RLD and congress are forming alliance in UP

jitender_singh

New member
RLD aur Congress UP main alliance banane ki taiyaree main hain..

kuch demands hain CH.Ajit singh ki.

1.reservation for jats in centre:)
2. Bharat ratan for CH.Charan singh
3. Harit pradesh.

here is the link

राज्यसभा चुनाव के बहाने
पश्चिमी यूपी में कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल के बीच नए राजनैतिक समीकरण के संकेत मिलने शुरू हो गए हैं। गठबंधन या विलय की शर्तों को लेकर इस समय कांग्रेस और आरएलडी के शीर्ष नेतृत्व के बीच बैठकों का दौर शुरू हो चुका है।

कांग्रेस की तरफ से राहुल गांधी सीधे इस मुद्दे पर अजित सिंह और जयंत चौधरी के संपर्क में हैं। ये संपर्क हाल ही में यूपी से राज्यसभा का चुनाव लड़ने जा रहे कैप्टन सतीश शर्मा के माध्यम से बने हैं। अजित सिंह को केंद्र में मंत्री पद की पेशकश भी दी गई है। वे चौधरी चरण सिंह के लिए भारत रत्न भी चाहते हैं।

पश्चिमी यूपी के राजनैतिक घटनाक्रम पर नजर रखने वाले राजनैतिक विश्लेषकों के अनुसार मिशन -2012 के लिए कांग्रेस वैसे तो अकेले ही चुनाव मैदान में उतरने की रणनीति बना रही है , लेकिन वह अपने ऐसे सहयोगियों को साथ लेकर चुनाव लड़ना चाहती है , जो माया के खिलाफ मुकाबले में अहम भूमिका निभा सकें।

यूपी की सत्ता में खास जगह रखने वाला राष्ट्रीय लोकदल पश्चिमी यूपी के एक दर्जन जिलों के जाट बहुल इलाकों में लगभग 80 विधानसभा क्षेत्र के चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। इस समय आरएलडी के लोकसभा में 5 और यूपी विधानसभा में 10 सदस्य हैं। पश्चिमी यूपी के सहारनपुर , मुजफ्फरनगर , बागपत , गाजियाबाद , बुलंदशहर , मुरादाबाद , अमरोहा , मथुरा , अलीगढ़ , आगरा और फिरोजाबाद जैसे जिलों में जाटों का इन क्षेत्रों में खासा योगदान है।

सूत्रों ने बताया कि अभी तक के संकेत बता रहे हैं कि राहुल गांधी आरएलडी का कांग्रेस में विलय चाहते हैं। इससे कम पर वे तैयार नहीं हैं। इसके अलावा अजित सिंह और कांग्रेस के बीच अनुराधा चौधरी को लेकर विरोध है। इसके साथ ही अजित सिंह के कार्यकर्ता विलय की बजाय अलग चुनाव लड़ने के पक्ष में हैं। इस पर अजित सिंह को अभी फैसला लेना है।


 
राजनैतिक गलियारों से मिली जानकारी के अनुसार हाल ही में अजित सिंह ने जब कांग्रेस को राज्यसभा में कैप्टन सतीश शर्मा के समर्थन में आने की बात कही तब ही इस समीकरण को बल मिला है। सूत्रों का यहां तक कहना है कि अजित सिंह और जयंत चौधरी के साथ राहुल गांधी की जो बातचीत हुई है , इसमें अजित सिंह ने 3 शर्तें रखी हैं। इनमें पहली शर्त जाटों को केंद्र सरकार की नौकरियों में रिजर्वेशन , दूसरी चौ . चरण सिंह को भारत रत्न और तीसरा हरित प्रदेश के मुद्दे पर केंद्र से समर्थन प्राप्त करना।

तीनों मुद्दों पर कांग्रेस आला कमान अजित सिंह के साथ सहमत हैं। इस विलय के बदले में कांग्रेस अजित सिंह को केंद्र में मंत्री पद , जयंत चौधरी को कांग्रेस संगठन में राष्ट्रीय पद देने की पेशकश की है। इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है , बल्कि अभी मंथन चल रहा है। अजित सिंह राज्यसभा चुनावों में कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन करने की घोषणा कर इस बात का संकेत दे चुके हैं कि आने वाले टाइम में दोनों के बीच अच्छा तालमेल हो सकता है।

