kisan aur ...halat

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ajit2009

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wat are the position of kisan this time.................. in my knowledge he going down & down. eg.....
ek kisan hai jiske pas 4-5 kile hai ,jise govt. karaz deti hai 2-3 lac on basis of kcc., wo apana kam nahi chala pata ,why?..............................
ek baniya jiske pas hai 200-500 gaj ki dukan govt. use karaj deti hai 30-40 lac, jo use kisano ko 2% byaj par deta hai aur 4-5 kisano ka kam chalata hai,why?........................
...............................where is govt. for kisan ..............................................................
kyun bahakati hai kisano ko....................... it is my self experience if it is wrong then tell me wat is truth?
 
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u r right brother !

wat are the position of kisan this time.................. in my knowledge he going down & down. eg.....
ek kisan hai jiske pas 4-5 kile hai ,jise govt. karaz deti hai 2-3 lac on basis of kcc., wo apana kam nahi chala pata ,why?..............................
ek baniya jiske pas hai 200-500 gaj ki dukan govt. use karaj deti hai 30-40 lac, jo use kisano ko 2% byaj par deta hai aur 4-5 kisano ka kam chalata hai,why?........................
...............................where is govt. for kisan ..............................................................
kyun bahakati hai kisano ko....................... it is my self experience if it is wrong then tell me wat is truth?

u r very much right brother ! society is framed like this, but don't hate baniyas for this but try to be a "baniya" if ur nature allows that.
u must be thinking that this is not the practical answer but this is brother.:)
 
भाई किसान का तो राम रुखाला हो स | हमारे ज्यादातर नेता ,अधिकारी इसी किसान बिरादरी से हैं पर पता नहीं यह लोग अपने किसान भाइयो का दर्द कैसे भूल जाते हैं | हमारा कोई जाट नेता हो लोग उसके आगे किसान नेता लिखते हैं , जबकि उन् सभी नेताओ ने तो किसानी छोडे मुद्दत हो ली | असल में किसान नेता वो हैं जो विपक्ष में होने पर अपनी किसानी का काम करता हो , वो ही सच्चा किसान हैं , वो ही किसान का दर्द तकलीफ समझ सकता हैं | | जब आपने अपना कर्म ही छोड़ दिया तो फेर अपने को किसान क्यों कहलाते हो | हम सब यहाँ जाट बिरादरी से हैं और आपने को किसान कहते हैं जबकि मेरे ख्याल से यहाँ कोई भी अभी किसानी नहीं करता होगा , सिर्फ ज़मीन नाम होने से किसान नहीं होता | मैंने ९७ में पढाई छोड़ी थी , मेरे गाँव का एक लड़का आया बोल्या भाईसाब एक यूरिया कम्पनी ( उज्ज्वला यूरिया ) भिवानी में अपना डीलर बनावे स आप या एजेन्सी ले ल्यो आपकी अप्र्रोअच भी स | मैंने भी सोची अक ८०% लोग खेती करे स तो बिक्री तो अच्छी ही होगी मुनाफे का काम स यह बनिए भी मोटे दाम कमावे स किसान की फसल से | मैंने व एजेन्सी ले ली अपना जुगाड़ लगा के | इब मैं कदे गाम में रह्या कोणी था तो मैंने के बेरा हो था अक कुणसी फसल कद बोई जा स , उसमे DAP कद पड़े स UREA कद पड़े स | म जब फसल की कटाई का टेम आता तो यूरिया मंगाता , और फेर रही सही बात किसान न उधार दयों | मैंने न्यू ना बेरा था अक इसकी उधार न आया करे , ये बनिए तो अपनी आढ़त में पुरे कर ले स पैसे | उधार मांगन जाओ तो राम कान्या हाथ करके कह देंगे अक भाई यो बरसेगा जिबे तो दयांगे | घर के रोला करण लागे अक गाम में उधार पूरी ना करता , एक घर चला गया प्रेम नाम था उसका उसके दो कमरे एक में वे खुद रह और दुसरे में न्यार तुडा घेर राख्या , म देख के उल्टा हो लिया , वो बोल्या साब आला क्यूकर आया था बेरा उसने भी था , मखा काका न्यू अ मिलन आ गया था | उस दिन मैंने सही मायेने में किसान की हालात का बेरा पाट्या | असल में किसान का दर्द उसने ए बेरा हो स जो यो काम करता हो | नाम के आगे किसान लिखे त ना बेरा लागे | AC में बैठ के जेठ की दोह्पैरी का के बेरा लागे भाई |
सरकार किसानो के कर्जे मांफ करके वाह वाही लुट रही जबकि यह कोई समाधान नहीं हैं किसान की हालात का , असल में यह पता लगाना चाहिए की जो आदमी सोसाइटी से मात्र 10000 रूपये लोन लेता हैं और उस बेचारे किसान से वो भी नहीं भरा जाता इसके क्या करण हैं ? यह तो हैं नहीं के मांफ होने के बाद उसे दुबारा पैसे की जरुरत नहीं पड़ेगी | वो बिचारा किसान फेर कर्जा लेगा फेर वही सोसाइटी आले वही पुलिस |
एक लाला की दूकान गोदाम में कुछ उजाड़ हो जाओ उसे बिमा कम्पनी भुगतान करदेती हैं और इस बिचारे भोले किसान का कोण भुगतान करे ? इसकी तो सारी कमाई पुरे बाराह मॉस खुले आसमान के नीचे बिना ताले में रहती हैं | आढ़ती बोली लायेगा तो इसका माल बिकेगा , राम बरस गया तो मण्डी में पड़े माल की हानि का कोई जवाब दार नहीं , कोई बिमा नहीं | बिचारे किसान को अपनी फसल के उजाड़ की भुगतान के लिए रास्ते रोकने पड़ते हैं दरखत काटने पड़ते हैं DC को ज्ञापन देना पड़ता हैं , जब जा के आश्वासन मिलता हैं के गाम में पटवारी , गिरदावर आयेंगे फसल के नुक्सान का मुआयना करण | एक व्यापारी को आपने प्रोडक्ट के दाम तय करने का हक हैं किसान को नहीं | एक किसान के आलू की फसल से चिप्स बना कर एक व्यापारी लाखो कमाता हैं और किसान को बिचारे को पूरी दिहाडी भी नहीं मिलती |
देश का प्रधामंत्री एक लाला बिरादरी से संबध रखता हैं ना के किसान बिरादरी से | देश का माना हुआ अर्थ्शःस्त्री भी हैं , लोग गुणगान करते हैं के बहुत अच्छा अर्थशाष्त्री हैं | यह प्रचार व्यापारी कौम करती हैं क्योकि वो पहले इनकी सोचेगा बाद में किसान की और भोला किसान इन लालो की हाँ में हाँ मिलाता हैं | राहुल गाँधी कहता हैं के हम रुपया भेजते हैं तो वो 10 पैसे रह जाता हैं , जबकि इनके पिता जी कहते थे की 17 पैसे पहुचते हैं | कोई इनसे पूछे की आपकी तो सरकार भी रह ली आपने पता क्यों नहीं करवाया की इन बेचारे किसान के हक का 90 पैसे कोण खा जाता हैं | जबकि लोग इन्हें शाबाशी देते हैं की ईमानदार हैं | यह तो सबको पता हैं की पैसा खाया जाता हैं पर खाने वाला कोण हैं ? इसका पता लगाओ तो हैं शाबाशी वाला काम |
इस बेचारे किसान की हालात पर पंजाबी गायक बब्बू मान ने एक मर्म को छूने वाला गीत गाया हैं जो एक जाट किसान की वास्तविकता को दर्शाता हैं | " जट्ट दी जूण बुरी "
http://www.youtube.com/watch?v=U1ZW5LU8--w&feature=related
 
