Reservation is our constitutional right

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केंद्र में जाट आरक्षण के लिए आंदोलन 16 अगस्त से निश्चित : सांगवान
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बतलाया कि संघर्ष समिति की कार्यकारिणी की सोनीपत में हुई बैठक के अंतिम दौर में यह निर्णय लिया गया है कि केंद्र सरकार को जाटों को केंद्र में आरक्षण देने के लिए जो चार महीने का समय दिया था, वह 18 जुलाई को समाप्त हो जाएगा और लगता नहीं कि केंद्र सरकार इस अवधि में जाटों को आरक्षण दे देगी। इसलिए संघर्ष समिति को मजबूर होकर 16 अगस्त से दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक जबरदस्त आंदोलन करना पड़ेगा। इस आंदोलन की रूपरेखा का 21 जुलाई को रोहतक की चौ. छोटूराम धर्मशाला में होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में खुलासा कर दिया जाएगा।
सांगवान ने बतलाया कि यह भी फैसला लिया गया है कि इस आंदोलन में कोई धरना या भूख हड़ताल नहीं की जाएगी बल्कि जंतर-मंतर से एक कूच किया जाएगा जिसकी घोषणा वहीं जंतर-मंतर पर कर दी जाएगी। जाटों का यह कूच शांतिपूर्वक होगा, लेकिन फिर भी केंद्र सरकार व दिल्ली प्रदेश की सरकार जाटों के साथ किसी प्रकार का बल प्रयोग करती है तो जाट इसका मुंहतोड़ जवाब देंगे। जाट किसी भी कीमत पर मैदान नहीं छोड़ेंगे और हर हालत में अपने उस उद्देश्य तक पहुंचेंगे। अब ये केंद्र सरकार पर है कि वह जाटों को आरक्षण देती है या जंतर-मंतर को जलियांवाला बाग बनाना चाहती है। जाटों ने ये फैसला बहुत सोच-विचारकर लिया है और आंदोलन पक्के इरादे तथा पूरी मानसिक और शारीरिक तैयारी के साथ किया जाएगा।
 
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चौ. भूपेंद्र सिंह हुड्डा के जाट सम्मेलन में जाने पर इतना हो-हल्ला क्यों : सांगवान
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बतलाया कि हमारे देश में सात हजार से अधिक जातियां हैं और इन सभी जातियों के अपने जातीय संगठन हैं, जिसमें जनता के द्वारा चुने हुए पंच से लेकर मंत्रियों तक अपनी जातियों और संगठनों में जाकर अपने जातीय संगठन की मजबूती व मांगों का समर्थन करते रहे हैं। जब पंडित जवाहरलाल नेहरू सन् 1947 में देश के प्रधानमंत्री बने तो उनको ब्राह्मण सभा ने बुलाकर गंगाजल छिडक़कर राजदंडा भेंट किया था। इसके पश्चात सन् 1953 में उन्होंने स्वयं गौड ब्राह्मण सभा का उद्घाटन किया था। इससे भी बढक़र जब पाकिस्तान बनने पर हमारे यहां से मुस्लिम गए तो उन्होंने मुस्लिम अधिकारियों की जगह अपनी जाति से अधिकारी नियुक्त करने के लिए सभी ब्राह्मण मुख्यमंत्रियों को गोपनीय पत्र लिखा था। कांग्रेसी नेता सुभाष बत्रा जिन्हें चौ. भूपेंद्र सिंह हुड्डा के तालकटोरा स्टेडियम के जाट महासम्मेलन में जाने की सबसे ज्यादा तकलीफ हुई है, उन्हें मैं याद दिलाना चाहता हूं कि उन्हीं के जाति भाई मेहरचंद खन्ना को उन्हीं की जाति का कल्याण देखने के लिए देश के बंटवारे के समय मंत्री बनाया गया था। इसी प्रकार इंद्रजीत सिंह यादव ने भी इस पर अपना ऐतराज जताया है, जबकि उनको कई बार हमने यादव सभाओं में सम्मिलित होते हुए देखा है और अभी भविष्य में भी हम उनको ये याद दिला देंगे। इस प्रकार के अनेकों उदाहरण दिए जा सकते हैं।
सांगवान ने आगे बतलाया कि इस सम्मेलन में दिल्ली प्रदेश की मुख्यमंत्री श्रीमति शीला दीक्षित भी एक प्रतिनिधि के तौर पर सम्मिलत हुईं, जबकि वे जाट जाति से न होकर ब्राह्मण जाति से संबंध रखती हैं। इस प्रकार देखा गया है कि हमने जाटों के आरक्षण के लिए प्रचार अभियान शुरू किया तो हमारे ऊपर भी ये इल्जाम लगाया गया कि हम जाति-पाति का जहर फैला रहे हैं, लेकिन आज तक किसी भी जाति वालों ने, जिन्हें जाति के आधार पर आरक्षण मिला हुआ है, उसे छोडऩे के लिए कभी नहीं कहा, तो फिर जाट जाति के लोग अपने सवैंधानिक अधिकार की बात करते हैं तो दूसरे लोगों को तकलीफ क्यों होती है? हमारे देश में प्रजातंत्र है और किसी भी जाति को अपना अधिकार मांगने का पूर्णतया अधिकार है तथा किसी भी नेता को ऐसे अधिकार के लिए समर्थन करना उनका सवैंधानिक कर्तव्य बनता है। इसलिए चौ. भूपेंद्र सिंह हुड्डा व अन्य किसी भी नेता ने जाट सम्मेलन में जाकर किसी भी प्रकार का न तो कोई असवैंधानिक कार्य किया है, न ही किसी को भ्रमित किया है। चौ. भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने जाट जाति में जन्म लिया है, इसीलिए अपने आप को जाट कहना उनका कर्तव्य बनता है, जिसमें किसी प्रकार की कोई गलती का सवाल ही पैदा नहीं होता है क्योंकि जाति प्रथा हमारे देश की हकीकत है, इसीलिए जातीय आधार पर अभी-अभी जनगणना करवाई गई है।
 
