rajpaldular
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भाई विनय,
दुलार जी के कहने का अर्थ यह है क़ि जब रामपाल वाले केस में कोर्ट के आदेश को तामील करने के लिए पूरा प्रशासन झोंका जा सकता है तो फिर बुखारी के केस में कोर्ट के आदेश को ठंडे बस्ते में क्यों डाल दिया जाता है? यह सवाल एक दम वाजिब है क़ि तब कोर्ट की अवमानना का मसला कहाँ चला जाता है|
इससे तो यही लगता है ना क़ि सारा जोर बस हिन्दुओ के बाबाओ पर ही है जहाँ बात किसी मुस्लिम की हो तो कोर्ट की भी सीट्टी- पिट्टी गुम हो जाती है| हालाँकि इसका मतलब यह नहीं है क़ि आप पाखंडी बाबाओ पर कार्यवाही न करो| क़ानून सबके लिए एक जैसा होना चाहिए फिर वह व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म का हो|
exactly. Thank you ayushji...............