Vigyan aur Dharm !!!!!!!

@vijaykajla1

भाई आप तो वो काम कर रहे हो कि कोई कहे कि मुसलमानों में कोई गांधी जैसी, आइंस्टाइन जैसी शख्सियत नहीं हुई और आपने सारे मुस्लिम एम.एल.ए., एम.पी. और सारे साइंस से जुड़े मुस्लिम अध्यापकों तथा छोटे-मोटे वैज्ञानिकों के नाम गिनवा दिए...हा...हा...हा...ये जो आपने नाम दिए हैं इनमें कोई भी नाम विश्व स्तर का नहीं है...अब मुसलमान भी इस दुनिया में आए हैं तो कुछ तो काम-धंधा करेंगे ही...ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने भी मिसाइल और परमाणु बम का आविष्कार नहीं किया था, केवल इन्हें बनाने में योगदान दिया था...कुल मिलाकर देखा जाए तो इस्लाम के लगभग डेढ़ हजार वर्षों के इतिहास में विश्व स्तर पर कोई भी मुस्लिम नायक नजर नहीं आता, सिवा ओसामा बिन लादेन के...हा...हा...हा...
Kya karen bhai saab, maine bhi jatland ke kuch bhaio se prerit ho kar copy paste karke chep diya, kyonki rajpal bhai ssab ne likha tha ki kuran ne kewal lutero, taskro ko hi janam diya h, ha ha ha........
 
@vijaykajla1

कुल मिलाकर देखा जाए तो इस्लाम के लगभग डेढ़ हजार वर्षों के इतिहास में विश्व स्तर पर कोई भी मुस्लिम नायक नजर नहीं आता, सिवा ओसामा बिन लादेन के...हा...हा...हा...
Osama JI to mahan hona hi h ,digvijay singh ka damad jo thehra
 
भारतीय मुसलमानों में आज अधिकतर वे मुसलमान हैं जिनके पूर्वज बलपूर्वक हिन्दू से मुसलमान बनाये गए थे. उनके पूर्वजो की गर्दनों पर तलवार रख दी गयी, उनके जनेऊ तोड़ दिए गए तथा शिखा काट कर उन्हें हठात मुसलमान बनाया गया. इस्लामिक शिक्षा का सबसे बड़ा प्रभाव एक साधारण मुस्लिम युवक पर यह पड़ा है कि उसके लिए केवल मुहम्मद अथवा उनके परिवार के सदस्य ही अनुसरण अथवा श्रद्धा के पात्र हैं. राम, शिव एवं कृष्ण चूँकि हिन्दुओं के हैं इसलिए उन्ही द्वारा पूजे जाएँ. आज के सन्दर्भ में लें तो मुसलमानों के लिए कारगिल के शहीदों से अधिक करबला के शहीद अधिक स्मरणीय और श्रद्धेय हैं.
 
Population wise, there are about 15 million Jews, which make 0.2% of the world's population and 1.5 billion Muslims which make 20% of the world's population.

Jews have won more than hundred noble prizes in field of science & medicine, where as Muslims only two; Ahmed Zewail (Egyptian) in chemistry and Abdus Salam (Pakistani) in physics



Vigyan aur Dharm !!!!!!
 
अब हम कैसे मानें कि कुरान में विज्ञान होगा, जब अल्लाह को स्वयं ही प्राथमिक ज्ञान नहीं है. मुसलमानों के कट्टर होने का यही कारण है. यदि वह कुरान की बातों की जाँच कर लेते तो तुरंत इस बेकार किताब को फ़ेंक देते.

राजपाल साहब , आप भी तो कट्टर हिन्दू है ! एक कट्टर हिन्दू अथवा एक कट्टर मुस्लमान एक ही सिक्के के दो पहलु है ! असल में आप या वो मुसलमान जो कट्टर है किसी भी रूप से धार्मिक नहीं है, अपितु साम्प्रदायिक हैं ! सम्प्रदाय धर्म की पतित अवस्था है जो काल्पनिक मान्यताओं पर अधिक विश्वास करता है न कि धर्म में निहित आध्यत्मिक सार की! सार रहित धर्म ही सम्प्रदाय है ! आपकी बुद्धि पर सम्प्रदाय का लेप लगा है न कि धर्म का !
 
