Shayri (Continued)

हर शख्स को नफरत झूठ से है, मैँ परेशा हूँ सोच कर

कि फिर ये
झूठ बोलता कौन है???
 
हर किसी को मैं खुश रख सकूं वो सलीका मुझे नहीं आता,

जो मैं नहीं हूँ वो दिखाने का तरीका मुझे नहीं आता..
 
नींद आए या ना आए, चिराग बुझा दिया करो,यूँ रात भर किसी का जलना, हमसेदेखा नहीं जाता....!!!!
Tu Dekh Ya Na Dekh, Tere Dekhne Ka Gham Nahi,Par Teri Ye Na Dekhne Ki Ada Dekhne Se Kam Nahi..!
 
किताब-ए-इश्क लिखने में मुझे फुर्सत नही साहिब........!!
अभी तक तो बेवफ़ाई पर मेरी तहकीकात जारी है.......!!!
Ab Maayos Q Ho Us Ki Bewafai Pe Dost?
Tum Khud Hi To Kehte The K Wo Sab Se Juda Hai..
 
हर किसी को मैं खुश रख सकूं वो सलीका मुझे नहीं आता,

जो मैं नहीं हूँ वो दिखाने का तरीका मुझे नहीं आता..
Bahut khoob......:)
 
ग़लतियों से जुदा तू भी नही,मैं भी नही |
दोनो इंसान हैं, खुदा तू भी नही,मैं भी नही ||

तू मुझे ओर मैं तुझे इल्ज़ाम देते हैं मगर |
अपने अंदर झाँकता तू भी नही,मैं भी नही ||

ग़लत फ़हमियों ने कर दी दोनो मैं पैदा दूरियाँ |
वरना फितरत का बुरा तू भी नही,मैं भी नही ||
 
जिंदगी में कुछ खोना पड़े तो यह
लाईन याद रखना :-

जो खोया है,
उसका ग़म नहीं, लेकिन जो पाया है
वो किसी से कम नहीं । जो नहीं है वो एक ख़्वाब है
और जो है वो लाजवाब है ।
 
जरुरी नहीं रौशनी चिरागो से ही हो,

बेटियां भी घर मैं उजाला करती हैं.. !!
 
अपनी "तारीफ़" खुद ही करिए...क्यूंकि...

आपकी बुराई करने के लिए तो पूरा ज़माना एक टांग पे तैयार खड़ा है।
 
ये मौत भी अजीब चीज़ है दोस्तों,

एक दिन मरने के लिए

पूरी जिंदगी जीना पड़ती है.
 
मैं तो गुबार था जो हवाओं में बँट गया ।
तूं तो मगर पहाड़ था तू कैसे हट गया ||
 
हमारे दोस्तों में कोई दुश्मन हो भी सकता है ।
ये अँग्रेज़ी दवाएँ हैं रिएक्शन हो भी सकता है ।

किसी माथे पे हरदम एक ही लेबल नहीं रहता,
भिखारी चंद हफ़्तों में महाजन हो भी सकता है ।
 
छत टपकती है उसके ..कच्चे घर की ...!
वो किसान फिर भी ..बारिश की दुआ करता है ..!!
 
जिन्दगी जीने का कभी सलीका नहीं आया |
मुझे रूठो को मानाने का तरीका नहीं आया ||

ताउम्र भटकता रहा जाने किसकी तलाश में |
प्यासा होंके भी पीने का सलीका नहीं आया ||
 
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