14 सितंबर को भिवानी में होगी गैर ब्राह्मणवादी बिग्रेड की स्थापना : सांगवान
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बतलाया कि ब्राह्मण आरक्षण संघर्ष समिति के प्रधान हरीराम दीक्षित का समाचार पत्रों में बयान छपा है कि मुख्यमंत्री चौ. भूपेंद्र सिंह हुड्डा का जाट सम्मेलन में जाना गैर सवैंधानिक है, तो हम दीक्षित साहब से पूछना चाहते हैं कि 12 मई, 2013 को भिवानी में मनाई गई परशुराम जयंती के अवसर पर ब्राह्मण सभा में हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप शर्मा ने सम्मिलित होकर ब्राह्मण समाज के लिए आरक्षण का स्पष्ट तौर पर समर्थन किया था और भविष्य में संघर्ष करने की सलाह दी थी। इस पर जाट समाज ने किसी प्रकार का कोई ऐतराज नहीं किया, लेकिन चौ. भूपेंद्र ङ्क्षसह हुड्डा द्वारा उनके अपने समाज के लिए इस प्रकार से किए जाने पर ब्राह्मण समाज को ऐतराज क्यों? जबकि विधानसभा के अध्यक्ष का पद सवैंधानिक तौर पर मुख्यमंत्री से बड़ा होता है। फिर कुलदीप शर्मा अपने पद से त्यागपत्र देकर इस सभा में शरीक क्यों नहीं हुए? इसके अतिरिक्त कई दूसरे उच्च जातियों के लोगों ने भी इस पर बहुत हो-हल्ला किया है, जिसको कुछ समाचार पत्रों ने जान-बूझकर आवश्यकता से अधिक तवज्जो दी है। इस पर भी हमारा बहुत बड़ा ऐतराज है। मैं यह भी बताना चाहता हूं कि शंख बजाने से न तो देश को आजादी मिली, न ही किसी को आरक्षण। हरियाणा में उच्च जातियों को जो भी आरक्षण मिला है, वह जाटों को रेल रोको आंदोलन के कारण मिला है। लेकिन उच्च जातियों के कुछ लोग जाटों को धन्यवाद देने की बजाय उन्हें ही लज्जित करने पर तुले हुए हैं।
सांगवान ने आगे कहा कि जहां तक दीक्षित साहब ने गैर जाट मंच की स्थापना की बात की है, इसका मैं स्वागत करता हूं और इसके जवाब में हम 14 सितंबर को जाट धर्मशाला, भिवानी में गैर ब्राह्मणवादी ब्रिगेड की स्थापना करने जा रहे हैं। इस ब्रिगेड का राष्ट्रीय स्तर का एक बहुत बड़ा सम्मेलन 24 नवंबर को चौ. छोटूराम के जन्मदिवस पर रोहतक में मनाया जाएगा, जिसमें जनजाति, अनुसूचित जाति और सभी पिछड़ी जातियां, जिनकी जनसंख्या भारतवर्ष में 88 प्रतिशत है, गैर ब्राह्मणवादी समाज की स्थापना करके जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी के सिद्धांत को लागू करने तथा प्राइवेट सेक्टर में भी इन सभी वर्गों के लिए आरक्षण की मांग का शंखनाद किया जाएगा क्योंकि इन 65 सालों में सरकारी नौकरियों में आरक्षण मिलने के बावजूद भारतीय न्यायपालिका, भारतीय मीडिया के इलावा केंद्रीय सत्ता में जहां पर देश के अहम् फैसले लिए जाते हैं, इन वर्गों की किसी प्रकार की कोई भी हिस्सेदारी अभी तक नहीं है। इसके लिए इन वर्गों को आजादी की दूसरी लड़ाई लडऩे के लिए आने वाले समय में हर हालत में तैयार किया जाएगा। हालांकि इन 65 सालों में भारतवर्ष के 28 राज्यों में से मात्र 23 राज्यों में ही अभी तक अनुसूचित जाति, जनजाति व पिछड़ी जातियों से मुख्यमंत्री बन पाए हैं, जबकि आज इस देश की सत्ता इन्हीं वर्गों के हाथों में होनी चाहिए थी, जिनकी जनसंख्या भारतवर्ष में 88 प्रतिशत है।
 
