"कब तलक महफूज़ रखूँ तुझसे मैं खुद को बता,
तू है वो खोया लिफाफा जिसपे है मेरा पता"
फासला न तय कर सके हम उम्रभर बस इतना सा..
अपने दायरे से निकल कर उसके दिल तक जाना था ..
बड़ा एहसान है तेरी रुसवाई का मुझपे ,.
तुझसे मिली एक ठोकर ने मुझे चलना सिखा दिया …!
सूरज रोज निकलता हे ,पर सुबह नहीं होती ...
उसका चले जाना ,जेसे आँख से गई ज्योति ....
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