तीसरा सोनिया गांधी ने हाईस्कूल से आगे की पढ़ाई कभी की ही नहीं, परन्तु रायबरेली से चुनाव लड़ने के समय उन्होंने अपने चुनाव नामांकन पत्र में उन्होंने ये असत्य हलफनामा दायर किया कि वो अंग्रेजी में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से डिप्लोमाधारी हैं. ये हलफनामा उन्होंने 2004 के लोकसभा चुनावों के समय रायबरेली में रिटर्निंग ऑफिसर के सम्मुख प्रस्तुत किया था. इससे पहले 1989 में लोकसभा में अपने बायोग्राफिकल में भी उन्होंने अपने हस्ताक्षर के साथ यही बात लोकसभा के सचिवालय के सम्मुख भी प्रस्तुत की थी, जो कि दोषपूर्ण दावा था. तत्पश्चात लोकसभा स्पीकर को लिखे पत्र में उन्होंने इसे मानते हुए इसे टाइपिंग की त्रुटि बताया. सत्य बात ये है कि श्रीमती सोनिया गांधी ने कभी किसी कालेज में पढाई की ही नहीं. वह पढ़ाई के लिए गिवानो के कैथोलिक नन्स द्वारा संचालित स्कूल मारिया आसीलेट्रिस गईं, जो उनके कस्बे ओरबासानों से 15 किलोमीटर दूर था. उन दिनों निर्धनता के चलते इटली की लड़कियां इन मिशनरीज में जाती थीं और फिर किशोरवय में ब्रिटेन चली जाती जिससेवहां वो कोई छोटी-मोटी नौकरी कर सकें. मैनो उन दिनों निर्धन थे. सोनिया के पिता और माता की हैसियत अत्यंत मामूली थी और अब वो दो बिलियन पाउंड की अथाह संपत्ति के स्वामी हैं. इस प्रकार सोनिया ने लोकसभा में हलफनामे के माध्यम से दोषपूर्ण जानकारी देकर आपराधिक कार्य किया है, जिसके तहत न केवल उन पर अपराध का मुकदमा चलाया जा सकता है अपितु वो सांसद की सदस्यता से भी वंचित की जा सकती हैं. ये सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय की भावना का भी उल्लंघन है कि सभी प्रत्याशियों को हलफनामे के माध्यम से अपनी सही पढ़ाई-लिखाई से संबंधित योग्यता को प्रस्तुत करना आवश्यक है. इस प्रकार ये सोनिया गांधी के तीन झूठ हैं, जो उन्होंने छिपाने का प्रयास किया. कहीं ऐसा तो नहीं कि कतिपय कारणों से भारतीयों को मूर्ख बनाने के लिए उन्होंने ये सब किया. इन सबके पीछे उनके उद्देश्य कुछ अलग थे. अब हमें उनके बारे में और कुछ भी जानने की आवश्यकता है.
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सोनिया का भारत में पर्दार्पण :-
सोनिया गांधी ने इतनी इंग्लिश सीख ली थी कि वो कैम्ब्रिज टाउन के यूनिवर्सिटी रेस्टोरेंट में वैट्रेस बन गईं. वो राजीव गांधी से पहली बार तब मिलीं जब वो 1965 में रेस्टोरेंट में आये. राजीव यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट थे, परन्तु वो लंबे समय तक अपने पढ़ाई के साथ तालमेल नहीं बिठा पाये इसलिए उन्हें 1966 में लंदन भेज दिया गया, जहां उनका नामांकन इंपीरियल कालेज ऑफ इंजीनियरिंग में हुआ. सोनिया भी लंदन चली आईं. मेरी सूचना के अनुसार उन्हें लाहौर के एक व्यवसायी सलमान तासिर के आउटफिट में नौकरी मिल गई. तासीर की एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट कंपनी का मुख्यालय दुबई में था परन्तु वो अपना अधिक समय लंदन में व्यतीत करता था. आईएसआई से जुडे होने के लिए उसकी ये प्रोफाइल आवश्यक थी.
स्वाभाविक तौर पर सोनिया इस नौकरी से इतना पैसा कमा लेती थीं कि राजीव को लोन फंड कर सकें. राजीव, मां इंदिरा गांधी द्वारा भारत से भेजे गये पैसों से कहीं अधिक पैसे व्यय कर देते थे. इंदिरा ने राजीव की इस आदत पर मेरे सामने भी 1965 में क्रोध प्रकट किया था जब मैं हार्वर्ड में इकोनामिक्स का प्रोफेसर था. श्रीमती इंदिरा गांधी ने मुझे ब्रेंनेडिस यूनिवर्सिटी के गेस्ट हाउस में, जहां वो ठहरी थीं, व्यक्तिगत तौर पर चाय के लिए आमंत्रित किया. पीएन लेखी द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट में प्रस्तुत किये गये राजीव के छोटे भाई संजय को लिखे गये पत्र में स्पष्ट रूप से संकेत दिया गया है कि वह वित्तीय रूप से सोनिया के बहुत ऋणी हो चुके थे और उन्होंने संजय से अनुरोध किया था, जो उन दिनों स्वयं ब्रिटेन में थे और बहुत पैसा उड़ा रहे थे और ऋण में आकंठ डूबे हुए थे.