16 अगस्त के आंदोलन में बाहरी नेतृत्व मंजूर नहीं, चौ. भूपेंद्र सिंह हुड्डा का जाट सम्मेलन में जाना तर्कसंगत : सांगवान
हिसार। आज जाट धर्मशाला, हिसार में अखिल भारतीय जाट आरक्षण सघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए यह स्पष्ट कहा कि हमारी संघर्ष समिति को प्रदेश से बाहर का नेतृत्व किसी भी हालत में स्वीकार नहीं होगा क्योंकि हमारे अनुभव से यह प्रमाणित हो चुका है कि बाहरी लोग कभी भी आंदोलन के बीच में से भाग खड़े हो सकते हैं। सांगवान ने बतलाया कि जाट समाज को केंद्र स्तर पर आरक्षण मिलना निश्चित है, लेकिन राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग के अध्यक्ष 31 मई, 2013 को सेवानिवृत हो जाने के बाद अभी तक नई नियुक्ति नहीं हो पाई है, जिस कारण जाट आरक्षण की प्रकिया थमी हुई है। इसी देरी के कारण हमारी संघर्ष समिति को यह फैसला लेना पड़ा कि 16 अगस्त से दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन छेड़ दिया जाएगा, जिसकी रूपरेखा 21 जुलाई को चौ. छोटूराम धर्मशाला, रोहतक में बना दी जाएगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग को पिछड़ी जातियों का 27 प्रतिशत का कोटा 32 प्रतिशत करने के लिए पहले ही लिखा जा चुका है क्योंकि मंडल कमीशन के समय पिछड़ी जातियों की जनसंख्या 54 प्रतिशत थी, जो अभी जाटों और कुछ अन्य जातियो को मिलने पर इनकी संख्या 64 प्रतिशत हो जाती है।
सांगवान ने जाट आरक्षण पर चर्चा करते हुए बताया कि जाट समाज में कुछ राजनीति से प्रेरित लोग सरेआम जाट समाज को गुमराह कर रहे हैं कि हरियाणा में कोई आरक्षण नहीं मिला है और यह धोखा है, जबकि वर्तमान में जितने भी नौकरियों के सरकारी विज्ञापन आ रहे हैं, उनमें विशेष पिछड़ी जाति के पद अलग से दिखाए जा रहे हैं और इसके लिए समझदार जाट अपने जाति प्रमाण-पत्र बनवाने में लगे हैं। लेकिन ये आश्चर्यजनक बात है कि यही लोग जाटों को केंद्र में आरक्षण दिलाने की बात कर रहे हैं, जबकि कानून यह है कि जब तक राज्य स्तर पर पिछड़ी जाति को आरक्षण नहीं मिल जाता, केंद्र में आरक्षण लागू नहीं हो सकता। फिर ऐसे लोगों को चाहिए कि वे पहले हरियाणा राज्य में आरक्षण दिलवाएं, फिर केंद्र की बात करें। सांगवान ने इस बात पर भी आश्चर्य प्रकट किया कि धर्मपाल छोत किस आधार पर अपने आप को अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति का पदाधिकारी बतला रहे हैं, जबकि वे संघर्ष समिति के सभी पदों से पहले ही त्यागपत्र दे चुके हैं। इस संबंध में उनके त्यागपत्र की एक प्रतिलिपि पत्रकारों के सुपुर्द भी की गई।
सांगवान ने चौ. भूपेंद्र सिंह हुड्डा के दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में हुए जाट सम्मेलन में सम्मिलित होने पर अनावश्यक मचे हो-हल्ले के बारे में बताते हुए कहा कि सन् 1947 से आज तक सभी जातियों के नेता या मंत्री आदि अपनी जाति और धर्म की सभाओं में बेरोकटोक जाते रहे हैं। पंडित जवाहरलाल नेहरू भी प्रधानमंत्री बनते ही ब्राह्मण सभा के बुलावे पर गए और उन्हें ब्राह्मण सभा ने गंगाजल छिडक़कर राजदंडा भेंट किया था। अभी-अभी 12 मई, 2013 को परशुराम जयंती पर भिवानी में बुलाई गई ब्राह्मण सभा में हरियाणा
प्रदेश की विधानसभा के अध्यक्ष पंडित कुलदीप शर्मा गए थे और उन्होंने ब्राह्मण समाज को आरक्षण लेने के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया था, जबकि विधानसभा के अध्यक्ष का सवैंधानिक दर्जा मुख्यमंत्री से बड़ा होता है। फिर भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ इस संबंध में दुष्प्रचार करना बहुत ही खेदजनक और पक्षपाती है, जिसको जाट समाज अच्छी तरह से समझने की कोशिश कर रहा है।
सांगवान ने आगे बतलाया कि हिसार जिले की संघर्ष समिति का पुनर्गठन करते हुए जयवीर खोखा को युवा इकाई का जिलाध्यक्ष बनाया गया है तथा राजीव सहरावत को युवा प्रदेश सचिव नियुक्त किया गया है। जिलाध्यक्ष दलजीत सिंह पंघाल की सहायता के लिए एक पांच सदस्यीय सलाहकार कमेटी का भी गठन किया गया है, जिसमें राजबीर सहरावत, प्रताप सिंह सिहाग, महेंद्र सिंह भगाना, रामपाल मिर्जापुर तथा बलबीर सिंह सरपंच को शामिल किया गया है।
पत्रकार वार्ता में महेंद्र सिंह भगाना, मनीराम मोर, जोगेंद्र सरपंच, हवासिंह खरब, दलजीत सिंह पंघाल, राजबीर सहरावत, प्रतापसिंह सिहाग, रामपाल मिर्जापुर, बलबीर सिंह पंच, जयवीर खोखा, सुखबीर सिंह, नत्थूराम आर्य, राजसिंह घणघस, जोगेंद्र तालू, रघुबीर सिंह बूरा, राजसिंह कार्यवाहक अध्यक्ष जाटू खाप 84, राजेंद्र सिंह खरड़, हवासिंह भगाना, दिलबाग सिंह हुड्डा, सुरेंद्र खोखा, जयसिंह रायपुर, सूबेदार दलीप सिंह, ईश्वर, प्रवीण ढांडा, रविंद्र गौरिया, प्रदीप खोखा, मोनू हुड्डा, बिजेंद्र, प्रवीण लताणी, विकास पेटवाड़, प्रदीप, अनूप किरोड़ी, सुमित, अमित भाटला, सूबेदार कलीराम, बिरेंद्र, राकेश रायपुर, बलजीत फौजी, जयदेव, बिजेंद्र नूनिया, रोहतास, अशोक, सुखविंद्र, रघुविंद्र, हवासिंह, रणसिंह श्योराण व प्रतापसिंह श्योराण आदि उपस्थित थे।
 
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बतलाया कि आरक्षण से संबंधित जो भी बयान उन्होंने दिए हैं, वे सच्चाई पर आधारित हैं, फिर भी उनके बयानों की कोई निंदा करता है तो वे उसका स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि जब हरीराम दीक्षित ने गैर जाट मंच बनाने का बयान दिया तो ब्राह्मण समाज के किसी भी व्यक्ति ने उसकी निंदा नहीं की, लेकिन जब इसके जवाब में उन्होंने गैर ब्राह्मणवादी बिग्रेड बनाने की बात कही तो ब्राह्मण समाज के कुछ लोगों को तकलीफ हुई। इसी प्रकार जब मुख्यमंत्री जाट सम्मेलन में गए तो इन्हें तकलीफ हुई, लेकिन जब कुलदीप शर्मा ने भिवानी में 12 मई को ब्राह्मण सम्मेलन में इनके समाज के लिए आरक्षण के लिए आह्वान किया तो जाट समाज को कोई तकलीफ नहीं हुई। इस प्रकार की दोगली नीति किसी भी समाज में स्वीकार्य नहीं है। सांगवान ने आगे कहा कि वे अंतिम फैसला ले चुके हैं कि 14 सितंबर को राज्य स्तर पर गैर ब्राह्मणवादी बिग्रेड का गठन होगा, जिसमें पूरे प्रदेश से दलित और पिछड़ी जातियों के लोग बढ़-चढक़र हिस्सा लेंगे। ब्रिगेड के उद्देश्यों की घोषणा उसी दिन कर दी जाएगी। चौ. छोटूराम के जन्मदिवस पर होने वाले राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन में पूरे देश से अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्ग से लाखों लोग हिस्सा लेंगे, जिसका खुलासा उसी दिन कर दिया जाएगा।
 
