Shayri (Part 1)

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आना हैं तुझे तो हिजाब ओढ़ के आया कर
तू महफ़िल ए बदनाम में जरा सोच के आया कर
कहीं चढ़ ना जाए ये रंग ए उल्फत तुझे भी
दिलजलो के दरीचे में तू बुत हो के आया कर​
 
आज तक में यही भूल करता रहा ,
आग यहाँ लगी थी ,और वहां बुझाता रहा
 
उसके मन मंदिर में दिया बनकर जलना चाहता था में ,
प्यार के दुश्मनों ने मंदिर ही गिरा दिया |
 
ये तो दिल था दीवाना के तुम पर आ गया
वरना हम कीमती पथरों को भी उठाया नहीं करते

ये मन के तुम हसीन हो मगर ये भी सुन लो
हम हसीन लोगों से दिल लगाया नहीं करते

जिस से करते हैं प्यार बस एक ही बार करते हैं
बार बार हम भी किसी को सताया नहीं करते

तुम तो अपने हो तुम से क्या पर्दा
वरना हम राज़ -ए -दिल किसी को बताया नहीं करते

तुम कह दो तो तुम्हारे लिए जान भी हाज़िर
वरना हम ज़िन्दगी दांव पर लगाया नहीं करते .
​

​
-----अनाम |​
 
Apne aasman se meri zameen dekh lo,
Tum khuwab aaj koi haseen dekh lo,
Aazmana hai agar aitbar ko,
Mere to ek jhoot tum keho aur mera yakin dekh lo...
 
क़बर पर मेरी उस का आंसू बहाना भी बहुत है ,
उस का शहर ए खामोस हम से गुज़र जाना भी बहुत है ,

हम को अपने जाने का गम नहीं बुल्कुल ,
उस का मेरे जाने पर पछताना भी बहुत है ,

समुंदर किनारे मट्टी का घरोंदा न बना तो क्या ,
उस का उस घरोंदे को ढाना भी बहुत है ,

खुद से बेवफाई का गिला नहीं हमको ,
उस का किसी और का हो जाना भी बहुत है ,

हम तो तनहा आये और तनहा चले गए ,
उस का हम को छोड़ जाना भी बहुत है ,





----- अनाम |​
 
आज देखा तो ये महसूस हुवा इस दिल को यारों ,
मोहब्बत आज भी हम उससे बे पनाह करते हैं |

कभी जीते हैं उसका नाम ले कर लम्हा लम्हा,
तो कभी यादों में उसकी जार - जार मरते हैं | ​
 
मैंने तो यूँ ही देखा था ,
दीदार -ए -शौक़ की खातिर तुम्हीं ,
तुम "दिल " में उतेर जाओ गे ,

कभी "सोचा " भी न था .​
 
[FONT=lucida grande, tahoma, verdana, arial, sans-serif]आप के चले जाने से पहले ,,[/FONT]
[FONT=lucida grande, tahoma, verdana, arial, sans-serif]हमारी भी गिनती थी जीने वालों में |[/FONT]
[FONT=lucida grande, tahoma, verdana, arial, sans-serif]
[/FONT]

आप के चले जाने के बाद ,,
हम भी शुमार हैं पीने वालों में |​
 
[FONT=lucida grande, tahoma, verdana, arial, sans-serif]मेने हमेसा हंसने की कोशिश की ,छुपा कर गम जमाने से ,[/FONT]
[FONT=lucida grande, tahoma, verdana, arial, sans-serif]पर जब उसका नाम याद आता हे ,रोना आ ही जाता हे |[/FONT]​
 
यही तो फरक होता हे नजर नजर का
तुम नजर हटाकर चले गए ,
हम अभी भी नजर गडाए बेठे हैं |
 
हमने ना की थी फ़िक्र-ए मंजिल कभी ,
पर बीच में ही उनका मुकाम आ गया |
अब अकेले ही चल-चले हैं हम ,
चाहे मंजिल आये या ना आये कभी |
 
आँखों मे आये आंसू , दिल में उतर गए ,
फिर भी मुस्कराने की जद्दोजहद जारी हे |
 
जो साथ चलकर हमसफ़र ना बन सके ,
वे जुदा हो कर मेरी किस्मत के खुदा हो गए |
 
वफ़ा में अब येः हुनर इख्तियार करना है ..
वोह सच कहे न कहे एतबार करना है ..​
 
लबों पर तबस्सुम आँखों में दो चार अश्क भी हैं


आज उन्हें शायद किसी ने हंसा कर रुलाया है .​
 
वक़्त -ए-जुदाई वो रोती रही मगर ....
आँखों में मेरे आंसुओं ने कर लिया बसेरा !!​
 
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