उन दिनों सोनिया के मित्रों में केवल राजीव गांधी ही नहीं थे अपितु माधवराव सिंधिया भी थे. सिंधिया और एक स्टीगलर नाम का जर्मन युवक भी सोनिया के अच्छे मित्रों में थे. माधवराव की सोनिया से मित्रता राजीव की सोनिया से शादी के बाद भी जारी रही. 1972 में माधवराव आईआईटी दिल्ली के मुख्य गेट के पास एक एक्सीडेंट के शिकार हुए और उसमें उन्हें बुरी तरह चोटें आईं, ये रात दो बजे की बात है, उसी समय आईआईटी का एक छात्र बाहर था. उसने उन्हें कार से निकाल कर ऑटोरिक्शा में बिठाया और साथ में घायल सोनिया को श्रीमती इंदिरा गांधी के आवास पर भेजा जबकि माधवराव सिंधिया का पैर टूट चुका था और उन्हें इलाज की आवश्यकता थी. दिल्ली पुलिस ने उन्हें हॉस्पिटल तक पहुंचाया. दिल्ली पुलिस वहां तब पहुंची जब सोनिया वहां से जा चुकी थीं.
बाद के सालों में माधवराव सिंधिया व्यक्तिगत तौर पर सोनिया के बड़े आलोचक बन गये थे और उन्होंने अपने कुछ निकट मित्रों से अपनी आशंकाओं के बारे में भी बताया था. कितना दुर्भाग्य है कि वो 2001 में एक विमान दुर्घटना में मारे गये. मणिशंकर अय्यर और शीला दीक्षित भी उसी विमान से जाने वाले थे परन्तु उन्हें अंतिम क्षणों में फ्लाइट से न जाने को कहा गया. वो परिस्थितियां भी विवादों से भरी हैं जब राजीव ने ओरबासानो के चर्च में सोनिया से विवाह रचाया था, परन्तु ये प्राइवेट बातें है, इसका विवरण देना ठीक नहीं होगा. इंदिरा गांधी आरंभ में इस विवाह के अत्यंत विरूद्ध थीं, उसके कुछ कारण भी थे जो उन्हें बताये जा चुके थे. वो इस विवाह को हिन्दू रीतिरिवाजों से दिल्ली में पंजीकृत कराने की सहमति तब दी जब सोवियत समर्थक टी एन कौल ने इसके लिए उन्हें कंविंस किया, उन्होंने इंदिरा जी से कहा था कि ये विवाह भारत-सोवियत दोस्ती के वृहद इंटरेस्ट में श्रेष्ठ कदम सिद्ध हो सकती है. कौल ने भी तभी ऐसा किया जब सोवियत संघ ने उनसे ऐसा करने को कहा.
सोनिया के केजीबी कनेक्शन:-
बताया जाता है कि सोनिया के पिता के सोवियत समर्थक होने के बाद से सोवियत संघ का संरक्षण सोनिया और उनके परिवार को मिलता रहा. जब एक प्रधानमंत्री का पुत्र लंदन में एक लड़की के साथ डेटिंग कर रहा था, केजीबी जो भारत और सोवियत रिश्तों की विशेष ध्यान रखती थी, ने अपनी दृष्टि इस पर लगा दी, ये स्वाभाविक भी था, तब उन्हें पता लगा कि ये तो स्टेफनो की पुत्री है, जो उनका इटली का पुराना विश्वस्त सूत्र है. इस प्रकार केजीबी ने इस विवाह को हरी झंडी दे दी. इससे ज्ञात होता है कि केजीबी श्रीमती इंदिरा गांधी के घर में कितने अंदर तक घुसा हुआ था.
राजीव और सोनिया के सम्बन्ध सोवियत संघ के हित में भी थे, इसलिए उन्होंने इस पर कार्य भी किया. राजीव के विवाह के पश्चात मैनो परिवार को सोवियत संबंधों से विशेष लाभ भी हुआ. भारत के साथ सभी प्रकार के सोवियत सौदों, जिसमें रक्षा सौदे भी सम्मिलित थे, से उन्हें घूस के रूप में मोटी रकम मिलती रही. एक प्रतिष्ठित स्विस मैगजीन स्विट्जर इलेस्ट्रेटेड के अनुसार राजीव गांधी के स्विस बैंक अकाउंट में दो बिलियन पाउंड जमा थे, जो बाद में सोनिया के नाम हो गये. डॉ. येवगेनी अलबैट (पीएचडी , हार्वर्ड) जाने माने रूसी स्कॉलर और जर्नलिस्ट हैं तथा वो अगस्त 1981 में राष्ट्रपति येल्तिसिन द्वारा बनाये गये केजीबी कमीशन के सद्स्यों में भी थीं. उन्होंने समस्त केजीबी की गोपनीय फाइलें देखीं, जिसमें सौदों से संबंधित फाइलें भी थीं. उन्होंने अपनी पुस्तक
"द स्टेट विदइन स्टेट – केजीबी इन द सोवियत यूनियन" में उन्होंने इस प्रकार की गोपनीय बातों के रिफरेंस नंबर तक दे दिये हैं, जिसे किसी भी भारतीय सरकार द्वारा क्रेमलिन से औपचारिक अनुरोध पर देखा जा सकता है.
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