Shayri (Part 1)

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हम तो वो हैं जो तेरी आवाज़ सुनकर तेरे हो गए ..

वो और होंगे जिन्हें तेरे दीदार की हसरत होगी .​
 
तेरी जैसी आँखों वाले जब समंदर पे आते हैं ...

तो लहरें भी शोर मचाती हैं लो आज समंदर डूब गया .​
 
मैं ने अपनी हर एक सांस उसी रात को दे दी थी ,

जिस रात सोई थी सीने पर सर रख के मेरे |​
 
सुनी जिन्दगी , सुने सपने , सुने हुए अल्फाज ,

हम पे क्या कुछ बीत गया , एक तुझको गंवाने से |
​
 
ख्वाहिशों का काफिला भी अजीब है ग़ालिब ...!!
अक्सर वहीं से गुज़रता है जहां रास्ता नहीं होता ..!!
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सुनसान रास्तो पर मंजिलो की बाँट जोहती ख्वायिशे,
मंजिल के दामन को थामे इन्द्रधनुष के रंगों में छिपी बंदिशे!!
नसीब के दीये को अरमानो की लों में जलाती मुश्किले,
हर शाम घर को लोटती उम्मीदों को धूल में उड़ाती ख्वायिशे!!
 
"कोई तेरे साथ नहीं है तो गम ना कर
खुद से बढ़कर कोई दुनिया में हमसफ़र नहीं होता !!"​
 
उल्फते सफर संग दस्ते सहरा में ....
खोज रहा है इंसा खुद का पता इस मतलबी दुनिया में |​
 
अपनी हथेली से मेरी हथेली मिला लेना ,
जब करना दुआ तो उसे भी उठा लेना ,
जब खुदा दे ख़ुशी तो अपना हाथ आगे करना ,
जब दे गम तो मेरी हथेली बढ़ा देना .​
 
बहुत लम्बा ये ज़िन्दगी का सफ़र है ....
धूप है, छाँव है, ख़ुशी भी हर डगर है.....

ग़म रोज़ हर एक मोड़ पे मिलते ही रहेंगे
उनमें भी ख़ुशी खोज जज्बा तुझमे अगर है ....​
 
रास्ता ऐसा भी दुश्वार न था ,​
बस तुम को हमारी चाहत पे ऐतबार न था ,​
तुम ही चल न सके हमारे साथ ,​
वरना हमें जान देने से भी इंकार न था ...!! . .​
 
मेरी मोहब्बत है वो कोई मज़बूरी तो नही,
वो मुझे चाहे या मिल जाये, जरूरी तो नही.
ये कुछ कम है कि बसा है मेरी साँसों में वो,
सामने हो मेरी आँखों के जरूरी तो नही !!​
 
फासला न तय कर सके हम उम्रभर बस इतना सा..
अपने दायरे से निकल कर उसके दिल तक जाना था ..​
 
ख़ामोशी छोड़ कर चले गए जो हैं , लम्हे ,
बज़्म में वो लौट कर अब नहीं आने वाले !!


तुम्हारी नादानियों से टूट गए जो खिलौने,
इन कमजोर कोशिशों से नहीं जुड़ने वाले !!


दिल से मिट चुके हसीं यादों के जो मंजर,
इन पनीली आँखों से कभी नहीं जाने वाले !!


सोचा तुम्हे पुकार लें करीब जाकर, लेकिन ,
हलक में घुटे लफ्ज़ जबां पे नहीं आने वाले!!


वफ़ा की आस में हमें रुसवाई मिलती रही
दिल में लगे दाग अब यूँ नहीं मिटने वाले !!


इस तंगदिली को हम क्या नाम दें ' ऐ तल्ख़'
ज़फाबाजी के इलज़ाम भी हैं अब लगने वाले !!
​
 
तुम्हारी दुनिया से चले जाने के बाद हम तुम्हे ,
हर एक तारे में नज़र आया करेंगे ,
तुम हर पल कोई दुआ मांग लेना ,
और हम हर बार टूट जाया करेंगे …|​
 
यूं कहने को तो हम बड़े खुश-मिजाज़ हैं

पर रुला देती है किसी के दीदार की हसरत !!!!
 
सिखा दी बेरुखी भी तुम्हे ज़ालिम ज़माने ने

के तुम ...जो सीख लेते हो हम पर ही आजमाते हो !!!
 
"कब तलक महफूज़ रखूँ तुझसे मैं खुद को बता,
तू है वो खोया लिफाफा जिसपे है मेरा पता"​
 
हूँ तो खफा उससे, पर जाने फिर भी क्यूँ..?​
न चाह कर भी उसको चाहना अच्छा लगता है,
हकीकत से हूँ दूर, यह मुझ को है पता.. ​
पर जान के अनजान रहना अच्छा लगता है,
कायल नहीं मैं रोने का फिर भी कभी कभी,​
तन्हाई में कुछ देर रोना अच्छा लगता है,
वो मेरा था, वो मेरा है, वो मेरा रहेगा​
कुछ पल इस ख्वाब में खोना अच्छा लगता है..​
 
jab koi ek bhi na yaar tha apna
aaine ki tara kirdar tha apna
yahan koi na ghamkhwar tha apna
5 din office mein guzar jaate
hafte mein sirf aik aitwar tha apna
jo koi bhi dekhta bimar ho jata
kuch itna sakhat bukhar tha apna
apne logoan se baat karte rehna
sirf ek yehi karobar tha apna.
 
कभी टूटे नहीं मेरे दिल से तेरी यादो का रिश्ता ...
गुफ्तगू .....जिस से भी हो ...ख्याल तेरा ही रहता है .!​
 
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