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u r very much right brother ! society is framed like this, but don't hate baniyas for this but try to be a "baniya" if ur nature allows that.
u must be thinking that this is not the practical answer but this is brother.:)

bhai i am not out of field , i knew every thing but if kisan left his work then wat he wii do?
fer jamidara kon karega ?
....................................wo baniya wali bat hai kiyadi jat na hote to jamidara mansa ne karna padta......................... samjha ........


:rockkisan marne marja ga par u koni chute kyonki u kute wala hadd hai, khana hi padega. masoode phoonte jange choose jaga.........:rock
 
Bhai sangwan sab i m not related kisan field,i am working really in this field.
aj mujhe jamidara karte huye 8 sal hoge. khoob din rat kheti ki par kade rupiye koni jude bas saman ,sauda judata hai,bas yahi badai hai ki ...wo kahte hai na :...jitna tu lera hai na uste doona te mere pas loha pada hai ke bakwad kare hai bas ya hi kamai hai kisan ke pas .
......................bala suki marod aur kuch nahi .......................


ek bar ek baniya bola jat ne ,kitna bajra hua ,jat bola 100 man ,,aur kal mandi me aoonga,
jat agle din mandi me 20 hak man bajra lekar gaya to baniya bola are tu to 100 man kahwe tha ,ek doosara baniya dekh ke bola bhai u 100 hi man la le yadi bajra 20 man hai to 80 man ki to jat ki tarad bole hai bakia tu samajh le
?
 
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Ajit singh ur signature is very offensive ' PRACTISE MAKES A MAN PERFECT '


Jatland girls teach him a lesson. 'PRACTISE MAKES A WOMAN PERFECT TOO'
 
Ajit singh ur signature is very offensive ' PRACTISE MAKES A MAN PERFECT '


Jatland girls teach him a lesson. 'PRACTISE MAKES A WOMAN PERFECT TOO'

:rockbhai jab govt. ne baraber ka darja de diya phir man aur woman likhane me kya farak hai, bas ye to ab dil ka beham rahgya .aur wese women to badh hai men se aj ke jamane me , :rock

inke bare me likhana to unko thes pahoochana hai ,ye to autimatically perfect hoti hai
 


Ajit singh ur signature is very offensive ' PRACTISE MAKES A MAN PERFECT '


Jatland girls teach him a lesson. 'PRACTISE MAKES A WOMAN PERFECT TOO'

HAhahaha .... :D:D:D:D

Practising together makes both of them perfect.
bhaiyo maine maadi si ya angreji ghaat aawe s , aap dono n ye kuchh kisaan ke bare me likhya s ak koi latifa sunaya s , bera lage to m bhi haas lyu .... ....
ek bhai n ye danta aale jindawar se chhape s iste to maine nyu a lage s ak kimme haasi ki baat batai s koi .... haas lyu k bhaiyo tahri is baat pe ?
 

arrrreee hanns manya diye bhul kai bhi. Sid chikkara teri issi tissi kar dewaga :D:D ibb manne ye dand la diye is baat pai hans liye ar man karre tai ro liye

mre yaar ya umar ya puchan ki sai ak hanse ak rowe. kimme samjdari tai kaam le


bhaiyo maine maadi si ya angreji ghaat aawe s , aap dono n ye kuchh kisaan ke bare me likhya s ak koi latifa sunaya s , bera lage to m bhi haas lyu .... ....
ek bhai n ye danta aale jindawar se chhape s iste to maine nyu a lage s ak kimme haasi ki baat batai s koi .... haas lyu k bhaiyo tahri is baat pe ?
 
bhaiyo maine maadi si ya angreji ghaat aawe s , aap dono n ye kuchh kisaan ke bare me likhya s ak koi latifa sunaya s , bera lage to m bhi haas lyu .... ....
ek bhai n ye danta aale jindawar se chhape s iste to maine nyu a lage s ak kimme haasi ki baat batai s koi .... haas lyu k bhaiyo tahri is baat pe ?


