Shayri (Part 1)

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हमेशा रोया नहीं करते
कभी-कभी हंसना भी चाहिए
अन्दर ही अन्दर कुढने का क्या फायदा
कभी-कभी बेबाक बहकना भी चाहिए


अर्ज किया हे --
ख़ुशी वो चीज हे
जिस से गम भुलाए जाते हैं
और गम वो चीज हे
जिस से कागज़ चिपकाए जाते हैं

 
हर चीज बिकती हे इस दुनिया में
पर जुदाई क्यों रिश्वत नहीं लेती
मरता नहीं कोई किसी से जुदा हो कर
बस ये यादें हैं जो जीने नहीं देती
 
सोचा ,की पानी से जुदा होकर
ये मछलियाँ
क्यूँ तड़प-तड़प कर मर जाती हैं
क्यूंकि ना मालुम था उनको की
नजदीकियां आदत ,
और आदत अक्सर
जिन्दगी बन जाती हैं
 
वो तो पानी की बूँद हे
जो आँखों से बह जाए
आंसू तो वो हैं जो
आँखों में ही रह जाएँ


वो दर्द क्या जो
लफ्जों में बयाँ हो जाए
दर्द तो वो हे जो
दिल में ही ठहर जाए
 
Kaghaz kaghaz haraf sajjaya karta hai,
Tanhai main sheher basaaya karta hai,
Kaisa paagal shaks hai saari saari raat,
Deewaroon ko dard sunaya karta hai,
Ro daita hai aap hi apni baatoon par,
Aur phir khud ko aap hansaaya karta hai
 
Mera iqraar tere inkaar se behter ho ga
Mera din bhi teri raat se behter ho ga
Yakeen nahin to doli se jhank kar dekhna
Mera janaza teri baarat se behter ho ga......
 
Dard Ko bhi Ab Dard Hone laga hai,
Dard Khud hi Mere Zakham dhone lagha hai,
Dard ke sath kabhi Roye na hum,
Dard Khud hi Humko chhu kar Rone Laga hai ...
 
Bechain hoke dil aah bhar ke kehta hai
wo mujhe chahne wala ranjish mian rehta hai......
jee to karta hai khanjar utar doon usmein
par wo bewafa ab tak mere dil me rehta hai. ....
 
लोग जब पूछते हैं के कौन बेवफा है जो तेरी ये हालत कर गया ?
मैं मुस्कुरा के कहता हूँ उसका नाम हर किसी के लबो पर अच्छा नही लगता
 
लोग जब पूछते हैं के कौन बेवफा है जो तेरी ये हालत कर गया ?
मैं मुस्कुरा के कहता हूँ उसका नाम हर किसी के लबो पर अच्छा नही लगता

मन्नै कहया अक किसनै यो शेर लिख्या
वो बोल्या अक बता दिया तो वो चढ जागा
मन्नै कहया अक चढ गया तो आछी बात सै
वो बोल्या जिसनै चढन की चाह वो शायर ही क्या
शायर तो वो होते है जो बस दूसरों के लिए लिखते है
अपने लिए लिखे जो वो खुदगर्ज होते हैं
 
अपने मुकददर का तो मिल ही जाएगा खुदा
वो चीज अदा कर जो किस्मत मे ना हो
 
बैठे है तेरे खयालों मे, कागज पे लिखा है तेरा नाम
कागज पे तेरी तस्वीर लगा के, लिखा है ये पैगाम
जिन्दा या मुर्दा पकडने पर मिलेगा ५०००० का ईनाम
 
बादलों के दरमियां कुछ एसी साजिश हुई
मेरा घर मिट्टी का था वहीं बारिश हुई
उनकी भी जिद है बिजलियां गिराने की
हमारी भी जिद है यहिं आशियाना बनाने की
 
खुद पे ही खुद का कर्ज हूँ मैं
खुद हूँ दवा खुद मर्ज हूँ मैं


जी रहा हूँ मैं बस अपने वास्ते
हूँ कितना स्वार्थी खुदगर्ज हूँ मैं


सोचता हूँ मैं मेरे परिवार तक
बस इतने दायरे में अपना फर्ज हूँ मैं


जिन्दा रह सकूँ बस इतना सोच कर
सांस लेने की महज इक गर्ज हूँ मैं


जिंदगी का साज यूँ ही बज रहा
सुर में बेसुर में जो तर्ज हूँ मैं


उसकी फेहरिस्त से भला बचा है कौन
थोडा आगे या पीछे - पर दर्ज हूँ मैं
मन्नै कहया अक किसनै यो शेर लिख्या
वो बोल्या अक बता दिया तो वो चढ जागा
मन्नै कहया अक चढ गया तो आछी बात सै
वो बोल्या जिसनै चढन की चाह वो शायर ही क्या
शायर तो वो होते है जो बस दूसरों के लिए लिखते है
अपने लिए लिखे जो वो खुदगर्ज होते हैं
 
कोई आँखो से बात कर लेता है
कोई आँखो मे मुलाकात कर लेता है
बडा मुश्किल होता है जवाब देना
जब कोई खामोश रहकर सवाल कर लेता है
 
उसकी खैरियत की ख़बर हो जाती मुझको,
एक बार अगर मेरे हालत का जयाजा लेता
बडा ही “खुदगर्ज” रहा था वो हर तकाजे मे,

मुझे गुमान हो उसकी सलामती का भी
वो कैसे मगर इतना भी मेरा एहसान लेता
 
नजरों से नजरों के जाम पिता हूं
जब आए महफिल मे तेरा नाम, पिता हूं
हर दिन ना पिता यहां मै यारों
बस जब जब ढलती ये शाम, पिता हूं
सांस लेने के सिवा ना कोई काम मुझे
बस जब जब होता कोई काम, पिता हूं
तूने जो हमारे दिल से की है इतनी बेवाफई
तो खुद से उसका ले ले इंतकाम, पिता हूं
लगातार ना कभी पिता हूं मै
हर दो लम्हा कर आराम, पिता हूं
बिना तेरे अब कैसे जियूंगा मै
सो अपनी मौत का कर इंतजार, पिता हूं


 
जीते थे हम तो पहले भी जां पे खेलकर i
बाज़ी है अब ये जान से बढ़कर लगी हुई ii
फैज़
 
" ret par likh k mera naam mitaya na karo , aankhen sach bolti hain pyaar chhupaya na karo, shehar-e-ehsaas mein pathraav bohot hai mohsin, dil ko sheeshay k jharokhon mein sajaya na karo "
 
True line : aankhen sach bolti hain pyaar chhupaya na karo



" ret par likh k mera naam mitaya na karo , aankhen sach bolti hain pyaar chhupaya na karo, shehar-e-ehsaas mein pathraav bohot hai mohsin, dil ko sheeshay k jharokhon mein sajaya na karo "
 
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