Shayri (Part 1)

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वास्ता हुस्न से या शिद्दत ए ज़ज्बात से क्या ,
इश्क को तेरे कबीले या मेरी जात से क्या ,
मेरी मसरूफ तबीयत भी कहाँ रोक सकी ,
वो तो याद आता है उस को मेरे दिन-रात से क्या ,
प्यास देखूं या करूँ फ़िक्र कि घर कच्चा है ,
सोच में हूँ कि मेरा रिश्ता है बरसात से क्या ,
अब वो कहता है के क्या लोग कहेंगे कल को
कल जो कहता था मुझे रस्मे रिवायात से क्या
 
हरयाणवी मै शायरी लिखी सै सुनियो
यो पयार भी कितना अजीब होवै सै ,जो किसी किसी नै रै
छोरो नसीब होवै सै,छु लेवै सै जो दामन इसका समझ
लयो वो सुसरा मौत के करीब होवै सै ।।
 
[h=5]मुखालफत से मेरी शख्सियत संवरती है |
मैं दुश्मनों का भी बहुत एहतराम करता हूँ
||[/h]
 
मेरी आँखों ने चुना है तुझको दुनिया देखकर
किसका चेहरा अब मैं देखू ,,,तेरा चेहरा देखकर ,,,,,,,,,
 
माना कि मैं अमीर नहीं हूं, यह बात तो सच है;
लेकिन अगर कोई अपना बना ले तो, उसका हर गम खरीद
सकता हूं!
 
प्यार से डंडा भी मारो तो होली लगती है!

गुस्से से हाल भी पूछो तो गोली लगती है!!

अपनो के लिए कोई भी अंदाज चलता है!

याद में गिरा दो आंसू भी समन्दर लगता है !!
 
अगर रख सको तो एक निशानी हूँ मैं....
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं....
रोक पाए न जिसको ये सारी दुनिया....
वोह एक बूँद आँख का पानी हूँ मैं.....
सबको प्यार देने की आदत है हमें....
अपनी अलग पहचान बनाने की आदत है हमे....
कितना भी गहरा जख्म दे कोई....
उतना ही ज्यादा मुस्कराने की आदत ह
 
[FONT=&quot]कभी यकीन होता है कभी सब झूठ लगता हैं |[/FONT]

[FONT=&quot]तेरा प्यार मुझे अब जाने क्यों अजीब लगता है ||[/FONT]

[FONT=&quot]सच ओर झूठ कि पहचान नहीं होती अब |[/FONT]

[FONT=&quot]इस कशमकश में रहना मुझको नसीब लगता है ||[/FONT]

[FONT=&quot]कभी लगता है तू छोड़ गया है मुझको राह में |[/FONT]

[FONT=&quot]कभी दूर होकर भी तू मुझको करीब लगता है ||[/FONT]

[FONT=&quot]कभी हर मुसीबत में तुझे अपने पास पाता था |[/FONT]

[FONT=&quot]आज मेरा होकर भी तू मुझको रकीब लगता है ||[/FONT]
-सन्दीप
 
[h=5]समझा ना कोई दिल की बात को
दर्द दुनिया ने बिना सोचे ही दे दिया
जो सह गए हर दर्द को हम चुपके से
तो हमको पत्थर दिल कह दिया
[/h][h=5][/h]
 
[h=5]सांपों को बांध दिया यह कहकर सपेरों ने
यहां इंसान ही काफी हैं इंसानों को डंसने के लिए
[/h]
 
[h=5]खफ़ा रहने का शौक भी पूरा कर लो तुम
लगता है तुम्हे हम जिन्दा अच्छे नहीं लगते

[/h]
 
dekh kr tanha mujhe poocha baharon ne
kanha gaya vo tera humsafar?
tujhe to bada naaj tha us pr
ye dekh kr mai chup raha magar
mere aansuon ne javab diya
milna kismat me, bichadna naseeb tha
vo mujhase itna door ho gaye,jitna vo mere paas tha.................
 
Tanha Rehna To Sikh Liya Humne,
Per Khush Na Kabhi Reh Payenge
Teri Duri To Pir Bhi Seh Leta Hai Ye Dil
Per Teri Mohabbat Ke Bin Na Jee Payenge….
 
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