वक़्त है झोंका हवा का और हम पीले पत्ते,
कौन जाने अगले लम्हे तुम कहाँ और हम कहाँ ...!!
हमने भी सदके लुटाये थे जी जान से उन पर ..
क्या मालूम था ऐ दोस्त, गमे तन्हाई का यही आगाज़ होता है...
मत कर ख़ाक के पुतले पे ग़रूर-ओ-बेन्याजी इतनी …
खुद को खुदी में झाँक कर देख तुझ में रखा क्या है !
जो फुरसत मिले तो चाँद से मेरे दर्द की कहानी पूछ लेना
एक वोही तो है हमराज़ मेरा, तेरे सो जाने के बाद.
हम से बेवफाई की इन्तहा क्या पूछते हो ???
वो हम से प्यार सीखती रही किसी और के लिए
हर वक़्त का हसना तुझे बर्बाद न कर दे ,,
तन्हाई के लम्हों में कभी रो भी लिया कर
दिल तो करता है ज़िन्दगी को किसी कातिल के हवाले कर दू
जुदाई में ये रोज़ रोज़ का मरना मुझे अच्छा नहीं लगता …
मेरी यादों से बच निकले तो वादा है मेरा तुझसे,
मैं खुद दुनिया से कह दूंगा कमी मेरी वफ़ा में थी.
उस के हाथ पर अपना नाम देखा तो मैं बहुत खुश हुआ,
वो बड़े मासूम से लहजे में बोली तेरे हम नाम और भी हैं ..!!!
जाने किस ग़म को छुपाने की तमन्ना है उसे ..
आज हर बात पे हँसते हुए देखा उसको …!
तुम्हारे बाद बाकी तो सब ठीक है लकिन ,
जहाँ दिल था कभी .. पहले ….वहां अब दर्द रहता है ..:very_drunk::sorrow: