Shayri (Part 1)

Status
Not open for further replies.
बस एक बार निकाल दो इस इश्क से ए खुदा

फिर जब तक जीयेंगे कोई खता न करेंगे!!!
 
बस एक बार निकाल दो इस इश्क से ए खुदा

फिर जब तक जीयेंगे कोई खता न करेंगे!!!
पा लिया मैं इश्क दा चौला , जेड़ा कदी मैला ना होवे
मिल्या सानु हुस्न हकीकी , जेड़ा कदी फनाह ना होवे
मिल्या वो महबूब प्यारा , जेड़ा कदी जुदा ना होवे
आदम इश्क नमाज मैं निति , जेड़ी कदी क़ज़ा ना होवे
 
पा लिया मैं इश्क दा चौला , जेड़ा कदी मैला ना होवे
मिल्या सानु हुस्न हकीकी , जेड़ा कदी फनाह ना होवे
मिल्या वो महबूब प्यारा , जेड़ा कदी जुदा ना होवे
आदम इश्क नमाज मैं निति , जेड़ी कदी क़ज़ा ना होवे

Kaliyan Ishq Kaman okha
Kisay nu Yar Bnana Okha
Pyar Pyar Tay har koi Bollay
Kar k Pyar nibhana okha
Har koi Dhukhan Tay HAss Lenda
kisay Da Dard wadana okha
Gallan Nall naye Rutbay millday
Jogi Bhesa wadana okha
Koi Kisay Di gall naye sunda
lokan nu Samjhana okha
 
तुम लौट के आने का तकल्लुफ मत करना ,
हम एक मोहब्बत को दो बार नहीं करते !!
 
अक्सर वही लोग उठाते है सूरज पर उंगलियां,

एक जुगनू जैसी भी जिनकी औकात नहीं होती !
 
Tha koi jo mere dil ko zakham de gaya,,, था कोई जो मेरे दिल को ज़ख़्म दे गया,,,
Zindgi bhar jeene ki kasam de gaya,,, जिंदगी भर जीने की कसम दे गया,,,
Lakhon phoolon main se ek phool chuna tha maine,,, लाखों फूलों मैं से एक फूल चुना था मैंने,,,
Jo kanton se bhi gahra jakham de gaya,,, जो काँटों से भी गहरा ज़ख़्म दे गया,,,

 
शर्मिंदा हूँ आज भी इन फूलों से
जिन को तेरे लिए टहनी से जुदा किया !!
और वो मेरी ही किताबों में सूख गए
तेरा इन्तेज़ार करते करते !!
 
के कुछ शख्सियत और भी है ज़माने में
तो इम्तिहान मुझी से क्यु मुखातिब हो ए खुदा !!
 
'ग़ुलाम अली साहब - आवारगी ' से कुछ पंक्तियाँ पेश हैं:

"ये दिल ये पागल दिल मेरा, क्यों बुझ गया आवारगी

कल शब मुझे बेशक्ल की आवाज़ ने चौंका दिया
मैंने कहा तू कौन है, उसने कहा आवारगी

कल रात तन्हा चाँद को देखा था मैंने खुआब में
मोहसिन, मुझे रास आएगी शायद सदा आवारगी"
 
Last edited:
खुसरो दरिया प्रेम का सो उलटी वाकी धार ..
जो उबरे सो डूब गए ,जो डूबे सो पार ...

अमीर खुसरो ...​
 
Maine kafir k ehsaason mein hai dekha…
Hai khuda vahan bhi… sirf jataata nhi..!!!

1.
बैठ कर पीने दे मस्जिद मे या

वो जगह बता दे जहा खुदा नहीं

2.
पी काफिर के घर जाकर

वहा खुदा नहीं

1.
मैंने काफ़िर के एहसासों में है देखा

है खुदा वहां भी सिर्फ जताता नही


 
Dil main tammanao ko dabana seekh liya,,, दिल मैं तम्मनाओं को दबाना सीख लिया,,,
Gam ko aankhon main chhupana seekh liya,,, गम को आँखों मैं छुपाना सीख लिया,,,
Mere chehre se koi baat zahir na ho,,, मेरे चहरे से कोई बात ज़ाहिर न हो,,,
Isliye Daba ke honton ko muskrana seekh liya... इसीलिए दबा के होठों को मुस्कुराना सीख लिया...

 
Yun Kabhi Tabaahi Ka Jashan Mana Lete Hain,,, यूँ कभी तबाही का जश्न मना लेते हैं,,,
Apni Palkon Pe Sitaron Ko Saja Lete Hain,,, अपनी पलकों पे सितारों को सजा लेते हैं,,,
Tum To Apne The Zara Haath Badhaya Hota,,, तुम तो अपने थे ज़रा हाथ बढाया होता,,,
Gair Bhi Doobne Wale Ko Bacha Lete Hain… गैर भी डूबने वाले को बचा लेते हैं...





 
"बेक़रारी सी बेक़रारी है ,
वस्ल हैं और फिराक तारी है
जो गुज़ारी न जा सकी हम से
हम ने वो ज़िन्दगी गुज़ारी है
बिन तुम्हारे कभी नहीं आई
क्या मेरी नीँद भी तुम्हारी है ?
उस से कहियो की दिल की गालियों में
रात-दिन तेरी इंतजारी है "
 
Badla jo waqt aapki mohabbat badal gai,,, बदला जो वक़्त आपकी मोहब्बत बदल गई,,,
Suraj dhala to saaye ki soorat badal gai,,, सूरज ढला तो साए की सूरत बदल गई,,,
Ek umar tak ham aapki zaroorat bane rahe,,, एक उम्र तक हम आपकी जरूरत बने रहे,,,
Fir yun hua ki aapki zaaroorat badal gai,,, फिर यूँ हुआ की आपकी जरूरत बदल गई,,,
 
यूँ न खेंच अपनी तरफ मुझे बे-बस कर के....
के खुद से भी बिछड जाऊ और तू भी न मिले !!!​
 
किससे मैं उम्मीद करूँ ,
समझेगा मेरी कौन बात !

कौन चाहता है मुझ पर मुस्कान खिले ,
किसको धुन है नींद चैन की सोऊँ मैं ?
है कद्र किसे जज़्बात , मेरे अहसासों की ,
कौन मुझे गलबाँही दे जब रोऊँ मैं ?​
 
वो कहा गया क रौनक -ए -दर -ओ -दीवार गए मोहसिन ,
एक शख्स ले गया मेरी दुनिया समेट केर |​
 
Status
Not open for further replies.
Back
Top