Shayari (Part 2)

koshish bht ki ke mohabbat byan na ho

koshish bht ki ke mohabbat byan na ho,
Mumkin kaha tha ke aag lagi ho or dhua na ho :'(
 
Vo bhul gae ke unhe rote hue hasya kisne tha ,
Jab vo ruthe to manaya kisne tha,
Vo kehete ha ke vo bht ache or khoobsurat,
Vo bhul gae ke unhe ye bataya kisne tha
 
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Aey ishq jara ek baat to bata?
Kya tum sabhi logo ko yuhi aazmate ho?
Ya mujhse hi teri kuch khas dushmani ha .
 
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मुझ को ये फ़िक्र कब है के साया कहाँ गया |
सूरज को रो रहा हूँ ख़ुदाया कहाँ गया ||

फिर आइने में ख़ून दिखाई दिया मुझे |
आँखों में आ गया तो छुपाया कहाँ गया ||

आवाज़ दे रहा था कोई मुझ को ख़्वाब में |
लेकिन ख़बर नहीं के बुलाया कहाँ गया ||

कितने चराग़ घर में जलाए गए न पूछ |
घर आप जल गया है जलाया कहाँ गया ||

ये भी ख़बर नहीं है के हम-राह कौन है |
पूछा कहाँ गया है बताया कहाँ गया ||

वो भी बदल गया है मुझे छोड़ने के बाद |
मुझ से भी अपने आप में आया कहाँ गया ||

तुझ को गँवा दिया है मगर अपने आप को |
बर्बाद कर दिया है गँवाया कहाँ गया ||
 
माँ को गले लगाते हो, कुछ पल मेरे भी पास रहो
’पापा याद बहुत आते हो’ कुछ ऐसा भी मुझे कहो |
मैनेँ भी मन मे जज़्बातोँ के तूफान समेटे हैँ,
ज़ाहिर नही किया, न सोचो पापा के दिल मेँ प्यार न हो |


थी मेरी ये ज़िम्मेदारी घर मे कोई मायूस न हो
मैँ सारी तकलीफेँ झेलूँ और तुम सब महफूज़ रहो |
सारी खुशियाँ तुम्हेँ दे सकूँ, इस कोशिश मे लगा रहा,
मेरे बचपन मेँ थी जो कमियाँ, वो तुमको महसूस न हो |


हैँ समाज का नियम भी ऐसा पिता सदा गम्भीर रहे
मन मे भाव छुपे हो लाखोँ, आँखो से न नीर बहे |
करे बात भी रुखी-सूखी, बोले बस बोल हिदायत के,
दिल मे प्यार है माँ जैसा ही, किंतु अलग तस्वीर रहे |


भूली नही मुझे हैँ अब तक, तुतलाती मीठी बोली
पल-पल बढते हर पल मे, जो यादोँ की मिश्री घोली |
कन्धोँ पे वो बैठ के जलता रावण देख के खुश होना,
होली और दीवाली पर तुम बच्चोँ की अल्हड टोली |


माँ से हाथ-खर्च मांगना, मुझको देख सहम जाना
और जो डाँटू ज़रा कभी, तो भाव नयन मे थम जाना |
बढते कदम लडकपन को कुछ मेरे मन की आशंका,
पर विश्वास तुम्हारा देख मन का दूर वहम जाना |


कॉलेज के अंतिम उत्सव मेँ मेरा शामिल न हो पाना
ट्रेन हुई आँखो से ओझल, पर हाथ देर तक फहराना |
दूर गये तुम अब, तो इन यादोँ से दिल बहलाता हूँ,
तारीखेँ ही देखता हूँ बस, कब होगा अब घर आना |


अब के जब तुम घर आओगे, प्यार मेरा दिखलाऊंगा
माँ की तरह ही ममतामयी हूँ, तुमको ये बतलाऊंगा |
आकर फिर तुम चले गये, बस बात वही दो-चार हुई,
पिता का पद कुछ ऐसा ही हैँ फिर खुद को समझाऊंगा |
 
Tere jism se lipat kar aksar main
rota hoon kuch iss tarah...........

Naa jaane phir kab milegi mohlat teri
bahoon mein aane ki..............
 
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