आप मेरी परिभाषा को समझे नहीं अरविन्द जी ,मेने केवल तीन घटक बताये हैं ,सही और गलत के लिए | यहाँ पर समाज एक घटक हे ,व्यक्ति या परिवार नहीं |इस लिए समाज जो सही या गलत कहे जिस से व्यक्ति या परिवार जुड़ा हे | सही या गलत हे |इसीलिए व्यक्तिगत स्वतंत्रता जब उस समाज के स्थापित नियमों का उल्लंघन करती हे तो उछस्र्न्खाल्ता कहलाती हे और समाज उसका विरोध करता हे |
इसका एक ही तोड़ हे उस व्यक्ति के लिए ,जो समाज के साथ नहीं चलना चाहता ,उस्से कोई दो घटक छोड़ने होंगे अपनी मर्जी करने के लिए | एक तो वो उस समाज को छोड़ दे ,जिस से वो सम्बंधित हे ,और दुसरा वो स्थान छोड़ दे | समय को छोड़ना किसी के बस की बात नहीं हे |और वहां जाए जहां पर या तो उस के विचारों से मिलता जुलता समाज और स्थान हे या फिर कोई भी समाज ना हो एसा स्थान हो |
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी हे ,और अगर उस्से समाज के साथ रहना हे, तो जिस समाज में भी वो रहता हो, उस समाज के नियमों का पालन करना होगा ,नहीं तो जंगल में या निर्जन स्थान पर रहे, और जो चाहे करे, वहां कुछ भी गलत और सही नहीं हे |
सही और गलत मानसिक अवस्था हे जिसको व्यक्ति का समाज निर्धारित करता हे |