:) bhai sab kit inse pooche hai .......wo kahte hai na ........
.....bhaid ne ke bera binola ke bhaw ka.............chore matwale kamm aur deewane jyada lage hai isliye girls ka abbal khyal rakhe hai:rock
:eek:in ko ye koni bera nai 2 jawani aur likadti kanch rooka nahi karadi:eek:
......................iska ilaj sirf khonsda ho se..........................................
 
:) bhai sab kit inse pooche hai .......wo kahte hai na ........
.....bhaid ne ke bera binola ke bhaw ka.............chore matwale kamm aur deewane jyada lage hai isliye girls ka abbal khyal rakhe hai:rock
:eek:in ko ye koni bera nai 2 jawani aur likadti kanch rooka nahi karadi:eek:
......................iska ilaj sirf khonsda ho se..........................................
hahhahaha bhaji koi n chhorya n jee se len dyo ..
 
Mirza galib khosde india mai ae khawega ak pakistan mai..is shayri nai band kar ib


:) bhai sab kit inse pooche hai .......wo kahte hai na ........
.....bhaid ne ke bera binola ke bhaw ka.............chore matwale kamm aur deewane jyada lage hai isliye girls ka abbal khyal rakhe hai:rock
:eek:in ko ye koni bera nai 2 jawani aur likadti kanch rooka nahi karadi:eek:
......................iska ilaj sirf khonsda ho se..........................................
 
Raka Sirji,

Superb post as usual.........

Jatt Di Joon is one of my fav songs by babbu mann.

really appreciate your views.

regards



भाई किसान का तो राम रुखाला हो स | हमारे ज्यादातर नेता ,अधिकारी इसी किसान बिरादरी से हैं पर पता नहीं यह लोग अपने किसान भाइयो का दर्द कैसे भूल जाते हैं | हमारा कोई जाट नेता हो लोग उसके आगे किसान नेता लिखते हैं , जबकि उन् सभी नेताओ ने तो किसानी छोडे मुद्दत हो ली | असल में किसान नेता वो हैं जो विपक्ष में होने पर अपनी किसानी का काम करता हो , वो ही सच्चा किसान हैं , वो ही किसान का दर्द तकलीफ समझ सकता हैं | | जब आपने अपना कर्म ही छोड़ दिया तो फेर अपने को किसान क्यों कहलाते हो | हम सब यहाँ जाट बिरादरी से हैं और आपने को किसान कहते हैं जबकि मेरे ख्याल से यहाँ कोई भी अभी किसानी नहीं करता होगा , सिर्फ ज़मीन नाम होने से किसान नहीं होता | मैंने ९७ में पढाई छोड़ी थी , मेरे गाँव का एक लड़का आया बोल्या भाईसाब एक यूरिया कम्पनी ( उज्ज्वला यूरिया ) भिवानी में अपना डीलर बनावे स आप या एजेन्सी ले ल्यो आपकी अप्र्रोअच भी स | मैंने भी सोची अक ८०% लोग खेती करे स तो बिक्री तो अच्छी ही होगी मुनाफे का काम स यह बनिए भी मोटे दाम कमावे स किसान की फसल से | मैंने व एजेन्सी ले ली अपना जुगाड़ लगा के | इब मैं कदे गाम में रह्या कोणी था तो मैंने के बेरा हो था अक कुणसी फसल कद बोई जा स , उसमे DAP कद पड़े स UREA कद पड़े स | म जब फसल की कटाई का टेम आता तो यूरिया मंगाता , और फेर रही सही बात किसान न उधार दयों | मैंने न्यू ना बेरा था अक इसकी उधार न आया करे , ये बनिए तो अपनी आढ़त में पुरे कर ले स पैसे | उधार मांगन जाओ तो राम कान्या हाथ करके कह देंगे अक भाई यो बरसेगा जिबे तो दयांगे | घर के रोला करण लागे अक गाम में उधार पूरी ना करता , एक घर चला गया प्रेम नाम था उसका उसके दो कमरे एक में वे खुद रह और दुसरे में न्यार तुडा घेर राख्या , म देख के उल्टा हो लिया , वो बोल्या साब आला क्यूकर आया था बेरा उसने भी था , मखा काका न्यू अ मिलन आ गया था | उस दिन मैंने सही मायेने में किसान की हालात का बेरा पाट्या | असल में किसान का दर्द उसने ए बेरा हो स जो यो काम करता हो | नाम के आगे किसान लिखे त ना बेरा लागे | AC में बैठ के जेठ की दोह्पैरी का के बेरा लागे भाई |
सरकार किसानो के कर्जे मांफ करके वाह वाही लुट रही जबकि यह कोई समाधान नहीं हैं किसान की हालात का , असल में यह पता लगाना चाहिए की जो आदमी सोसाइटी से मात्र 10000 रूपये लोन लेता हैं और उस बेचारे किसान से वो भी नहीं भरा जाता इसके क्या करण हैं ? यह तो हैं नहीं के मांफ होने के बाद उसे दुबारा पैसे की जरुरत नहीं पड़ेगी | वो बिचारा किसान फेर कर्जा लेगा फेर वही सोसाइटी आले वही पुलिस |
एक लाला की दूकान गोदाम में कुछ उजाड़ हो जाओ उसे बिमा कम्पनी भुगतान करदेती हैं और इस बिचारे भोले किसान का कोण भुगतान करे ? इसकी तो सारी कमाई पुरे बाराह मॉस खुले आसमान के नीचे बिना ताले में रहती हैं | आढ़ती बोली लायेगा तो इसका माल बिकेगा , राम बरस गया तो मण्डी में पड़े माल की हानि का कोई जवाब दार नहीं , कोई बिमा नहीं | बिचारे किसान को अपनी फसल के उजाड़ की भुगतान के लिए रास्ते रोकने पड़ते हैं दरखत काटने पड़ते हैं DC को ज्ञापन देना पड़ता हैं , जब जा के आश्वासन मिलता हैं के गाम में पटवारी , गिरदावर आयेंगे फसल के नुक्सान का मुआयना करण | एक व्यापारी को आपने प्रोडक्ट के दाम तय करने का हक हैं किसान को नहीं | एक किसान के आलू की फसल से चिप्स बना कर एक व्यापारी लाखो कमाता हैं और किसान को बिचारे को पूरी दिहाडी भी नहीं मिलती |
देश का प्रधामंत्री एक लाला बिरादरी से संबध रखता हैं ना के किसान बिरादरी से | देश का माना हुआ अर्थ्शःस्त्री भी हैं , लोग गुणगान करते हैं के बहुत अच्छा अर्थशाष्त्री हैं | यह प्रचार व्यापारी कौम करती हैं क्योकि वो पहले इनकी सोचेगा बाद में किसान की और भोला किसान इन लालो की हाँ में हाँ मिलाता हैं | राहुल गाँधी कहता हैं के हम रुपया भेजते हैं तो वो 10 पैसे रह जाता हैं , जबकि इनके पिता जी कहते थे की 17 पैसे पहुचते हैं | कोई इनसे पूछे की आपकी तो सरकार भी रह ली आपने पता क्यों नहीं करवाया की इन बेचारे किसान के हक का 90 पैसे कोण खा जाता हैं | जबकि लोग इन्हें शाबाशी देते हैं की ईमानदार हैं | यह तो सबको पता हैं की पैसा खाया जाता हैं पर खाने वाला कोण हैं ? इसका पता लगाओ तो हैं शाबाशी वाला काम |
इस बेचारे किसान की हालात पर पंजाबी गायक बब्बू मान ने एक मर्म को छूने वाला गीत गाया हैं जो एक जाट किसान की वास्तविकता को दर्शाता हैं | " जट्ट दी जूण बुरी "
http://www.youtube.com/watch?v=U1ZW5LU8--w&feature=related
 
