Shayari

sumit007

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मन्नै उस्तै एक इशारा करया,
उसनै राम राम लिख कै भेज्या.


मन्नै पुछ्या तेरा नाम के सै ?
उसनै चाँद लिख के भेज्या.


मन्नै पुछ्या तन्नै के चहिए ?
उसनै सारा आसमान लिख कै भेज्या.


मन्नै पुछ्या कद मिलेगी ?
उसनै कयामत की रात लिख कै भेज्या.


मन्नै पुछ्या किस तै डरै सै ?
उसनै मुहब्बत का अंजाम लिख कै भेज्या.


मन्नै पुछ्या तन्नै नफरत किस तै सै ?
उसनै हाय रै मेरा नाम लिख कै भेज्या.
 
खोकर पाने का मज़ा ही कुछ ओर है,
रोकर मुस्कुराने का मज़ा ही कुछ ओर है,
हार तो ज़िंदगी का हिस्सा है मेरे दोस्त,
हारने के बाद जीतने का मज़ा ही कुछ ओर है…
 
के बात सै भाई घणा मजा आ ग्या । मै इसने फेसबूक पै सज्झा करू सु बुरा मत मानिए भाई ।
 
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