 
हा बागपत लोकसभा के जाट हिजड़े है

राजनैतिक गलियारों से मिली जानकारी के अनुसार हाल ही में अजित सिंह ने जब कांग्रेस को राज्यसभा में कैप्टन सतीश शर्मा के समर्थन में आने की बात कही तब ही इस समीकरण को बल मिला है। सूत्रों का यहां तक कहना है कि अजित सिंह और जयंत चौधरी के साथ राहुल गांधी की जो बातचीत हुई है , इसमें अजित सिंह ने 3 शर्तें रखी हैं। इनमें पहली शर्त जाटों को केंद्र सरकार की नौकरियों में रिजर्वेशन , दूसरी चौ . चरण सिंह को भारत रत्न और तीसरा हरित प्रदेश के मुद्दे पर केंद्र से समर्थन प्राप्त करना।

तीनों मुद्दों पर कांग्रेस आला कमान अजित सिंह के साथ सहमत हैं। इस विलय के बदले में कांग्रेस अजित सिंह को केंद्र में मंत्री पद , जयंत चौधरी को कांग्रेस संगठन में राष्ट्रीय पद देने की पेशकश की है। इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है , बल्कि अभी मंथन चल रहा है। अजित सिंह राज्यसभा चुनावों में कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन करने की घोषणा कर इस बात का संकेत दे चुके हैं कि आने वाले टाइम में दोनों के बीच अच्छा तालमेल हो सकता है।


I read it on orkut :

हा हम बागपत लोकसभा के जाट वो हिजड़े है जिस पर पूरी जाट कौम आज शर्मशार हो गयी है| यह बात गाँव बावली (बागपत) के वेदपाल तोमर ने कही| उनका कहना था जब मुज्ज़ेफर्र्न्गर, मुरादाबाद, आगरा, अलीगढ, हरयाणा, पंजाब , हिमाचल, जम्मू कश्मीर का जाट वहा मुरादनगर नेहर पर कई हजार पुलिसवालो की बन्दूको की छाव में भूखा प्यासा पड़ा हुआ था तब हम यहाँ रालोद नेता अजित सिंह के दिशानुसार घर से बहार भी नहीं निकले| सिरसली के एक जाट युवक अनिल तोमर का कहेना था आज हम पूरे बागपत लोकसभा के जाट अपनी ही कौम के आगे नंगे हो गए वहा मुरादनगर गंग नेहर पर आये हुए पुरे देश के जाटों ने आकार जिस तरह आरक्षण के लिए संगर्ष किया उसको देखते हुए हम बागपत के जाट अपनी ही आँखों में गिर गए| बिजरोल गाव के मनोज तोमर ने कहा के यहाँ बागपत के जाटों को शायद यह लगता है के अगर हम जाट आरक्षण के लिए केंद्र सरकार से मांगे करते है या यहाँ बागपत के पिछड़ेपन के लिए आवाज़ उठाते है तो चौधरी चरण सिंह और अजित की वसीयत से उन्हें बेदखल कर दिया जायेगा|
आज जिस तरह से देश का पूरा जाट समाज सिवाए बागपत जाटों के, जिस तरह यशपाल मालिक दुआरा के किये गए जाट आरक्षण के आन्दोलन की सराहना कर रहा है| उसे देख कर यही लगता है के आने वाले समय में चौ. अजित सिंह और उनके परिवार की राजनीति की दुकान हमेशा के लिए बंद हो जाएगी|
 
I read it on orkut :