यदि हिन्दू कहते हैं की हनुमान सूरज निगल गया था तो क्या वा भी मान लो ? राम बंदरों व भालुओं के सहारे लंका फ़तेह कर आया था तो क्या यह भी मान ले क्या ? बंदर भालू आज भी बहुत हैं देश में आप जीत के देखा दो पाकिस्तान को इन जानवरों के सहारे ?
राजपाल जी ऐसे खोखले तर्क सभी धर्मो के ग्रंथो में मिल जायेंगे | बाकी इतना पक्का हैं की इन कुरान वालो का जिनका एक ही देवता या खुदा हैं ने 33 करोड़ देवी देवता वाले हिन्दुओ पर सदियों राज किया हैं और आज भी रुला राखे स | इन मुसलमानों या ईसाईयों का हिन्दुओ पर राज का एक ही कारण हैं की इनका खुदा भगवान एक हैं और हमारे देवताओ की गिनती ही नहीं | खसम एक होना जरूरी स जिसके सो खसम होंगे उसका तो फेर हिंदुआ जिसा हाल होवेगा ही |
राजपाल जी ये धर्म सिर्फ राजनैतिक स्वार्थ के लिए काम में आते हैं भगवान खुदा की प्राप्ति में कहीं नहीं | भाजपा ने इस हिन्दू धर्म के सहारे देश में अपनी दूकान जंचा रखी हैं तो कांग्रेस ने मुसलमानों के सहारे | आपके यह आर एस एस वाले , शिव सेना वाले और भी कई सेना हैं धर्म के नाम पर बहुत शोर मचाते हैं कभी कोई श्रीनगर जाकर नहीं देखता बस किसी चौक पर पुतला फूंक कर अपनी मर्दानगी दिखा कर खुश हो लेते हैं | अभी पीछे सी भारत भूषण वाले मसले पर बाल ठाकरे ने भी एक टिप्पणी की थी जिसके जवाब में अन्ना हजारे ने कहा था की यह ठाकरे सिर्फ घर की खिड़की से बोलने वाला हैं इसने कश्मीर सिर्फ टीवी पे देखा हैं , मैंने कश्मीर भी देखा हैं और पाकिस्तान की लड़ाई भी |
जब देश आजाद हुआ तो इन धर्म के ठेकेदारों ने इस देश के खासकर जटवाड़े के धर्म के नाम पर दो टुकड़े करवा दिए | धर्म के नाम पर आर पार की शुरू हुई तो या लड़ाई मौल ली जाटों ने , अपनों ने अपनों को ही क़त्ल कर दिया | उस पार के मुस्लिम जाटों ने हिन्दुओ का क़त्ल किया तो इस तरफ के हिन्दू सिक्ख जाटों ने इस कत्ले आम में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया | पुरे देश में सिर्फ संयुक्त पंजाब , दिल्ली के आस पास व राजस्थान के कुछ हिस्से से मुस्लिम निकाले गए बाकि देश के हिन्दुओ (rss ) की आसंग नहीं हुई इनको निकालने की | बाकियों (rss ) ने तो सिर्फ एक माहत्मा को मार कर संतोष कर लिया बता उसके मरने से क्या मुस्लिम मर रहे थे ?
इन हिन्दुओ के कहने से हमने मुस्लिम तो निकाल दिए फिर आये हमारे प्यारे हिन्दू भाई जिनके लिए हमने अपनों का कत्ल किया था | इन हिन्दुओ पर हमारे बुजुर्गो ने तरस खा कर इनको रोटी कपड़ा मकान दिया पर हमारे बुजुर्गो को नहीं पता था की ये संपोले हैं जिनको वे पाल रहे हैं | अब ये पंजाबी हिन्दू (रिफ्यूजी , भापे) अपना काम निकलवाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं शाम दढ़ भेद भाव नीति कोई हो अपना काम निकलवाओ बस यह इनकी नीति रहती हैं हमेशा | जब इनका भरना शुरू हुआ तो इन्होने अपने हुनर के कमाल दिखाने शुरू कर दिए | इनकी करतूतों के कारण फिर हमारे यहाँ एक कहावत प्रचलित हुई " घाड़े गए उघाड़े आ गए " | बुजुर्गों ने माथे पर हाथ मारा के इनसे तो हमारे मुसलमान ही बेहतर थे जिनका कोई दिन ईमान तो था कोई रीती रिवाज तो थे | इन रिफूजी हिन्दुओ ने सबसे पहले अपना असर दिखाया पंजाब में जिस कारण वह 1984 में ब्लू स्टार हुआ और जब इनपर दाब पड़ी तो इन्होने उस लड़ाई को रंग दे दिया हिन्दू सिक्ख का और पंजाब से भागना शुरू कर दिया | हिन्दू जाट इनकी यह चाल समझ नहीं पाए और अपने ही सिक्ख जाट भाइयों का कत्ल शुरू कर दिया | किसी ने यह नहीं सोचा की अगर पंजाब में सही में हिन्दू सिक्ख का मसला था तो फिर लड़ाई के मामले में सबसे कमजोर मानी जाने वाली