Join Baba Ramdev in Bhrashtachar Mitao Satyagraha - 4th June 2011

अन्ना हजारे, स्वामी रामदेव अथवा अन्य जो भ्रष्टाचार के विरूद्ध लड रहे हैं उनसे कांग्रेस क्यों परेशान है, जानिए कारण:-

१ - सरकार हर वर्ष लोगों से 134 प्रकार के टैक्स से कितना पैसा जमा कराती है और ये पैसे कहा व्यय हो जाते हैं?

२ - मंदिरों का पैसा सरकार किस मद में खर्च कराती है जिसे केवल हिन्दू दान देकर इकठ्ठा करते हैं? बहुत बड़ा प्रश्न है.

३- काले धन का इतिहास क्या है? पहले कपिल सिब्बल ने कहा कोई भी नुकसान २ जी घोटाले में नहीं हुआ है, फिर अहलुवालिया ने कहा कि हाँ कोई घोटाला नहीं हुआ है, फिर मनमोहन सिंह ने कहा कि उसकी जाँच चल रही है, विपक्ष को टालते रहे, राजा जैसा व्यक्ति जिसके पास अपनी मोबाइल को टाप अप करने का पैसा नहीं हो, यदि वह अपनी पत्नी के नाम 3000 करोड़ रुपया मारीशश में जमा कर दे, क्या यह सब बिना सोनिया की जानकारी के कर सकता है, उस पार्टी में जहाँ पर बिना सोनिया के पूछे कोई वक्तव्य तथाकथित प्रवक्ता नहीं दे सकते हैं,

४- फिर आया महा घोटाला देवास-इसरो डील का जिसमें कि 205000 करोड़ की बैंड विड्थ को मात्र 1200 करोड़ के 10 साल के उधार के पैसे में दे दिया गया, भला हो सुब्रमण्यम स्वामी जी का जिन्हें इन चोरो को नंगा कर दिया, हमारी कांग्रेसी और विदेशी मीडिया सुब्रमनियम स्वामी का चित्र सदैव से दोषपूर्ण प्रस्तुत किया है जब कि वास्तव में भारत देश को ऐसे ही कर्तव्यनिष्ट नेताओ की आवश्यकता है जिसने कभी भी चोरी के बारे में सोचा ही नहीं.

५ - फिर आया कामनवेल्थ खेल का 90000 करोड़ का घोटाला, फिर कोयला का घोटाला जिसमे ठेकेदारों द्वारा 10 पैसे प्रति किलो के भाव से कोयला क्रय किया जाता है और उसे बाजार में 4 रुपये किलो तक बेचा जाता है, यह रकम अब तक 26 लाख करोड़ होती है.

६ - इटली के 8 बैंक और switzerland के 4 बैंको को 2005 में भारत में क्यों खोला गया है और इसमे किसका पैसा जमा होता है, ये बैंक किसको लोन देते है और इनका ब्याज क्या है, इनकी आवश्यकता क्यों आ पड़ी भारत में. जब कि भारत के ही बैंकरों की बैंक खोलने के आवेदन सरकार के पास धूल खा रहे हैं , इन बैंको को चोरी छुपे क्यों खोला गया है, इन बैंको की आवश्यकता क्यों है जब भारत में 80% लोग 20 रूपया प्रतिदिन से भी कम कमाते है.

७ -भारत के किसानो से कमीशन लेने वाले चोर कत्रोची के बेटे को अंदमान दीप समूह में तेल की खुदाई का ठेका क्यों दिया गया 2005 में, किसने दिया ठेका, किसके कहने पर दिया ठेका, क्या वहां पर पहले से ही तेल के कुओं का पता लगाकर वह स्थान इसे दे दिया गया जैसे की बहुत बार समाचारों में अन्य संदर्भो में आता है, यह समाचार क्यों छुपाया गया अब तक, इसे देश को क्यों नहीं बताया गया, मीडिया क्यों इसे छुपा गई, और विपक्ष ने इसे मुद्दा क्यों नहीं बनाया?

८ - सरकार ने पहले कहा कि बाबा बकवास कर रहे हैं, काला धन नाम की कोई वस्तु नहीं है, फिर सूचना आयी कि काला धन है और सबसे अधिक भारतीयों का है, यह स्विस बैंको के अलावा 70 और दूसरे देशों में जमा है.

