kyun thook bilon laag rhe so.....yo padho....
अंगरेज इब्बै याड़ै ए सैं
देश के हालात पै जै हम सरसरी तौर पै एक नजर डाल्लैं,तो चुगरदे कै पुलिस के लट्ठ अर आंसू गैस के गुब्बारे दिखाई देवैंगे।
इन लट्ठ अर आंसू गैस के गोल्यां म्ह सियासत का खुद के नंगा होण का भय अर लाचारी दोन्नों कत्तई साफ दिक्खण लाग री सैं। चौपाल की एक कूण पै, नीम की गहरी छांह तलै बैठे घास्सी नै होक्के का लांबा कश खींच्या अर होक्के की नाल कांस्सी कान्हीं कर कै बोल्या-इब तो कसूत्ता जुलम हो रया सै रै कांस्सी। किसी भी सामाजिक बुराई का विरोध करणा भी खतरे तै खाल्ली ना सै। ऐसा करण म्ह मोगरे लाग्गण के हंडरड परसैंट चांस सैं।
इब रामदेव नै ए ले ले, उसनै योग सिखाण के गेल गेल समाज को भ्रष्टाचारमुक्त करण का रोग पाल लिया। कालेधन की वापसी की घणी कसूत्ती जिद पकड़कै बैठ ग्या। मसले तो उस बेचारे नै बढ़िया अर सोलिड ठाए थे, पर इस इंजेक्शन तै तिलमिला कै सरकार नै रामदेव कै कुतके (डंडे) मरवा दिए। इतणा बड्डा रिस्क रामदेव नै आम आदमी की भलाई खात्तर ए तो लिया सै, न्हीं तै वो ठाठ की जिंदगी तो जी रया था, के उसके गुग्गन(बच्चे) रोवैं थे?
‘दो खाई दो काख म्ह, मोड्डा लोट्या राख म्ह’ आली कहावत पै चालदा होया वो भी काच्चे काट सकैथा। होक्के की घूंट मार कै कांस्सी बोल्या-कुतके तो लागणो ए थे रै घास्सी,किसी आदमी की दुखदी नस नै जो छेड़ैगा; उसके गात का बैंड बाजणा निश्चित सै। म्हारे लीडरां नै भ्रष्टाचार का कुत्ता पाल राख्या सै जिसका नाम सै दामदेव। इस कुत्ते के बिना इन खाग्गड़ां नै भी रोट्टी कोनी थ्यावैं। इब जब रामदेव उनके दामदेव नै मारैगा तो वे उसतै पुरस्कार देवैंगे?
यू पंग्गा करण तै पहल्यां रामदेव सारे लीडरां नै भोत घणा बढ़िया लाग्ग था पर अपणी थाली म्ह तै खीर खुसदी देखकै सारे मलंग लीडर उस कान्हीं मारणो झोट््टे की तरियां देक्खण लाग रे सैं। मतलब साफ सै, सत्ता के सुर म्ह सुर मिलाण आला उनकी आंख की किरकिरी ना बणदा। घास्सी खाट पै लेटदा होया बोल्या-एक बात तो सही सै भई, रामदेव नै कांगरेस की कूण तो जरूर हिला दी थी पर यू मिशन छेडण तै पहल्यां वो लाला लाजपतराय की जीवनी आच्छी तरियां पढ़ लेंदा तो घणा बढ़िया रहंदा। जै वो रामलीला मैदान म्ह तै लंगोट्टी ठा कै ना भाजदा तो घणा वजनदार रहंदा। यू रामलीला कांड होण तै आगले दिन की बात सै, मैं रेल म्ह बैट्ठया था। राजनीति के पिस्सू दो-तीन जणो रामदेव आले मसले पै थूक बिलोण लाग रे थे। उन म्ह तै एक आदमी रामदेव की तारीफ के पुल बांधण लाग रया था।
इतणो म्ह अधेड़ उमर की एक लुगाई छोह म्ह पाट कै पड़ी। वा बोल्ली- कित का रामदेव! पहल्यां तै चौधराहट म्ह रामलीला मदान म्ह रामलीला करण खात्तर देश जोड़ लिया अर जब लट््ठ पड़े तो अपणी लीला खतम होंदी दिक्खी तै पूंझड़ा ठा कै अस्सी की स्पीड म्ह भाज ग्या।
मेरे घरआला भी उसके समर्थन म्ह चौधर का तुर्रा ताण कै गया था,पर ग्राउंड म्ह ऐसे मोगरे लाग्गे अक् आज तक किणछ-किणछ कै खाट म्ह हींग हग्गण लाग रया सै।
के बिगड़ ग्या उस झकोई लंगोटधारी मोड्डे का? पुलिस की दो-च्यार लाट्ठी खा कै वो अस्पताल म्ह पौंच ज्यांदा तो उसके समर्थन म्ह भ्रष्टाचार नाम के राक्षस नै सुधां जड़ के पाड़ फैंकण का देशव्यापी अभियान काब्बू करणा सरकार के पकड़ तै बाहर हो ज्यांदा अर भ्रष्ट लीडरां की चोट्टी खड़ी हो ज्यांदी। कांस्सी घास्सी की हां म्ह हां मिलाकै बोल्या-बात तो सही सै रै घास्सी! म्हारै इस बात की खुशफहमी से अक््हम आजाद सैं,पर असल बात तो या सै अक््हम पहले तै घणी कसूत्ती तरियां गुलाम सैं।
म्हारे घर के आदमियां नै ए हम गुलामी की बेड़ियां म्ह जकड़ कै गेर राक्खे सैं। आज बाड़ खेत न ए खाण लाग री सै। कुल मिलाकै देक्खैं तो अंगरेज इब्बै गए ना सैं,बल्कि वे रूप बदल कै हमनै नोच-नोच कै खावण लाग रे सैं।
http://www.bhaskar.com/article/HAR-OTH-situation-of-the-country-2203683.html