Shayri (Continued)

जमीन पे कहते रहे ज्योतषी कुछ और मुझे
वो आसमान पे सितारे मेरे बदलता रहा !!


 
हम नादान थे जो उसको अपना हमसफ़र समझ बैठे |
वो चलता तो मेरे साथ था, पर किसी और की तलाश में ||

 
सफ़र की हद है वहाँ तक कि कुछ निशान रहे|
चले चलो के जहाँ तक ये आसमान रहे||

ये क्या उठाये क़दम और आ गई मन्ज़िल|
मज़ा तो जब है के पैरों में कुछ थकान रहे||
 
रूह के रिश्तों को
किसी कसौटी पर ना कस

कुछ रिश्ते अहसास से
गुजर जाया करते हैं...
 
अज़ब दो रंग है

इंसान की फ़ितरत में

गिला है जिससे,

उससे बे-इंतहा प्यार भी है...!!!
 
समझ नहीं आता

मुझे यह फासले का फलसफा

जब भी उसको याद किया

खुद के करीब पाया है ....
 
तुम्हारा एक परस्तार
तुम्हारे ख़्यालों की चादर
ओढ़कर सो जाता है ,
तब भी ये सितारे
मुसलसल जागते रहते हैं ।

अब किसकी कशिश ज़्यादा है , क्या कहें ?
 
महंगी नहीं है
ख्वाबों की ताबीर,

बस एक
जिंदगी की कमी है...!!!
 
सच को महसूस करो
और सच रहने दो,

इसे चेहरा न दो
ज़माने की फरेब बातों से...!!!
 
तक -तक रावां किन्ने इंतज़ार कित्ते नी |
मूक गए रो -रो हंजू ,मेरे नैन रीते नी ||

सदियाँ तों लम्मे बिछोडे ,दिन हज़ार दीते नी |
हूण वी मिलन दे पल ,दो चार दीते नी ||
 
एक अजब सा नशा है तेरी यादों में ,,,,,,,,,,,
मैं तेरा जिक्र लिखूं तो ,,अल्फाज रश्क करते हैं .......
 
खुद को फैलाओ कभी

आसमाँ की बाँहों सा,

तुम मे घुल जाए कोई

चाँद का टुकड़ा बन कर ...!!!
 
अब भी पूछते हो मकाम अपना ...............
कह तो दिया जिंदगी हो तुम .
 
मैं इसे शोहरत कहूँ या अपनी रूसवाई कहूँ।

मुझसे पहले उस गली में मेरे अफसाने गये।
 
जब भी कभी शुरू करता हूँ किस्सा लिखना, अपनी मोहब्बत का
कागज हर बार बोल पड़ता है कि इतना दर्द मुझसे झेला नहीं जाता
 
मज़ा बरसात का चाहो तो इन आँखों में आ बैठो |
वो बरसों में कभी बरसे, ये बरसो से बरस रही है ||
 
ना जाने कौन थे जो बन गए मंजिल तेरी |
हम तो रास्तों की तरह सिर्फ तेरे पावों में रहे |

 
कभी हम भीगते हैं चाहतों की तेज बारिशों में |
और कभी बरसों नहीं मिलते किसी हल्की सी रंजिश में
|
 
दूरियों की ना परवाह किया कीजिये,
दिल जब भी पुकारे बुला लीजिये |
हम दूर ज्यादा नहीं आपसे,
बस अपनी आँखों को पलकों से मिला लीजिये ||
 
वो कैसे लोग थे या रब जिन्होंने पा लिया तुमको |
हमें तो हो गया दुश्वार एक इंसान का मिलना ||
 
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