Shayri (Part 1)

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Kabhi daman kabhi palkain bhigona kis ko kahte hain,,,
Kabhi mujh se poocho ki toot ke rona kis ko kahte hain,,,
Kabhi meri jagah khud ko rakho phir jaan jaoge,,,
Ke duniyan bhar ke dukh dil main samona kis ko kahte hain,,,
Meri aankhon mere chahre ko ek din gor se dekho,,,
Phir na poochoge VEERAAN hona kis ko kahte hain,,,


 
Utre jo zindgi teri gahraiyon main hum,,,उतरे जो जिंदगी तेरी गहराइयों में हम,,,
Mahfil main rah ke bhi rahe tanhaiyon main hum,,,महफ़िल में रह के भी रहे तनहाइयों में हम,,,
Deewangi nahin to or kya kahain ise?दीवानगी नहीं तो और क्या कहैं ?
Insaan dhoondhte rahe parchaiyon main hum,,,इंसान ढूंढते रहे परछाइयों में हम,,,,

 
Na jane kyun apne saye se bhi dar raha hoon main,,,न जाने क्यों अपने साए से भी डर रहा हूँ मैं,,,
Apni hi galiyon se chhupkar guzar raha hoon main,,,अपनी ही गलियों से छुपकर गुज़र रहा हूँ मैं,,
Maangi thi kabhi duaaon mein ik anokhi maut maine,,,मांगी थी कभी दुआ मैंने एक अनोखी मौत मैंने,,,
Isiliye shayad jeete-je mar raha hoon main,,,इसीलिए शायद जीते जी मर रहा हूँ मैं,,,

 
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Kise apna banayain koi is kaabil nahin milta,,,
Yahan pathar bahut milte hain dil nahin milta,,,
Ye duniyan farebon ki basti hai e-dost,,,
Yahan sirf dard milta hai,hamdard nahin milta.....
 
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क्या है जिंदगी ,
देखो तो ख्वाब है जिंदगी ,
पढो तो किताब है जिंदगी ,
सुनो तो ज्ञान है जिंदगी ,
पर हँसते रहो तो आसन है जिंदगी …​
 
हो जो ताल्लुक तो रूह से हों...

दिल तो आखिर भर ही जाते हैं...​
 
ये मनमोहन भी ले लो;

ये दिग्विजय भी ले लो;

भले छीन लो हमसे सोनिया गांधी!

मगर हमको लौटा दो, वो कीमतें पुरानी;

वो आटा, वो गैस, वो बिजली, वो पानी!

बड़ी मेहरबानी, बड़ी मेहरबानी!!
 
Usko chaaha bhi to ikraar na karna aaya,,,उसको चाहा भी तो इकरार न करना आया,,,
Kat gai umar hamain pyar na karna aaya,,,कट गई उम्र हमें प्यार न करना आया,,,
Usne mangi bhi agar to judaai maangi,,,उसने मांगी भी अगर तो जुदाई मांगी,,,
Or ek ham the hamain inkaar na aaya....और एक हम थे हमें इनकार न करना आया....




 
AAj ke baad khatam apni kahani hai,,,आज के बाद खतम अपनी कहानी है,,,
Teri or meri alag alag ab zindgani hai,,,तेरी और मेरी अलग अलग अब जिंदगानी है,,,
Tu bhi khush lag rahi hai,main bhi khush lag raha hoon,,,तू भी खुश लग रही है,में भी खुश लग रहा हूँ,,,
Lagta hai jo aankhon main hai vo khushi ka paani hai...लगता है जो आँखों में है वो खुशी का पानी है...



 
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Ab sharir-e-jaan bachane ki khwhish nahin rahi,,,अब शरीर -ए-जाँ बचने कि ख्वहिश नहीं रही,,,
Phir se paane ganwane ki khwahish nahin rahi,,,फिर से पाने गंवाने कि ख्वहिश नहीं रही,,,
Ab tum palat ke aane ki khwahish ko maar do,,,अब तुम पलट के आने कि ख्वहिश को मार दो,,,
Ab tumko aazmane ki khwahish nahin rahi...अब तुमको आजमाने कि ख्वहिश नहीं रही...



 
जब नींद से मेरा कोई वास्ता ही नहीं तो फिर क्यों
ये आवारा ख्वाब मेरी छत पर टहला करते है ??
 
Kushiyon ki aarzoo main mukaddar so gaye,,,खुशियों की आरज़ू में मुकद्दर सो गए,,,
Aandhi aisi chali ki apne bhi kho gaye,,,आंधी ऐसी चली कि अपने भी खो गए,,,
Kya khoob tha unka andaz-e-mohabbat,,,क्या खूब था उनका अंदाज़-ए-मोहब्बत ,,,,
Pyar dene aaye the or palkain bhigo gaye...प्यार करने आये थे और पलकें भिगो गए...



 
चाहता हूँ की भूल जाऊं तुम्हे

और खुद भी न याद आऊँ तुम्हे

जैसे तुम सिर्फ एक कहानी थी

जैसे मैं सिर्फ एक फ़साना था !!!
 
सूने पनघट का कोई दर्द भरा गीत थे हम

शहर के शोर मैं क्या तुझको सुनायी देते !!
 
इस तरह सताया है, परेशान किया है
जैसे दोस्ती नहीं एहसान किया है
 
नफरतों वाली दुनिया में प्यार न कर "साहिल"
यहाँ रूह फना हो जाती है लेकिन वफ़ा नही मिलती
 
कुछ लोगों को खुद होकर जबाब देना है
और कुछ से खुद होकर हिसाब लेना है

बहुत लिख ली तकदीर ने मन मुताबिक इबारत
तकदीर से वापस ज़िन्दगी की किताब लेना है

अब न होगी अंधेरों में और गुजर बसर
वक़्त के पास गिरवी रखा आफताब लेना है

पुराने ख्वाबो को हकीकत की जमीं
और आँखों को कुछ नए ख्वाब देना है
कुछ लोगों को खुद होकर............
 
काश खुदा ने हुस्न वालों अहसास ए दर्द दिया ह&am

काश खुदा ने हुस्न वालों अहसास ए दर्द दिया होता .

हो सकता था जालिम ने अपने से दूर न किया होता
हुस्न की अदाएं दिखाकर
मासूम दिल को अपने जाल में फंसाकर
नज़रों के फिर तीर चलाकर
दिल से दिल लगाकर फिर झट से दूर न किया होता
काश खुदा ने हुस्न वालों अहसास ए दर्द दिया होता
बाँहों की फिर पिंग झुलाकर
नए नए वो ख्वाब दिखाकर
सपनों की फिर सेज सजाकर
मीठी मीठी नींद में सुलाकर अचानक से फिर न जगा जगा दिया
काश खुदा ने हुस्न वालों अहसास ए दर्द दिया होता .




सोमबीर सिंह सरोया
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9321083377
 
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