एक बे ताऊ सुरजा इंग्लैंड गया ते उड़े उसका अंग्रेज दोस्त बोल्या -हमारे यहाँ समय की बहुत पाबन्दी है, ताऊ ने पुच्छी वा किस तरिया ,बता तो सही.. अंग्रेज बोल्या -देख मै तो कमेंटरी बोलूँगा और इतनी देर में मेरा नोकर दही ले कर वापिस भी आ जाएगा.. अंग्रेज ने अपणे नोकर ते कहि -जुली जाओ ,दही लेकर आओ.. नोकर चाल पड्या तो अंग्रेज बोल्या -जुली अब सड़क पर जा रहा है ,वह दुकान के अंदर गया ,और उसने दही ले लिया है.. अब वह वापिस सड़क पर आ रहा है और अब वह आ गया है , इतने में नौकर ने कहि -लो साहब दही.. ताऊ बोल्या इस तरिया की पाबन्दी तो माहरे देश में भतेरी स..
कुछ दिन बाद वो उसका अंग्रेज दोस्त आया ते ताऊ ने झट आपणे नौकर नथू ते आवाज लगाई अर बोल्या -जा रे नथू ,जाके थोडा दही लिया ,फेर के था ,नथू के जाते ही ताऊ ने भी शुरु कर दी कमेंटरी -नथू चाल पड्या है ,पोडिया ते उतर लिया है ,अर इब वो कांध के तले तले की कीकर नीचे ते दुकान में बड लिया स ,उसने दही तुलवा लिया स अर उसी राह वापस आ लिया स ,अर एब वो दही ठाए कमरे में बड लिया स ,इतने में भीतर बड के नथू बोल्या ---
"रे ताऊ दही ल्याणा कितना स ??"