भाई किसान का तो राम रुखाला हो स | हमारे ज्यादातर नेता ,अधिकारी इसी किसान बिरादरी से हैं पर पता नहीं यह लोग अपने किसान भाइयो का दर्द कैसे भूल जाते हैं | हमारा कोई जाट नेता हो लोग उसके आगे किसान नेता लिखते हैं , जबकि उन् सभी नेताओ ने तो किसानी छोडे मुद्दत हो ली | असल में किसान नेता वो हैं जो विपक्ष में होने पर अपनी किसानी का काम करता हो , वो ही सच्चा किसान हैं , वो ही किसान का दर्द तकलीफ समझ सकता हैं | | जब आपने अपना कर्म ही छोड़ दिया तो फेर अपने को किसान क्यों कहलाते हो | हम सब यहाँ जाट बिरादरी से हैं और आपने को किसान कहते हैं जबकि मेरे ख्याल से यहाँ कोई भी अभी किसानी नहीं करता होगा , सिर्फ ज़मीन नाम होने से किसान नहीं होता | मैंने ९७ में पढाई छोड़ी थी , मेरे गाँव का एक लड़का आया बोल्या भाईसाब एक यूरिया कम्पनी ( उज्ज्वला यूरिया ) भिवानी में अपना डीलर बनावे स आप या एजेन्सी ले ल्यो आपकी अप्र्रोअच भी स | मैंने भी सोची अक ८०% लोग खेती करे स तो बिक्री तो अच्छी ही होगी मुनाफे का काम स यह बनिए भी मोटे दाम कमावे स किसान की फसल से | मैंने व एजेन्सी ले ली अपना जुगाड़ लगा के | इब मैं कदे गाम में रह्या कोणी था तो मैंने के बेरा हो था अक कुणसी फसल कद बोई जा स , उसमे DAP कद पड़े स UREA कद पड़े स | म जब फसल की कटाई का टेम आता तो यूरिया मंगाता , और फेर रही सही बात किसान न उधार दयों | मैंने न्यू ना बेरा था अक इसकी उधार न आया करे , ये बनिए तो अपनी आढ़त में पुरे कर ले स पैसे | उधार मांगन जाओ तो राम कान्या हाथ करके कह देंगे अक भाई यो बरसेगा जिबे तो दयांगे | घर के रोला करण लागे अक गाम में उधार पूरी ना करता , एक घर चला गया प्रेम नाम था उसका उसके दो कमरे एक में वे खुद रह और दुसरे में न्यार तुडा घेर राख्या , म देख के उल्टा हो लिया , वो बोल्या साब आला क्यूकर आया था बेरा उसने भी था , मखा काका न्यू अ मिलन आ गया था | उस दिन मैंने सही मायेने में किसान की हालात का बेरा पाट्या | असल में किसान का दर्द उसने ए बेरा हो स जो यो काम करता हो | नाम के आगे किसान लिखे त ना बेरा लागे | AC में बैठ के जेठ की दोह्पैरी का के बेरा लागे भाई |
सरकार किसानो के कर्जे मांफ करके वाह वाही लुट रही जबकि यह कोई समाधान नहीं हैं किसान की हालात का , असल में यह पता लगाना चाहिए की जो आदमी सोसाइटी से मात्र 10000 रूपये लोन लेता हैं और उस बेचारे किसान से वो भी नहीं भरा जाता इसके क्या करण हैं ? यह तो हैं नहीं के मांफ होने के बाद उसे दुबारा पैसे की जरुरत नहीं पड़ेगी | वो बिचारा किसान फेर कर्जा लेगा फेर वही सोसाइटी आले वही पुलिस |
एक लाला की दूकान गोदाम में कुछ उजाड़ हो जाओ उसे बिमा कम्पनी भुगतान करदेती हैं और इस बिचारे भोले किसान का कोण भुगतान करे ? इसकी तो सारी कमाई पुरे बाराह मॉस खुले आसमान के नीचे बिना ताले में रहती हैं | आढ़ती बोली लायेगा तो इसका माल बिकेगा , राम बरस गया तो मण्डी में पड़े माल की हानि का कोई जवाब दार नहीं , कोई बिमा नहीं | बिचारे किसान को अपनी फसल के उजाड़ की भुगतान के लिए रास्ते रोकने पड़ते हैं दरखत काटने पड़ते हैं DC को ज्ञापन देना पड़ता हैं , जब जा के आश्वासन मिलता हैं के गाम में पटवारी , गिरदावर आयेंगे फसल के नुक्सान का मुआयना करण | एक व्यापारी को आपने प्रोडक्ट के दाम तय करने का हक हैं किसान को नहीं | एक किसान के आलू की फसल से चिप्स बना कर एक व्यापारी लाखो कमाता हैं और किसान को बिचारे को पूरी दिहाडी भी नहीं मिलती |