हा हम बागपत लोकसभा के जाट वो हिजड़े है जिस पर पूरी जाट कौम आज शर्मशार हो गयी है| यह बात गाँव बावली (बागपत) के वेदपाल तोमर ने कही| उनका कहना था जब मुज्ज़ेफर्र्न्गर, मुरादाबाद, आगरा, अलीगढ, हरयाणा, पंजाब , हिमाचल, जम्मू कश्मीर का जाट वहा मुरादनगर नेहर पर कई हजार पुलिसवालो की बन्दूको की छाव में भूखा प्यासा पड़ा हुआ था तब हम यहाँ रालोद नेता अजित सिंह के दिशानुसार घर से बहार भी नहीं निकले| सिरसली के एक जाट युवक अनिल तोमर का कहेना था आज हम पूरे बागपत लोकसभा के जाट अपनी ही कौम के आगे नंगे हो गए वहा मुरादनगर गंग नेहर पर आये हुए पुरे देश के जाटों ने आकार जिस तरह आरक्षण के लिए संगर्ष किया उसको देखते हुए हम बागपत के जाट अपनी ही आँखों में गिर गए| बिजरोल गाव के मनोज तोमर ने कहा के यहाँ बागपत के जाटों को शायद यह लगता है के अगर हम जाट आरक्षण के लिए केंद्र सरकार से मांगे करते है या यहाँ बागपत के पिछड़ेपन के लिए आवाज़ उठाते है तो चौधरी चरण सिंह और अजित की वसीयत से उन्हें बेदखल कर दिया जायेगा|
आज जिस तरह से देश का पूरा जाट समाज सिवाए बागपत जाटों के, जिस तरह यशपाल मालिक दुआरा के किये गए जाट आरक्षण के आन्दोलन की सराहना कर रहा है| उसे देख कर यही लगता है के आने वाले समय में चौ. अजित सिंह और उनके परिवार की राजनीति की दुकान हमेशा के लिए बंद हो जाएगी|

Bhai yashpal malik ke jivan pe bhi prakash dalain ........ Kya usmain samaj ko lead karne ki achhi yogyata ha ...... Ya fir ye sab kaam congress ke isare pe ho raha ha...... Pahale se sthapit jaton ko khatam karne ke liye.....???
Jaise hamare rajasthan main baisala ne BJP ke isare pe gujaron ko bawala banaya. wasi kahani to nahin ha.
Aur Jayant chaudhary main dum ha ya wo apne pita ki hi taraha ha.
 
Bhai Piyush,

Jayant Chaudhary bhi aisa hi hai jaisey ye hai is parivaar ko to pata hai eh yke JAT ko sirf aur sirf kheti mein lagaye rakho usey bahar ki duniya se door rakho..JAT jitna backward hoga NETA bhi kam honey aur inki dukan chalti rahegi.
 
भाई यशपाल मालिक फिलहाल तो किसे राजनीतिक दल से नहीं हैं | जो ये प्रदर्शन हुआ था किसे राजनीतिक दल के शय पर नहीं हुआ यह सिर्फ जाटों ने किया था | रही बात अजित सिंह परिवार की तो मंडल कमिसन ने अपनी रिपोर्ट में चौ.चरण सिंह को एक पिछड़ी जाति का नेता लिखा हैं , उसके बावजूद भी चौ साहब ने जाटों को आरक्षण देने की मांग नहीं की | जब कमिसन उन्हें खुद कबूल कर रहा हैं की वो पिछड़ी जाति से हैं फेर उन्हें मांग करने में क्या दिक्कत थी ? अजित सिंह जी के चरित्र और चित्र का सब को पता हैं कैसा हैं इनका नहीं पता कब कौम को बेच दे | फिर भी ये भोले जाट इस परिवार पर नाज करते हैं |
 
http://epaper.amarujala.com/svww_zo...&itop=72&zoomRatio=130&AN=20100615a_008108005
अजित आरक्षण दिला दें आंदोलन खत्म कर देंगे यशपाल मलिक ने कहा-सभी जाट नेताओं से इस मुद्दे पर किया था संपर्क,
जब कुछ न किया तो शुरू किया आंदोलन