९ - सरकार ने कहा कि टैक्स चोरी का मामला है, हम उन देशो से समझौते कर रहे हैं, जिससे कि दोहरा कर न देना पड़े, यह टैक्स चोरी नहीं भारत देश को लूट डालने का मामला है

१० - फिर बात आई कि यदि ये भ्रष्टाचारी और लुटेरे इसमे से 15% टैक्स सरकार को दे तो इसे भारत के बैंको में जमा करने दिया जायेगा और किसी को यह अधिकार नहीं होगा कि वह पूछे अथवा इतना पैसा कैसे कमाया अथवा लूटा. सरकार इस पर एक कानून क्यो नही ला रही है, किसको बचाया जा रहा है?



११ - यूरिया घोटाला है और यूरिया किसान को दुगुने दाम में विक्रय जाता है, फिर गेहूं सस्ते में क्रय किया जाता है, हम अभी तक सुरक्षित अन्न भण्डारण की व्यवस्था क्यों नहीं बना पाए जब कि हमारे पास धन की कमी ही नहीं है, क्योकि अन्न को सडा दिखाकर उसे कौड़ियो के भाव शराब माफिया को बेचा जाता है जब कि निर्धन, अन्न बिना मर रहा है.

१२ - हमारे देश में क्यों अनुसन्धान के लिए पर्याप्त धन नहीं दिया जाता है, यह किसकी चाल है, जिसके कारण से हम 5-10 गुना दाम में विदेशी वस्तुएं क्रय करते हैं, क्या कारण है कि हमारे देश में एक भी सोलर ऊर्जा वैज्ञानिक नहीं है और संसार भर के परमाणु वैज्ञानिक हैं जो हमें सदैव असत्य आश्वाशन देते हैं कि यह परमाणु बिजली सस्ती और निरापद है भारत का परमाणु से सम्बंधित कुल बाजार 750 लाख करोड़ का होगा. जब कि हम भारत में 400000 मेगावाट सोलर बिजली बना सकते है,

१३ - ऐसे कौन से कारण हैं जिनके कारण हम नेहरू के द्वारा ट्रांसफर ऑफ़ पॉवर एग्रीमेंट 14 अगस्त 1947 को हस्ताक्षर करने के पश्चात भी आज तक विकसित नहीं बन पाए, जब कि हमारी जनता सप्ताह में 90 घंटे काम करती है जबकि कामचोर अंग्रेज सप्ताह में केवल 30 घंटे काम करते हैं.

१४ - क्या कारण है कि हमारे 45 रुपये में 1 डालर और 90 रुपये में 1 पौंड मिलता है, जब कि 1947 में 1 रुपये में 1 डालर मिलता था.

१५ - मीडिया को निष्पक्ष बनाने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है, मीडिया, टीवी और पत्रिकाएं सरकार को बिक जाती हैं और निराधार और झूठ को भी सच बताकर प्रस्तुत करती हैं.

१६ - यदि देश में 2 लाख करोड़ रुपये की नकदी सर्कुलेशन में है तो देश की अर्थव्यवस्था लगभग 100 लाख करोड़ रुपयों की होती है. और हमारे देश में रिजर्व बैंक अबतक लगभग 18 लाख करोड़ रुपयों के नोट छाप चुका है और कम से कम 10 लाख करोड़ रुपये सर्कुलेशन में है. इस गणना से देश की अर्थव्यवस्था लगभग 400 से 500 लाख करोड़ रुपये होनी चाहिए किन्तु अभी हमारी अर्थव्यवस्था केवल 60 लाख करोड़ की है. जबकि इतनी अर्थव्यवस्था के लिए दो लाख करोड़ से भी कम सर्कुलेशन मनी की आवश्यकता है.

१७ - यदि 400 लाख करोड़ रूपये का काला धन देश में वापिस आ जाता है तो देश की अर्थव्यवस्था लगभग 20,000 लाख करोड़ रुपये होगी ... क्या आप जानते हैं कि इस समय अमेरिका सबसे शक्तिशाली देश है और उसकी अर्थव्यवस्था लगभग 650 लाख करोड़ रुपये की है... अर्थात 400 लाख करोड़ रुपये वापिस मिलने पर हम अमरीका से 30 गुना शक्तिशाली बन सकते हैं.
 
Brother, You are right, but problem is that non of the leader fron any party which matter in national politics, is honest and almost all of them have black money. Now public at large have to stand and force the system to improve, no other option.
 
