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अजित आरक्षण दिला दें आंदोलन खत्म कर देंगे यशपाल मलिक ने कहा-सभी जाट नेताओं से इस मुद्दे पर किया था संपर्क,
जब कुछ न किया तो शुरू किया आंदोलन
गाजियाबाद।
जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा कि रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह जाटों को आरक्षण दिला दें वे उसी क्षण अपना आंदोलन समाप्त कर देंगे। मलिक ने कहा कि उनका मकसद जाटों को आरक्षण दिलाना है। उन्हें भी पता है कि रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह की कांग्रेस से बातचीत चल रही है। अजित सिंह चाहे तो संसद में भी जाटों के आरक्षण के मुद्दे को उठा सकते हैं, लेकिन अभी तक ऐसा हुआ नहीं है।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में मलिक ने कहा कि जाटों के लिए आरक्षण की लड़ई शुरू करने से पहले वे देश के सभी जाट नेताओं के पास गए थे। आरक्षण के मुद्दे पर सबको ज्ञापन दिया गया था। लेकिन किसी ने कोई रुचि नहीं ली। इसलिए उन्हें मैदान में उतरना पड़। उनका आंदोलन पूरी तरह से गैर राजनीतिक है। फिर भी किसी राजनीतिक दल को समर्थन करना है तो उसके लिए दरवाजे खुले हैं। विभिन्न पार्टियों के जाट नेता आरक्षण आंदोलन को समर्थन की घोषणा करें। जाट पिछड़ है ये रिपोर्ट भी केंद्र सरकार के पास है। फिर भी जाटों को ओबीसी में शामिल नहीं किया जा रहा है। उन्होंने ये भी कहा कि जाटों के बल पर राजनीति करने वालों ने जाटों के लिए अभी तक कुछ नहीं किया है। जाटों के दम पर किसान नेता तो बन गए लेकिन आज तक जाटों को आरक्षण नहीं दिला पाए। मलिक ने कहा कि दिल्ली का पानी रोकना तो अभी ट्रेलर है। पिक्चर तो अभी बाकी है। आरक्षण नहीं मिला तो कॉमनवेल्थ गेम्स भी नहीं होने देंगे। इसकी भी पूरी तैयारी कर ली है। दिल्ली का गैस, तेल, दूध, सब्जी आदि सारी सप्लाई बंद कर दी जाएगी। इसके लिए सोनीपत, पानीपत, मथुरा और अमरोहा में जाटों की पंचायत हो चुकी हैं। केंद्र सरकार ने अगर जाटों की मांगों को हल्के में लिया तो दोबारा इससे भी बड़ आंदोलन होगा।लखनऊ से भी मिली आंदोलन को हवा
गाजियाबाद। दिल्ली का पानी रोककर आरक्षण की मांग को लेकर शुरू किए गए आंदोलन को लखनऊ से भी हवा मिल रही थी। मुख्यमंत्री के जाट आरक्षण को समर्थन देने यह साफ हो गया है। पश्चिमी यूपी जाट बेल्ट होने से रालोद प्रमुख चौधरी अजित सिंह का गढ़ मानी जाती है। जाट आरक्षण का पत्ता खेलकर बसपा प्रमुख मायावती ने अजित सिंह के गढ़ में सेंध लगाने का काम किया है। रालोद के नेताओं को इसकी भनक थी तभी तो वे जाटों के इस आंदोलन में नजर नहीं आए।
