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"PM" का चक्कर
आजकल हिन्दी का स्तर (स्टैंडर्ड) काफी गिर गया है । बेशक नवभारत टाइम्स को देख लो कभी भी - यह अखबार कभी 'टॉप' पर होता था पर आजकल इसका बेड़ा गर्क हो गया है - आधे से ज्यादा शब्द अंग्रेजी के होते हैं, "नोएडा में मर्डर", "पी.एम. फॉरेन टूर से लौटे" - ऐसे ऐसे तो शीर्षक होते हैं । मैंने इसके सम्पादक को लिखा भी - कि आपके पेपर ने हिन्दी की ऐसी-तैसी कर रखी है - "मर्डर" की हिन्दी नहीं होती क्या (हत्या, कत्ल, खून आदि कितने ही नाम हैं)? उन साहब ने जवाब ही नहीं दिया । इस पेपर को देखकर जी करता है कि या तो इनका सिर फोड़ दूं या अपना फोड़ लूं ।
बेचारे प्रधानमंत्री को कोई अखबार वाला न तो 'प्रधानमंत्री' लिखता है और न ही 'प्राइम मिनिस्टर' - चाहे हिन्दी हो या अंग्रेजी - सब "PM" ही लिखते हैं । सारे मुख्यमंत्री 'सी.एम' हो गए हैं । टी.वी. चैनल वाले भी ऐसा ही बोलते हैं ।
दोपहर के बाद के समय को भी "PM" कहते हैं । शॉर्टकट का ऐसा रिवाज चल पड़ा है कि आगे शायद Post Mortem को भी "PM" कहने लगें ।
यहां बात हो रही है जाटलैंड के PM सिस्टम की - कोई इसे 'पर्सनल मैसेज' कहता है, कोई 'प्राइवेट मेसेज' । आजकल अपने प्रोफाइल में ही कुछ छोटे-छोटे बक्से बने हैं जिन पर दूसरे सदस्यों द्वारा कुछ-कुछ लिखा होता है - इसे भी शायद PM ही कहते हैं पर इसे सब पढ़ सकते हैं - यह किस किस्म का 'प्राइवेट मेसेज' हुआ भाई ? एक और चक्कर - जाटलैंड चौपाल में भी एक "PM system" है - पता नहीं कोई और नाम क्यों नहीं दे दिया जाता इसको - कमरा, कोठड़ी, खोखा वगैरा - जिसमें जाकर दो मेंम्बर आपस में बात कर सकते हैं, दूसरों से लुक-छिपकर ।
यह सिस्टम काफी लोकप्रिय है । वैसे तो याहू चैट, गूगल चैट वगैरा में भी यही पद्धति है, पर जाटलैंड पर इसके होने का खास महत्व है । बहुत सारे जाटलैंडर प्राइवेट कंपनियों में काम करते हैं जहाँ पर याहू चैट आदि पर प्रतिबन्ध है, इसलिये वे जाटलैंड को खोलकर इसकी चौपाल का इस्तेमाल करते हैं । नए-नए मेंबर कई बार गल्ती कर बैठते हैं - जाटनियों से PM करके इश्कबाजी के चक्कर में रहते हैं । मैं हमेशा इस बात के हक में रहा हूं कि चौपाल में भद्दापन न फैलने पाए । इसी चक्कर में कई मेंबर "बैन" भी हो गए ।
पर आजकल चक्कर उल्टा है - पहले जाटणियां चौपाल में कम ही जाती थी, पर आजकल तो उन्होंने ही तकरीबन वहां कब्जा कर रखा है - थोड़ी बहुत चौधराहट भी पाल ली है कि वहां अगर किसी ने हमें वहां पर 'डिस्टर्ब' किया तो उनकी शिकायत कर दी जायेगी (झूठी या सच्ची) और उसे 'आउट' कर दिया जायेगा । कई लड़कों ने तो इस डर से वहां पर जाना ही छोड़ दिया - कहने लगे कि क्या करें जी, आजकल तो सब जगह इनकी ही सुनी जाती है, यहां आधे से ज्यादा Mods तो जाटणियां ही हैं, एक तो करेला और दूसरे नीम पर भी चढ़ा ! अगर कोई जाटनी झूठी शिकायत भी कर देगी तो हमारा तो हो जायेगा कल्याण !