कांग्रेसी कहते हैं कि स्वामी रामदेव संत नहीं, भगोड़े हैं....तो निम्न लिखित बिन्दुओं का अध्ययन कीजिये:-

# श्रीकृष्ण का नाम रणछोड़ है.

# पांडव कितने दिनों तक छिपकर रहे.

#महा राणा प्रताप ने भी अपने प्राण छुपकर बचाए थे.

# शिवाजी मिठाई की टोकरी मे छिप कर भागे थे.


# सुभाष चन्द्र बॉस भी भागे थे.

# वीर सावरकर भी कई बार भागे थे.

# आजाद तो वेश बदल कर भागे थे.

...क्योंकि कोई भी युद्ध मरकर नहीं जीता जा सकता ...युद्ध जीतने के लिए जीवित रहना आवश्यक है.
 
कांग्रेसी कहते हैं कि स्वामी रामदेव संत नहीं, भगोड़े हैं....तो निम्न लिखित बिन्दुओं का अध्ययन कीजिये:-

# श्रीकृष्ण का नाम रणछोड़ है.

# पांडव कितने दिनों तक छिपकर रहे.

#महा राणा प्रताप ने भी अपने प्राण छुपकर बचाए थे.

# शिवाजी मिठाई की टोकरी मे छिप कर भागे थे.


# सुभाष चन्द्र बॉस भी भागे थे.

# वीर सावरकर भी कई बार भागे थे.

# आजाद तो वेश बदल कर भागे थे.

...क्योंकि कोई भी युद्ध मरकर नहीं जीता जा सकता ...युद्ध जीतने के लिए जीवित रहना आवश्यक है.

भगत सिंह भी तो भेष बदल कर निकले थे लाहोर से |
 
कांग्रेसी कहते हैं कि स्वामी रामदेव संत नहीं, भगोड़े हैं....तो निम्न लिखित बिन्दुओं का अध्ययन कीजिये:-

# श्रीकृष्ण का नाम रणछोड़ है.

# पांडव कितने दिनों तक छिपकर रहे.

#महा राणा प्रताप ने भी अपने प्राण छुपकर बचाए थे.

# शिवाजी मिठाई की टोकरी मे छिप कर भागे थे.


# सुभाष चन्द्र बॉस भी भागे थे.

# वीर सावरकर भी कई बार भागे थे.

# आजाद तो वेश बदल कर भागे थे.

...क्योंकि कोई भी युद्ध मरकर नहीं जीता जा सकता ...युद्ध जीतने के लिए जीवित रहना आवश्यक है.

Uprokh sabhi ke dushman aise they ki unko pakde jane par 100% marte. Par Ramdev ke bare mein aisa nahi tha.

SARKAR KISI BHI KEEMAT PAR ITNE POPULAR AADMI KO POLICE KE HATHON NAHI MAARTI.

Eeb yahan-wahan ki marne ke bajae isi mein bhalai hai ki jo galati ho jae usko svikar karo aur aage badho. Sachai ye hai ki Ramdev DAR gae they. Unhone expect nahi kiya tha ki jo sarkar 4-4 kendriye matriyon ko bhej kar unka swagat karti hai wo aisa bhi kar sakti hai.

Aur uss bhochakke pan mein unhone khoob galatiyan ki.

Pahele to mahilyan aur bahene mera kwach hongi. He should be ashamed of that.
Second, he tried to flee wearing ladies clothes. Shame!!

Ye koe baat nahi, manviya bhavnaen hein. He hasnt been in such conditions ever before nor he has been strugling from his youth times for such causes. Police dekh ke dar lag-gya koe dikkat na ... people can understand.

Eeb uss kami ko ye kaheke dhakna is also a mistake. It hits his credibility. So loud mouth person comes out to be a phus when hard times. He should have lead from the front.

Ye bhi sachai hai ki he has lost a very very good opportunity to become a gandhi like hero of free india. He could have gained same status as that of Lohia and Jaiprakash and may be even higher. IF he had given giraftari that night and also if he had been hit by police on his head with blood coming out. Just an hour of struggle and wise decision have made his image and credibility.

Ab kuch kahete raho ... us sthan ko pane ke liye inko bahut kadi mehanat karni padegi. No doubt he is not bad as a person. He was fighting for good cause. He should keep it up but atleast without such bachkane arguments.
 
कांग्रेसी कहते हैं कि स्वामी रामदेव संत नहीं, भगोड़े हैं....तो निम्न लिखित बिन्दुओं का अध्ययन कीजिये:-

# श्रीकृष्ण का नाम रणछोड़ है.

# पांडव कितने दिनों तक छिपकर रहे.

#महा राणा प्रताप ने भी अपने प्राण छुपकर बचाए थे.