गाजियाबाद। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा कि रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह जाटों को आरक्षण दिला दें वे उसी क्षण अपना आंदोलन समाप्त कर देंगे। मलिक ने कहा कि उनका मकसद जाटों को आरक्षण दिलाना है। उन्हें भी पता है कि रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह की कांग्रेस से बातचीत चल रही है। अजित सिंह चाहे तो संसद में भी जाटों के आरक्षण के मुद्दे को उठा सकते हैं, लेकिन अभी तक ऐसा हुआ नहीं है।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में मलिक ने कहा कि जाटों के लिए आरक्षण की लड़ई शुरू करने से पहले वे देश के सभी जाट नेताओं के पास गए थे। आरक्षण के मुद्दे पर सबको ज्ञापन दिया गया था। लेकिन किसी ने कोई रुचि नहीं ली। इसलिए उन्हें मैदान में उतरना पड़। उनका आंदोलन पूरी तरह से गैर राजनीतिक है। फिर भी किसी राजनीतिक दल को समर्थन करना है तो उसके लिए दरवाजे खुले हैं। विभिन्न पार्टियों के जाट नेता आरक्षण आंदोलन को समर्थन की घोषणा करें। जाट पिछड़ है ये रिपोर्ट भी केंद्र सरकार के पास है। फिर भी जाटों को ओबीसी में शामिल नहीं किया जा रहा है। उन्होंने ये भी कहा कि जाटों के बल पर राजनीति करने वालों ने जाटों के लिए अभी तक कुछ नहीं किया है। जाटों के दम पर किसान नेता तो बन गए लेकिन आज तक जाटों को आरक्षण नहीं दिला पाए। मलिक ने कहा कि दिल्ली का पानी रोकना तो अभी ट्रेलर है। पिक्चर तो अभी बाकी है। आरक्षण नहीं मिला तो कॉमनवेल्थ गेम्स भी नहीं होने देंगे। इसकी भी पूरी तैयारी कर ली है। दिल्ली का गैस, तेल, दूध, सब्जी आदि सारी सप्लाई बंद कर दी जाएगी। इसके लिए सोनीपत, पानीपत, मथुरा और अमरोहा में जाटों की पंचायत हो चुकी हैं। केंद्र सरकार ने अगर जाटों की मांगों को हल्के में लिया तो दोबारा इससे भी बड़ आंदोलन होगा।
लखनऊ से भी मिली आंदोलन को हवा
गाजियाबाद। दिल्ली का पानी रोककर आरक्षण की मांग को लेकर शुरू किए गए आंदोलन को लखनऊ से भी हवा मिल रही थी। मुख्यमंत्री के जाट आरक्षण को समर्थन देने यह साफ हो गया है। पश्चिमी यूपी जाट बेल्ट होने से रालोद प्रमुख चौधरी अजित सिंह का गढ़ मानी जाती है। जाट आरक्षण का पत्ता खेलकर बसपा प्रमुख मायावती ने अजित सिंह के गढ़ में सेंध लगाने का काम किया है। रालोद के नेताओं को इसकी भनक थी तभी तो वे जाटों के इस आंदोलन में नजर नहीं आए।
जाटों ने गंगा जल प्लांट पर कब्जा कर दिल्ली का पानी रोक दिया और पुलिस-प्रशासन ने कुछ नहीं किया। अफसर सिर्फ जाटों को समझाते नजर आए। रात भर यशपाल मलिक की मानमनव्वल होती रही। प्रशासन चाहता तो जाट मुरादनगर गंग नहर से दिल्ली जाने वाले पानी को नहीं रोक पाते। मगर पुलिस-प्रशासन जाटों के आगे बेकफुट पर ही नजर आया। इसका प्रमुख कारण प्रदेश की मुखिया खुद जाटों को आरक्षण दिए जाने के पक्ष था। इसे राजनीतिक दांव-पेंच माना जा रहा है। तभी तो बल प्रयोग करके भी पानी चालू कराने का प्रयास नहीं किया गया। जाट दिल्ली को हिलाना चाहते थे और उनकी मंशा भी पूरी हो गई। रविवार को जाट नेता सरकारी गेस्ट हाउस का भी इस्तेमाल कर रहे थे। उन्हें उसके लिए भी नहीं रोका गया। मामला बहुत हॉट हो गया। जो संदेश दिल्ली को दिया जाना था वह दिया जा चुका था। इसलिए सोमवार की सुबह पानी भी चालू करा दिया गया।
