ये लाईलाज रोग कहाँ से लगा लिया विजय भाई?
फ़िर भी, अति सुंदर! ऐसे ही लिखते रहो!
धन्यवाद भाई साहब .........
लेकिन ये कोई रोग नहीं है ....... बल्कि ये तो वो अहसास हैं जो कलम से लिखे जाते हैं ..... अपने लिए ...... उनके लिए ..... और जमाने के लिए![]()
इस दुनिया ने ग़लत समझा लेकिन हमें कोई गम नहीं
लेकिन अपनों ने ठुकराया बस परायों से सलाम के लिए ||
दौड़ कर चले आए हम तुम्हारी हर एक आवाज़ पर
तुमने हमें जब भी बुलाया सिर्फ़ किसी इल्जाम के लिए ||
हम अब कैसे पहचान पाते किसी इंसान की असलियत
क्या तुमने अपना चेहरा बदला था किसी इंतकाम के लिए ||
आज भी हमे कोई पूछता रहता है कि कैसे हो "विजय"
बड़ा 'लापरवाह' दिख रहा लगता है हमारे अंजाम के लिए ||
इस दुनिया ने ग़लत समझा लेकिन हमें कोई गम नहीं
लेकिन अपनों ने ठुकराया बस परायों से सलाम के लिए ||
दौड़ कर चले आए हम तुम्हारी हर एक आवाज़ पर
तुमने हमें जब भी बुलाया सिर्फ़ किसी इल्जाम के लिए ||
हम अब कैसे पहचान पाते किसी इंसान की असलियत
क्या तुमने अपना चेहरा बदला था किसी इंतकाम के लिए ||
आज भी हमे कोई पूछता रहता है कि कैसे हो "विजय"
बड़ा 'लापरवाह' दिख रहा लगता है हमारे अंजाम के लिए ||
Sir...itni solid shayari kis ke liye likhte hain aap....![]()
kaun hai woh.....
Hello
Plss
Gum ki aanch per anshun ubal kar dekho,
rang ban jaynge kisi per dal kar dekho,
Tumhare seene ki jalan cum hogi jaroor,
kisi ke pawon se kanta nikal kar dekho.
Thanx
A Royal JAT of INDIA
We use essential cookies to make this site work, and optional cookies to enhance your experience.