# शिवाजी मिठाई की टोकरी मे छिप कर भागे थे.


# सुभाष चन्द्र बॉस भी भागे थे.

# वीर सावरकर भी कई बार भागे थे.

# आजाद तो वेश बदल कर भागे थे.

...क्योंकि कोई भी युद्ध मरकर नहीं जीता जा सकता ...युद्ध जीतने के लिए जीवित रहना आवश्यक है.
I think, comparing such person with above yodhas/great leaders is areal insult to the above, secondly, rana faught gurilla war, a type of warfare, he never hidden himself, sivaji got out of jail, and others were avoiding arrest so that they could hit the govt, non above was on hunger strike, public was not around them they didnot call people and run away leaving them to face the music and nobody was killing this monkey and if the govt would have killed him, he would have won the battle than and there only.WHAT WAS THE PROBLEM AT HIS ASRAM, why couldnot he continue his fast, where had his yogic power gone. The fact is that ramdev has sold himself to the congress mismanagers. unfortunately congress leaders have cheated this person very well, he has lost his reputation as well as the public support, his position as yogi and so called leader have been demaged badly by these corrupt politicians but this person asked for it and deserve also,
 
Last edited:
Pahele to mahilyan aur bahene mera kwach hongi. He should be ashamed of that.
Second, he tried to flee wearing ladies clothes. Shame!!

Wa ek kahawat sai na...Naii aale baal aage aaya karein..yu Ramdev sai e isse karam karan ka! Kade isnai Bhagat Singh,Subhash Chandra, Maharana Pratap banan laag re hain logg!
 
I think you could be bit more respectful given that you claim to be representative(mahasevak) of Kharab Khap.

और घणा बोदर ले भाई |
आड़े सारी शीक्षआ दुसर्यां खातर स |
आपणे पे कदे ना अजमाई |
 
भगत सिंह भी तो भेष बदल कर निकले थे लाहोर से |

भाईजान आप भगत सिंह की तारीफ़ कर रहे हैं या कटाक्ष कुछ समझ नहीं आया ?
मैंने वैसे पहले भी बताया था भगत सिंह के भागने का कारण वो कोई जन आन्दोलन में से नहीं भागे थे |
परन्तु इस "monkey " ने तो किसी का क़त्ल नहीं किया था फिर क्यों भागा ? :)
" एक भगत सिंह मरेगा तो 100 भगत सिंह पैदा होंगे " यह कहकर भगत सिंह ने पहले गिरफ्तारी दी और बाद में जान भी दी | इस बात का आप लोग इस पाखंडी मोढ से मेल नहीं करते ?
बाकी आप लोग मेहरबानी करके इस चोर का अपनी कौम के बहादुरों से तुलना न करे |
 
भाईजान आप भगत सिंह की तारीफ़ कर रहे हैं या कटाक्ष कुछ समझ नहीं आया ?
मैंने वैसे पहले भी बताया था भगत सिंह के भागने का कारण वो कोई जन आन्दोलन में से नहीं भागे थे |
परन्तु इस "monkey " ने तो किसी का क़त्ल नहीं किया था फिर क्यों भागा ? :)
" एक भगत सिंह मरेगा तो 100 भगत सिंह पैदा होंगे " यह कहकर भगत सिंह ने पहले गिरफ्तारी दी और बाद में जान भी दी | इस बात का आप लोग इस पाखंडी मोढ से मेल नहीं करते ?
बाकी आप लोग मेहरबानी करके इस चोर का अपनी कौम के बहादुरों से तुलना न करे |


Is dhongi baba kai kadd mai jacch kai lath laag jata nai to yu kaade chuu bhi na karta aage..buss kasar ya rehgi :) Sarkaar bhaanp nahi paayi ya baat ;)
 
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Uprokh sabhi ke dushman aise they ki unko pakde jane par 100% marte. Par Ramdev ke bare mein aisa nahi tha.

SARKAR KISI BHI KEEMAT PAR ITNE POPULAR AADMI KO POLICE KE HATHON NAHI MAARTI.

Eeb yahan-wahan ki marne ke bajae isi mein bhalai hai ki jo galati ho jae usko svikar karo aur aage badho. Sachai ye hai ki Ramdev DAR gae they. Unhone expect nahi kiya tha ki jo sarkar 4-4 kendriye matriyon ko bhej kar unka swagat karti hai wo aisa bhi kar sakti hai.