स्पेशल बीसी के शिक्षार्थी भी स्कॉलरशिप के अधिकारी हैं : सांगवान
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बतलाया कि हरियाणा सरकार के आदेश नंबर 59 एसडब्ल्यू(1)-2013 दिनांक 24.01.2013 के अनुसार स्पेशल बीसी की जातियों को भी पिछड़ी जातियों के समान माना है तथा वे सभी सुविधाएं जो पिछड़ी जातियों को मिल रही हैं, विशेष पिछड़ी जाति को भी मिलने का अधिकार दिया गया है। इसीलिए विशेष पिछड़ी जाति के शिक्षार्थी, जो भी सरकारी स्कूल व कॉलेजों में तथा सरकार द्वारा अनुदान प्राप्त करने वाले शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे हैं, वे सभी स्कॉलरशिप के अधिकारी हैं, जिनके माता-पिता की सालाना आय एक लाख रूपए से कम है। इसीलिए इन सभी विद्यार्थियों को अपने माता-पिता की आय पर आधारित आधार कार्ड बनवाकर स्कॉलरशिप के लिए अपने शिक्षण संस्थानों में आवेदन करना चाहिए।
सांगवान ने आगे बतलाया कि वर्तमान के सरकारी कानूनों से काफी संस्थाएं व अधिकारी तथा कर्मचारी अवगत नहीं हैं, इसलिए जहां भी इस प्रकार की कठिनाई होती है, उनको चाहिए कि इन आदेशों से अधिकारियों व कर्मचारियों को अवगत करवाएं ं।
 
16 अगस्त से शुरू होने वाले आंदोलन के लिए कमर कस लें जाट : सांगवान
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बतलाया कि जाट समाज को दुष्प्रचार से बचते हुए अपने अधिकारों के लिए हमेशा सचेत रहना चाहिए और यदि जल्दी ही केंद्र में आरक्षण नहीं मिलता है तो 16 अगस्त से शुरू होने वाले आंदोलन के लिए अपनी कमर कस लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हरियाणा के अधिकतर जाटों को बहकने की आदत है क्योंकि वे हमेशा दूसरों पर अधिक विश्वास करते आए हैं, जबकि आज समय बदल चुका है और इसी बहकने की आदत से नकारात्मक सोच की उत्पत्ति होती है, जो किसी भी व्यक्ति के विकास में एक बड़ी बाधा है। हरियाणा के जाट को मानसिक रूप से यह स्वीकार करना पड़ेगा कि वह वास्तव में पिछड़ा है क्योंकि ये बात सरकार सिद्धांतिक रूप से स्वीकार कर चुकी है। इसीलिए सभी पिछड़ी जातियों का यह स्वाभाविक कर्तव्य बनता है कि वे अपने पिछड़ेपन को पीछे छोडक़र आगे बढऩे का प्रयास करें। हरियाणा का ग्रामीण जाट वास्तव में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है क्योंकि जमीनें बहुत तेजी से कम होती जा रही हैं और गांवों में रोजगार का कोई सृजन नहीं हो रहा है।
सांगवान ने आगे बतलाया कि चौ. छोटूराम ने संयुक्त पंजाब के सदन में और बाहर हमेशा जाटों को पिछड़ा कहा, लेकिन जाट उस बात को भूल गए क्योंकि जाटों द्वारा एक विशेष पंथ को अपनाए जाने पर उनके दिमाग में ये जहर भर दिया गया कि वे श्रेष्ठ हैं। इसीलिए मंडल कमीशन के समय जाटों ने स्वयं ही पिछड़ा बनने से इंकार करते हुए आरक्षण को स्वीकार नहीं किया था। परिणामस्वरूप, इन लगभग 23 वर्षों में जाट समाज को भारी नुकसान उठाना पड़ा है, जिसकी भरपाई होनी संभव नहीं है।
 
16 अगस्त की जाट आक्रोश रैली की रूपरेखा तैयार करने के लिए बैठक रोहतक में 21 जुलाई को : सांगवान
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बतलाया कि 16 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाली जाट आक्रोश रैली की रूपरेखा तैयार करने व नीति को बनाने के लिए संघर्ष समिति की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 21 जुलाई, 2013, रविवार को प्रात: 11 बजे चौ. छोटूराम धर्मशाला, रोहतक में संपन्न होगी। जाट समाज में इस बात का बहुत बड़ा आक्रोश है कि केंद्र सरकार जाट समाज के आरक्षण के अधिकार को देने में अनावश्यक रूप से देरी कर रही है। इसलिए जाट समाज इस आंदोलन को एक आक्रोश रैली के रूप में शुरू करने जा रहा है, जिसके लिए लगभग आठ प्रदेशों के जाट दिल्ली में इक_ा होकर अपने इस अधिकार की मांग करेंगे।
सांगवान ने आगे बतलाया कि जब देश की आठ राज्य सरकारों ने जाट समाज को पिछड़ा मान लिया है, तो केंद्र स्तर पर उन्हें पिछड़ा न मानने का कोई भी कारण नहीं है, जिससे स्पष्ट है कि जाट समाज के साथ सरासर भेदभाव हो रहा है, जिसे जाट समाज किसी भी कीमत पर बर्दाश्त करने वाला नहीं है। इसलिए जाट समाज आंदोलन करने के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार है।
इस अवसर पर उनके साथ जिलाध्यक्ष कपूर सिंह धनाना, चौ. मौजीराम, दयाकिशन बडेसरा, कृष्ण कुमार नांगल, सतबीर सिंह मिताथल, उमेद सिंह जताई, राजसिंह मदनहेड़ी, कुलदीप सिंह निमड़ी, सतपाल घुसकानी, सतपाल सिंह बिलावल, धर्मपाल अटेला, सुरेश कुमार झरवाई, नंबरदार रतनसिंह नांगल नंबरदार, सूबेदार सुमेर सिंह भांडवा, राजसिंह घणघस, जोगेंद्र तालू, रणसिंह संागवान, रघुबीर सिंह बूरा, जगत मिताथल, सूबेदार बलवान सिंह व सूबेदार उमेदसिंह आदि थे।
 