देश का प्रधामंत्री एक लाला बिरादरी से संबध रखता हैं ना के किसान बिरादरी से | देश का माना हुआ अर्थ्शःस्त्री भी हैं , लोग गुणगान करते हैं के बहुत अच्छा अर्थशाष्त्री हैं | यह प्रचार व्यापारी कौम करती हैं क्योकि वो पहले इनकी सोचेगा बाद में किसान की और भोला किसान इन लालो की हाँ में हाँ मिलाता हैं | राहुल गाँधी कहता हैं के हम रुपया भेजते हैं तो वो 10 पैसे रह जाता हैं , जबकि इनके पिता जी कहते थे की 17 पैसे पहुचते हैं | कोई इनसे पूछे की आपकी तो सरकार भी रह ली आपने पता क्यों नहीं करवाया की इन बेचारे किसान के हक का 90 पैसे कोण खा जाता हैं | जबकि लोग इन्हें शाबाशी देते हैं की ईमानदार हैं | यह तो सबको पता हैं की पैसा खाया जाता हैं पर खाने वाला कोण हैं ? इसका पता लगाओ तो हैं शाबाशी वाला काम |
इस बेचारे किसान की हालात पर पंजाबी गायक बब्बू मान ने एक मर्म को छूने वाला गीत गाया हैं जो एक जाट किसान की वास्तविकता को दर्शाता हैं | " जट्ट दी जूण बुरी "
http://www.youtube.com/watch?v=U1ZW5LU8--w&feature=related
पहला तो मेरी एक गुजारिश है सभी दोस्तों से की हम में से कुछ किसान परिवार से संबंध रखते हैं कुछ नहीं पर हमारा पुस्तैनी काम खेती करना ही था ! तो ऐसी बात जिसपे हमे सोच के अपने जाट (किसान) समाज के भले का कुछ सोचना चाहिए उसपे एक दुसरे पर व्यंग्य कसने की बजाये एकजुट होके कोई हल निकलना चाहिए !
राकेश सांगवान जी ने सही बात कही है जो आदमी किसानो के बीच नहीं जाता जो उनकी पीडा नहीं समझता जो ऐ सी में बैठ कर हमारे किसानो के भविष्य का फैंसला करते हैं वो हमारा क्या भला करेंगे ? पर हम आज उसी समाज का हिस्सा हैं और उस समाज उस परिवार ने हमे पढ़ा लिखा के आज एक अच्छे मुकाम पे पहुँचाया है और हम मिलकर उस किसान के लिए कुछ कर सकते हैं ! हम अगर एक दुसरे पर व्यंग्य कसने और एक दुसरे को निचा दिखने की कोशिस को छोड़ कर एकजुट होकर उनका भला करना चाहे तो क्या नहीं कर सकते ? फिर हम क्यों नहीं करते मैं आपसे ये नहीं कह रहा की आप उन्हें अपने कमाए डोलर दें ! आज सबसे ज्यादा किसान को नुक्सान पहुँचने वाला "बिचोलिया" है क्या हम उस बिचोलिये को किसी तरह ख़तम नहीं कर सकते ?
अगर किसान की पैदा की गयी फसल सीधी ग्राहक को मिले तो किसान को ज्यादा दाम और ग्राहक को सस्ता सामान (फल, अनाज और सब्जिया ) मिलेगा ! मैं कई बार ऐसा सोचता हूँ पर बिचोलिये ख़तम करने के लिए किसान को मंडियां चाहिए और सामान रखने के लिए गोदाम चाहिए ! हम जयादातर किसी जमीन के मालिक हैं और वो जमीन हमने किसी को ठेके या साझे पर बोने के लिए दी हुई है !क्या हम उस जमीन पे कोल्ड स्टोर या गोदाम नहीं बनवा सकते? जिनकी जमीन हाईवे के नजदीक है वो लोग उस मंडी का रूप दे सकते हैं ! आज हमारे contact हैं और उन contacts को हम इस्तेमाल करके ग्राहक को किसान तक नहीं पहुंचा सकते ? मैंने एक थ्रेड शुरू किया था इस टाइप का शायद वो इसमें कुछ मदद करे ! अमेरिका और europe के कुछ देश भारत में पैदा हो रहे खाद्यान खरीदना चाहते हैं ! सारी दुनिया के आगे सबसे बड़ी समस्या खाने को लेकर है और हम ४०-५० प्रतिशत खाना मंडी में पहुँचने से पहले ख़राब कर देते हैं ! क्योंकि उसका मालिक बिचोलिया बन जाता है और बिचोलिया सिर्फ फायदे का मालिक है नुकसान किसान को ही भुगतना पड़ता है ! अमेरिका उस खाने को बचने के लिए पैसा देता है जिसे ऊपर ही ऊपर बिचोलिये डकार जाते हैं ! दोस्तों हमे मिलके इसके लिए कुछ करना चाहिए !कब तक हम नेताओ को गली देकर अपने फर्ज से पीछा छुडाते रहेंगे ?
http://www.jatland.com/forums/showthread.php?t=27257
आर माधवन जैसे इंसान जो की आई आई टी passout होकर खेती कर सकते हैं तो हम क्या ये छोटा सा काम नहीं कर सकते जिसमे हम अकेले नहीं ?
 