Aur uss bhochakke pan mein unhone khoob galatiyan ki.

Pahele to mahilyan aur bahene mera kwach hongi. He should be ashamed of that.
Second, he tried to flee wearing ladies clothes. Shame!!

Ye koe baat nahi, manviya bhavnaen hein. He hasnt been in such conditions ever before nor he has been strugling from his youth times for such causes. Police dekh ke dar lag-gya koe dikkat na ... people can understand.

Eeb uss kami ko ye kaheke dhakna is also a mistake. It hits his credibility. So loud mouth person comes out to be a phus when hard times. He should have lead from the front.

Ye bhi sachai hai ki he has lost a very very good opportunity to become a gandhi like hero of free india. He could have gained same status as that of Lohia and Jaiprakash and may be even higher. IF he had given giraftari that night and also if he had been hit by police on his head with blood coming out. Just an hour of struggle and wise decision have made his image and credibility.

Ab kuch kahete raho ... us sthan ko pane ke liye inko bahut kadi mehanat karni padegi. No doubt he is not bad as a person. He was fighting for good cause. He should keep it up but atleast without such bachkane arguments.

भाई गुहांडी,

आपकी सरलता मन को छू लेती है ! मसलन, आम बोलचाल की भाषा में, बिना शालीनता खोये, आप वह सब कह देते हो की कोई चाह कर भी पूरी तरह असहमत नहीं हो सकता !
"साची ये है की रामदेव डरगे थे, उन्होंने एक्स्पेक्ट नहीं किया था की जो सरकार चार चार केन्द्रीय मंत्रियों को भेज कर स्वागत करती है वो ऐसा भी कर सकती है, और उस भोचाक्केपण में उन्होंने बहुत गलतियाँ की"
आपका उपरोक्त कथन निचोड़ है ! भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बोस व् शिवाजी जैसी हस्तियों से तुलना करना तर्कसंगत नहीं ! क्योंकि उनके समय परिस्थितियां बिलकुल ही भिन्न थी !
हालांकि भ्रष्टाचार के खिलाफ जन चेतना जागृत करने में बाबा का बहुत बड़ा योगदान है ! जंतर मंतर पर अन्ना के सत्याग्रह को गतिमान करने में बाबा रामदेव की उस से पहले, फ़रवरी में की सभा का बहुत बड़ा योगदान है !
बाबा ने अनसन के बाद की पहली पत्तरकार वार्ता में कहा की वह "गीदड़ की मौत " नही मरना चाहते थे !
हालांकि मेरे कुछ अपने उस रात रामलीला मैदान में मोजूद थे, लेकिन मेरी निजी राय है की अगर सत्याग्रही मरने से डर गया, तो समझो सत्याग्रह ख़त्म!
पुरे टीवी मिडिया के सामने उन कि जान को कोई जोखिम नहीं होता ! आधी रात को गिरफ्तारी दे बाबा अपना कद बढा सकते थे
में आप की इस बात से भी पूरी तरह सहमत हूँ कि, " इस घटना से पहले के स्थान को पाने के लिए बाबा को बहुत मेहनत करनी पड़ेगी"

एक सच्ची घटना जो एक सत्याग्रही के चरित्र को दर्शाती है :
हिंदी आन्दोलन के समय, हमारे गाँव के एक दर्जन से ज्यादा लोग ह्यद्राबाद में गिरफ्तार हुए थे ! मेरे दादाजी भी थे !
जीतू भाई आप जानते होगे हमारे गाँव में लाहली आले, एक बड़ा ठोला है ! उस ठोले के मेरे रिश्ते के एक ताऊजी थे मोट्टू, कद के छोटे , हंसी ठठे करते थे , लोग भी उनसे बहुत विनोद भाव रखते थे! वे भी उस सत्याग्रह में सामिल हुए थे ! गिरफ्तारी का विरोध करते हुए पोलिस ने लाठीचार्ज किया ! ताऊ मोटू आधे ट्रक से बहार लटकें और दो पुलिसिया भीतर धक्कावे, तीसरा लठ मारे कड़ में ! और माहरा बहादुर ताऊ मोटू फेर भी नारे लावे," जो हमसे टकरावेगा, चूर चूर होजावेगा"

खुश रहो!
 
