samarkadian
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कुछ यूँ हुआ कि जब भी जरुरत पड़ी मुझे !
हर शख्स इतेफाक से मजबूर हो गया !!
हर शख्स इतेफाक से मजबूर हो गया !!
Deedar kar aur takleefe badha,मेरी तकलीफे बढती है तेरे दीदार से,
तुझे देख के जीने की आदत भी नहीं जाती !!
सुना है आपकी मुस्कान पर हर कोई मरता है !
ज़रा समय निकल कर आइये ,
एक चूहा मरवाना है !!
तकदीरे बदल जाती हैं जब जिंदगी का हो कोई मकसद !
वरना जिंदगी कट ही जाती है तकदीर को इलज़ाम देते देते !!
नाराज़ अगर वो है तो खुद्दार हम भी है दोस्तों !
ये इश्क है, इसमें कोई झुक कर नहीं मिलता !!
क्या हुआ जो तेरे माथे पर है सजदों क निशाँ !
कोई ऐसा सजदा भी कर जो जमीं पर निशान छोड़ जाए !!
हादसों में बड़ा हादसा ये हुआ !
लोग रुके नहीं , वो हादसा देख कर !!
लोग यूँ ही किताबो के आदि है !
वरना हर चेहरे पे कुछ ना कुछ लिखा है !!
जा तुझे तेरे हाल पर छोड़ा !
इस से बेहतर तेरी सजा भी नहीं !!
कोई तो फैसला करता है पत्थर के मुकद्दर का भी !
किसे भगवान बनाना है , किसे ठोकर में रहना है !!
अच्छे ने अच्छा और बुरे ने बुरा जाना मुझे !
जिसकी जैसी फितरत थी उसने उतना पहचाना मुझे !!
लगा के दरखतो को आग अपने हाथो से !
अजीब लोग हैं , छाया तलाश करते हैं !!
कोई तो फैसला करता है पत्थर के मुकद्दर का भी !
किसे भगवान बनाना है , किसे ठोकर में रहना है !!
अच्छे ने अच्छा और बुरे ने बुरा जाना मुझे !
जिसकी जैसी फितरत थी उसने उतना पहचाना मुझे !!
लगा के दरखतो को आग अपने हाथो से !
अजीब लोग हैं , छाया तलाश करते हैं !!
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