virendernarwal
New member
******* कडवा सच *******
आदरणीय जाटलैंड्र्स
जैसा की आप सभी जानते हैं कि काफ़ी दिनों से मैं जाटलैंड पर एक "एडमिन्स" की हैसियत से अपनी जिम्मेंवारियों का निर्वाह कर रहा था…...इस दौरान मुझे आप सभी से जो सहयोग ओर साहनभूति मिली…उसी से प्रोत्साहित हो कर मैंने बिना किसी द्वेष या बिना किसी पक्षपात की भावना से, हमेशा जाटलैंड हित को सर्वोपरी मानते हुये "ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर"….के तहत निर्णय लिये और अपनी जिम्मेंवारियों को निष्ठा, इमानदारी और निष्पक्षता से निभाने की कोशिश की।
माना संसार में जितने भी कार्य होते हैं वह सब एक दूसरे के सहयोग से समपन्न होते हैं , इतिहास कोई अकेला नही रच सकता….इतिहास रचने के लिये अपनों की जरूरत होती है….इसी भावना को मद्देनजर रखते हुये मैने ये जिम्मेवारी ली……ओर तेजधारी तलवार पर नंगे पैर चलने की कोशिश की… इस दौरान आप को मेरी कार्यशैली ओर फ़ैसलें उचित लगे होंगे तो कुछ अनुचित भी ? ये सत्य है कि फ़ैसले सभी को एक जैसा अनुभव नही दे सकते……माना हमारे फ़ैसले सभी को प्रसन्नचित नही रख सकते….लेकिन कुछ अच्छा करने के लिये सख्त फ़ैसले लेने पडते हैं…..परन्तु जब फ़ैसलों पर लोग इतने आहत हो जाते हैं कि "जाटलैंड छोडने तक की बात कह जाते हैं"….....…तब हमें मोड/एडमिन जैसे सम्मानीय पद ओर स्वंय की गरिमा का ख्याल रखते हुये “स्वंय के लिये” कुछ अनावश्यक, अप्रिय एवं असहनीय फ़ैसले लेने पडते हैं…..जो सदस्य मेरी वजह से जाटलैंड छोड कर जाने की कह रहे हैं मेरा उन से अनुरोध है के वो यहां से ना जाये…और जाटलैंड को अपने शुद्द एवं उच्च विचारों से अपनी चिरपरीचित शैली में सुशोभित करते रहें ।
अभी मरते है जीने का ताना नही देना
ये ताना उनको देना जिनसे ऐसा हो नहीं सकता
अत: आपको ये कष्ट उठाने की आवश्यकता ना है…..आपकी खुशियों के लिये ये कार्य हम ही किये देते हैं।
कुछ दिनों से ऐसा आभास हो रहा है कि कुछ सदस्य अविशवास की भावना से ग्रस्त हो चले हैं….शिक्षित होने के बावजूद किसी के बारे में कुछ भी लिख देते है….ये तक नही समझते की इसके क्या दूषपरिणाम होगें…. "इज्जत तो इज्जत होती है….आपकी हो या हमारी"…...जैसे जल में रह कर मछली शुद्द नही हो सकती ठीक वैसे ही विचारों की शुद्दि भी सिर्फ़ शिक्षा, उच्च अहोदों पर आसीन होने से नही आ सकती….अच्छाई हमारे व्यवहार में भी झलकनी चाहिये।
इस दौर ए तरक्की के अंदाज निराले हैं
जहनों में अंधेरे….सडकों पे उजाले हैं
कुछ सदस्य आजकल सकारत्मक विचारों का चयन न कर अकसर नकारत्मक बातों में इतना उलझे रहते हैं कि उनको जिंदगी के अच्छे पहलू दिखाइ ही नही पडते….सच कहना सुनना ओर पचाना/सहना सबके बस की बात नही है…..सच्चाई अतित के गर्भ मे भी होती है…….ये बात भी सत्य है कि ऐसा सच जिसके जुबां पर आने से कयामत आये….बचना चाहिये…..जीवन में सभी प्रसन्ता चाहते हैं लेकिन उसे पाने के उन तरीकों पर ज्यादा ध्यान दे दिया जाता है जो अंत में आपको प्रसन्न्ता तो नही दे पाती, किंतु आपको दुःखी अवश्य कर देती है।
जाटलैंड एक सच्चे जाटलैंड्र्स की तरह मेरे लिये भी सम्मानीय है….मोड/एडमिन के इलावा जाटलैंड पर सदस्यों का बहुत बडा योगदान होता है….लेकिन इसका मतलब ये कतई नही है कि कोई भी सदस्य जिसका योगदान भले ज्यादा भी रहा हो….उसको मोड/एडमिन को बिना कोई ठोस वजह अपमानित करने का अधिकार मिले….जब कोई मोड/एडमिन इमानदारी, अधिकार, जवाबदेही व सामुहिक हित की भावना से औत-प्रोत होकर अपने कर्तव्य का निष्ठापूर्वक पालन कर रहा हो….आप न जाने किस दुर्भावना से प्रेरित होकर ऐसे इल्जामात थोप देतें हैं जिनका कोई आधार नही होता।
ऐसे ही कुछ हादसे चंद दिनों में मैने झेले हैं ?
