Shayri (Continued)

कुछ यूँ हुआ कि जब भी जरुरत पड़ी मुझे !
हर शख्स इतेफाक से मजबूर हो गया !!
 
"हुस्न तेरी इन्तिहा, इश्क़ मेरी इन्तिहा
तू भी अभी नातमाम, मैं भी अभी नातमाम"
 
मेरी तकलीफे बढती है तेरे दीदार से,
तुझे देख के जीने की आदत भी नहीं जाती !!
Deedar kar aur takleefe badha,
Mujhe dekh kar jee aur mujhe deewana de bana
 
जब मै डूबा तो समंदर को भी हैरत हुई !
अजीब शख्स है किसी को पुकारता ही नहीं !!

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अपने मुकद्दर का तो मिल ही जाएगा

ए खुदा !
वो चीज़ अदा कर, जो किस्मत में ना हो !!

 
अभी तो साथ चलना है समंदर कि मुसाफत में !
फिर आगे चल कर देखेंगे किनारा कौन करता है !!

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न अपना रंज , न औरों का गम , न तेरा मलाल !

शब्-ए- फिराक कभी हमने यूँ गवाई न थी !!

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अगर फुरसत के लम्हों में मुझे याद करते हो तो मत याद करो !
मै तनहा हो सकता हूँ मगर फ़िज़ूल नहीं !!
 
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छोटा करके देखिये जीवन का विस्तार
आँखों भर आकाश है, बाँहों भर संसार।
- नीदा फ़ाज़ली
 
बस इक झिझक है यही, हाल-ए-दिल सुनाने में
कि तेरा ज़िक्र भी आयेगा इस फ़साने में

इसी में इश्क़ की क़िस्मत बदल भी सकती थी
जो वक़्त बीत गया मुझ को आज़माने में
 

तकदीरे बदल जाती हैं जब जिंदगी का हो कोई मकसद !
वरना जिंदगी कट ही जाती है तकदीर को इलज़ाम देते देते !!


नाराज़ अगर वो है तो खुद्दार हम भी है दोस्तों !
ये इश्क है, इसमें कोई झुक कर नहीं मिलता !!


क्या हुआ जो तेरे माथे पर है सजदों क निशाँ !
कोई ऐसा सजदा भी कर जो जमीं पर निशान छोड़ जाए !!

हादसों में बड़ा हादसा ये हुआ !
लोग रुके नहीं , वो हादसा देख कर !!

लोग यूँ ही किताबो के आदि है !
वरना हर चेहरे पे कुछ ना कुछ लिखा है !!

जा तुझे तेरे हाल पर छोड़ा !
इस से बेहतर तेरी सजा भी नहीं !!
 
Deep words...Superb !!


तकदीरे बदल जाती हैं जब जिंदगी का हो कोई मकसद !
वरना जिंदगी कट ही जाती है तकदीर को इलज़ाम देते देते !!


नाराज़ अगर वो है तो खुद्दार हम भी है दोस्तों !
ये इश्क है, इसमें कोई झुक कर नहीं मिलता !!


क्या हुआ जो तेरे माथे पर है सजदों क निशाँ !
कोई ऐसा सजदा भी कर जो जमीं पर निशान छोड़ जाए !!

हादसों में बड़ा हादसा ये हुआ !
लोग रुके नहीं , वो हादसा देख कर !!

लोग यूँ ही किताबो के आदि है !
वरना हर चेहरे पे कुछ ना कुछ लिखा है !!

जा तुझे तेरे हाल पर छोड़ा !
इस से बेहतर तेरी सजा भी नहीं !!
 
Na jane kyun yahan per insan hi ghul mil kar nahi rahte
Warna aaj kal kis cheez mei milawat nahi hoti !!
 
आवारगी छोड़ दी हमने तो भूलने लगे हैं लोग।।
वर्ना शोहरतें कदम चूमती थी, जब हम बदनाम थे।।
 
भूले हैं रफ़्ता-रफ़्ता उन्हें मुद्दतों में हम
किश्तों में ख़ुदकुशी का मज़ा हमसे पूछिए

आगाज़-ए-आशिक़ी का मज़ा आप जानिए
अंजाम-ए-आशिक़ी का मज़ा हमसे पूछिए
 

कोई तो फैसला करता है पत्थर के मुकद्दर का भी !
किसे भगवान बनाना है , किसे ठोकर में रहना है !!


अच्छे ने अच्छा और बुरे ने बुरा जाना मुझे !
जिसकी जैसी फितरत थी उसने उतना पहचाना मुझे !!

लगा के दरखतो को आग अपने हाथो से !
अजीब लोग हैं , छाया तलाश करते हैं !!

 
Really nice with real and deep meaning,, U wrote these........



कोई तो फैसला करता है पत्थर के मुकद्दर का भी !
किसे भगवान बनाना है , किसे ठोकर में रहना है !!


अच्छे ने अच्छा और बुरे ने बुरा जाना मुझे !
जिसकी जैसी फितरत थी उसने उतना पहचाना मुझे !!

लगा के दरखतो को आग अपने हाथो से !
अजीब लोग हैं , छाया तलाश करते हैं !!

 
चुभें आँख़ों में भी और रुह में भी, दर्द की किरचें
मेरा दिल इस तरह तोड़ो के आईना बधाई दे
 
कुछ तो कर आदाब-ए-महफ़िल का लिहाज़,
यार ! ये पहलू बदलना छोड़ दे.
 

कोई तो फैसला करता है पत्थर के मुकद्दर का भी !
किसे भगवान बनाना है , किसे ठोकर में रहना है !!


अच्छे ने अच्छा और बुरे ने बुरा जाना मुझे !
जिसकी जैसी फितरत थी उसने उतना पहचाना मुझे !!

लगा के दरखतो को आग अपने हाथो से !
अजीब लोग हैं , छाया तलाश करते हैं !!


Bahut khub !!!
 
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