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खापों ने लिया सही समय पर सही फैसला: सांगवान
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि जाट आरक्षण के मामले में खापों ने सही समय पर सही फैसला लिया है। जब हमने मार्च, 2011 में रेल रोको आंदोलन चलाया, तो खापों ने हमारा पूरा सहयोग किया था और हमें आशा है कि आवश्यकता पडऩे पर भविष्य में भी हमारा पूरा-पूरा सहयोग करेंगी, लेकिन बड़े आश्चर्य की बात है कि जिन तथाकथित संगठनों ने खापों को लिखित रूप में दिया था, वही लोग आज खापों के पुतले जला रहे हैं, ऐसे लोगों का आरक्षण से कोई लेना-देना नहीं। वे केवल अपनी राजनीति चमका रहे हैं और साथ-साथ पैसा भी इक_ा कर रहे हैं। सांगवान ने आगे बतलाया कि दूसरे लोग जो जाटों के आरक्षण का विरोध कर रहे हैं, उससे यह सर्वसिद्ध है कि हरियाणा पिछड़ा आयोग की रिपोर्ट जाट समाज के पूर्णतया हक में है। यदि कोई भी जाट आरक्षण के विरोध में न्यायालय जाएगा तो इसके लिए हरियाणा सरकार स्वयं उसका बचाव करेगी। यह आश्वासन मुख्यमंत्री ने स्वयं दिया है। हमारी संघर्ष समिति हरियाणा सरकार द्वारा जारी किए जाने वाली अधिसूचना का इंतजार करेगी और केंद्र में जाटों को ओबीसी में सम्मिलित करने के लिए जल्दी ही केंद्रीय नेताओं से मिलेगी जिसके लिए 30 दिसंबर को छोटूराम धर्मशाला रोहतक में संघर्ष समिति की कार्यकारिणी अपनी भविष्य की रूपरेखा तैयार करेगी।
सांगवान ने आगे बतलाया कि आयोग की रिपोर्ट ने चौधरी ओमप्रकाश चौटाला तथा चौधरी कुलदीप बिश्रोई की मांग को भी पूरा कर दिया है क्योंकि उनकी मांग थी कि बी.सी के 27 प्रतिशत कोटे मेें छेड़छाड़ न की जाए और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आरक्षण दिया जाए। आयोग ने 27 प्रतिशत में कोई भी छेड़छाड़ नहीं की और उच्च जातियों के आर्थिक तौर पर पिछड़े लोगों के लिए अलग से दस प्रतिशत का प्रावधान भी कर दिया है। इसलिए आयोग की रिपोर्ट पर इन नेताओं द्वारा उंगली उठाया जाना तर्कसंगत नहीं है।
संघर्ष समिति हरियाणा पिछड़ा आयोग के अध्यक्ष तथा सभी सदस्यों का धन्यवाद करती है कि उन्होंने रात-दिन कड़ी मेहनत करके अपनी रिपोर्ट को तैयार किया। इसके साथ-साथ हम दूसरे लोगों का भी धन्यवाद करते हैं जिन्होंने आज तक की मुहिम में हमारा किसी न किसी रूप में साथ दिया तथा भविष्य में भी साथ देने की हम आशा रखते हैं।
इस अवसर पर उनके साथ रघुबीर सिंह बूरा, नत्थूराम आर्य, ओमपाल आर्य, जोगेंद्र तालू, सूबेदार उमेदसिंह बामला, जगतसिंह मिताथल, सूबेदार कलीराम, चौ. कपूर सिंह, राजसिंह धनाना व कुलदीप फौगाट आदि साथ थे।
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि जाट आरक्षण के मामले में खापों ने सही समय पर सही फैसला लिया है। जब हमने मार्च, 2011 में रेल रोको आंदोलन चलाया, तो खापों ने हमारा पूरा सहयोग किया था और हमें आशा है कि आवश्यकता पडऩे पर भविष्य में भी हमारा पूरा-पूरा सहयोग करेंगी, लेकिन बड़े आश्चर्य की बात है कि जिन तथाकथित संगठनों ने खापों को लिखित रूप में दिया था, वही लोग आज खापों के पुतले जला रहे हैं, ऐसे लोगों का आरक्षण से कोई लेना-देना नहीं। वे केवल अपनी राजनीति चमका रहे हैं और साथ-साथ पैसा भी इक_ा कर रहे हैं। सांगवान ने आगे बतलाया कि दूसरे लोग जो जाटों के आरक्षण का विरोध कर रहे हैं, उससे यह सर्वसिद्ध है कि हरियाणा पिछड़ा आयोग की रिपोर्ट जाट समाज के पूर्णतया हक में है। यदि कोई भी जाट आरक्षण के विरोध में न्यायालय जाएगा तो इसके लिए हरियाणा सरकार स्वयं उसका बचाव करेगी। यह आश्वासन मुख्यमंत्री ने स्वयं दिया है। हमारी संघर्ष समिति हरियाणा सरकार द्वारा जारी किए जाने वाली अधिसूचना का इंतजार करेगी और केंद्र में जाटों को ओबीसी में सम्मिलित करने के लिए जल्दी ही केंद्रीय नेताओं से मिलेगी जिसके लिए 30 दिसंबर को छोटूराम धर्मशाला रोहतक में संघर्ष समिति की कार्यकारिणी अपनी भविष्य की रूपरेखा तैयार करेगी।
सांगवान ने आगे बतलाया कि आयोग की रिपोर्ट ने चौधरी ओमप्रकाश चौटाला तथा चौधरी कुलदीप बिश्रोई की मांग को भी पूरा कर दिया है क्योंकि उनकी मांग थी कि बी.सी के 27 प्रतिशत कोटे मेें छेड़छाड़ न की जाए और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आरक्षण दिया जाए। आयोग ने 27 प्रतिशत में कोई भी छेड़छाड़ नहीं की और उच्च जातियों के आर्थिक तौर पर पिछड़े लोगों के लिए अलग से दस प्रतिशत का प्रावधान भी कर दिया है। इसलिए आयोग की रिपोर्ट पर इन नेताओं द्वारा उंगली उठाया जाना तर्कसंगत नहीं है।
संघर्ष समिति हरियाणा पिछड़ा आयोग के अध्यक्ष तथा सभी सदस्यों का धन्यवाद करती है कि उन्होंने रात-दिन कड़ी मेहनत करके अपनी रिपोर्ट को तैयार किया। इसके साथ-साथ हम दूसरे लोगों का भी धन्यवाद करते हैं जिन्होंने आज तक की मुहिम में हमारा किसी न किसी रूप में साथ दिया तथा भविष्य में भी साथ देने की हम आशा रखते हैं।
इस अवसर पर उनके साथ रघुबीर सिंह बूरा, नत्थूराम आर्य, ओमपाल आर्य, जोगेंद्र तालू, सूबेदार उमेदसिंह बामला, जगतसिंह मिताथल, सूबेदार कलीराम, चौ. कपूर सिंह, राजसिंह धनाना व कुलदीप फौगाट आदि साथ थे।