Shayri (Part 1)

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[FONT=Arial, Helvetica, sans-serif]Khushiyon se naaraz hai meri zindgi,,,खुशियों से नाराज़ है मेरी जिंदगी,,,
Pyar ki mohtaaz hai meri zindgi,,,प्यार कि मोहताज़ है मेरी जिंदगी,,,
Hans leti hoon kabhi logon ko dekh kar,,,हंस लेती हूँ कभी लोगों को देख कर,,,
Warna dard ki kitaab hai meri zindgi,,,वर्ना दर्द कि किताब है मेरी जिंदगी....
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दर्द बन कर दफ़न हो गई सीने में हर बात,,,
ना समझा सके हम अपनी मजबूरियां और हालत,,,
वक्त ने इस लायक भी नहीं छोड़ा कि कोई शिकवा करें,,,
बिन नींद, आंसुओं के संग गुजरती है अब हमारी हर रात...
 
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Duniyan ko is ka chehra dikhana pada mujhe,,,दुनियां को इसका चेहरा दिखाना पड़ा मुझे,,,
Parda jo darniyaan tha hatana pada mujhe,,,पर्दा जो दरमियाँ था हटाना पड़ा मुझे,,,
Ruswaiyon ke khauf se mehfil main aaj,,,रुसवाइयों के खौफ से महफ़िल में आज,,,
Phir is bewafa se haath milana pada mujhe,,,फिर इस बेवफा से हाथ मिलाना पड़ा मुझे...


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मोहब्बत भी क्या चीज़ बनायीं है तू ने ए खुदा

तेरी ही मस्जिद में तेरे ही बंदे तेरे ही सामने रोते है किसी और के लिए !!
 
जिंदगी से कोई चीज़ उधार नहीं मांगी मैंने 'फ़राज़'

कफ़न भी लेने गए तो जिंदगी अपनी देकर !!
 
निगाहें जो आज उनकी झुकी झुकी देखी हमनें
तो ना मानने वाली बात भी मान ली हमने
 
सुनी जो कदमो की आहट तो जाम फेंक दिया
मिली जो नजर तो सुराही ही तोड दी हमने

 
तुम्हारे शहर में रहने को तो रहते हैं हम लेकिन

कभी हम टूट जाते हैं, कभी घर टूट जाता है...
 
खफा रह कर तुम भी न रह पाओगे

जान तो जाएगी हमारी, सांस तुम भी न ले पाओगे !!
 
मुहब्बत के अंदाज़ भी जुदा से है

किसी ने टूट के चाहा और कोई चाह के टूट गया !!
 
उनका हुस्न बयान न हो सका ए दोस्त

लोग थक गए शायरी करते करते !!
 
मेरे लफ़्ज़ों की पहचान अगर कर लेता वो फराज़

उसे मुझ से नहीं खुद से ही मुहब्बत हो जाती !!
 
उस से अब कोई वास्ता नहीं लेकिन

उसके हिस्से का वक्त आज भी तनहा गुजरता है!!
 
जब नाम तेरा प्यार से लिखती हैं उंगलियाँ
मेरी तरफ ज़माने की उठती हैं उंगलियाँ
दामन सनम का हाथ मे.न आया था एक पल
दिन रात उस एक पल से महकती हैं उंगलियाँ
जिस दिन से दूर हो गये उस दिन से ही सनम
बस दिन तुम्हारे आने के गिनती हैं उंगलियाँ
पत्थर तराश कर ना बना ताज एक नया
फनकार की ज़माने में कटती हैं उंगलियाँ
 
Last edited:
मुझ से कहती है तेरे साथ रहूंगी सदा

बहुत प्यार करती है मुझ से उदासी मेरी!!!
 
वो मेरा सब कुछ है पर मुक्कदर नहीं फ़राज़

काश वो मेरा कुछ न होता पर मुक्कदर होता !!
 
Zindgi ka raaz maine tanhaai main pa liya,,,जिंदगी का राज़ मैंने तन्हाई में पा लिया,,,
Jiska bhi gam mila apna bana liya,,,जिसका भी गम मिला अपना बना लिया,,,
Sunane ko mila na koi daastaan-e-gam,,,सुनाने को मिला न कोई दास्ताँ -ए-गम,,,
Aaina rakha saamne or khud ko suna liya,,,आइना रखा सामने और खुद को सुना लिया....

 
Dil gumsum,zuban khamosh kyon hai,,,दिल गुमसुम,जुबां खामोश क्यों है,,,
Ye aankhain yun namm kyon hain,,,ये आँखें यूँ नम क्यों हैं,,,
Jab,kabhi tujhe paaya hi na tha,,,जब,कभी तुझे पाया ही ना था,,,
To aaj tujhe khone ka gam kyon hai...?तो आज तुझे खोने का गम क्यों है...?


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Na jaane kyon hamain ansoo bahana nahin aata,,,ना जाने क्यों हमें आंसू बहाना नहीं आता,,
Na jaane kyon hamain haal-e-dil sunana nahin aata,,,ना जाने क्यों हमें हाल-ए-दिल सुनाना नहीं आता,,,
Kyon saathi bichhad jaate hain hamesha,,,क्यों साथी बिछड जाते हैं हमेशा,,,
Shayad hamain hii saath nibhana nahin aata,,,शायद हमें ही साथ निभाना नहीं आता,,,,




 
Unke liye jab hamne bhatakna chhod diya,,,उनके लिए जब हमने भटकना छोड़ दिया,,,
Yaad main unki jab tadapna chhod diya,,,याद में उनकी जब तडपना छोड़ दिया,,,
Wo roye bahut aakr tab hamare paas,,,वो रोये बहुत आकर तब हमारे पास,,,
Jab hamare dil ne dhadkna chhod diya...जब हमारे दिल ने धडकना छोड़ दिया...





 
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