अगामी
विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो गई है। रालोद की नजदीकियां कांग्रेस से बढ़ है। बातचीत भी हुई है। चर्चा तेजी से फैली कि एक बार भी अजित सिंह कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं। इससे पहले की कोई निर्णय होता। बसपा प्रमुख ने अपना काम कर दिया। आरक्षण को लेकर जाट आरक्षण संघर्ष समिति के आंदोलन को हवा दे दी और बाद में समर्थन की घोषणा भी कर दी। मुख्यमंत्री ने समर्थन की घोषणा कर जाटों में पार्टी की जगह बनाने का प्रयास किया है। साथ ही केंद्र को भी ये संदेश दे दिया कि प्रदेश सरकार दिल्ली का पानी बंद करने के पक्ष में नहीं थी और आंदोलन नियंत्रित न करने पर डीएम गाजियाबाद को हटा दिया।
दिल्ली की बांह हुई कमजोर
गाजियाबाद। आरक्षण की मांग को लेकर जाटों ने दिल्ली की बांह मरोड़ने का काम किया है। मुरादनगर गंग नहर स्थित गंगा जल प्लांटों से दिल्ली की 40 प्रतिशत आबादी की प्यास बुझती है। जाटों के इस आंदोलन ने दिल्ली की कमजोर नस को उजागर कर दिया है। दिल्ली या केंद्र सरकार से मांग मनवाने के लिए अब हर संगठन और राजनीतिक दल की नजर इन प्लांटों पर ही रहेगी।
दिल्ली को पानी हरियाणा और यूपी की गंग नहर से मिलता है। सोनिया विहार और भागीरथी जल संयंत्र को प्रतिदिन 470 क्यूसैक पानी की सप्लाई होती है। दिल्ली की कमजोर ये पानी है। अगर जाटों ने दिल्ली का पानी बंद नहीं किया होता तो शायद इतनी जल्दी केंद्र सरकार नहीं जागती। भले ही इसके पीछे कोई भी राजनीति रही हो लेकिन दिल्ली को हिलाने का एक बड़ माध्यम ये गंगा जल प्लांट बन गए हैं। 20 घंटे ही सिर्फ पानी बंद रहा लेकिन इतने में ही दिल्ली सरकार के होश उड़ गए। दिल्ली में पहले से ही पानी की किल्लत है। उस पर अगर ये पानी भी बंद हो गया तो त्राही-त्राही मच जाती। जाट नेता यशपाल मलिक ने खुद माना कि उन्हें मीडिया के माध्यम से पता चला कि गंग नहर से पानी बंद होने से दिल्ली में स्थिति काफी खराब हो गई है। गर्मी में बिना पानी से स्थिति खराब हो जाती। इसलिए पानी को चालू कराने का निर्णय लिया।
यशपाल मलिक ने कहा-सभी जाट नेताओं से इस मुद्दे पर किया था संपर्क,
जब कुछ न किया तो शुरू किया आंदोलन
प्रतिनिधिमंडल के लौटने पर खिले जाटों के चेहरे
