Shayri (Part 1)

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Log aksar kehte hai jinda rhe toh phir milenge…………..
Magar Iss dil ne mehsus kiya hai agar milenge toh hi shayad Jinda rhenge.
 
हाथों में किसके सॉप दे हम ज़िन्दगी की डोर
कोई भी ऐतबार के अब काबिल नहीं रहा
हम कश्ती-ऐ-पतवार को ले जायें किस तरफ
नज़रों के सामने कोई साहिल नहीं रहा...​
 
[h=6]धुँधला हुआ आलम शाम ढलने लगी है
उसके जूड़े की गाँठ यारो खुलने लगी है

रोशन हुए दिल में फिर चिराग हुस्न के
तमन्नाएं पतंगों सी मचलने लगी हैं
[/h]
 
फासला न तय कर सके हम उम्रभर बस इतना सा..
अपने दायरे से निकल कर उसके दिल तक जाना था ..​

This lovelorn attitude is due to the fact that distance leads to enchantment.
 
बड़ा एहसान है तेरी रुसवाई का मुझपे ,.
तुझसे मिली एक ठोकर ने मुझे चलना सिखा दिया …!​
 
दीवाना हँसता है तो उसे हस लेने दो यारो
तन्हाई में वो शक्स रोया भी बोहत होगा ......​
 
उसने कुछ ऐसे सलीके से गम दिए हैं मुझे,.........
के सारे जख्मों से खुशबू सी आ रही है, अभी ....​
 
[FONT=lucida grande, tahoma, verdana, arial, sans-serif]सूरज रोज निकलता हे ,पर सुबह नहीं होती ...[/FONT]
[FONT=lucida grande, tahoma, verdana, arial, sans-serif]उसका चले जाना ,जेसे आँख से गई ज्योति ....[/FONT]​
 
जैसे कभी अपना माना था वैसे ठुकराने आओ तुम
एक रस्म अभी तक बाकी है वो रस्म निभाने आओ तुम
वैसे भी तेरा मुझसे मिलना मंजूर नहीं था दुनिया को
बस कभी कभी मुझसे मिलकर दुनिया को जलाने आओ तुम​
 
" खुश हाली में इक बदहाली , तू भी है और में भी हूँ ,
हर निगाह पर इक सवाली , तू भी है और में भी हूँ ,
दुनिया कुछ भी अर्थ लगाये , हम दोनों को मालूम है ,
भरे -भरे पर खाली -खाली , तू भी है और में भी हूँ ...."

​
 
Last edited:
बड़ा एहसान है तेरी रुसवाई का मुझपे ,.
तुझसे मिली एक ठोकर ने मुझे चलना सिखा दिया …!​


तेरी रुसवाई मे हमें बोलना सिखा दिया
प्यार की ठोकर ने हमें चलना सिखा दिया
शायद हम ही ना थे तेरी चाहत के काबिल
तडपते दिल
ने
आज हमें जलना सिखा दिया
 
सूरज रोज निकलता हे ,पर सुबह नहीं होती ...
उसका चले जाना ,जेसे आँख से गई ज्योति ....​

Very good. The dejected lover's pathos vividly pours out in the couplet.

But such a character must remember that there are so many alternates and other purposes of life also in addition to remembering at all time the lost love or unfulfilled dream of love life!
 
खुश रहना सीख रहा था उसके बगैर भी

यादें बेहाल कर देती हैं मुड-मुड के !!!​
 
नादानी की हद है ज़रा देखो तो मुझे ,

उस्से खो कर ,में उस्सी जेसी ढूँढ रहा हूँ !



मायावी सा समय था वो ,


जिस के फिर से आने की बाट जोह रहा हूँ |​
 
[FONT=lucida grande, tahoma, verdana, arial, sans-serif]इश्क की आखरी हद होती हे जल जाना [/FONT]
[FONT=lucida grande, tahoma, verdana, arial, sans-serif]राख हो गया हूँ ,और नहीं जल सकता | [/FONT]​
 
[FONT=lucida grande, tahoma, verdana, arial, sans-serif]प्रेम की सजा कभी माफ़ नहीं होती ,[/FONT]
[FONT=lucida grande, tahoma, verdana, arial, sans-serif]ये वो स्लेट हे जो कभी साफ़ नहीं होती |[/FONT]​
 
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