भाई किसान का तो राम रुखाला हो स | हमारे ज्यादातर नेता ,अधिकारी इसी किसान बिरादरी से हैं पर पता नहीं यह लोग अपने किसान भाइयो का दर्द कैसे भूल जाते हैं | हमारा कोई जाट नेता हो लोग उसके आगे किसान नेता लिखते हैं , जबकि उन् सभी नेताओ ने तो किसानी छोडे मुद्दत हो ली | असल में किसान नेता वो हैं जो विपक्ष में होने पर अपनी किसानी का काम करता हो , वो ही सच्चा किसान हैं , वो ही किसान का दर्द तकलीफ समझ सकता हैं | | जब आपने अपना कर्म ही छोड़ दिया तो फेर अपने को किसान क्यों कहलाते हो | हम सब यहाँ जाट बिरादरी से हैं और आपने को किसान कहते हैं जबकि मेरे ख्याल से यहाँ कोई भी अभी किसानी नहीं करता होगा , सिर्फ ज़मीन नाम होने से किसान नहीं होता | मैंने ९७ में पढाई छोड़ी थी , मेरे गाँव का एक लड़का आया बोल्या भाईसाब एक यूरिया कम्पनी ( उज्ज्वला यूरिया ) भिवानी में अपना डीलर बनावे स आप या एजेन्सी ले ल्यो आपकी अप्र्रोअच भी स | मैंने भी सोची अक ८०% लोग खेती करे स तो बिक्री तो अच्छी ही होगी मुनाफे का काम स यह बनिए भी मोटे दाम कमावे स किसान की फसल से | मैंने व एजेन्सी ले ली अपना जुगाड़ लगा के | इब मैं कदे गाम में रह्या कोणी था तो मैंने के बेरा हो था अक कुणसी फसल कद बोई जा स , उसमे dap कद पड़े स urea कद पड़े स | म जब फसल की कटाई का टेम आता तो यूरिया मंगाता , और फेर रही सही बात किसान न उधार दयों | मैंने न्यू ना बेरा था अक इसकी उधार न आया करे , ये बनिए तो अपनी आढ़त में पुरे कर ले स पैसे | उधार मांगन जाओ तो राम कान्या हाथ करके कह देंगे अक भाई यो बरसेगा जिबे तो दयांगे | घर के रोला करण लागे अक गाम में उधार पूरी ना करता , एक घर चला गया प्रेम नाम था उसका उसके दो कमरे एक में वे खुद रह और दुसरे में न्यार तुडा घेर राख्या , म देख के उल्टा हो लिया , वो बोल्या साब आला क्यूकर आया था बेरा उसने भी था , मखा काका न्यू अ मिलन आ गया था | उस दिन मैंने सही मायेने में किसान की हालात का बेरा पाट्या | असल में किसान का दर्द उसने ए बेरा हो स जो यो काम करता हो | नाम के आगे किसान लिखे त ना बेरा लागे | ac में बैठ के जेठ की दोह्पैरी का के बेरा लागे भाई |
सरकार किसानो के कर्जे मांफ करके वाह वाही लुट रही जबकि यह कोई समाधान नहीं हैं किसान की हालात का , असल में यह पता लगाना चाहिए की जो आदमी सोसाइटी से मात्र 10000 रूपये लोन लेता हैं और उस बेचारे किसान से वो भी नहीं भरा जाता इसके क्या करण हैं ? यह तो हैं नहीं के मांफ होने के बाद उसे दुबारा पैसे की जरुरत नहीं पड़ेगी | वो बिचारा किसान फेर कर्जा लेगा फेर वही सोसाइटी आले वही पुलिस |
एक लाला की दूकान गोदाम में कुछ उजाड़ हो जाओ उसे बिमा कम्पनी भुगतान करदेती हैं और इस बिचारे भोले किसान का कोण भुगतान करे ? इसकी तो सारी कमाई पुरे बाराह मॉस खुले आसमान के नीचे बिना ताले में रहती हैं | आढ़ती बोली लायेगा तो इसका माल बिकेगा , राम बरस गया तो मण्डी में पड़े माल की हानि का कोई जवाब दार नहीं , कोई बिमा नहीं | बिचारे किसान को अपनी फसल के उजाड़ की भुगतान के लिए रास्ते रोकने पड़ते हैं दरखत काटने पड़ते हैं dc को ज्ञापन देना पड़ता हैं , जब जा के आश्वासन मिलता हैं के गाम में पटवारी , गिरदावर आयेंगे फसल के नुक्सान का मुआयना करण | एक व्यापारी को आपने प्रोडक्ट के दाम तय करने का हक हैं किसान को नहीं | एक किसान के आलू की फसल से चिप्स बना कर एक व्यापारी लाखो कमाता हैं और किसान को बिचारे को पूरी दिहाडी भी नहीं मिलती |
देश का प्रधामंत्री एक लाला बिरादरी से संबध रखता हैं ना के किसान बिरादरी से | देश का माना हुआ अर्थ्शःस्त्री भी हैं , लोग गुणगान करते हैं के बहुत अच्छा अर्थशाष्त्री हैं | यह प्रचार व्यापारी कौम करती हैं क्योकि वो पहले इनकी सोचेगा बाद में किसान की और भोला किसान इन लालो की हाँ में हाँ मिलाता हैं | राहुल गाँधी कहता हैं के हम रुपया भेजते हैं तो वो 10 पैसे रह जाता हैं , जबकि इनके
इस बेचारे किसान की हालात पर पंजाबी गायक बब्बू मान ने एक मर्म को छूने वाला गीत गाया हैं जो एक जाट किसान की वास्तविकता को दर्शाता हैं | " जट्ट दी जूण बुरी "
http://www.youtube.com/watch?v=u1zw5lu8--w&feature=related