मुरादनगर। सोमवार को जाट आरक्षण समिति का 12 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल जैसे ही धरना स्थल पर लौटा, समाज के लोगों के चेहरे खिल गए। केंद्र सरकार ने भले ही जल्दबाजी में जाटों के प्रतिनिधि मंडल को आरक्षण के मुद्दे पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया हो, लेकिन कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में जाटों के निशाने पर कामनवेल्थ गेम्स हैं। जाटों ने जनपद और केंद्र सरकार के अधिकारियों को दो टूक कह दिया है कि यदि आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र सरकार ने चुप्पी साधी तो दस जुलाई के बाद उग्र आंदोलन किया जाएगा। इसके लिए ठोस रणनीति भी तय कर ली गई है।
लामबंद जाटों को संबोधित करते हुए आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा कि आश्वासन समस्या का समाधान नहीं है। लड़ई आगे भी जारी रहेगी। आरक्षण समिति सूत्रों की माने तो केंद्र सरकार ने कार्रवाई नहीं की तो बुलंदशहर जनपद में विदेशियों के लिए उगाई जा रही विदेशी सब्जियों के खेत उजाड़ दिए जाएंगे। इसके अलावा कामनवेल्थ गेम्स से पहले पानीपत और मुरादनगर से जलापूर्ति, मथुरा एवं सोनीपत रिफाइनरी से गैस आपूर्ति, अमरोहा से दूध और सब्जी की आपूर्ति पूरी तरह ठप कर दिया जाएगा।
आरक्षण आंदोलन पर चर्चा गरम
केंद्रीय नौकरियों में जाट आरक्षण को लेकर रविवार से लेकर सोमवार शाम तक जो कुछ हुआ उसको लेकर कई तरह की चर्चा गरम हैं। महापंचायत के आयोजन और दिल्ली की जलापूर्ति ठप होने को लेकर लोग प्रदेश के एक राजनीति दल के समर्थन की चर्चा करते दिखाई दिए। लोगों का यहां तक कहना है कि आरक्षण की लड़ई के बाहने राजनीतिक दल रालोद नेता अजीत सिंह के गढ़ में दूसरा कद्दावर जाट नेता तैयार कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं।
प्रतिनिधिमंडल में नहीं गए राष्ट्रीय अध्यक्ष
केंद्र सरकार में सोशल जस्टिस मंत्रालय के ज्वाइंट सेक्र्रेटरी से वार्ता के लिए गए प्रतिनिधिमंडल में संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद नहीं गए, बल्कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों को भेजकर संदेश भिजवा दिया कि मांग नहीं मानी तो आंदोलन और भी उग्र होगा। 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में एचपी परिहार, शूरवीर सिंह, पुष्पेंद्र चौधरी, सतपाल चौधरी, हवा सिंह सांगवान, धर्मपाल सिंह, रनसिंह शौकीन, राजेंद्र चिकारा, मांगेराम तेवतिया, कर्नल यामीन, चौधरी ज्ञानेंद्र सिंह आदि रहे।
आंदोलन के दूसरे दिन भी हावी रहे जाट
मुरादनगर। केंद्रीय नौकरियों में आरक्षण की मांग को लेकर लामबंद जाट मुरादनगर में दूसरे दिन भी जिला प्रशासन पर हावी रहे। सोमवार की सुबह जब डीएम और एसएसपी ने प्रतिनिधि मंडल दिल्ली भेजने की बात कहकर जाट नेताओं को धरना समाप्त करने का प्रस्ताव रखा तो जाटों ने दो टूक कह दिया कि प्रतिनिधि मंडल के लौटने तक धरना जारी रहेगा। इसी दौरान गांवों से ट्रैक्टर में खाना और भीड़ आते देख प्रशासनिक अधिकारियों की चिंता और बढ़ गई।