हरियाणा में जाट आरक्षण बना हकीकत, अब केंद्र में तैयारी : सांगवान
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बतलाया कि हरियाणा में जाट आरक्षण सिद्धांतिक तौर पर लागू हो चुका है और भिवानी के कॉलेजों में दाखिले की आज विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित स्पेशल पिछड़ा वर्ग के लिए कट ऑॅफ लिस्ट 48 प्रतिशत पर आ गई है, जबकि सामान्य वर्ग... के लिए यह 94 प्रतिशत है। इसी प्रकार हरियाणा के दूसरे कॉलेजों में भी विशेष पिछड़ी जातियों के विद्यार्थियों के दाखिले इसी आधार पर हो रहे हैं। जाटों के कुछ संगठन जो इस बारे में दुष्प्रचार कर रहे हैं, उनकी वजह से जाटों के बच्चों को बहुत नुकसान उठाना पड़ रहा है। वे इस दुष्प्रचार से बाज आएं।
सांगवान ने आगे बतलाया कि केंद्र में आरक्षण लेने के लिए 16 अगस्त से दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसके लिए पूरे हरियाणा में प्रचार अभियान प्रथम अगस्त से आरंभ हो जाएगा और इसकी तैयारियों के लिए सभी जिलों में इसी महीने मीटिंग हो रही हैं। भिवानी जिले की मीटिंग 30 जुलाई को प्रात: 11 बजे जाट धर्मशाला, भिवानी में होगी, जिसमें प्रचार अभियान की पूरी रूपरेखा तथा प्रचार अभियान के लिए हलका वाइज टीमें बनाकर प्रचार सामग्री वितरित कर दी जाएगी। संपूर्ण हरियाणा प्रदेश में प्रचार अभियान जोरों से किया जाएगा और देखने में आया है कि जाट समाज में अपने इस अधिकार के लिए पूरा उत्साह है और लाखों की संख्या में जाट और जाटनियां 16 अगस्त को दिल्ली पहुंचेंगे।
 
