Shayri (Part 1)

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[h=5]पहले- पहले मुझसे शर्माती थी तन्हाई मगर ....
अब मेरे साथ ही मेरे बिस्तर पर सोने लगी ....!!!
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जिन इन्सां को पूजा हमने,वो पत्थर समान हो गए,
जिन पत्थरों को पूजा हमने वो सारे भगवान् हो गए,
पत्थर का धर्म न समझा ,न पत्थर का मजहब जाना,
पत्थर जोड़ के बने थे जो घर ,वो सारे मकान हो गए ​
 
पत्थर न चला जालिम शीशे के ख्वाब है ये
लग जाये टूट जाएँ,, नाजुक अलाव हैं ये |
हमने अभी ये जाना, क्या समझेगा ज़माना
दिल की लगी से जलते, जिस्ते-चिराग हैं ये |​
 
बच्चा बोला देखकर मस्जिद आलीशान
इक खुदा तेरे लिये इत्ता बडा मकान
 
सीधा साधा डाकिया जादु करे महान
एक ही थैले में भरें आंसु और मुस्कान
 
ना कमजोर पड़ा मेरा तुमसे ताल्लुक और ना कहीं हुए सिलसिले मजबूत
ये तो वक्त की साजिश है ऐ-दोस्त कभी तुम मसरूफ तो कभी हम मसरूफ
 
बहते अश्को कि जुबा नहीं होती
लफ्जो में मुहब्बत बयाँ नहीं होती |
मिले जो प्यार कभी तो क़द्र करना
किस्मत हर किसी पे मेहरबा नहीं होती ||
 
[h=5]वो रुप था या रंग हर पल जो मेरे संग था
मैने कहा तु कौन है उसने कहा तेरी नजर
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♥ ♥ ♥ आज कुछ कमी सी है तुम बिन !
♥ ♥ ♥ ना रंग ना रोशनी है तुम बिन !
♥ ♥ ♥ वक़्त अपनी रफ़्तार से चल रहा है,
♥ ♥ ♥ बस धड़कन थमी सी है तुम बिन !
♥ ♥ ♥ ना अलाव है ना ही धुवाँ,
♥ ♥ ♥ फिर भी दिल में तपिश सी है तुम बिन !
♥ ♥ ♥ बहुत रोका है बादल को बरसने से,
♥ ♥ ♥ फिर भी आँखों में नमी सी है तुम बिन !!


 
[h=5]दिन के उजेरे में न करो कोई ऐसा काम नींद जो ना आये तुम्हे रात के अंधेरे में
रात के अंधेरे में न करो कोई ऐसा काम मुह जो छिपाते फिरो दिन के उजेरे में
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[h=5]हर घड़ी चश्मे खरीदार में रहने के लिए
कुछ हुनर चाहिए बाजार में रहने के लिए
अब तो बदनामी का शोहरत से वो रिश्ता है,
कि लोग नंगे हो जाते हैं अखबार में रहने के लिए
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[h=5]हमारा कतल करने की, उनकी साजिश तो देखो...!!
चाँद निकलने से, पहले उपवास तोड दिया...!!
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एक नफरत ही है जिसे दुनिया लम्हों में जान लेती है
वर्ना चाहत का पता लगाने में तो जमाने बीत जाते हैं...
 
[h=5]कोई पास रहकर भी कभी मिला नहीं
कोई दूर रहकर भी कभी जुदा नहीं
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[h=5]चाहे कोई न दे हमें खुश रहने की दुआ ऐ-दोस्त
वैसे भी हम खुशियां रखते नहीं बांट दिया करते हैं
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[h=5]क्या सुनाऊ अपनी वफा की कहानी तुमको !!
समन्दर का रखवाला था, और सारी उमर प्यासा रह गया !!
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[h=5]तेरे इश्क ने सरकारी दफ्तर बना दिया दिल को !!
ना कोई काम करता है, ना कोई बात सुनता है. !!
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[h=5]बिछड़ जाता है कोई, तो मरता नहीं कोई किसी के बगैर ...
ये तो हकीकत है जिन्दगी की .......
लेकिन दोस्तों, सिर्फ साँस लेने को "जीना"तो नहीं कह सकते ! ♥[/h]
 
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