अखिल भारतीय जाट आरक्षण समिति ने महापंचायत से पूर्व ऐसी रणनीति बनाई कि जिला प्रशासन चारों खाने चित्त हो गया। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पहले ही पांच ट्रक खाने-पीने का समान अबूपुर, मनौटा और सुल्तानपुर में पहुंच चुका था। रणनीति के तहत प्रशासनिक दखलंदाजी होने पर हाईवे या रेलवे ट्रैक जाम करने की तैयारी थी, लेकिन रेगुलेटर से दिल्ली का पानी बंद करने की रणनीति गुपचुप बनाई गई।
रविवार को दिल्ली की जलापूर्ति ठप करने की रणनीति इतनी कामयाब होगी जाटों ने सोचा भी नहीं था। इसी का नतीजा था कि लामबंद जाट सोमवार को भी जिला प्रशासन के सामने केंद्र से आश्वासन नहीं मिलने तक धरना जारी रखने की जिद पर अड़ रहे। उन्होंने डीएम-एसएसपी से साफ तौर पर कह दिया कि यदि केंद्र सरकार के मंत्री और अधिकारी नहीं जागे तो जाट दोबारा दिल्ली जलापूर्ति ठप कर देंगे। किसी प्रकार अधिकारियों ने सामाजिक न्याय मंत्रालय के दो सेक्रेटरी का हवाला देकर संघर्ष समिति को मनाया, तब जाकर दिल्ली की जलापूर्ति बहाल हो सकी और जाट आरक्षण संघर्ष समिति का 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल एडीएम फाइनेंस के नेतृत्व में दिल्ली रवाना हुआ।
प्रतिनिधिमंडल के जाने के बाद लामबंद जाट अखिल भारतीय जाट आरक्षण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक के साथ धरना स्थल पर ही डटे रहे। शाम छह बजे जैसे ही प्रतिनिधि मंडल वापस लौटा धरना समाप्त करने की घोषणा की गई। इस दौरान यशपाल महिला ने कहा कि आरक्षण आंदोलन आने वाली पीढ़यों के भविष्य की लड़ई है। धरना केवल आज के लिए समाप्त हुआ है। यदि दस जुलाई तक केंद्र ने कार्रवाई नहीं की तो केंद्र सरकार को चारों ओर से घेरकर पानी, दूध, गैस, सब्जी बंद कर दोबारा ताकत का अहसास कराएंगे।
उधर जाट आरक्षण समिति के इस आंदोलन में हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों के जाटों ने बड़ संख्या में भाग लिया। उन्होंने पहले पंचायत और फिर धरने में भी भाग लेकर अपनी ताकत का अहसास कराया। बड़ संख्या में जाटों के जुड़ से जिला प्रशासन भी बल प्रयोग करने की हिम्मनत नहीं जुटा पाया।
सोमवार को कब क्या हुआ
पानी बंद कराके हर बार मजबूर की जाएगी दिल्ली
पानी खोलने खुद जुटे डीएम-एसएसपी
गाजियाबाद। जाट नेताओं से जब पानी खोलने को लेकर सहमति बन गई तो उसके बाद डीएम-एसएसपी खुद पानी खोलने में जुट गए। रेगुलेटर के चक्के को चूंकि जाटों ने तोड़ दिया था इसलिए पानी रिंच मंगा कर रेगुलेटर को घुमाकर पानी खोला गया। इस दौरान पुलिस-प्रशासन के अन्य अफसर भी उनके साथ रहे। एसएसपी न तो खुद ही अपने हाथ में रिंच ले लिया था और उससे रेगुलेटर घुमाया। बाद में जल निगम के कर्मचारियों ने पानी खोल दिया।
भाकियू भी समर्थन को आगे आया
जाटों के आंदोलन को भाकियू ने भी समर्थन किया। भाकियू के मंडल अध्यक्ष राजवीर सिंह ने सुबह धरना स्थल पर पहुंचकर अपने संगठन की ओर से समर्थन दिया। राजवीर सिंह ने बताया कि खुद चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने उन्हें समर्थन करने के लिए भेजा था। इसलिए वे भाकियू के नेताओं के
 