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भाईजान आप भगत सिंह की तारीफ़ कर रहे हैं या कटाक्ष कुछ समझ नहीं आया ?
मैंने वैसे पहले भी बताया था भगत सिंह के भागने का कारण वो कोई जन आन्दोलन में से नहीं भागे थे |
परन्तु इस "monkey " ने तो किसी का क़त्ल नहीं किया था फिर क्यों भागा ? :)
" एक भगत सिंह मरेगा तो 100 भगत सिंह पैदा होंगे " यह कहकर भगत सिंह ने पहले गिरफ्तारी दी और बाद में जान भी दी | इस बात का आप लोग इस पाखंडी मोढ से मेल नहीं करते ?
बाकी आप लोग मेहरबानी करके इस चोर का अपनी कौम के बहादुरों से तुलना न करे |

भाई मन्ने तो राजपाल जी की लिस्ट में नाम जोडन खातर लिखा था , बाकी सरदार भगत सिंह जी की बराबरी रामदेव के गेल्याँ तो किस्से भी सूरत में नि करी जा सकदी | यु तो सूरज ताहि दीपक दीखान आली बात हो ज्या गी |इतना जन समर्थन होयें पाछे भी इब्ब क्यूँ ना चुसक्दा यु या बात समझ में ना आई |
 
मैं भी स्वामी रामदेव की तुलना अपने महान शहीद भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बोस इत्यादि से नहीं कर रहा हूँ. भगवान ने अब ऐसे महान सपूतों को जन्म देना बंद कर दिया है. मेरा आशय केवल इतना ही था की जब वो भागे थे तो रामदेव भी यदि भागे हैं तो क्या हुआ?
 
आज कलषुता की सीमायॆं,मानव लाँघ चुका है,
लॊकतंत्र अब लाचारी की, पगड़ी बाँध चुका है,
दॆश समूचा सुलग रहा, आतंकवाद कॆ घॆरॆ मॆं,
राजनीति का रास रचा है, मंत्री जी कॆ डॆरॆ मॆं,
द्वापर का खॆल यहाँ पर, खूब खिलाया जाता है,
पाँचाली सा भारत माँ पर,दाव लगाया जाता है,
जब संसद मॆं कॊई भारत माँ का, चीर हरा करता है !!
तब भूषण का वंशज शब्दॊं मॆं, तॆज़ाब भरा करता है !!१!!

लॊकतंत्र की प्राचीरॊं मॆं, कील ठॊंक दी जाती है,
जब दहॆज़ की ज्वाला मॆं,वधू झॊंक दी जाती है,
रक्षा चौकी मॆं नारी की, इज्जत लूटी जाती है,
निर्वस्त्र घुमाकर बस्ती मॆं, अबला पीटी जती है,
जब मज़दूरॊं कॊ उनका, अधिकार नहीं मिलता,
सत्ता सुविधाऒं का उनकॊ,जब द्वार नहीं खुलता,
जब तड़प-तड़प खॆतॊं मॆं, कॊई किसान मरा करता है !!२!!
तब भूषण का वंशज शब्दॊं मॆं............................

झॆल रही है आँचल मॆं अब,अंगारॆ यह भारत माँ,
आज़ाद भगतसिंह आऒ, तुम्हॆं पुकारॆ भारत माँ,
राजगुरू सुखदॆव कहाँ हॊ, इसकी आँखॊं कॆ तारॆ,
मंगलपाँडॆ कहाँ गयॆ तुम, आज़ादी कॆ पहलॆ नारॆ,
प्राणॊं की आहुति दॆकर, तुम नॆं आधार दिया है,
कुर्सी कॆ गद्दारॊं नॆं इसकॊ,जीतॆ जी मार दिया है,
भारत माँ की आँखॊं सॆ जब, खारा नीर झरा करता है !!३!!
तब भूषण का वंशज शब्दॊं मॆं..............................

वंदन करता हूँ जिनका, ईमान जरा भी बाकी है,
वंदन करता जिनकॆ दिल मॆं, भारत की झाँकी है,
वंदन करता हूँ जॊ, सीमा पर, सीना तान खड़ॆ हैं,
वंदन करता हूँ उनकॊ,जो आज़ादी की जंग लड़ॆ हैं,
वंदन है उनकॊ जिनमॆं, निज राष्ट्र-प्रॆम की धारा है,
जाति, धर्म भाषा सॆ ऊपर, जिन्हॆं तिरंगा प्यारा है,
जब मानवता के सीने पर,दानव पांव धरा करता है !!४!!
तब भूषण का वंशज शब्दॊं मॆं.............................

####### Raj Bundela
 
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