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जाट आरक्षण हरियाणा में बना हकीकत
प्यारे रक्त बंधुओ,
जाट आरक्षण हरियाणा में राज्य स्तर पर सिद्धांतिक तौर पर लागू हो चुका है। अभी-अभी 24 जुलाई को भिवानी के कॉलेजों में दाखिले के लिए पहली कट आऊट लिस्ट की घोषणा की गई (समाचार पत्र की प्रति साथ संलग्र कर रहे हैं)तो पाया कि विशेष पिछड़ी जातियों अर्थात भिवानी में विशेष पिछड़ी जातियों में केवल हिंदू जाट हैं, जहां पर कोई जाट, बिश्रोई, सिख जाट, रोड व त्यागी जाति से नहीं है। समझदार जाटों के जिन बच्चों ने कॉलेज में दाखिले के फार्म के सा...थ अपना जाति प्रमाण पत्र बनवाकर लगाया, उनके दाखिले 39 प्रतिशत तक अंक लेने वालों तक के हो गए हैं। जेबीटी की कट आऊट लिस्ट भी विशेष पिछड़ी जातियों की 58 प्रतिशत से नीचे पहुंच चुकी है। ये बड़ा स्पष्ट है कि जब तक हमारे बच्चों के पढ़ाई के लिए कॉलेजों में दाखिले ही नहीं होंगे, तो वे कैसे पढ़ पाएंगे और फिर किस प्रकार नौकरियों में आरक्षण का फायदा उठा पाएंगे। कट आऊट लिस्ट के अनुसार सामान्य वर्ग का दाखिला 94 प्रतिशत पर अटककर रह गया, लेकिन लिस्ट देखने पर प्रतीत होता है कि बहुत कम जाटों के बच्चों ने अपने जाति प्रमाण पत्र बनवाए और जिन्होंने नहीं बनवाए, वे 93 प्रतिशत अंक लेकर भी दाखिले से वंचित रह गए। जो जाटों के बच्चे प्रमाण पत्र नहीं बनवा पाए, उसका मुख्य कारण था कि हमारे ही कुछ तथाकथित जाट नेताओं ने इस आरक्षण के विरोध में प्रचार किया और कहा कि हरियाणा में किसी प्रकार का कोई आरक्षण नहीं मिला है। इस बारे में दो दिन से जाटों के उन बच्चों के लगातार फोन आ रहे हैं, जिन्होंने जाति प्रमाण पत्र नहीं बनवाए और कहते हैं कि अंकल, हमसे गलती हो गई। हमने सोचा कि हरियाणा का आरक्षण एक छलावा मात्र है, इसीलिए हमने जाति प्रमाण-पत्र नहीं बनवाए। अभी क्या किया जा सकता है? तो मैंने कहा कि पीछे की गलती भूल जाएं। अभी तुरंत जाति प्रमाण-पत्र बनवाकर रखें और जहां भी आवश्यकता हो, उसका अवश्य इस्तेमाल करें। यही एकमात्र रास्ता बचा है। दूसरा बहुरूपिये तथाकथित जाट नेताओं से भविष्य में सावधान रहें। उत्तरप्रदेश के एक तथाकथित जाट नेता ने कुछ दिन पहले चरखी दादरी में बयान दिया कि हरियाणा में जाटों का आरक्षण एक लॉलीपाप है और जाटों को बहकाया जा रहा है। ऐसे नेताओं ने ही हमारे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, जिन्हें आने वाले समय में जाट समाज कभी माफ नहीं करेगा। फेसबुक पर एक दोस्त मेरे बारे में लिख रहे थे कि मैं कब तक जाट समाज को मूर्ख बनाता रहूंगा। इस बारे में मेरा यह कहना है कि दूसरे अनेकों तथाकथित जाट नेता जाट समाज को पहले से ही मूर्ख बनाने में लगे हुए हैं और वे मुझे मूर्ख बनाने का कभी अवसर नहीं देंगे। ऐसे नेता आज हमारे समाज को बर्बाद करने के लिए मैदान में डटे हुए हैं। इसलिए यह तकलीफ मुझे कभी भी नहीं उठानी पड़ेगी। इसीलिए ऐसे मेरे दोस्त इस बारे में कोई चिंता न करें। इसके साथ-साथ मुझे अफसोस है कि इस आरक्षण का फायदा कॉलेज के दाखिलों में कुछ ही जिलों में जाटों के बच्चे उठा पा रहे हैं, बाकी प्रदेश में हमारा समाज अभी तक सोया हुआ है। उन्हें जागृत करने की आवश्यकता है। मैं मेरे रक्त बंधुओ से प्रार्थना करता हूं कि उनसे जो भी बन पड़े, इसके लिए प्रचार करें और हमारी पिछड़ी कौम को आगे बढ़ाने में सहयोग करें।
मेरे रक्त बंधुओ, शहरों में रहने वाले अधिकतर जाट हमारे ग्रामीण जाट की आर्थिक स्थिति से परिचित नहीं हैं। लगभग 40 प्रतिशत ग्रामीण जाटों की आर्थिक स्थिति दलित समाज से भी नीचे जा चुकी है और हम गांवों में जब जाटों के घरों में जाएंगे तो अधिकतर घरों में पाएंगे कि उनके चाय पिलाने वाले कप यदि पांच हैं तो वे अलग-अलग रंगों के हैं। किसी का हैंडल टूटा हुआ है तो किसी का किनारा टूटा हुआ है। ये पूरा हमारे ग्रामीण जाट की आर्थिक स्थिति को बयान कर रहा है। हरियाणा पिछड़ा आयोग की रिपोर्ट स्पष्ट कह रही है कि आज हरियाणा में ग्रामीण जाट की औसतन जोत डेढ़ एकड़ से भी कम आ चुकी है। इसलिए मैं कहता हूंं कि जिस परिवार में किसी प्रकार की दूसरी आय का साधन नहीं है, तो ऐसे परिवार किस प्रकार अपना जीवन यापन कर रहे हैं, यह बड़ा चिंतनीय विषय है। इसलिए मेरे बंधुओ, हमारा ग्रामीण जाट केवल पिछड़ा ही नहीं, बल्कि अति पिछड़ा है, लेकिन उसे भगवान के भरोसे जीने की आदत पड़ी हुई है, इसलिए वह रोता और चिल्लाता नहीं है। ये हमारे साथ एक बहुत बड़ी त्रासदी है और इस त्रासदी से निपटने के लिए आरक्षण मात्र एक छोटा सा साधन है अन्यथा इस समाज को आगे ले जाने के लिए बहुत कुछ करना पड़ेगा, जिसका खुलासा केंद्र में आरक्षण मिलते ही कर दिया जाएगा। हमें दो मोर्चों पर लड़ाई लडऩी है। पहला मोर्चा, हमारा एकमात्र समाज का है, दूसरा मोर्चा हमने हमारे प्यारे दलित भाईयों व पिछड़ा वर्ग के भाईयों के साथ मिलकर जीतना है, जिसमें आप सभी का सहयोग अति आवश्यक है और मुझे पूरी-पूरी उम्मीद है कि मेरे समझदार भाई और बहन किसी भुलावे में न पडक़र अपनी कौम की भलाई के लिए जो भी बन पड़ता है, प्रयास करें।
मेरे प्यारे रक्त बंधुओ, हरियाणा में ये हमारा अति आवश्यक अधिकार चौ. भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने दिलवाया नहीं, बल्कि यूं कहूंगा कि उन्होंने ही दिया है और उन्होंने ये जो कार्य किया है, उसके लिए हमारी कौम उनकी सदा-सदा के लिए ऋणी रहेगी। इसीलिए हम लोगों को बगैर किसी राजनीतिक पार्टी के, भेदभाव के सीधे तौर पर चौ. भूपेंद्र सिंह हुड्डा का ऋणी रहना चाहिए। जो नहीं रहेगा, मैं उसे अहसान फरामोश समझूंगा और ऐसा होना जाट चरित्र का बिल्कुल भी गुण नहीं है। सभी को नमस्कार, गुड आफ्टर नून, सलाम वालेकम और जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल--चौ. भूपेंद्र सिंह हुड्डा जीये हजारों साल। जय जाट।See More
 