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Dear Members,

It is an interesting development. Finally, Ch. Ajit Singh is doing something for Jats.

1. Harit Pradesh: Probably with an aim to be the CM of the State himself, and if not then Ch. Jayant be the CM or may be Ms. Anuradha Ch be the CM. (work done for Jats)

2. Bharat Ratan for Ch. Charan Singh: Whether we get Bharat Ratna for
Late Ch. Sahab or not he would never know. Probably his soul would have felt proud, if his legacy was nurtured to help the farmer's community in general and Jat community in particular. I think that would have been a bigger award for his dedicated service to the nation. The way, these awards are given, I really don't care if it is given to the Late Ch. Charan Singh or not. The issue is how much has been done for the community by those blowing the bugle of his legacy.

3. Reservation for Jats: I have already expressed my views on the subject on earlier topics. You want to finish a community, give something for free.

Rewards: (Negotiations)

1. Ministry for Ch. Ajit Singh (Jat development)
2. Position for Ch. Jayant (Jat Development)

Since so much is being done by our beloved Leader Ch. Ajit Singh for Jat Development; we must all support his in his mission.

 
First of ALL there is no talks going on between Congress and RLD-Ajit singh, It is just a false propoganda through media by Ajit Singh
Dear Members,

It is an interesting development. Finally, Ch. Ajit Singh is doing something for Jats.

1. Harit Pradesh: Probably with an aim to be the CM of the State himself, and if not then Ch. Jayant be the CM or may be Ms. Anuradha Ch be the CM. (work done for Jats)
ANS: HARIT Preadesh is nothing but just a slogan of Ajit singh making fool JATS..It will not be formed under this poor leadership.
2. Bharat Ratan for Ch. Charan Singh: Whether we get Bharat Ratna for
Late Ch. Sahab or not he would never know. Probably his soul would have felt proud, if his legacy was nurtured to help the farmer's community in general and Jat community in particular. I think that would have been a bigger award for his dedicated service to the nation. The way, these awards are given, I really don't care if it is given to the Late Ch. Charan Singh or not. The issue is how much has been done for the community by those blowing the bugle of his legacy.
ANS: HAVE you heard before a son demanding Bharat ratna for his father? Has any Kisan Community or JAT community as a whole demanded bharat Ratna.
3. Reservation for Jats: I have already expressed my views on the subject on earlier topics. You want to finish a community, give something for free.
ANS: Did;t we JAT know this since last 17 years (Mandal Commision report) Ajit singh Party never raise this issue? How many times Mr. Ajit singh and Jayant raise this issue in Parliament?

Rewards: (Negotiations)

1. Ministry for Ch. Ajit Singh (Jat development)
2. Position for Ch. Jayant (Jat Development)

Since so much is being done by our beloved Leader Ch. Ajit Singh for Jat Development; we must all support his in his mission.
ANS:What has been done for JAt Development?How many educational institution and job opportunity created in Baghpat(Ajit) and Mathura(Jayant)? Over All did you hear anytime Ki jo Kamjor ho(RLD) wohi apni shart (condition) rakhe:)
Is congress so FOOL Party ki Sari Mange JATON Ki puri karey aur Sehra bhi us (Ajit) leader ke sir par bandhe jo bilkul bhi reliable nahi hai.:)
 
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oho Ajay Singh,
Bhai teri kami rehegi thi? what abt alliance with BJP in 2009 loksabha election? and now what happend with BJP? was;nt it be a for Harit Pradesh?;) Oh Yaad aaya It was for JAT Development :rolleyes:
 
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Even if Harit pradesh is formed , will we have a Jat CM?...I have doubt...Most probably it will be a Muslim CM...Can any local guy from WUP put light on the same pl?
 
Ajit Singh has betrayed community's faith several times in pursuit of his personal ambitions. It is, however, difficult to find a credible substitute at present. Most of the community leaders are self-seekers and have scant regard for public grievances. In any case, people have no option but to find a lesser evil.
 
राजनीती की दूकान

Even if Harit pradesh is formed , will we have a Jat CM?...I have doubt...Most probably it will be a Muslim CM...Can any local guy from WUP put light on the same pl?

Muslim in western UP are maximum in number and vote percentage. There is no doubt about Muslim CM in western UP. I told you its just a Slogan to make JAT fool. There is no other community supporting "harit Pradesh' except JAT in meerut commisionery.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सबसे जाएदा वोट प्रतिशत मुस्लिम का है और अगर हरित प्रदेश कभी बनता भी है तो वहा मुस्लिम मुख्यमंत्री निश्चित होगा|
 
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Piyush thanks for the info!!!! Few days back i was chatting with a Jat guy from Samli n he was very sure that if Harit pradesh forms then CM will be a Muslim which in turn will make WUP a mini pakistan!!!
 
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