brahmtewatia
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Upender Singh Laakdaभाई अगर ध्यान से सोचें तो ये बातें कहने-सुनने में ही अच्छी नहीं लगती, बल्कि इस दुनिया की सच्चाई-सी भी लगती हैं. हालांकि सबकी अपनी-अपनी सोच होती है और होनी भी चाहिए, लेकिन भाई विजय मेरे को एक बात बताओ इस दुनिया में किसकी जिंदगी आसान है? माना कि गरीब आदमी की जिंदगी बहुत मुश्किल है, लेकिन अमीरों की जिंदगी भी कहाँ आसान है?
[1] माइकल जैक्सन का देखो क्या हाल होकर मरा है.
[2] पिछले दिनों नामी क्रिकेटर वसीम अकरम की बीवी को बड़े-बड़े डॉक्टर भी मिलकर नहीं बचा सके. अर भाई पुलिस वाले तो अमीरों के भी डंडा मार देते हैं.
[3] पिछले दिनों पुलिस वालों ने अमर सिंह का सिर फोड़ दिया था डंडा मारकर. और आम लोगों का मौका लगता है तो वे पुलिस वालों को पीट देते हैं. ये तो दुनिया है मेरे भाई.
[4] शाहरुख खान को शिव सेना वाले परेशान कर रहे हैं और बहुत ही कम लोगों को पता है कि...
[5] शाहरुख की एक बहन भी है, उसे पता नहीं क्या बीमारी है, वो बेचारी ठीक ही नहीं हो सकी कभी.
[6] सद्दाम हुसैन जो पूरे देश का मालिक था, अपनी जान बचाने के लिए छिपता घूमा और आखिर में फांसी पर लटका दिया गया.
[7] मुंबई में जितनी भी नामी पैसे वाली हस्तियाँ हैं, सब 2 पैसे के गुंडों के खौफ में जीती हैं. कहने का मतलब यह कि जिंदगी किसी की भी आसान नहीं है. बस समस्याएं अलग तरह की हैं. कोई भी समझदार आदमी होगा तो वो बिना किसी वजह के किसी की बेइज्जती नहीं करता.
[8] माना कि हमें तरक्की करनी चाहिए, लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाने के लिए भी प्रयास करने चाहिए,
[9] लेकिन अगर कोई गरीबी रेखा के नीचे नहीं रहेगा तो भी जिंदगी की चुनौतियां समाप्त नहीं होंगी, ये तय है.
[10] इस दुनिया में इस बात का बहुत महत्व है कि इंसान ने क्या किया, इस बात का कोई विशेष महत्व नहीं है कि वो अमीर था या गरीब.
[11] श्रीराम तो 14 साल तक घोर गरीबी में रहे.
[12] क्या होता है जंगल में रहना, समझते हो? (<<< good question)वहाँ बारिश भी आएगी, गर्मी भी पड़ेगी, सर्दी भी पड़ेगी. कहाँ नहाओगे, कहाँ कपड़े धोओगे?
[13] बहुत मुश्किल है जंगल में रहना, गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की जिंदगी से भी ज्यादा मुश्किल.
[14] गुरु नानक कहाँ अमीर था?
[15] बुद्ध तो बिलकुल गरीब होकर जंगल में चला गया था.
[16] महावीर ने भी कुछ ऐसा ही किया था.
[17] गांधी तो ठेठ कंगाली में रहा. मैं ये नहीं कह रहा कि हमें गरीबी दूर करने के प्रयास नहीं करने चाहिए, लेकिन पश्चिमी देशों और वर्ल्ड बैंक जैसी संस्थाओं को ऐसी बातें नमक-मिर्च लगाकर पेश नहीं करनी चाहिए. अगर वे ऐसा करेंगे तो फिर हम भी उनसे ये पूछेंगे कि उन्होंने अमीर और तथाकथित विकसित होकर क्या पहाड़ तोड़ दिए?
[18] हम गरीबी दूर करने के प्रयास कर रहे हैं. हमने अपने अस्तित्व को बचाने के लिए 947 साल तक संघर्ष किया है. हमें आज़ाद हुए सिर्फ 62 साल हुए हैं. सैकड़ों साल की क्षतिपूर्ति करने में समय तो लगेगा ही.
रै ओ बटेऊ... के चाहवे है तू ?
मका 'मार्टीन लूथर किंग' अर 'घटोतकच्च' नै भूल ग्या? किम्मे उन्हें भी बिठा लेता अपनी इस "बम्बई से गई पूना"... आली रेलगाडी मै.
मका थम जा, घणेऐ ऍन.आर.आई कूच कर लिए हैं इंडिया कैड... कदे इब कै तेरा ही लम्बर लाग ले... मेरे बटे की, घनीऐ चमक री है यो चाँद.
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