जाटों ने गंगा जल प्लांट पर कब्जा कर दिल्ली का पानी रोक दिया और पुलिस-प्रशासन ने कुछ नहीं किया। अफसर सिर्फ जाटों को समझाते नजर आए। रात भर यशपाल मलिक की मानमनव्वल होती रही। प्रशासन चाहता तो जाट मुरादनगर गंग नहर से दिल्ली जाने वाले पानी को नहीं रोक पाते। मगर पुलिस-प्रशासन जाटों के आगे बेकफुट पर ही नजर आया। इसका प्रमुख कारण प्रदेश की मुखिया खुद जाटों को आरक्षण दिए जाने के पक्ष था। इसे राजनीतिक दांव-पेंच माना जा रहा है। तभी तो बल प्रयोग करके भी पानी चालू कराने का प्रयास नहीं किया गया। जाट दिल्ली को हिलाना चाहते थे और उनकी मंशा भी पूरी हो गई। रविवार को जाट नेता सरकारी गेस्ट हाउस का भी इस्तेमाल कर रहे थे। उन्हें उसके लिए भी नहीं रोका गया। मामला बहुत हॉट हो गया। जो संदेश दिल्ली को दिया जाना था वह दिया जा चुका था। इसलिए सोमवार की सुबह पानी भी चालू करा दिया गया।
अगामी
विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो गई है। रालोद की नजदीकियां कांग्रेस से बढ़ है। बातचीत भी हुई है। चर्चा तेजी से फैली कि एक बार भी अजित सिंह कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं। इससे पहले की कोई निर्णय होता। बसपा प्रमुख ने अपना काम कर दिया। आरक्षण को लेकर जाट आरक्षण संघर्ष समिति के आंदोलन को हवा दे दी और बाद में समर्थन की घोषणा भी कर दी। मुख्यमंत्री ने समर्थन की घोषणा कर जाटों में पार्टी की जगह बनाने का प्रयास किया है। साथ ही केंद्र को भी ये संदेश दे दिया कि प्रदेश सरकार दिल्ली का पानी बंद करने के पक्ष में नहीं थी और आंदोलन नियंत्रित न करने पर डीएम गाजियाबाद को हटा दिया।
दिल्ली की बांह हुई कमजोर
गाजियाबाद। आरक्षण की मांग को लेकर जाटों ने दिल्ली की बांह मरोड़ने का काम किया है। मुरादनगर गंग नहर स्थित गंगा जल प्लांटों से दिल्ली की 40 प्रतिशत आबादी की प्यास बुझती है। जाटों के इस आंदोलन ने दिल्ली की कमजोर नस को उजागर कर दिया है। दिल्ली या केंद्र सरकार से मांग मनवाने के लिए अब हर संगठन और राजनीतिक दल की नजर इन प्लांटों पर ही रहेगी।
दिल्ली को पानी हरियाणा और यूपी की गंग नहर से मिलता है। सोनिया विहार और भागीरथी जल संयंत्र को प्रतिदिन 470 क्यूसैक पानी की सप्लाई होती है। दिल्ली की कमजोर ये पानी है। अगर जाटों ने दिल्ली का पानी बंद नहीं किया होता तो शायद इतनी जल्दी केंद्र सरकार नहीं जागती। भले ही इसके पीछे कोई भी राजनीति रही हो लेकिन दिल्ली को हिलाने का एक बड़ माध्यम ये गंगा जल प्लांट बन गए हैं। 20 घंटे ही सिर्फ पानी बंद रहा लेकिन इतने में ही दिल्ली सरकार के होश उड़ गए। दिल्ली में पहले से ही पानी की किल्लत है। उस पर अगर ये पानी भी बंद हो गया तो त्राही-त्राही मच जाती। जाट नेता यशपाल मलिक ने खुद माना कि उन्हें मीडिया के माध्यम से पता चला कि गंग नहर से पानी बंद होने से दिल्ली में स्थिति काफी खराब हो गई है। गर्मी में बिना पानी से स्थिति खराब हो जाती। इसलिए पानी को चालू कराने का निर्णय लिया।
यशपाल मलिक ने कहा-सभी जाट नेताओं से इस मुद्दे पर किया था संपर्क,
जब कुछ न किया तो शुरू किया आंदोलन
प्रतिनिधिमंडल के लौटने पर खिले जाटों के चेहरे