कुछ दिन पहले एक धागा चला, उसमें PM का जिक्र हो गया । मैने भी मजाकिया लहजे में एक पोस्ट लिख दी, बिना किसी का नाम लिखे - (Click here) । वही बात हो गई कि चोर की दाढ़ी में तिनका । एक नकचढ़ी जाटनी जो ज्यादातर चौपाल में बैठी रहती है, उसको मेरी पोस्ट पढ़कर तिलमिलाहट हुई होगी और हो सकता है कि मेरी शिकायत किसी सरपंचनी को कर दी हो । फिर मुझे एक सरपंचनी से धमकी भरा PM मिला कि जी, आपकी उम्र के किसी मेंबर को किसी पर "unveiled comments" लिखना शोभा नहीं देता । "Unveiled comments" यानि खुली बात नहीं, पर पर्दे में छुपी हुई बात पर एक इशारा ।
क्यों मैडम साहिबा, क्या हो गया मेरी उम्र को ? अच्छा खासा हट्टा-कट्टा हूं, मेरे से ज्यादा उम्र के और भी बहुत से मेंबर हैं यहां पर । आदमी की उम्र बढ़ने के साथ ही उसकी लेखनी (कलम) की शक्ति भी बढ़ती है । यही एक ऐसा गुण है जिसका सम्बन्ध सिर्फ उम्र से है । एक कम उम्र का होनहार छात्र, चाहे उसने कई पी-एच-डी कर रखी हों, इतना अच्छा कलम का सिपाही नहीं हो सकता जितना एक सीनियर व्यक्ति । खुशवन्त सिंह को ही देख लो - कब्र में पैर लटकाये बैठा है, पर उसकी कलम का आज भी जवाब नहीं, फिल्मी हीरोइनों की खूबसूरती पर फब्तियां कसता रहता है पर उससे कोई नाराज नहीं होता/होती । यहां जाटलैंड पर भी कुछ सीनियर मेंम्बर ही हैं जो कलम के अच्छे सिपाही हैं - जैसे जगमोहन मलिक, धर्मपाल दूदी, ब्रि. लक्ष्मण सिंह, लक्ष्मण बुरड़क, देव दहिया आदि ।
यक्ष ने युधिष्ठिर से पूछा था – आदमी की उम्र के बढ़ने के साथ-साथ उसकी भाग-दौड़ की शक्ति, नजर, सुनने आदि की क्षमता कम होती जाती है, सिर्फ एक ही गुण है जो उम्र के साथ बढ़ता है, वह गुण कौन सा है ? युधिष्ठिर ने कहा - वह गुण है 'बुद्धि' । एक कम उम्र का आदमी ज्यादा ज्ञानी (knowledgeable), ताकतवर, पढ़-लिखा, विद्वान तो हो सकता है, पर ’बुद्धिमान’ नहीं होता । बुद्धि को अंग्रेजी में 'wisdom' कहते हैं । 'knowledge' और 'wisdom' दो अलग-अलग चीजें हैं - जैसे रावण ज्ञानी, खूब पढ़ा-लिखा, विद्वान तो था, पर बुद्धिमान (wise) नहीं था । एक अनपढ़ आदमी ज्यादा 'wise' हो सकता है एक पढ़े लिखे, 'knowledgeable' और विद्वान नौजवान से ।
मैने तो आज तक कोई अश्लील शब्द या वाक्य कभी नहीं लिखा और न ही किसी के बारे में सीधा लिखा । हरेक का अपना स्वभाव होता है, किसी को वह भाता है और किसी को नहीं । इस किस्म की पब्लिक फोरम में भी यही बात है । दो-चार जाट-जाटणी हैं जो सरपंचों के काबू के नहीं, हम मेंबर ही उनका जुगाड़ कर सकते हैं । हमें किसी से व्यक्तिगत बैर नहीं, ऐसे दो-चार जब कभी-कभी कोई गलत पोस्ट लिखते मुझे नजर आते हैं, तो मैं अपनी पोस्ट लिखता हूं, बिना नाम लिए - एक सही कूटनीतिक चाल, ताकि किसी का नाम भी मत लो और समझने वाले समझ भी जायें, सांप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे । सो भाई लोगो, अगर मेरी यह अदा आपको पसंद नहीं तो बता दो, मैं बंद कर देता हूं इस फोरम में लिखना । मेरी यह पोस्ट इस बात का सबूत है कि मुझ पर सरपंचनी साहिबा के PM का कोई असर नहीं हुआ है ।
हां, एक बात मैंने जरूर की है - अपने प्रोफाइल से PM सिस्टम को हटा दिया है ताकि फिर मुझे कोई मेंबर या सरपंच/नी PM न भेजे, ई-मेल बेशक भेजे । आप कहोगे तो इस PM सिस्टम को फिर चालू कर दूंगा ।
है न यह "PM" कमाल की चीज ?
