Kanyaa bhurna hatyaa

"नये ज़माने के रंग में,
पुरानी सी लगती है जो|
आगे बढने वालों के बीच,
पिछङी सी ल...गती है जो|
गिर जाने पर मेरे,
दर्द से सिहर जाती है जो|
चश्मे के पीछे,आँखें गढाए,
हर चेहरे में मुझे निहारती है जो|
खिङकी के पीछे,टकटकी लगाए,
मेरा इन्तजार करती है जो|
सुई में धागा डालने के लिये,
हर बार मेरी मनुहार करती है जो|
तवे से उतरे हुए,गरम फुल्कों में,
जाने कितना स्वाद भर देती है जो|
मुझे परदेस भेज,अब याद करके,
कभी-कभी पलकें भिगा लेती है जो|
मेरी खुशियों का लवण,मेरे जीवन का सार,
मेरी मुस्कुराहटों की मिठास,मेरी आशाओं का आधार,
मेरी माँ, हाँ मेरी माँ ही तो है वो|" अगर बेटी नहीं टी माँ कहाँ से आएगी???????????????
 
ए़क माँ ने सामाजिक दबाब में आकर
कन्या भ्रूणहत्या के लिए दवा खा ली है अब
कन्या भ्रूण के पास जो थोड़ा सा समय शेष
है उसमें वह अपनी माँ से कुछ दिन की बात
... कहती है वो कया हैॽ
मैं आती तो घर के अंदर ... गुड़िया घर
बनवाती माँ
मैं आती तो संग तेरे... पूजा की थाल
सजवाती माँ
चूड़ी कंगन पहन के मैं ... खन खन खन
खनाती माँ
मैं आती तो पैरो मैंपायल ... छन छन छन
छनकाती माँ
साड़ी तेरी तह करके... आलमारी में
रखवाती माँ
रंग बिरंगी रंगोली से ... घर आँगन
सजवाती माँ
दीवाली में दियों में बाती ... तेरे संग
लगवाती माँ
परेशानी में सहेली बनकर ... तुझको में
समझती माँ
नाना-नानी कौन कहेगा ... मामा-मामी के
संग रहेगा
जब कन्या भ्रूण मारी जायेगी ... तब रिश्ते
भी मर जायेगे
ये शब्द अनसुने रह जायेंगे ... खैंर छोड़ इन
बातों को
तूझे मैं ये बतलाती माँ ... तेरे लिये सब से
लड़ती
मेरे लिये कौन लड़ेगा ... माँ तेरा आँचल क्यूँ
भीगा है
तूँ अब क्यूँ रोती है ... छोड़ स्वप्न कीबातें
तेरी बिटिया अब ... चिर निद्रा में
सोती है..…

Bahut badhiyaa likha hai bhai Virendra.
 
मेरी प्यारी बेटी
पलकों में पली साँसों में बसी माँ की आस है बेटी
हर पल मुस्काती गाती एक सुखद अहसास है बेटी
गहन अंधेरी रातों में जैसे, भोर की उजली किरन है बेटी
सूने आँगन में खिली, मासूम कली की सी मुस्कान है बेटी
मान अभिमान है बेटी, दोनों कुलों की लाज है बेटी
दुख दर्द अंदर ही सहती,एक खामोश आवाज़ है बेटी
तपित धरती पर सघन छाया सी, शीतल हवा है बेटी
लक्ष्मी दुर्गा सरस्वती सी,बुजुर्गो की पावन दुआ है बेटी
करते विदा जब डोली में,तब पराई होजाती है बेटी
उदास मन सूना आँगन, फिर बहुत याद आती है बेटी
 
अजन्मी कन्या का सवाल
मैं जन्म की चाहत में, तू ले आई"माँ"तेरी कोख मे,
बुलाया आपने प्यार से, किसी मिलन के क्षण मे;
परमपिता ने वरदान समझ भेजा- ममता के आँचल मे;
नफरत मुझसे क्यों ? आई नहीं बात समझ मे ;
सृष्टि अब भावी-सृष्टि पर,लिप्त कैसे अत्यचार मे ?
प्रति-पालक पिता क्या कर मग्न हुवे संहार मे ,
तेरे तन का लहू पुकारता तुझे जीने की आस मे ;
हत्यारे सोचो ' ध्यानसे' तुम आये कैसे जग मे ?
मैं हूँ जग का आधार, मेरा निवास हर जननी मे |
फिर वह घातक रहते कैसे ,धरती माँ की गोद मे !
कैसा अनुराग है निष्ठुर" मात-पिता" का संतान मे,
कन्या या पुत्र का सृजन तो है उनके अधिकार मे ;
अपने किये का दंड,अजन्मी कन्या को अकारण मे,
तुम्हारा खून रहम मागें,असहाय लाचार अवस्था मे,
कब तलक पाप होग परम्परा,बंस-बेल की आढ़ मे,
तुम जरा इन्सान बनो, मत खो इन्सानियत, हैवानी मे !
 
thnx naresh do shabd meri taraf se bhi
आने दो बेटियों को धरती पर
मत बजाना थाली चाहे
वरना कौन गाएगा गीत
अपने वीरों की शादी में
आने दो बेटियों को धरती पर
पनपने दो उनके भ्रूण
वरना कौन धारण करेगा
तुम्हारे बेटों के भ्रूण
आने दो बेटियों को धरती पर
मत बजाना थाली चाहे।
 