बनिया जाति के लोगो ने वहा से पलायन क्यों नहीं किया ? अगर ऐसा कुछ होता तो आज पंजाब में कोई भी हिन्दू बनिया या ब्राह्मण नहीं होना चाहिए | पंजाब से भागकर यह लोग हरियाणा में आकर बस गए फिर इन्होने अपनी करतूत यहाँ शुरू कर दी जनगणना में हरियाणा में अपनी मात्र भाषा पंजाबी तो पंजाब में अपनी मात्र भाषा हिंदी | अखबारों में लिखना शुरू कर दिया के हरियाणा वालो को तो बोलना पहनना खाना पंजाबियों ने सिखाया हैं (94 -95 के पंजाब केसरी के अखबार में तीन दिन यह लेख चला था ) | श्याने इतने की इन्होने अपनी जाति की जगह अपने आप को पंजाबी कहना शुरू कर दिया जिससे की हरियाणा पंजाब के जाटों में फूंट पड़ी रहे कोई यह नहीं सोचता की अगर ये लोग पंजाबी हैं तो फिर पंजाब में अपनी मात्र भाषा हिंदी क्यों लिखवाते हैं ? फिर इन्होने जाटों की खापो पर हमले बोल दिए हमारी खाप कोई भी निर्णय सुनाए सबसे पहले ये पंजाबी (रिफ्यूजी) उसके विरुद्ध कोर्ट में अपील करते हैं जबकि उस फैसले से इनको या इनकी जातियों को कोई लेना देना नहीं पर इन्होने तो ठान रखी हैं जाट कौम को बदनाम करने की | मीडिया में इन लोगो का कब्ज़ा हो गया उसके मादय्म से टीवी पिक्चरो में नंगापन दिखा कर हमारे देश के रीती रिवाजों को तोडना शुरू कर दिया | देश में कोई घपला हो उसके सूत्र धार ये लोग मिलेंगे और इन सबमे इनका साथ देने वाले मिलेंगे हिन्दू धर्म के ठेकेदार ब्राह्मण | इन रिफ्यूजियों ने तो वो कर दी हमारे साथ के " जिनको अता की थी हमने धड़कने , उनको जुबान मिली के हमी पे बरस पड़े " |
आपके इन हिन्दुओ को मुकाबला करने की आदत नहीं हैं , ऐसा ही आपके हिन्दुओ ने कश्मीर में दिखा दिया जब वहा दाब पड़ी तो वहा से दुम दबा कर भाग लिए | अब आपके हिन्दू तर्क देंगे की वहां मुसलमानों की नफरी ज्यादा हैं तो कोई इन हिन्दुओ से कहे की तुम्हारे लिए सरकार ने फ़ौज भी तो भेज रखी हैं | मुकाबला कहाँ से करेंगे इनको तो रिफ्यूजी कैम्पों में फ्री के भाव के चीनी चावल खाने की आदत जो पड़ी हुई हैं |
फिर इन रिफुजियों ने हिन्दू धर्म के नाम पर एक राजनैतिक पार्टी भाजपा को पकड़ा और पुरे देश में मंदिर के नाम रथ यात्रा निकाली और उस पाखण्ड में कुछ हद तक सफल भी रहे | इस पाखंड का असर जाटों पर भी पड़ा इनकी एक आवाज़ पर मदिर गिराने चले गए | इस पाखंड के सहारे ये सरकार बनाने में कामयाब भी रहे पर सरकार आने के बाद कश्मीर , मंदिर सब भूल गए | कारगिल में इनको मौका मिला तो वहा छेर गए | अगर ऐसे ही कट्टर हिन्दू थे तो पाकिस्तान से शांतिवार्ता की क्या जरुरत थी बस शेव क्यों शुरू की ? इनका तो राज हो बस , सिद्धांत की कोई बात नहीं और फिर देश में कबूतरों की कमी हैं ही नहीं | अब फिर इन कबूतरों ने इन पाखंडियों के कहने से घुटर घु करना शुरू कर दिया हैं , ये छेड़ा छेड़ के एक तरफ हो जायेंगे और फिर आखिर में या बिमारी जाट अपने सर ले लेंगे | इन हिन्दुओ से बचो मुसलमानों से कोई खतरा नहीं हैं | मुसलमानों को तो देख लेंगे पर इन काली भेड़ो का क्या करे जो दीमक की तरह हमे खा रहे हैं इस धर्म को ख़त्म करने के जिम्मेवार भी आपके यह रिफ्यूजी और ब्राह्मण हिन्दू ही हैं |
राजपाल जी मैं तो जातिवाद में विश्वास रखता हु जाति कभी नहीं बदलती धर्म का क्या पता कब बदली करना पड़ जाये या हो जाये | इसलिए आपसे भी कहूँगा के कम से कम अपनी कौम को तो इन फालतू की बातो से बक्श दो | " बदुआ देंगे हमे बाद में आने वाले घर न बनता न सही नीवं तो रख ही दी होती " इसलिए राजपाल कौम की आने वाली नस्लों के लिए कोई ढंग की नीवं ही रखो दो |
आस्था आशकी बरगी हो स के बेरा कद किसपे कुण्से धर्म पे दिल आ जा ;)
 