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"PM" का चक्कर
आजकल हिन्दी का स्तर (स्टैंडर्ड) काफी गिर गया है । बेशक नवभारत टाइम्स को देख लो कभी भी - यह अखबार कभी 'टॉप' पर होता था पर आजकल इसका बेड़ा गर्क हो गया है - आधे से ज्यादा शब्द अंग्रेजी के होते हैं, "नोएडा में मर्डर", "पी.एम. फॉरेन टूर से लौटे" - ऐसे ऐसे तो शीर्षक होते हैं । मैंने इसके सम्पादक को लिखा भी - कि आपके पेपर ने हिन्दी की ऐसी-तैसी कर रखी है - "मर्डर" की हिन्दी नहीं होती क्या (हत्या, कत्ल, खून आदि कितने ही नाम हैं)? उन साहब ने जवाब ही नहीं दिया । इस पेपर को देखकर जी करता है कि या तो इनका सिर फोड़ दूं या अपना फोड़ लूं ।
बेचारे प्रधानमंत्री को कोई अखबार वाला न तो 'प्रधानमंत्री' लिखता है और न ही 'प्राइम मिनिस्टर' - चाहे हिन्दी हो या अंग्रेजी - सब "PM" ही लिखते हैं । सारे मुख्यमंत्री 'सी.एम' हो गए हैं । टी.वी. चैनल वाले भी ऐसा ही बोलते हैं ।
दोपहर के बाद के समय को भी "PM" कहते हैं । शॉर्टकट का ऐसा रिवाज चल पड़ा है कि आगे शायद Post Mortem को भी "PM" कहने लगें ।
यहां बात हो रही है जाटलैंड के PM सिस्टम की - कोई इसे 'पर्सनल मैसेज' कहता है, कोई 'प्राइवेट मेसेज' । आजकल अपने प्रोफाइल में ही कुछ छोटे-छोटे बक्से बने हैं जिन पर दूसरे सदस्यों द्वारा कुछ-कुछ लिखा होता है - इसे भी शायद PM ही कहते हैं पर इसे सब पढ़ सकते हैं - यह किस किस्म का 'प्राइवेट मेसेज' हुआ भाई ? एक और चक्कर - जाटलैंड चौपाल में भी एक "PM system" है - पता नहीं कोई और नाम क्यों नहीं दे दिया जाता इसको - कमरा, कोठड़ी, खोखा वगैरा - जिसमें जाकर दो मेंम्बर आपस में बात कर सकते हैं, दूसरों से लुक-छिपकर ।
यह सिस्टम काफी लोकप्रिय है । वैसे तो याहू चैट, गूगल चैट वगैरा में भी यही पद्धति है, पर जाटलैंड पर इसके होने का खास महत्व है । बहुत सारे जाटलैंडर प्राइवेट कंपनियों में काम करते हैं जहाँ पर याहू चैट आदि पर प्रतिबन्ध है, इसलिये वे जाटलैंड को खोलकर इसकी चौपाल का इस्तेमाल करते हैं । नए-नए मेंबर कई बार गल्ती कर बैठते हैं - जाटनियों से PM करके इश्कबाजी के चक्कर में रहते हैं । मैं हमेशा इस बात के हक में रहा हूं कि चौपाल में भद्दापन न फैलने पाए । इसी चक्कर में कई मेंबर "बैन" भी हो गए ।
पर आजकल चक्कर उल्टा है - पहले जाटणियां चौपाल में कम ही जाती थी, पर आजकल तो उन्होंने ही तकरीबन वहां कब्जा कर रखा है - थोड़ी बहुत चौधराहट भी पाल ली है कि वहां अगर किसी ने हमें वहां पर 'डिस्टर्ब' किया तो उनकी शिकायत कर दी जायेगी (झूठी या सच्ची) और उसे 'आउट' कर दिया जायेगा । कई लड़कों ने तो इस डर से वहां पर जाना ही छोड़ दिया - कहने लगे कि क्या करें जी, आजकल तो सब जगह इनकी ही सुनी जाती है, यहां आधे से ज्यादा Mods तो जाटणियां ही हैं, एक तो करेला और दूसरे नीम पर भी चढ़ा ! अगर कोई जाटनी झूठी शिकायत भी कर देगी तो हमारा तो हो जायेगा कल्याण !