हादसे तो रोज़ होते हैं…मगर..जिन्दा हूं ये मेरी माँ की दुआओं का असर लगता है
जिन्दगी तूने मेरी कब्र से कम दी है जिन्दगी…पैर फ़ैलाता हूँ तो दिवार पर सर लगता है
बुर्जगों ने भी कहा है कि जब सोना कानों को काटने लगे तो सोने को भी निकाल देना चाहिये ।
खुशी ऐसी चीज़ नही जो किसी परिस्थिती या आपके प्रति किसी व्यक्ति विशेष के व्यवहार की मोहताज हो…..यह तो वह भाव है जिसका सृजन स्वंय आप करते हैं, अत: सदस्यों की खुशियों ओर भावनाओं की कद्र करते हुये मैं एडमिन पद से अपने आप को मुक्त कर रहा हूं। आशा करता हूँ कि कम से कम मेरे इस फ़ैसले से तो आप सभी अवश्य सहमत होंगे।
दुनिया जिसे कहते है जादू का खिलोना है !
मिल जाये तो मिट्टी है खो जाये तो सोना है !!
जाने-अनजाने में अगर कोइ गलती मुझ से हुई हो…..या कोइ मेरे व्यवहार से आहत हुआ हो…..मैं उसके लिये क्षमाप्राथी हूँ।
जाटलैंड ओर समस्त जाटलैंड्र्स के लिये मेरी तरफ़ से शुभकामनाएँ !
उम्र भर यूं ही गलतियां करते रहे….धुल चेहरे पे थी ओर हम आइना साफ़ करते रहे !!
*** वीरेन्द्र नरवाल ***
आदरणीय जाटलैंड्र्स
जैसा की आप सभी जानते हैं कि काफ़ी दिनों से मैं जाटलैंड पर एक "एडमिन्स" की हैसियत से अपनी जिम्मेंवारियों का निर्वाह कर रहा था…...इस दौरान मुझे आप सभी से जो सहयोग ओर साहनभूति मिली…उसी से प्रोत्साहित हो कर मैंने बिना किसी द्वेष या बिना किसी पक्षपात की भावना से, हमेशा जाटलैंड हित को सर्वोपरी मानते हुये "ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर"….के तहत निर्णय लिये और अपनी जिम्मेंवारियों को निष्ठा, इमानदारी और निष्पक्षता से निभाने की कोशिश की।
माना संसार में जितने भी कार्य होते हैं वह सब एक दूसरे के सहयोग से समपन्न होते हैं , इतिहास कोई अकेला नही रच सकता….इतिहास रचने के लिये अपनों की जरूरत होती है….इसी भावना को मद्देनजर रखते हुये मैने ये जिम्मेवारी ली……ओर तेजधारी तलवार पर नंगे पैर चलने की कोशिश की… इस दौरान आप को मेरी कार्यशैली ओर फ़ैसलें उचित लगे होंगे तो कुछ अनुचित भी ? ये सत्य है कि फ़ैसले सभी को एक जैसा अनुभव नही दे सकते……माना हमारे फ़ैसले सभी को प्रसन्नचित नही रख सकते….लेकिन कुछ अच्छा करने के लिये सख्त फ़ैसले लेने पडते हैं…..परन्तु जब फ़ैसलों पर लोग इतने आहत हो जाते हैं कि "जाटलैंड छोडने तक की बात कह जाते हैं"….....…तब हमें मोड/एडमिन जैसे सम्मानीय पद ओर स्वंय की गरिमा का ख्याल रखते हुये “स्वंय के लिये” कुछ अनावश्यक, अप्रिय एवं असहनीय फ़ैसले लेने पडते हैं…..जो सदस्य मेरी वजह से जाटलैंड छोड कर जाने की कह रहे हैं मेरा उन से अनुरोध है के वो यहां से ना जाये…और जाटलैंड को अपने शुद्द एवं उच्च विचारों से अपनी चिरपरीचित शैली में सुशोभित करते रहें ।
अभी मरते है जीने का ताना नही देना
ये ताना उनको देना जिनसे ऐसा हो नहीं सकता
अत: आपको ये कष्ट उठाने की आवश्यकता ना है…..आपकी खुशियों के लिये ये कार्य हम ही किये देते हैं।