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Rajpal ji shayad Pakistani Quran ki baat kar rahe the jo shayad asli Quran se kaafi alag hai!!
 
इस्लाम व कुरान पर भारत के महापुरुषों द्वारा दिए गए क्रातिकारी विचार

स्वामी विवेकानन्द:-
ऎसा कोई अन्य मजहब नहीं जिसने इतना अधिक रक्तपात किया हो और अन्य के लिए इतना क्रूर हो । इनके अनुसार जो कुरान को नहीं मानता कत्ल कर दिया जाना चाहिए । उसको मारना उस पर दया करना है । जन्नत ( जहां हूरे और अन्य सभी प्रकार की विलासिता सामग्री है ) पाने का निश्चित तरीका गैर ईमान वालों को मारना है । इस्लाम द्वारा किया गया रक्तपात इसी विश्वास के कारण हुआ है ।

कम्प्लीट वर्क आफ विवेकानन्द वॉल्यूम २ पृष्ठ २५२-२५३

गुरु नानक देव जी:-
मुसलमान सैय्यद , शेख , मुगल पठान आदि सभी बहुत निर्दयी हो गए हैं । जो लोग मुसलमान नहीं बनते थें उनके शरीर में कीलें ठोककर एवं कुत्तों से नुचवाकर मरवा दिया जाता था ।

