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केंद्र में जाट आरक्षण के लिए आंदोलन 16 अगस्त से निश्चित : सांगवान
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बतलाया कि संघर्ष समिति की कार्यकारिणी की सोनीपत में हुई बैठक के अंतिम दौर में यह निर्णय लिया गया है कि केंद्र सरकार को जाटों को केंद्र में आरक्षण देने के लिए जो चार महीने का समय दिया था, वह 18 जुलाई को समाप्त हो जाएगा और लगता नहीं कि केंद्र सरकार इस अवधि में जाटों को आरक्षण दे देगी। इसलिए संघर्ष समिति को मजबूर होकर 16 अगस्त से दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक जबरदस्त आंदोलन करना पड़ेगा। इस आंदोलन की रूपरेखा का 21 जुलाई को रोहतक की चौ. छोटूराम धर्मशाला में होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में खुलासा कर दिया जाएगा।
सांगवान ने बतलाया कि यह भी फैसला लिया गया है कि इस आंदोलन में कोई धरना या भूख हड़ताल नहीं की जाएगी बल्कि जंतर-मंतर से एक कूच किया जाएगा जिसकी घोषणा वहीं जंतर-मंतर पर कर दी जाएगी। जाटों का यह कूच शांतिपूर्वक होगा, लेकिन फिर भी केंद्र सरकार व दिल्ली प्रदेश की सरकार जाटों के साथ किसी प्रकार का बल प्रयोग करती है तो जाट इसका मुंहतोड़ जवाब देंगे। जाट किसी भी कीमत पर मैदान नहीं छोड़ेंगे और हर हालत में अपने उस उद्देश्य तक पहुंचेंगे। अब ये केंद्र सरकार पर है कि वह जाटों को आरक्षण देती है या जंतर-मंतर को जलियांवाला बाग बनाना चाहती है। जाटों ने ये फैसला बहुत सोच-विचारकर लिया है और आंदोलन पक्के इरादे तथा पूरी मानसिक और शारीरिक तैयारी के साथ किया जाएगा।
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बतलाया कि संघर्ष समिति की कार्यकारिणी की सोनीपत में हुई बैठक के अंतिम दौर में यह निर्णय लिया गया है कि केंद्र सरकार को जाटों को केंद्र में आरक्षण देने के लिए जो चार महीने का समय दिया था, वह 18 जुलाई को समाप्त हो जाएगा और लगता नहीं कि केंद्र सरकार इस अवधि में जाटों को आरक्षण दे देगी। इसलिए संघर्ष समिति को मजबूर होकर 16 अगस्त से दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक जबरदस्त आंदोलन करना पड़ेगा। इस आंदोलन की रूपरेखा का 21 जुलाई को रोहतक की चौ. छोटूराम धर्मशाला में होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में खुलासा कर दिया जाएगा।
सांगवान ने बतलाया कि यह भी फैसला लिया गया है कि इस आंदोलन में कोई धरना या भूख हड़ताल नहीं की जाएगी बल्कि जंतर-मंतर से एक कूच किया जाएगा जिसकी घोषणा वहीं जंतर-मंतर पर कर दी जाएगी। जाटों का यह कूच शांतिपूर्वक होगा, लेकिन फिर भी केंद्र सरकार व दिल्ली प्रदेश की सरकार जाटों के साथ किसी प्रकार का बल प्रयोग करती है तो जाट इसका मुंहतोड़ जवाब देंगे। जाट किसी भी कीमत पर मैदान नहीं छोड़ेंगे और हर हालत में अपने उस उद्देश्य तक पहुंचेंगे। अब ये केंद्र सरकार पर है कि वह जाटों को आरक्षण देती है या जंतर-मंतर को जलियांवाला बाग बनाना चाहती है। जाटों ने ये फैसला बहुत सोच-विचारकर लिया है और आंदोलन पक्के इरादे तथा पूरी मानसिक और शारीरिक तैयारी के साथ किया जाएगा।