~ अब और किस नशे पे हम ऐतबार करे साकी .........की आँखों से पिलाने वाले भी अब मिलावट करने करने लगे है ~
धूप है छाओं है
जलते तेरे पाँव है
धारा के विपरीत
बहती तुम्हारी नाव है
जिसने भूख मिटाई
उसको कहते भगवान है
जिसने हमको अन्न दिया,
वो भारत का किसान है
कभी बाढ़ ने
कभी सूखे ने सताया है
खुद को भूखा रख कर
तुने हमें खिलाया है
हर पल तुम परिश्रम
करते हो ,
लाखों लोगो की भूख
तुम अपने पसीने से हरते हो
किसान फिर क्यों तुम
भूखे मरते हो
तुम्हारी मेहनत को
चूहे और नेता खा जाते हैं
भूखों को कुछ मिलता नहीं
अनाज खुले में सड़ जाते हैं
और मेरे देश के किसान
भूखे ही मर जाते हैं
We use essential cookies to make this site work, and optional cookies to enhance your experience.