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16 अगस्त के आंदोलन के लिए पूरे हरियाणा में प्रचार अभियान 5 अगस्त से : सांगवान
आज अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति की जिला भिवानी कार्यकारिणी की एक बैठक जाट धर्मशाला, भिवानी में कैप्टन सोहनलाल श्योराण की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें भिवानी जिले में, 16 अगस्त को दिल्ली में होने वाली जाट आक्रोश रैली के प्रचार अभियान के लिए आठ पार्टियां नियुक्त की गईं, जिनको प्रचार सामग्री भी वितरित की गई। समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने बतलाया कि जिन पदाधिकारियों ...को इन पार्टियों की कमान सौंपी गई, उनमें कैप्टन सोहनलाल, रामकुमार पूर्व सरपंच, कपूर सिंह धनाना, सूबेदार बलवान सिंह, चौ. मौजीराम, धर्मपाल अटेला, जंगबीर अलखपुरा व सूबेदार सुमेर सिंह भांडवा शामिल हैं। उन्होंने बताया कि सिवानी व बहल की प्रचार पार्टियों का पहले ही गठन किया जा चुका है।
श्री सांगवान ने आगे बताया कि हरियाणा में जाट आरक्षण लागू हो चुका है और प्रदेश के कॉलेजों में तो जाटों के जिन बच्चों ने दाखिले के लिए प्रमाण-पत्र लगाए, उन सभी को दाखिले भी मिल रहे हैं। अभी केंद्र स्तर पर आरक्षण लेने के लिए जाट समाज में भारी उत्साह है, लेकिन केंद्र में हो रही देरी के कारण जाट समाज में आक्रोश भी है और इसी कारण दिल्ली के जंतर-मंतर पर जाटों का यह आक्रोश एक आक्रोश रैली के रूप में परिवर्तित हो जाएगा।
बैठक में कमांडेंट रामपाल के उस बयान की सर्वसम्मति से कड़ी निंदा की गई, जिसमें उन्होंने पूर्व सैनिकों व अर्धसैनिकों को रेवाड़ी में प्रस्तावित नरेंद्र मोदी की रैली में आने के लिए आह्वान किया था। इसलिए बैठक में फैसला लिया गया कि इस प्रकार से सेवानिवृत सैनिकों व अर्धसैनिकों के राजनीतिक शोषण को किसी प्रकार से भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और न ही ये लोग किसी भी राजनीतिक रैली में एक संगठन के तौर पर सम्मिलित होंगे क्योंकि इस प्रकार की राजनीतिक रैलियों से केवल राजनीतिक शोषण ही नहीं, धार्मिक व आर्थिक शोषण भी होता है।
बैठक में कपूर सिंह धनाना, रघुबीर सिंह बूरा, जगत सिंह मिताथल, ओमपाल आर्य, दयाकिशन, वेदसिंह, मीरसिंह, सूबेदार कलीराम, राजसिंह कार्यवाहक अध्यक्ष जाटू खाप 84, कैप्टन भोपाल सिंह, अत्तरसिंह दलाल, मौजीराम सांगवान, धर्मपाल अटेला, रामकुमार धुआं, बनीसिह नंबरदार, सूबेदार सुमेरसिंह, सूबेदार जीवनसिंह पूर्व सरपंच, सरूपसिंह, दफेदार करतार सिंह, कैप्टन ईश्वरसिंह, ईश्वरसिंह श्योराण, रणसिंह सांगवान, सूबेदार बलवान सिंह, सूबेदार उमेदसिंह, हरकेश सिंगल, जोगेंद्र सिंह तालू, राजसिंह घणघस, राजकुमार जताई, कृष्ण बलहारा, सूबेसिंह, मा टेकचंद, जगबीर सिंह तोशाम, सोमबीर, जोगेंद्र, बिजेंद्र धनाना, एडवोकेट राजनारायण पंघाल, एडवोकेट रमेश सांगवान, एडवोकेट विरेंद्र दूहन, मास्टर राजबीर पातूवास, धर्मपाल श्योराण, प्यारेलाल सांगवान, शक्तिपाल व प्रताप सिंह गिगनाऊ आदि सैंकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे।See More
 
16 अगस्त के आंदोलन के लिए खापों को किया आमंत्रित
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि 16 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाली जाट आक्रोश रैली में शामिल होने के लिए सभी खापों को भी आमंत्रित किया गया है और उन्हें आशा है कि सभी खापें आंदोलन में बढ़-चढक़र हिस्सा लेंगी, जिस प्रकार मार्च, 2011 में रेल रोको आंदोलन के दौ...रान खापों ने पूरा समर्थन और सहयोग दिया, जिस कारण आंदोलन सफल हो पाया और हरियाणा राज्य में जाट समाज को आरक्षण मिला। सांगवान ने इस बात के लिए आश्चर्य प्रकट किया कि कुछ जाट जो कल तक यह कह रहे थे कि हरियाणा में आरक्षण नहीं मिला है तथा यह केवल एक लॉलीपाप है, तो वे किस आधार पर केंद्र सरकार से आरक्षण मांगने जाएंगे, अगर वे कहते हैं कि राज्य में आरक्षण लागू ही नहीं है।
सांगवान ने आगे बतलाया कि उन्होंने बार-बार यह बयान दिया है कि जाट समाज को किसी प्रकार के बहकावे में आने की आवश्यकता नहीं है। कुछ राजनीति से प्रेरित लोग शुरू से ही दुष्प्रचार में लगे हैं लेकिन समय आने पर समाज ऐसे लोगों को माफ नहीं करेगा क्योंकि इनके दुष्प्रचार से हमारे काफी बच्चे जाति प्रमाण पत्र नहीं बनवा पाए और वे कॉलेजों में दाखिले से वंचित रह गए।
 