हमारा देस और समाज काफी प्रगति कर गया है और आगे
करभी रहा है लेकिन
अभी भी स्त्रियो को जितना सम्मानमिलना चाहिए
उतना नही मिलता है क्योकि उन्हें इतना महत्वपूर्ण
नही समझाजाता है और इसी लिए गर्भ में
ही उनकी हत्या कर दी जाती है लिंग परिक्षण करवाके लेकिन
ऐसा नही करना चाहिए, यदि आप ऐसा सोचते है
की बेटा होगा तो वह अधिक काम का होगा तो बहुत ही ग़लत
सोचते है, बेटा हो या बेटी भगवान की इच्छा समझ के उसे
ही स्वीकार कर लेना चाहिए, क्योकि पहेले से ही किसी बात
का अंदाजा लगा लेना बहुत उचित नही कहा जा सकता है,
इसी से सम्बंधित मै एक प्रेरक प्रसंग प्रस्तुत कर रहा हूँ
जिससे आप को ऐसालगे की कोई किसी से कम नही बस
आपने परवरिस कैसे की है,देखभाल कैसे की है, सबकुछ इस
पर आधार रखता है .
हमारे देस की सक्रिय राजनीती में अभी भी एक परिवार खूब
ही सक्रिय रूप से जुडा हुआ है जिसे गाँधी नेहरू परिवार के
नाम से जाना जाता है , अब आप समझ गए होंगे
की मेरा इशारा किस ओर है, जवाहर लाल नेहरू हारे देस के
प्रथम प्रधानमंत्री है , इनके पिता का नाम मोतीलाल नेहरू
था जो बारिस्टर थे
जवाहर लाल नेहरू की एक ही संतान
थी जो की पुत्री थी लेकिन हमें इतिहास में
कही भी ऐसा नही पता चलता हैकी जवाहर लाल नेहरू
को कभी भी इस बात से कोई समस्या रही हो की कोई
बेटा क्यो नही हुआ क्या वो चाहते तो कोई बेटा गोद नही ले
सकते थे या फिर कोई दूसरी शादी नही कर सकते थे लेकिन
उन्होंने ऐसा नही किया भगवन ने उन्हें जो दिया इस मामले में
यही कहूँगा की उन्होंने उसे ही स्वीकार कर लिया, वैसे
तो अब आप समझ ही गए होंगे की मै किसकी बात कर रहा हूँ
लेकिन फिर भी नाम बता ही दूँ, तो जवाहर लाल नेहरू को एक
ही पुत्री रत्न की प्राप्ति हुई थी जिनका नाम
इंदिरा गाँधी था, अब मै यह विचार करता हूँ की यदि जवाहर
जी को पुत्री की जगह कोई पुत्र प्राप्त हुआ
होता तो क्या वह इंदिरा गांघी के जितना नाम कर
पाता या फिर इतनी निदारत से फैसले ले पाता…..
इसीलिए मेरा ऐसा मानना है की यदि आप अपने
बच्चो को सही से पढाते लिखाते है उन्हें देस
दुनिया का सही से परिचय कराते हैं उनकी समस्याओ
को समझ करके उसका समाधान करते है तो और
बेटी को संकुचित द्रिस्टीसे नही देखते है तो आप
को अपनीजिन्दगी में कभी भी ऐसा नही लगेगा की हमारा कोई
बेटा नही है बल्कि बेटा और बेटी में आप को अन्तर
दिखेगा ही नही साथ ही आपका नाम भी रोशन होगा और इस
देसका भी
 
मेरे पड़ोस में एक बारह साल
की बच्ची रहती है। पहले उसके व्यवहार से मुझे
लगता था की काफी उद्दण्ड और घमंडी है
वो। उसके पापा साधारण सी कोई नौकरी करते है।पर
उसकी हर ईच्छा को जरुर पूरी करते है।
काफी मन्नतो के बाद उनके घर संतानहुआ था।
एक बार उसने अपने घर में नई चप्पल के लिये
बखेरा खड़ा कर दिया।
उसके पापा की आज ही सैलरी मिली थी।
पापा ने काफी खुबसुरत चप्पल लाकर उसे दी।
चप्पल लेकर वो काफी खुश थी।
उस दिन उसने चप्पल पहन के खुब उछल-कुद की।
पर अगले दिन आश्चर्य चकित रह गया मैं,जब
वो अपनी माँ से कह रही थी की ये नई चप्पल मैँ
नहीं पहनुंगी,
मुझे अच्छा नहीं लग रहा है।
पुराना वाला ही ठिक है।
सुनकर थोड़ा गुस्सा आया मुझे,फिर शाम को मैनें कड़े
शब्दो में पूछा की जब चप्पले
नहीं पहननी थी,तो इतनी महँगी क्यों खरीदवाई??
और एक दिन पूरा पहन के क्यों घुमी??
अब तो वापस भी नही हो सकता ये चप्पल!
मेरी बात सुनके वो हँसने लगी बोलीकी, बुद्धु रह जाओगे
भैया।
वो तो मम्मी की चप्पल घिस गई थी, नई चप्पल अपने लिये
खरीदवा नहीं रही थी।
वो तो सारा प्यार मुझ पे लुटा देना चाहती है।
बस मै बहाने से चप्पल खरीदवा के पहन ली।
और इसलिये घुमी की दुकान वाले को वापिस
ना किया जा सके।
अब मम्मी उस चप्पल को पहन के कहीं भी आ,जा सकेंगी।
इतनी कम उम्र मे माँ के लिये
इतनी प्यारी सोच देख के मैं दंग रह गया।
सच माँ-बेटी का रिश्ता अनमोल है |
translate from kannada makkla madhyam
 
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