कुछ दिनों से ऐसा आभास हो रहा है कि कुछ सदस्य अविशवास की भावना से ग्रस्त हो चले हैं….शिक्षित होने के बावजूद किसी के बारे में कुछ भी लिख देते है….ये तक नही समझते की इसके क्या दूषपरिणाम होगें…. "इज्जत तो इज्जत होती है….आपकी हो या हमारी"…...जैसे जल में रह कर मछली शुद्द नही हो सकती ठीक वैसे ही विचारों की शुद्दि भी सिर्फ़ शिक्षा, उच्च अहोदों पर आसीन होने से नही आ सकती….अच्छाई हमारे व्यवहार में भी झलकनी चाहिये।
इस दौर ए तरक्की के अंदाज निराले हैं
जहनों में अंधेरे….सडकों पे उजाले हैं
कुछ सदस्य आजकल सकारत्मक विचारों का चयन न कर अकसर नकारत्मक बातों में इतना उलझे रहते हैं कि उनको जिंदगी के अच्छे पहलू दिखाइ ही नही पडते….सच कहना सुनना ओर पचाना/सहना सबके बस की बात नही है…..सच्चाई अतित के गर्भ मे भी होती है…….ये बात भी सत्य है कि ऐसा सच जिसके जुबां पर आने से कयामत आये….बचना चाहिये…..जीवन में सभी प्रसन्ता चाहते हैं लेकिन उसे पाने के उन तरीकों पर ज्यादा ध्यान दे दिया जाता है जो अंत में आपको प्रसन्न्ता तो नही दे पाती, किंतु आपको दुःखी अवश्य कर देती है।
जाटलैंड एक सच्चे जाटलैंड्र्स की तरह मेरे लिये भी सम्मानीय है….मोड/एडमिन के इलावा जाटलैंड पर सदस्यों का बहुत बडा योगदान होता है….लेकिन इसका मतलब ये कतई नही है कि कोई भी सदस्य जिसका योगदान भले ज्यादा भी रहा हो….उसको मोड/एडमिन को बिना कोई ठोस वजह अपमानित करने का अधिकार मिले….जब कोई मोड/एडमिन इमानदारी, अधिकार, जवाबदेही व सामुहिक हित की भावना से औत-प्रोत होकर अपने कर्तव्य का निष्ठापूर्वक पालन कर रहा हो….आप न जाने किस दुर्भावना से प्रेरित होकर ऐसे इल्जामात थोप देतें हैं जिनका कोई आधार नही होता।
ऐसे ही कुछ हादसे चंद दिनों में मैने झेले हैं ?
हादसे तो रोज़ होते हैं…मगर..जिन्दा हूं ये मेरी माँ की दुआओं का असर लगता है
जिन्दगी तूने मेरी कब्र से कम दी है जिन्दगी…पैर फ़ैलाता हूँ तो दिवार पर सर लगता है
बुर्जगों ने भी कहा है कि जब सोना कानों को काटने लगे तो सोने को भी निकाल देना चाहिये ।
खुशी ऐसी चीज़ नही जो किसी परिस्थिती या आपके प्रति किसी व्यक्ति विशेष के व्यवहार की मोहताज हो…..यह तो वह भाव है जिसका सृजन स्वंय आप करते हैं, अत: सदस्यों की खुशियों ओर भावनाओं की कद्र करते हुये मैं एडमिन पद से अपने आप को मुक्त कर रहा हूं। आशा करता हूँ कि कम से कम मेरे इस फ़ैसले से तो आप सभी अवश्य सहमत होंगे।
दुनिया जिसे कहते है जादू का खिलोना है !
मिल जाये तो मिट्टी है खो जाये तो सोना है !!
जाने-अनजाने में अगर कोइ गलती मुझ से हुई हो…..या कोइ मेरे व्यवहार से आहत हुआ हो…..मैं उसके लिये क्षमाप्राथी हूँ।
जाटलैंड ओर समस्त जाटलैंड्र्स के लिये मेरी तरफ़ से शुभकामनाएँ !
उम्र भर यूं ही गलतियां करते रहे….धुल चेहरे पे थी ओर हम आइना साफ़ करते रहे !!
*** वीरेन्द्र नरवाल ***