मुरादनगर। सोमवार को जाट आरक्षण समिति का 12 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल जैसे ही धरना स्थल पर लौटा, समाज के लोगों के चेहरे खिल गए। केंद्र सरकार ने भले ही जल्दबाजी में जाटों के प्रतिनिधि मंडल को आरक्षण के मुद्दे पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया हो, लेकिन कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में जाटों के निशाने पर कामनवेल्थ गेम्स हैं। जाटों ने जनपद और केंद्र सरकार के अधिकारियों को दो टूक कह दिया है कि यदि आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र सरकार ने चुप्पी साधी तो दस जुलाई के बाद उग्र आंदोलन किया जाएगा। इसके लिए ठोस रणनीति भी तय कर ली गई है।
लामबंद जाटों को संबोधित करते हुए आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा कि आश्वासन समस्या का समाधान नहीं है। लड़ई आगे भी जारी रहेगी। आरक्षण समिति सूत्रों की माने तो केंद्र सरकार ने कार्रवाई नहीं की तो बुलंदशहर जनपद में विदेशियों के लिए उगाई जा रही विदेशी सब्जियों के खेत उजाड़ दिए जाएंगे। इसके अलावा कामनवेल्थ गेम्स से पहले पानीपत और मुरादनगर से जलापूर्ति, मथुरा एवं सोनीपत रिफाइनरी से गैस आपूर्ति, अमरोहा से दूध और सब्जी की आपूर्ति पूरी तरह ठप कर दिया जाएगा।
आरक्षण आंदोलन पर चर्चा गरम
केंद्रीय नौकरियों में जाट आरक्षण को लेकर रविवार से लेकर सोमवार शाम तक जो कुछ हुआ उसको लेकर कई तरह की चर्चा गरम हैं। महापंचायत के आयोजन और दिल्ली की जलापूर्ति ठप होने को लेकर लोग प्रदेश के एक राजनीति दल के समर्थन की चर्चा करते दिखाई दिए। लोगों का यहां तक कहना है कि आरक्षण की लड़ई के बाहने राजनीतिक दल रालोद नेता अजीत सिंह के गढ़ में दूसरा कद्दावर जाट नेता तैयार कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं।
प्रतिनिधिमंडल में नहीं गए राष्ट्रीय अध्यक्ष
केंद्र सरकार में सोशल जस्टिस मंत्रालय के ज्वाइंट सेक्र्रेटरी से वार्ता के लिए गए प्रतिनिधिमंडल में संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद नहीं गए, बल्कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों को भेजकर संदेश भिजवा दिया कि मांग नहीं मानी तो आंदोलन और भी उग्र होगा। 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में एचपी परिहार, शूरवीर सिंह, पुष्पेंद्र चौधरी, सतपाल चौधरी, हवा सिंह सांगवान, धर्मपाल सिंह, रनसिंह शौकीन, राजेंद्र चिकारा, मांगेराम तेवतिया, कर्नल यामीन, चौधरी ज्ञानेंद्र सिंह आदि रहे।
आंदोलन के दूसरे दिन भी हावी रहे जाट
मुरादनगर। केंद्रीय नौकरियों में आरक्षण की मांग को लेकर लामबंद जाट मुरादनगर में दूसरे दिन भी जिला प्रशासन पर हावी रहे। सोमवार की सुबह जब डीएम और एसएसपी ने प्रतिनिधि मंडल दिल्ली भेजने की बात कहकर जाट नेताओं को धरना समाप्त करने का प्रस्ताव रखा तो जाटों ने दो टूक कह दिया कि प्रतिनिधि मंडल के लौटने तक धरना जारी रहेगा। इसी दौरान गांवों से ट्रैक्टर में खाना और भीड़ आते देख प्रशासनिक अधिकारियों की चिंता और बढ़ गई।