नानक प्रकाश तथा प्रेमनाथ जोशी की पुस्तक पैन इस्लाममिज्म रोलिंग बैंक पृष्ठ ८०

महर्षि दयानन्द सरस्वती:-
इस मजहब में अल्लाह और रसूल के वास्ते संसार को लुटवाना और लूट के माल में खुदा को हिस्सेदार बनाना शबाब का काम हैं । जो मुसलमान नहीं बनते उन लोगों को मारना और बदले में बहिश्त को पाना आदि पक्षपात की बातें ईश्वर की नहीं हो सकती । श्रेष्ठ गैर मुसलमानों से शत्रुता और दुष्ट मुसलमानों से मित्रता , जन्नत में अनेक औरतों और लौंडे होना आदि निन्दित उपदेश कुएं में डालने योग्य हैं । अनेक स्त्रियों को रखने वाले मुहम्मद साहब निर्दयी , राक्षस व विषयासक्त मनुष्य थें , एवं इस्लाम से अधिक अशांति फैलाने वाला दुष्ट मत दसरा और कोई नहीं । इस्लाम मत की मुख्य पुस्तक कुरान पर हमारा यह लेख हठ , दुराग्रह , ईर्ष्या विवाद और विरोध घटाने के लिए लिखा गया , न कि इसको बढ़ाने के लिए । सब सज्जनों के सामन रखने का उद्देश्य अच्छाई को ग्रहण करना और बुराई को त्यागना है ।।

सत्यार्थ प्रकाश १४ वां समुल्लास विक्रमी २०६१
महर्षि अरविन्द:-
हिन्दू मुस्लिम एकता असम्भव है क्योंकि मुस्लिम कुरान मत हिन्दू को मित्र रूप में सहन नहीं करता । हिन्दू मुस्लिम एकता का अर्थ हिन्दुओं की गुलामी नहीं होना चाहिए । इस सच्चाई की उपेक्षा करने से लाभ नहीं ।किसी दिन हिन्दुओं को मुसलमानों से लड़ने हेतु तैयार होना चाहिए । हम भ्रमित न हों और समस्या के हल से पलायन न करें । हिन्दू मुस्लिम समस्या का हल अंग्रेजों के जाने से पहले सोच लेना चाहिए अन्यथा गृहयुद्ध के खतरे की सम्भावना है । ।
ए बी पुरानी इवनिंग टाक्स विद अरविन्द पृष्ठ २९१-२८९-६६६


सरदार वल्लभ भाई पटेल:-
मैं अब देखता हूं कि उन्हीं युक्तियों को यहां फिर अपनाया जा रहा है जिसके कारण देश का विभाजन हुआ था । मुसलमानों की पृथक बस्तियां बसाई जा रहीं हैं । मुस्लिम लीग के प्रवक्ताओं की वाणी में भरपूर विष है । मुसलमानों को अपनी प्रवृत्ति में परिवर्तन करना चाहिए । मुसलमानों को अपनी मनचाही वस्तु पाकिस्तान मिल गया हैं वे ही पाकिस्तान के लिए उत्तरदायी हैं , क्योंकि मुसलमान देश के विभाजन के अगुआ थे न कि पाकिस्तान के वासी । जिन लोगों ने मजहब के नाम पर विशेष सुविधांए चाहिंए वे पाकिस्तान चले जाएं इसीलिए उसका निर्माण हुआ है । वे मुसलमान लोग पुनः फूट के बीज बोना चाहते हैं । हम नहीं चाहते कि देश का पुनः विभाजन हो ।
संविधान सभा में दिए गए भाषण का सार ।