कुछ दिन पहले एक धागा चला, उसमें PM का जिक्र हो गया । मैने भी मजाकिया लहजे में एक पोस्ट लिख दी, बिना किसी का नाम लिखे - (Click here) । वही बात हो गई कि चोर की दाढ़ी में तिनका । एक नकचढ़ी जाटनी जो ज्यादातर चौपाल में बैठी रहती है, उसको मेरी पोस्ट पढ़कर तिलमिलाहट हुई होगी और हो सकता है कि मेरी शिकायत किसी सरपंचनी को कर दी हो । फिर मुझे एक सरपंचनी से धमकी भरा PM मिला कि जी, आपकी उम्र के किसी मेंबर को किसी पर "unveiled comments" लिखना शोभा नहीं देता । "Unveiled comments" यानि खुली बात नहीं, पर पर्दे में छुपी हुई बात पर एक इशारा ।
क्यों मैडम साहिबा, क्या हो गया मेरी उम्र को ? अच्छा खासा हट्टा-कट्टा हूं, मेरे से ज्यादा उम्र के और भी बहुत से मेंबर हैं यहां पर । आदमी की उम्र बढ़ने के साथ ही उसकी लेखनी (कलम) की शक्ति भी बढ़ती है । यही एक ऐसा गुण है जिसका सम्बन्ध सिर्फ उम्र से है । एक कम उम्र का होनहार छात्र, चाहे उसने कई पी-एच-डी कर रखी हों, इतना अच्छा कलम का सिपाही नहीं हो सकता जितना एक सीनियर व्यक्ति । खुशवन्त सिंह को ही देख लो - कब्र में पैर लटकाये बैठा है, पर उसकी कलम का आज भी जवाब नहीं, फिल्मी हीरोइनों की खूबसूरती पर फब्तियां कसता रहता है पर उससे कोई नाराज नहीं होता/होती । यहां जाटलैंड पर भी कुछ सीनियर मेंम्बर ही हैं जो कलम के अच्छे सिपाही हैं - जैसे जगमोहन मलिक, धर्मपाल दूदी, ब्रि. लक्ष्मण सिंह, लक्ष्मण बुरड़क, देव दहिया आदि ।
यक्ष ने युधिष्ठिर से पूछा था – आदमी की उम्र के बढ़ने के साथ-साथ उसकी भाग-दौड़ की शक्ति, नजर, सुनने आदि की क्षमता कम होती जाती है, सिर्फ एक ही गुण है जो उम्र के साथ बढ़ता है, वह गुण कौन सा है ? युधिष्ठिर ने कहा - वह गुण है 'बुद्धि' । एक कम उम्र का आदमी ज्यादा ज्ञानी (knowledgeable), ताकतवर, पढ़-लिखा, विद्वान तो हो सकता है, पर ’बुद्धिमान’ नहीं होता । बुद्धि को अंग्रेजी में 'wisdom' कहते हैं । 'knowledge' और 'wisdom' दो अलग-अलग चीजें हैं - जैसे रावण ज्ञानी, खूब पढ़ा-लिखा, विद्वान तो था, पर बुद्धिमान (wise) नहीं था । एक अनपढ़ आदमी ज्यादा 'wise' हो सकता है एक पढ़े लिखे, 'knowledgeable' और विद्वान नौजवान से ।
मैने तो आज तक कोई अश्लील शब्द या वाक्य कभी नहीं लिखा और न ही किसी के बारे में सीधा लिखा । हरेक का अपना स्वभाव होता है, किसी को वह भाता है और किसी को नहीं । इस किस्म की पब्लिक फोरम में भी यही बात है । दो-चार जाट-जाटणी हैं जो सरपंचों के काबू के नहीं, हम मेंबर ही उनका जुगाड़ कर सकते हैं । हमें किसी से व्यक्तिगत बैर नहीं, ऐसे दो-चार जब कभी-कभी कोई गलत पोस्ट लिखते मुझे नजर आते हैं, तो मैं अपनी पोस्ट लिखता हूं, बिना नाम लिए - एक सही कूटनीतिक चाल, ताकि किसी का नाम भी मत लो और समझने वाले समझ भी जायें, सांप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे । सो भाई लोगो, अगर मेरी यह अदा आपको पसंद नहीं तो बता दो, मैं बंद कर देता हूं इस फोरम में लिखना । मेरी यह पोस्ट इस बात का सबूत है कि मुझ पर सरपंचनी साहिबा के PM का कोई असर नहीं हुआ है ।
हां, एक बात मैंने जरूर की है - अपने प्रोफाइल से PM सिस्टम को हटा दिया है ताकि फिर मुझे कोई मेंबर या सरपंच/नी PM न भेजे, ई-मेल बेशक भेजे । आप कहोगे तो इस PM सिस्टम को फिर चालू कर दूंगा ।
है न यह "PM" कमाल की चीज ?
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