Shayri (Part 1)

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Soch lene se pahley mein kar arz deti hun
shayari me dil ke raaz khol deti hun
kuch apni kuch unki kahaani bahut hain
mila mila kar kissey mein duniya ko bol deti hun…
!!
 
ये तो ज़मीन की फितरत है की ,
वो हर चीज़ को मिटा देती हे
वरना ,
तेरी यद् में गिरने वाले आंसुओं का ,
अलग समंदर होता !!​
 
जिसके साये में भरोसे की छांव देखी थी,
उसी दरख़्त ने सूरज से दोस्ती कर ली...
 
एक अदा आपकी दिल चुराने की
एक अदा आपकी दिल मैं बस जाने की
एक चेहरा आपका चाँद सा एक जिद हमारी चाँद को पाने की …
इश्क किया तुझसे , मेरे ऐतबार की हद थी ;
इश्क में दे दी जान , मेरे प्यार की हद थी ;
मरने के बाद भी खुली थी आँखें , यह मेरे इंतज़ार की हद थी ..!​
 
वो कभी हमपे जान दिया करते थे
जो हम कहते थे मान लिया करते थे
एक दिन पास से अनजान बन के गुजर गए
जो बिना देखे पहचान लिया करते थे
 
HUm mohabbat ki Numaish nai krte,
HUm lafzo Ki farmaish Nai krte,
Jise Chahte hai Dil Se Chahte hai,
Badle me Chahne Ki Khawaish nhi krte.

​
 
Jab bhi kuch sochta hu teri yaad aa jati hai.
Bethe bethe ankhe meri namm ho jati hain.
Dil rota hai par tu na aati hai.
Bus teri yaad hi to hai jo mujhe har baar rula jati hai........​

​
 
आग से खेलने के फन में माहिर थे

शरारों को मुट्ठी में क़ैद रखते है

ताज तपिश ने सारे अरमानों को सुला दिया

अपने ही शौख ने अपना दामन जला दिया
 
उसकी तस्वीर जो चन्द बरसों पुरानी देखी,
हीर रांझे की मैने उसमें दीवानी देखी,,
कल जो मद्मस्त थी सावन की घटा के जैसी,
आज देखी तो लगा बदली सयानी देखी,,
 
चोट एक साथ खायी है
ये दर्द तेरा भी शायद कुछ मेरे दर्द जैसा है

मैं भी तन्हा हूँ यहाँ और तू भी तन्हा है

दोनों ने मोहब्बत में चोट एक साथ खायी है

थोड़े हम भी पागल है थोडा तुभी बहका है

आदीन अभी लम्बा है ये सफ़र जिंदगी का शायद

अभी चोट खानी है बहुत अभी दर्द सहना है
​
 
कुछ जीत लिखू या हार लिखूँ

या दिल का सारा प्यार लिखूँ

कुछ अपनो के ज़ाज़बात लिखू या सापनो की सौगात लिखूँ ॰॰॰॰॰॰

मै खिलता सुरज आज लिखू या चेहरा चाँद गुलाब लिखूँ ॰॰॰॰॰॰

वो डूबते सुरज को देखूँ या उगते फूल की सान्स लिखूँ

वो पल मे बीते साल लिखू या सादियो लम्बी रात लिखूँ

मै तुमको अपने पास लिखू या दूरी का ऐहसास लिखूँ

मै अन्धे के दिन मै झाँकू या आँन्खो की मै रात लिखूँ

मीरा की पायल को सुन लुँ या गौतम की मुस्कान लिखूँ

बचपन मे बच्चौ से खेलूँ या जीवन की ढलती शाम लिखूँ

सागर सा गहरा हो जाॐ या अम्बर का विस्तार लिखूँ

वो पहली -पाहली प्यास लिखूँ या निश्छल पहला प्यार लिखूँ

सावन कि बारिश मेँ भीगूँ या आन्खो की मै बरसात लिखूँ

गीता का अॅजुन हो जाॐ या लकां रावन राम लिखूँ॰॰॰॰॰

मै हिन्दू मुस्लिम हो जाॐ या बेबस ईन्सान लिखूँ॰॰॰॰॰

मै ऎक ही मजहब को जी लुँ ॰॰॰या मजहब की आन्खे चार लिखूँ॰॰॰

कुछ जीत लिखू या हार लिखूँ

या दिल का सारा प्यार लिखूँ
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एक अजब-सी पहेली है जिंदगी,
सबके साथ होते हुए भी अकेली है जिंदगी,
कभी प्यार का अरमान है जिंदगी,
तो कभी दर्द से भरा तूफान है जिंदगी,
कभी कांटों से भरा रास्ता है जिंदगी,
कभी फूलों-सी मासूम है जिंदगी,
और कभी गुनाहों का बोझ बन जाती है जिंदगी,
आखिर क्या है यह जिंदगी ?
​
 
मुझसे मत पूछ की क्यूँ आँख झुका ली मैंने ,
तेरी तस्वीर थी जो तुझसे छुपा ली मैंने |

जिस पे लिखा था की तू मेरे मुक़द्दर में नहीं ,
अपने माथे की वोह तहरीर मिटा ली मैंने |

हर जन्म सबको यहाँ सच्चा प्यार कहाँ मिलता है ,
तेरी चाहत में तो उम्र बिता ली मैंने |

मुझको जाने कहाँ एहसास मेरे ले जाएँ ,
वक़्त के हाथो से एक नज़्म उठा ली मैंने |

घेरे रहती हैं मुझे एक अनोखी खुशबु ,
तेरी यादों से हर एक सांस सजा ली मैंने |

जिसके शेरों को वो सुनके बहुत रोई थी ,
बस वाही एक ग़ज़ल सबसे छुपा ली मैंने |
​
 
किसी के ज़ख़्म का मरहम , किसी के ग़म का इलाज ....!!
लोगों ने बाँट रखा हे मुझे दवा की तरह .​
 
रिश्तों में झुकना कोई बुरी बात नही जाना ...
चढ़ता सूरज भी डूब जाता है
चांदनी के लिए ...!!!​
 
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[FONT=lucida grande, tahoma, verdana, arial, sans-serif]कागा ,शरीर का सारा खा लिओ मांस |[/FONT]
[FONT=lucida grande, tahoma, verdana, arial, sans-serif]ये दो नेना मत खाइओ ,प्रियतम देखन की आस |[/FONT]​
 
ज़िन्दगी तुम बिन उल्फत सी लगती हे ,
एक पल की जुदाई मुदत सी लगती हे ,
पहले नहीं अब सोचते हे हम ,
जिंदगी को आपकी ज़रूरत सी लगती हे .​
 
जब तलक काम आते रहो , हमसफ़र कहलाते रहो ,
काम निकल जाने पर हमसफ़र , कोई दूसरा हो जाता है ... !!

... गम नहीं था मुझ को कभी ज़माने की रुस्वाइओं का ,
तकलीफ होती है जब कोई अपना खफा हो जाता है ... !!!
 
तुम मुझे ख़ाक भी समझो तो कोई बात नहीं ,
ये भी उड़ती हे तो आँखों में समा जाती हे |
 
कुछ पल मिले थे प्यार के,
जो साथ गुज़ार दिए,
पर उन पलों ने सपने हज़ार दिए,
छोड़ कर चल दिए अपने पराये सभी,
बुरे वक़्त ने कई चश्में उतार दिए​
 
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