ज़माने के साथ चलने का अंदाज़ सीख लिया आख़िर
अब फुरसत भी कहाँ पुराने दोस्तों से सलाम के लिए ||
कौन कहता है कि वो हमसे अब बात भी नहीं करते
आज भी मिलते है हम से कोई नए इल्जाम के लिए ||
दिल का दर्द अगर बिखर जाता कोई ज्वालामुखी लिए
तो शायद टीस बनके न चुभता ज़िंदगी तमाम के लिए ||
कोई आज़ाद रह कर भी लुत्फ़ न ले पाया ज़िंदगी का
ये सफर कितना हसीन रहा मोहब्बत के गुलाम के लिए ||
शायद वो तुम ही थी जो कल रात मेरे सपने में आई
मैं दिन भर यही सोचता रहा कि किस काम के लिए ||
ये कच्चे धागों का बन्धन भी कितना अजीब है विजय
कोई बेनाम सा रिश्ता तरसता रहा किसी नाम के लिए ||
अब फुरसत भी कहाँ पुराने दोस्तों से सलाम के लिए ||
कौन कहता है कि वो हमसे अब बात भी नहीं करते
आज भी मिलते है हम से कोई नए इल्जाम के लिए ||
दिल का दर्द अगर बिखर जाता कोई ज्वालामुखी लिए
तो शायद टीस बनके न चुभता ज़िंदगी तमाम के लिए ||
कोई आज़ाद रह कर भी लुत्फ़ न ले पाया ज़िंदगी का
ये सफर कितना हसीन रहा मोहब्बत के गुलाम के लिए ||
शायद वो तुम ही थी जो कल रात मेरे सपने में आई
मैं दिन भर यही सोचता रहा कि किस काम के लिए ||
ये कच्चे धागों का बन्धन भी कितना अजीब है विजय
कोई बेनाम सा रिश्ता तरसता रहा किसी नाम के लिए ||