बहुत सुंदर और सच लिखा है आपने राकेश भाई !
न्याय युद्घ (१९८७)के समय की बात है , ताऊ देवीलाल का काफिला हिसार से चल के हांसी होता हुआ मूंडाल के पास पहुँचने वाला था !
हजारों आदमी साथ थे ! ताऊ ने देख्या, एक हाली हल चला रह था और उसकी पत्नी जवारा ले के आगई!
ताऊ ने पूछ्या, खाने के लिए क्या ले कर आई है ! किसान की पत्नी ने कहा , ताऊ जी सीत राबडी और रोटी है , खाओगे क्या ?
ताऊ ने थोडा सीत राबडी पिया और डोले पे खडा होके दोनों हाथ ऊपर ने उठा के आसमान की तरफ देख के नु बोल्या, " इस बावले(किसान ) का कोए नहीं स,इसका ध्यान राखिये"!
तो भाई , इस बावले का न कोए !न कोई सरकार , न कोई लीडर !
आर कदे २ रते यो ऊपर आला भी धोखा दे दे से!
 
वह बोता हैं और रोता यह किसान की गाथा हैं |
गद्दी पर बैठी सरकार व बिचोलिया आज उसका विधाता हैं ||
 
पहला तो मेरी एक गुजारिश है सभी दोस्तों से की हम में से कुछ किसान परिवार से संबंध रखते हैं कुछ नहीं पर हमारा पुस्तैनी काम खेती करना ही था ! तो ऐसी बात जिसपे हमे सोच के अपने जाट (किसान) समाज के भले का कुछ सोचना चाहिए उसपे एक दुसरे पर व्यंग्य कसने की बजाये एकजुट होके कोई हल निकलना चाहिए !
राकेश सांगवान जी ने सही बात कही है जो आदमी किसानो के बीच नहीं जाता जो उनकी पीडा नहीं समझता जो ऐ सी में बैठ कर हमारे किसानो के भविष्य का फैंसला करते हैं वो हमारा क्या भला करेंगे ? पर हम आज उसी समाज का हिस्सा हैं और उस समाज उस परिवार ने हमे पढ़ा लिखा के आज एक अच्छे मुकाम पे पहुँचाया है और हम मिलकर उस किसान के लिए कुछ कर सकते हैं ! हम अगर एक दुसरे पर व्यंग्य कसने और एक दुसरे को निचा दिखने की कोशिस को छोड़ कर एकजुट होकर उनका भला करना चाहे तो क्या नहीं कर सकते ? फिर हम क्यों नहीं करते मैं आपसे ये नहीं कह रहा की आप उन्हें अपने कमाए डोलर दें ! आज सबसे ज्यादा किसान को नुक्सान पहुँचने वाला "बिचोलिया" है क्या हम उस बिचोलिये को किसी तरह ख़तम नहीं कर सकते ?
अगर किसान की पैदा की गयी फसल सीधी ग्राहक को मिले तो किसान को ज्यादा दाम और ग्राहक को सस्ता सामान (फल, अनाज और सब्जिया ) मिलेगा ! मैं कई बार ऐसा सोचता हूँ पर बिचोलिये ख़तम करने के लिए किसान को मंडियां चाहिए और सामान रखने के लिए गोदाम चाहिए ! हम जयादातर किसी जमीन के मालिक हैं और वो जमीन हमने किसी को ठेके या साझे पर बोने के लिए दी हुई है !क्या हम उस जमीन पे कोल्ड स्टोर या गोदाम नहीं बनवा सकते? जिनकी जमीन हाईवे के नजदीक है वो लोग उस मंडी का रूप दे सकते हैं ! आज हमारे contact हैं और उन contacts को हम इस्तेमाल करके ग्राहक को किसान तक नहीं पहुंचा सकते ? मैंने एक थ्रेड शुरू किया था इस टाइप का शायद वो इसमें कुछ मदद करे ! अमेरिका और europe के कुछ देश भारत में पैदा हो रहे खाद्यान खरीदना चाहते हैं ! सारी दुनिया के आगे सबसे बड़ी समस्या खाने को लेकर है और हम ४०-५० प्रतिशत खाना मंडी में पहुँचने से पहले ख़राब कर देते हैं ! क्योंकि उसका मालिक बिचोलिया बन जाता है और बिचोलिया सिर्फ फायदे का मालिक है नुकसान किसान को ही भुगतना पड़ता है ! अमेरिका उस खाने को बचने के लिए पैसा देता है जिसे ऊपर ही ऊपर बिचोलिये डकार जाते हैं ! दोस्तों हमे मिलके इसके लिए कुछ करना चाहिए !कब तक हम नेताओ को गली देकर अपने फर्ज से पीछा छुडाते रहेंगे ?
http://www.jatland.com/forums/showthread.php?t=27257
आर माधवन जैसे इंसान जो की आई आई टी passout होकर खेती कर सकते हैं तो हम क्या ये छोटा सा काम नहीं कर सकते जिसमे हम अकेले नहीं ?



