह ठहाके लगाना,
झूठा नहीं है,
वे शिकायतें,
शायद झूठी हो सकती हैं,
स्वार्थ से उपजी हुइ कल्पनाएं,
झूठ हो सकता है वह बेबस चिल्लाना,
मगर वह उदास मौन झूठा नहीं है;
नहीं पता,
खुदा है या नहीं,
हो सकता है झूठ हो किसी ईश्वर की कल्पना,
झूठ हो कर्म-फल का सिद्धांत भी,
झूठ हो श्रीकॄष्ण और गीता,
पर ये दुखान्त कहानियाँ,
जिन्हें पढ़कर कुछ लोग रोते हैं
और कुछ बताते हैं अति-नाटकीय,
ये सब सच हैं;
बहुत संभावना है कि मैं झूठा हूं,
पर ये निर्दोष आत्मा,
प्यासी है,
झूठी नहीं.........