Shayari (Part 2)

''दुआ से कम नहीं होता जोर तूफान का ,
खुदा का हाल ये है , नाखुदा से क्या कहे !
 
अच्छी सूरत को सँवरने की ज़रूरत क्या है|
सादगी भी तो कयामत की अदा होती है||
 
सैकड़ों नदियों को पीकर कश्तियाँ तक खा गए,
गाँव गलियां सब पचाकर बस्तियाँ तक खा गए,
वो गरीबों की भूख को कैसे मिटायेंगे भला जो
शहीदों की चिताओं की अस्थियाँ तक खा गए!!
 
भौंरे कहते है कि गगन बदला है,
पंछी कहते है कि चमन बदला है,
ज़िंदगी की खामोशी यह कहती है,
कि लाश वही है सिर्फ़ कफ़न बदला है.....
 
जितना चाहे रूला ले मुझको तूँ ऐ जिन्दगी...
हंसकर गुजार दूँगा तुझको, ये मेरी भी जिद्द है....
 
माचिस की जरूरत यहाँ नही पड़ती,
यहाँ आदमी आदमी से जलता है
 
इस कलयुग में
रूपया चाहे कितना भी गिर जाए,
इतना कभी नहीं गिर पायेगा,
जितना रूपये के लिए इंसान गिर चूका है...
 
अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे
तेरी मर्ज़ी के मुताबिक नज़र आएँ कैसे

घर सजाने का तसव्वुर तो बहुत बाद का है
पहले ये तय हो के इस घर को बचाएँ कैसे

कहकहाँ आँख का बर्ताव बदल देता है
हँसने वाले तुझे आँसू नज़र आएँ कैसे

कोई अपनी ही नज़र से तो हमें देखेगा
एक क़तरे को समंदर नज़र आएँ कैसे
 
वो रुलाकर हँस ना पाया देर तक़
जब मैं रोकर मुस्कुराया देर तक़

भूलना चाहा अगर उसको कभी
और भी वो याद आया देर तक़

भूखे बच्चों की तसल्ली के लिए
माँ ने फिर पानी पकाया देर तक़

गुनगुनाता जा रहा था इक़ फ़क़ीर
धूप रहती है ना साया देर तक़
 
कुछ अपनी करामात दिखा ओ साकी ,
जो खोल दे आँख वो जाम पीला तू साकी ,
होशियार को दीवाना बनाया भी तो क्या ;
दीवाने को होशियार बना ओ साकी !!


बस इसी धुन में रहा कि मर के मिल्लेगी ज़न्नत ,
ए शेख तुझे ना जीना का करीना आया !!
 
देख कर आप की निगाहो को
आरज़ू-ए-शराब होती है
रोज़ तौबा को तोड़ता हू मे
रोज़ नियत खराब होती है

ऊदी ऊदी घटा'ए आती है
मुटारीबो की नवा'ए आती है
किसके गेसू खुले है सावन मे
महकी महकी हवा'ए आती है
 
दुनिया टूटते हुए तारे से भी दुआ मांगती है !
कौन कहता है बर्बादी किसी के काम नहीं आती!!
 
दुनिया टूटते हुए तारे से भी दुआ मांगती है !
कौन कहता है बर्बादी किसी के काम नहीं आती!!

Please allow me now for " baal ki khal" on this. Toota hua tara is nothing but a meteorite ( finally a piece of stone) falling on earth. One such stone is kept in Kaba where Muslims seek blessings (dua). We Hindus to seek dua from similar stones in various forms. ..

RK^2
 
एक बचपन का जमाना था, जिस में खुशियों का खजाना था,


चाहत चाँद को पाने की थी, पर मन तितली का दीवाना था!
 
अपनी कीमत उतनी रखिए जो अदा हो सके, अगर अनमोल हो गए तो, तन्हा हो जाओगे...
 
Back
Top