:D..........Bhai kama kar kheti karna asan hai par kheti karke kamana muskil hota hai.........:rock

isliye apna to uddhar to tabhi ho sakta hai jab 2-3 sal ka stok karke sab kisan kheti na karne ki kasam kha le aur ho jaye sab ki tarah selfish ........................kya ho sakta hai aisa ?
..........mere hisab se nahi kyonki koi head nahi hai sab mauka parast mukhiya hai ...........agar koi tha to wo ch chotu ram tha .....wo ab ane wala nahi
:rock:confused::confused:
 
Ravi Bhai,

very well put up lines ....

very impressive ...even your signature also......

Es desh mein yaadi kisi ki izzat karne ka maan karta hain , toh woh hain Jawan aur Kisan.

Long Live The Indomitable INDIA!!!

regards


वह बोता हैं और रोता यह किसान की गाथा हैं |
गद्दी पर बैठी सरकार व बिचोलिया आज उसका विधाता हैं ||
 
iss chhorey ki kathni me to kimme dum s..... aage karni me dekho..........................
प्राइवेट मनीलैंडर्स के शिकंजे से किसानों को मुक्त कराएं
जागरण ब्यूरो, चंडीगढ़ : किसानों के मामलों की जोरदार वकालत करते हुए रोहतक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस सांसद दीपेन्द्र सिंह हुड्डा ने किसानों के लिए ऋणों पर ब्याज दर मौजूदा सात प्रतिशत से घटाकर चार प्रतिशत तक करने, समय पर ऋण चुकाने वाले किसानों को ब्याज राहत के साथ पुरस्कृत करने और इस समुदाय को निजी उधारदाताओं (प्राइवेट मनीलैंडर्स) के शिकंजे से मुक्त करके उनके ऋणों को सहकारी बैंक ऋणों में बदले जाने की मांग की है। लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस में उन्होंने यूपीए सरकार पर किसानों की समस्याओं का हल निकालने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया। उन्होंने किसानों के लिए ऋणों पर ब्याज दरों में वर्तमान सात प्रतिशत से चार प्रतिशत तक कटौती करने (जोकि कांग्रेस के घोषणापत्र में वायदा है) और ऋण श्रृंखला को सरल करने के लिए बिचौलियों की भूमिका को कम करने, अनावश्यक शर्तें और गारंटी की जरूरतों को हटाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हमारे लिए वह समय आ गया है जब देश में भूमि नीलामी कानून पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करना चाहिए। साथ ही, किसान की कुल खेती योग्य भूमि गिरवी रखने की जगह आनुषंगिक मूर्त जमानत ली जा सकती है। किसानों को सबसिडी का प्रत्यक्ष नकद अंतरण पर भी विचार किया जाये और सबसिडी फसल एवं भूमि जोत के आकार पर प्राइवेट मनीलैंडर्स के.. आधारित हो। वर्ष 2008-09 में हमारी अनुमानित 96,000 करोड़ रुपये की उर्वरक सबसिडी है और इस स्थिति को तत्काल ठीक करने की आवश्यकता है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारण के मसले पर दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि विभिन्न फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्यों में ऐतिहासिक वृद्धि ने हमें जनादेश हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसे विशेष रूप से स्वामीनाथन आयोग और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषि सिफारिशों की स्थायी समिति द्वारा किया जाना चाहिए और सी2+50 प्रतिशत न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने में प्रयोग किया जाना चाहिए। सीएसीपी लागत गणना को क्षेत्रीय भिन्नताओं (सिंचाई लागत, श्रम और भूमि) को पूरा करने के लिए परिवर्तित किया जाना चाहिए और इसमें मार्केटिंग और परिवहन की लागत को भी जोड़ना चाहिए। हुड्डा ने यह भी मांग की कि निर्यात नीति को किसानों को ध्यान में रखकर बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं आईसीएआर, कृषि विश्वविद्यालयों को दूसरे हरित क्रांति कायम करने के उद्देश्य से जलवायु बदलाव जैसे मुद्दों से निपटने के लिए अधिक अनुदान देने के पक्ष में हूं। युवा सांसद ने अंतर-राज्यीय पानी से संबंधित मामलों को तीव्रता से सुलझाने पर बल दिया। हमें यमुना नदी के ऊपर बनने वाले बांधों के निर्माण में तेजी लाने की जरूरत है, इनमें रेणुका, लखवार व्यासी और किसाऊ बांध शामिल हैं।
 
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