लगता है केंद्र में जाटों के साथ आरक्षण के बारे में धोखा हो रहा है
प्यारे दोस्तो,
आपको याद होगा कि कुछ समय पहले हम केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री सुश्री शैलजा कुमारी से मिले थे और उन्होंने कहा था कि जाटों के आरक्षण के बारे में केंद्र स्तर पर कार्रवाई हो रही है और जल्दी ही उनका हक दे दिया जाएगा। जब मैंने कहा कि यदि समय रहते हमें केंद्र स्तर पर आरक्षण नहीं मिला तो हमें दिल्ली में आकर इस बुढ़ापे में ...सिर फुड़वाना पड़ेंगा तो इस पर मैडम ने कहा कि ऐसा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
लेकिन आज लगभग 11 बजे हमारे संगठन से अंबाला और नाराणगढ़ के क्षेत्र से लगभग 100 आदमी उनके निवास पर पर अंबाला में आरक्षण के बारे में मिले तो मैडम का कहना था कि हरियाणा सरकार से अभी तक उन्हें किसी प्रकार का आरक्षण के बारे में कोई प्रस्ताव नहीं मिला है कि किन-किन जातियों को केंद्र में ओबीसी का आरक्षण देना है, जबकि उन्हें गुजरात से इस प्रकार का प्रस्ताव मिल चुका है। इससे स्पष्ट है कि मैडम शैलजा कुमारी के दिल में हमारी जाति के प्रति कहीं खोट है क्योंकि हम सभी जानते हैं कि राज्य सरकार ने हरियाणा पिछड़ा आयोग की रिपोर्ट दिसंबर, 2012 में ही भेज दी थी। यदि ऐसा नहीं था तो जब मैं और मेरे साथी उनके दिल्ली कार्यालय में मिले तो उन्हें ऐसा ही हमको कहना चाहिए था। वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग का अध्यक्ष मई, 2012 में सेवानिवृत हो गए थे और आज तक उनकी जगह कोई अध्यक्ष नहीं लगाया गया है, जो कि सामाजिक न्याय मंत्रालय के द्वारा ही उसकी नियुक्ति होनी है, जिसके लिए शैलजा कुमारी ही जिम्मेवार हैं।
यह सर्वविदित है कि चौ. भूपेंद्र सिंह हुड्डा और सुश्री शैलजा कुमार का राजनीति में 36 का आंकड़ा है और हो सकता है कि उनकी आपस में कोई दुश्मनी हो। लेकिन ये मेरी समझ से बाहर है कि शैलजा कुमारी की जाट समाज से क्या दुश्मनी है। हमारे जाट समाज की तो शैलजा कुमारी और उनकी जाति से कोई दुश्मनी नहीं है। हमने तो सदियों तक आपस में मिल-जुलकर खेतों में काम किया है और वो समय मुझे तो अच्छी तरह याद है, लेकिन फिर भी शैलजा कुमारी जाटों से कोई दुश्मनी रखती हैं तो उन्हें अपना इरादा साफ कर देना चाहिए। लेकिन इस प्रकार से जाट समाज की पीठ में छुरा नहीं भोंकना चाहिए।
इससे स्पष्ट है कि जाटों के साथ हर हालत में केंद्र स्तर पर धोखा हो रहा है और अब समय आ गया है कि जाट समाज केंद्र में आरक्षण लेने के लिए 16 अगस्त को आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार हो जाए। मैं मेरे सभी जाट दोस्तों से निवेदन करता हूं कि वे स्वयं व अपने रिश्तेदारों तथा दोस्तों आदि को इस बारे में सूचित करें और सभी भाई-बहनों को अपने अधिकार के लिए 16 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहुंचने का निवेदन करें। दुनिया में कोई भी अधिकार किसी को भी बगैर संघर्ष के नहीं मिलता है, फिर जाट समाज को आसानी से यह अधिकार मिलने वाला नहीं। इसीलिए हमें हर हालत में लड़ाई लडऩी होगी। सभी भाई-बहन मानसिक और शारीरिक तौर पर अपने अधिकार के लिए खड़े हो जाएं और ये वादा करें कि किसी भी हालत में जब तक हमारा अधिकार नहीं मिलता है, हम चैन से बैठने वाले नहीं। जय जाट।See More
 
जाट आरक्षण पर सुश्री शैलजा कुमारी की नीयत साफ नहीं लगती : सांगवान
भिवानी। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने एक बयान में कहा कि सुश्री शैलजा कुमारी की नीयत जाट आरक्षण के प्रति साफ नहीं लगती है क्योंकि जब संघर्ष समिति का एक प्रतिनिधिमंडल 26 अप्रैल को मेरी अगुवाई में दिल्ली में शैलजा कुमारी के कार्यालय में उनसे मिला तो उनका साफ-साफ कहना था कि जाट आ...रक्षण पर सकारात्मक कार्रवाई चल रही है। जब मैंने उनसे कहा कि समय रहते आरक्षण नहीं मिला तो हमें मजबूरन होकर दिल्ली में आंदोलन करना पड़ेगा, जिससे आम आदमी को भी परेशानी होगी, इस पर उन्होंने कहा था कि ऐसा अवसर नहीं आने दिया जाएगा, लेकिन जब हाल ही में तीन अगस्त को अंबाला और नारायणगढ़ जिलों की हमारी संघर्ष समितियों का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिला तो उन्होंने कहा कि अभी तक उनको हरियाणा सरकार से आरक्षण के बारे में कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। इससे लगता है कि उनकी नियत साफ नहीं है वर्ना ऐसी कोई बात थी तो हमें भी 26 अप्रैल को कह सकती थीं, जबकि हरियाणा सरकार ने जाट, सिख जाट, रोड, त्यागी व बिश्रोई जातियों को केंद्र में ओबीसी में शामिल करने के लिए अपना प्रस्ताव दिसंबर, 2012 में ही भेज दिया था।
सांगवान ने आगे कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री चौ. भूपेंद्र ङ्क्षसह हुड्डा और केंद्रीय मंत्री सुश्री शैलजा कुमारी के आपस में कोई राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन हमारे जाट समाज का न ही तो सुश्री शैलजा कुमारी से और न ही उनकी जाति से किसी भी प्रकार का कोई भी मतभेद है। दोनों ही जातियों ने मिलकर खेतों में काम किया है और एक कमाऊ वर्ग से संबंध रखते हैं। सुश्री शैलजा कुमारी का यह बार-बार बयान देना तर्कसंगत नहीं है कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने केवल एक ही जाति और एक ही क्षेत्र में कार्य किया है क्योंकि सोनीपत, रोहतक और झज्जर जिले में जितने भी कार्य हुए हैं, वे सभी पूरे हरियाणा के लोगों को भी उसी रूप से काम आने वाले हैं। जहां तक इस क्षेत्र में अच्छी सडक़ों की बात है, वे केवल हरियाणा के लोगों के ही काम नहीं आ रही हैं, बल्कि पंजाब, जम्मू -कश्मीर और राजस्थान के कई जिलों के लोग इधर से ही होकर राजधानी दिल्ली जाते हैं। भिवानी के लोगों को पहले दिल्ली पहुंचने के लिए जहां चार घंटे लग जाते थे, वहीं अब मात्र ढ़ाई घंटे में दिल्ली पहुंचा जा सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि सत्ता मिलने पर अपने क्षेत्र में अधिक से अधिक विकास कार्य सभी नेता करवाते रहे हैं और करवा भी रहे हैं। इसलिए शैलजा कुमारी को नकारात्मक राजनीति छोडक़र अपने क्षेत्र तथा दलित समाज के लिए ऐसे कार्य करने चाहिएं, जिन्हें आने वाले समय में याद रखा जा सके।See More
 
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