S sivach New member Apr 11, 2013 #141 जमीन पे कहते रहे ज्योतषी कुछ और मुझे वो आसमान पे सितारे मेरे बदलता रहा !!
S sivach New member Apr 13, 2013 #142 हम नादान थे जो उसको अपना हमसफ़र समझ बैठे | वो चलता तो मेरे साथ था, पर किसी और की तलाश में ||
S sandeepsirohi New member Apr 13, 2013 #143 सफ़र की हद है वहाँ तक कि कुछ निशान रहे| चले चलो के जहाँ तक ये आसमान रहे|| ये क्या उठाये क़दम और आ गई मन्ज़िल| मज़ा तो जब है के पैरों में कुछ थकान रहे||
सफ़र की हद है वहाँ तक कि कुछ निशान रहे| चले चलो के जहाँ तक ये आसमान रहे|| ये क्या उठाये क़दम और आ गई मन्ज़िल| मज़ा तो जब है के पैरों में कुछ थकान रहे||
R ravinderjeet New member Apr 14, 2013 #144 रूह के रिश्तों को किसी कसौटी पर ना कस कुछ रिश्ते अहसास से गुजर जाया करते हैं...
R ravinderjeet New member Apr 14, 2013 #145 अज़ब दो रंग है इंसान की फ़ितरत में गिला है जिससे, उससे बे-इंतहा प्यार भी है...!!!
R ravinderjeet New member Apr 14, 2013 #146 समझ नहीं आता मुझे यह फासले का फलसफा जब भी उसको याद किया खुद के करीब पाया है ....
R ravinderjeet New member Apr 14, 2013 #147 तुम्हारा एक परस्तार तुम्हारे ख़्यालों की चादर ओढ़कर सो जाता है , तब भी ये सितारे मुसलसल जागते रहते हैं । अब किसकी कशिश ज़्यादा है , क्या कहें ?
तुम्हारा एक परस्तार तुम्हारे ख़्यालों की चादर ओढ़कर सो जाता है , तब भी ये सितारे मुसलसल जागते रहते हैं । अब किसकी कशिश ज़्यादा है , क्या कहें ?
R ravinderjeet New member Apr 14, 2013 #148 महंगी नहीं है ख्वाबों की ताबीर, बस एक जिंदगी की कमी है...!!!
R ravinderjeet New member Apr 14, 2013 #149 सच को महसूस करो और सच रहने दो, इसे चेहरा न दो ज़माने की फरेब बातों से...!!!
S sandeepsirohi New member Apr 16, 2013 #150 तक -तक रावां किन्ने इंतज़ार कित्ते नी | मूक गए रो -रो हंजू ,मेरे नैन रीते नी || सदियाँ तों लम्मे बिछोडे ,दिन हज़ार दीते नी | हूण वी मिलन दे पल ,दो चार दीते नी ||
तक -तक रावां किन्ने इंतज़ार कित्ते नी | मूक गए रो -रो हंजू ,मेरे नैन रीते नी || सदियाँ तों लम्मे बिछोडे ,दिन हज़ार दीते नी | हूण वी मिलन दे पल ,दो चार दीते नी ||
R ravinderjeet New member Apr 16, 2013 #151 एक अजब सा नशा है तेरी यादों में ,,,,,,,,,,, मैं तेरा जिक्र लिखूं तो ,,अल्फाज रश्क करते हैं .......
R ravinderjeet New member Apr 16, 2013 #152 खुद को फैलाओ कभी आसमाँ की बाँहों सा, तुम मे घुल जाए कोई चाँद का टुकड़ा बन कर ...!!!
R ravinderjeet New member Apr 16, 2013 #153 अब भी पूछते हो मकाम अपना ............... कह तो दिया जिंदगी हो तुम .
R ravinderjeet New member Apr 16, 2013 #154 मैं इसे शोहरत कहूँ या अपनी रूसवाई कहूँ। मुझसे पहले उस गली में मेरे अफसाने गये।
S sivach New member Apr 17, 2013 #155 जब भी कभी शुरू करता हूँ किस्सा लिखना, अपनी मोहब्बत का कागज हर बार बोल पड़ता है कि इतना दर्द मुझसे झेला नहीं जाता
जब भी कभी शुरू करता हूँ किस्सा लिखना, अपनी मोहब्बत का कागज हर बार बोल पड़ता है कि इतना दर्द मुझसे झेला नहीं जाता
S sivach New member Apr 17, 2013 #156 मज़ा बरसात का चाहो तो इन आँखों में आ बैठो | वो बरसों में कभी बरसे, ये बरसो से बरस रही है ||
S sivach New member Apr 17, 2013 #157 ना जाने कौन थे जो बन गए मंजिल तेरी | हम तो रास्तों की तरह सिर्फ तेरे पावों में रहे |
S sivach New member Apr 17, 2013 #158 कभी हम भीगते हैं चाहतों की तेज बारिशों में | और कभी बरसों नहीं मिलते किसी हल्की सी रंजिश में |
S sivach New member Apr 17, 2013 #159 दूरियों की ना परवाह किया कीजिये, दिल जब भी पुकारे बुला लीजिये | हम दूर ज्यादा नहीं आपसे, बस अपनी आँखों को पलकों से मिला लीजिये ||
दूरियों की ना परवाह किया कीजिये, दिल जब भी पुकारे बुला लीजिये | हम दूर ज्यादा नहीं आपसे, बस अपनी आँखों को पलकों से मिला लीजिये ||
S sivach New member Apr 17, 2013 #160 वो कैसे लोग थे या रब जिन्होंने पा लिया तुमको | हमें तो हो गया दुश्वार एक इंसान का मिलना ||