Shayri (Continued)

बेवफा हसरतें!
हसरतों से हो जाती थी मुलाकात कभी-कभी ख़्वाबों में,
पर अब तो कमबख्त नींद भी नहीं आती इन आखों में..
 
नहीं ज़रूरत है ज़माने तेरी नश्तर सी चुभती बातों की ,
मेरे आंसुओं सैलाब ही काफ़ी है ,मुझे डुबोने के लिए .
 
बाहर-बाहर क्या भटके है, क्यों है रे मन तू प्यासा,
इन दो नैनों में छिपी है, प्यार की पूरी परिभाषा
 
तूने पूछा है आरजू क्या है ,दिल ही जाने कि जुस्तजू क्या है ?
तेरे होने से मेरा होना है , मैं नहीं जानता कि तू क्या है....
 
मुझे मसरूफियत में

भी साथ तेरा चाहिए...

और तू है कि सिर्फ

ख्वाबों में है सोचों में है...!!!
 
तुम सवाल पर सवाल करते हो...
पर देखो मेरा हर जवाब तुम हो
 
कल वो सामने था तो ख़ामोशी न तोड़ी गई,

आज उससे हर बात कह जाने का मन करता है...!!!
 
वफ़ा का नाम सुना था पुराने लोगो से ,

हमारे वक़्त में ये हादसा हुआ ही नहीं !
 
करता है मोहब्बत ज़िन्दगी में दुबारा वही.....
सिर्फ़ एक बार तबाही जिसे अच्छी नहीं लगती.....
 
तुमको रख लिया है अपनी पलकों के कतरों में,
जब भी गिरोगे ,मेरे आँचल में समा जाओगे .
 
बहुत रोये वो हमारे पास आ के जब एहसास हुआ उन्हें अपनी ग़लती का !

चुप तो करा देते हम, अगर चेहरे पे हमारे कफ़न ना होता ...!
 
मेरी ज़िन्दगी से खेलना तो सब की आदत बन गयी है,................
काश हम खिलौना बनके बिकते तो आज किसी एक के तो हो जाते........
 
मुद्ददत्तों बाद जब उसने देखी जो मेरी खुश्क आँखें !

ये कह के रुला गया के लगता है अब तुम संभल चुके हो !!

कांश आँखों की जुबा पढ़ ली होती ..... वेलकॉम बेक :cool:

इन्ने सारे इक साथ ...........................:victorious:
 
bakhat kam he, a ishk ,jindgi me tujhe aajmaane kaa,
bas teri yaad me ,kabhi-kabhi aanshu bahaa liyaa karte hein,
jatland doob naa jaaye ,inn aanshuon ke dariyaa me ,
issliye surkh aankhon se ,adhiktar shaayri karte hein.
----ravi"atrupt"
 
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