अखिल भारतीय जाट आरक्षण समिति ने महापंचायत से पूर्व ऐसी रणनीति बनाई कि जिला प्रशासन चारों खाने चित्त हो गया। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पहले ही पांच ट्रक खाने-पीने का समान अबूपुर, मनौटा और सुल्तानपुर में पहुंच चुका था। रणनीति के तहत प्रशासनिक दखलंदाजी होने पर हाईवे या रेलवे ट्रैक जाम करने की तैयारी थी, लेकिन रेगुलेटर से दिल्ली का पानी बंद करने की रणनीति गुपचुप बनाई गई।
रविवार को दिल्ली की जलापूर्ति ठप करने की रणनीति इतनी कामयाब होगी जाटों ने सोचा भी नहीं था। इसी का नतीजा था कि लामबंद जाट सोमवार को भी जिला प्रशासन के सामने केंद्र से आश्वासन नहीं मिलने तक धरना जारी रखने की जिद पर अड़ रहे। उन्होंने डीएम-एसएसपी से साफ तौर पर कह दिया कि यदि केंद्र सरकार के मंत्री और अधिकारी नहीं जागे तो जाट दोबारा दिल्ली जलापूर्ति ठप कर देंगे। किसी प्रकार अधिकारियों ने सामाजिक न्याय मंत्रालय के दो सेक्रेटरी का हवाला देकर संघर्ष समिति को मनाया, तब जाकर दिल्ली की जलापूर्ति बहाल हो सकी और जाट आरक्षण संघर्ष समिति का 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल एडीएम फाइनेंस के नेतृत्व में दिल्ली रवाना हुआ।
प्रतिनिधिमंडल के जाने के बाद लामबंद जाट अखिल भारतीय जाट आरक्षण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक के साथ धरना स्थल पर ही डटे रहे। शाम छह बजे जैसे ही प्रतिनिधि मंडल वापस लौटा धरना समाप्त करने की घोषणा की गई। इस दौरान यशपाल महिला ने कहा कि आरक्षण आंदोलन आने वाली पीढ़यों के भविष्य की लड़ई है। धरना केवल आज के लिए समाप्त हुआ है। यदि दस जुलाई तक केंद्र ने कार्रवाई नहीं की तो केंद्र सरकार को चारों ओर से घेरकर पानी, दूध, गैस, सब्जी बंद कर दोबारा ताकत का अहसास कराएंगे।
उधर जाट आरक्षण समिति के इस आंदोलन में हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों के जाटों ने बड़ संख्या में भाग लिया। उन्होंने पहले पंचायत और फिर धरने में भी भाग लेकर अपनी ताकत का अहसास कराया। बड़ संख्या में जाटों के जुड़ से जिला प्रशासन भी बल प्रयोग करने की हिम्मनत नहीं जुटा पाया।
सोमवार को कब क्या हुआ
पानी बंद कराके हर बार मजबूर की जाएगी दिल्ली
पानी खोलने खुद जुटे डीएम-एसएसपी
गाजियाबाद। जाट नेताओं से जब पानी खोलने को लेकर सहमति बन गई तो उसके बाद डीएम-एसएसपी खुद पानी खोलने में जुट गए। रेगुलेटर के चक्के को चूंकि जाटों ने तोड़ दिया था इसलिए पानी रिंच मंगा कर रेगुलेटर को घुमाकर पानी खोला गया। इस दौरान पुलिस-प्रशासन के अन्य अफसर भी उनके साथ रहे। एसएसपी न तो खुद ही अपने हाथ में रिंच ले लिया था और उससे रेगुलेटर घुमाया। बाद में जल निगम के कर्मचारियों ने पानी खोल दिया।
भाकियू भी समर्थन को आगे आया
जाटों के आंदोलन को भाकियू ने भी समर्थन किया। भाकियू के मंडल अध्यक्ष राजवीर सिंह ने सुबह धरना स्थल पर पहुंचकर अपने संगठन की ओर से समर्थन दिया। राजवीर सिंह ने बताया कि खुद चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने उन्हें समर्थन करने के लिए भेजा था। इसलिए वे भाकियू के नेताओं के