Shayri (Continued)

साथ रहते हैं मेरे सब, मतलबों की हद तक |
कहीं थकता हूँ तो अकेला, कहीं रुकता हूँ तो तनहा ||
 
Jisko bhi chaho who bewafa ho jata hai
Sir agar jukavo to sanam khuda ho jata hai

Jab tak kaam aate raho, hum safar kehlata raho,
Kaam nikal jane ke baad hum safar, koi doosra ho jata hai,

Gum nahi tha kabhi humko zamaane ki ruswaayo ka
Taklif hoti hai jab koi apna khafa ho jaata hai,

Dil ki khalish akshar jaan leva ho jati hai lekin
Dard –e dil ek had ke baad drad –e dawa ho jati hai,

Hara bhara hai gulshan ye yaar,ye bahar ke din hai,
Khizen aane per dekho ek ek patta kaise juda ho jata hai,

Yehi suchai hai hakikat hai,yahi dastoor ye- zindagi hai,
Kuch der milte hai humrahi,phir har koi tnha ho jata hai,
 
सूखे होठों से ही होती है मीठी बातें अक्सर...

प्य|स बुझ जाये तो आलफाज़ और इंसान दोनों बदल जाते है !!
 
माना की तेरी दीद के काबिल नहीं हम ;
पर हमारे ताज अजायबघरो में रखे हैं !
 
नौकरों पर जो गुज़रती है, मुझे मालूम है
बस करम कीजे, मुझे बेकार रहने दीजिये
 
नौकरों पर जो गुज़रती है, मुझे मालूम है
बस करम कीजे, मुझे बेकार रहने दीजिये

Huzoor, bekar nahi, sahukar baniye.
aur fir naukron par karam kijiye

RK^2
 
मौत आई इश्क़ में तो हमें नींद आ गई
निकली बदन से जान तो काँटा निकल गया
 
अपने लुटने का मुझको रंज नहीं, गम अगर है तो सिर्फ इतना,
मेरे किरदार की शराफत से उसने जो फायदा उठाया हैं।
 
अपने लुटने का मुझको रंज नहीं, गम अगर है तो सिर्फ इतना,
मेरे किरदार की शराफत से उसने जो फायदा उठाया हैं।

Aapke kirdaar ki sharafat bahut faidemand hai.....LOL
 
मौत आई इश्क़ में तो हमें नींद आ गई
निकली बदन से जान तो काँटा निकल गया

Isq ka kanta aur haseena ka chanta, jisko lagta hai bas wohi jaanta hai...

inse Jitna bacho utna hi khush rahoge miaan.

RK^2
 
Last edited:
माँ ने अपने ख़त में कितने दर्द से लिक्खा था ,
अब तो गाँव आया करना सड़के पक्की है |
 
हर ऐब सही मुझ मे मगर आज भी मुझ को |
अपनों से ख़फ़ा होने का अंदाज़ नही आया ||
 
Good compositon of the legendary poet Sahir Ludhiyanvi, which is relevant in the communally charged atmoshphere and religious war-mongering prevailing nowadays all around.

ख़ून अपना हो या पराया हो
नस्ले-आदम का ख़ून है आख़िर
जंग मग़रिब में हो कि मशरिक में
अमने आलम का ख़ून है आख़िर

बम घरों पर गिरें कि सरहद पर
रूहे-तामीर ज़ख़्म खाती है
खेत अपने जलें या औरों के
ज़ीस्त फ़ाक़ों से तिलमिलाती है

टैंक आगे बढें कि पीछे हटें
कोख धरती की बाँझ होती है
फ़तह का जश्न हो कि हार का सोग

जिंदगी मय्यतों पे रोती है

इसलिए ऐ शरीफ इंसानो
जंग टलती रहे तो बेहतर है
आप और हम सभी के आँगन में
शमा जलती रहे तो बेहतर है।

 
अकेले में रो-रो कर मन अपना हल्का कर लेता है वो नन्हा बच्चा


देश की रक्षा की खातिर जिसका पिता सीमा से वापस नहीं लौटा।
 
Good compositon of the legendary poet Sahir Ludhiyanvi, which is relevant in the communally charged atmoshphere and religious war-mongering prevailing nowadays all around.

ख़ून अपना हो या पराया हो
नस्ले-आदम का ख़ून है आख़िर
जंग मग़रिब में हो कि मशरिक में
अमने आलम का ख़ून है आख़िर

बम घरों पर गिरें कि सरहद पर
रूहे-तामीर ज़ख़्म खाती है
खेत अपने जलें या औरों के
ज़ीस्त फ़ाक़ों से तिलमिलाती है

टैंक आगे बढें कि पीछे हटें
कोख धरती की बाँझ होती है
फ़तह का जश्न हो कि हार का सोग

जिंदगी मय्यतों पे रोती है

इसलिए ऐ शरीफ इंसानो
जंग टलती रहे तो बेहतर है
आप और हम सभी के आँगन में
शमा जलती रहे तो बेहतर है।



Great Sir! Thanx!
 
अँधेरे को उजाले का, सुबह को रात का डर है,
जिन्होंने मूंद ली आखें, उन्हें किस बात का डर है ?

बहुत सच बोलता है ये, इसे जल्दी ज़हर दे दो,
सियासत को ज़माने में फ़क़त सुकरात का डर है।
 
अँधेरे को उजाले का, सुबह को रात का डर है,
जिन्होंने मूंद ली आखें, उन्हें किस बात का डर है ?

बहुत सच बोलता है ये, इसे जल्दी ज़हर दे दो,
सियासत को ज़माने में फ़क़त सुकरात का डर है।

Nice. Did you write it ?

RK^2
 
Nice. Did you write it ?

RK^2


Dear Sir

इतना ही खुशकिस्मत काफी हूँ कि ये मुझे समझ आते हैं और मेरे Collection में हैं। लिखना तो - तौबा-तौबा. और कई बार ये भी होता है कि जहां ये मुझे मिलते हैं वहाँ Writer का नाम नहीं दिया होता। और कई बार मैं खुद भी Writer का नाम न लिखने की भूल करता हूँ।
 
इस उड़ान पर शर्मिंदा मै भी हु ओर तू भी है |
आसमान से गिरा परिंदा मैं भी हु ओर तू भी है ||
छुट गयी रस्ते में जीने मरने की सब कसमे |
अपने -२ हाल पे जिन्दा मैं भी हु ओर तू भी है ||
 
Guys, tham toh ghane serious sher-shar maran lag ge ... gimme some "sadak-chaap" fun sher the kinda one sees behind auto and trucks :p

Tinku, pinku te tinku di gaddi :p

hans mat pagli, pyar ho jayega :p

Jat di gaddi jandi hai chalanga mardi :p

etc etc
 
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