बाबा साहब भीम राव अंबेडकर:-
हिन्दू मुस्लिम एकता एक अंसभव कार्य हैं भारत से समस्त मुसलमानों को पाकिस्तान भेजना और हिन्दुओं को वहां से बुलाना ही एक हल है । यदि यूनान तुर्की और बुल्गारिया जैसे कम साधनों वाले छोटे छोटे देश यह कर सकते हैं तो हमारे लिए कोई कठिनाई नहीं । साम्प्रदायिक शांति हेतु अदला बदली के इस महत्वपूर्ण कार्य को न अपनाना अत्यंत उपहासास्पद होगा । विभाजन के बाद भी भारत में साम्प्रदायिक समस्या बनी रहेगी । पाकिस्तान में रुके हुए अल्पसंख्यक हिन्दुओं की सुरक्षा कैसे होगी ? मुसलमानों के लिए हिन्दू काफिर सम्मान के योग्य नहीं है । मुसलमान की भातृ भावना केवल मुसमलमानों के लिए है । कुरान गैर मुसलमानों को मित्र बनाने का विरोधी है , इसीलिए हिन्दू सिर्फ घृणा और शत्रुता के योग्य है । मुसलामनों के निष्ठा भी केवल मुस्लिम देश के प्रति होती है । इस्लाम सच्चे मुसलमानो हेतु भारत को अपनी मातृभूमि और हिन्दुओं को अपना निकट संबधी मानने की आज्ञा नहीं देता । संभवतः यही कारण था कि मौलाना मौहम्मद अली जैसे भारतीय मुसलमान भी अपेन शरीर को भारत की अपेक्षा येरूसलम में दफनाना अधिक पसन्द किया । कांग्रेस में मुसलमानों की स्थिति एक साम्प्रदायिक चौकी जैसी है । गुण्डागर्दी मुस्लिम राजनीति का एक स्थापित तरीका हो गया है । इस्लामी कानून समान सुधार के विरोधी हैं । धर्म निरपेक्षता को नहीं मानते । मुस्लिम कानूनों के अनुसार भारत हिन्दुओं और मुसलमानों की समान मातृभूमि नहीं हो सकती । वे भारत जैसे गैर मुस्लिम देश को इस्लामिक देश बनाने में जिहाद आतंकवाद का संकोच नहीं करते ।
प्रमाण सार डा अंबेडकर सम्पूर्ण वाग्मय , खण्ड १५१
 
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इस्लाम व कुरान पर भारत के महापुरुषों द्वारा दिए गए क्रातिकारी विचार

माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर श्री गुरू जी
पाकिस्तान बनने के पश्चात जो मुसलमान भारत में रह गए हैं क्या उनकी हिन्दुओं के प्रति शत्रुता , उनकी हत्या , लूट दंगे, आगजनी , बलात्कार , आदि पुरानी मानसिकता बदल गयी है , ऐसा विश्वास करना आत्मघाती होगा । पाकिस्तान बनने के पश्चात हिन्दुओं के प्रति मुस्लिम खतरा सैकड़ों गुणा बढ़ गया है । पाकिस्तान और बांग्लादेश से घुसपैठ बढ़ रही है । दिल्ली से लेकर रामपुर और लखनउ तक मुसलमान खतरनाक हथियारों की जमाखोरी कर रहे हैं । ताकि पाकिस्तान द्वारा भारत पर आक्रमण करने पर वे अपने भाइयों की सहायता कर सके । अनेक भारतीय मुसलमान ट्रांसमीटर के द्वारा पाकिस्तान के साथ लगातार सम्पर्क में हैं । सरकारी पदों पर आसीन मुसलमान भी राष्ट्र विरोधी गोष्ठियों में भाषण देते हें । यदि यहां उनके हितों को सुरक्षित नहीं रखा गया तो वे सशस्त्र क्रांति के खड़े होंगें ।
बंच आफ थाट्स पहला आंतरिक खतरा मुसलमान पृष्ठ १७७-१८७

गुरूदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर
ईसाई व मुसलमान मत अन्य सभी को समाप्त करने हेतु कटिबद्ध हैं । उनका उद्देश्य केवल अपने मत पर चलना नहीं है अपितु मानव धर्म को नष्ट करना है । वे अपनी राष्ट्र भक्ति गैर मुस्लिम देश के प्रति नहीं रख सकते । वे संसार के किसी भी मुस्लिम एवं मुस्लिम देश के प्रति तो वफादार हो सकते हैं परन्तु किसी अन्य हिन्दू या हिन्दू देश के प्रति नहीं । सम्भवतः मुसलमान और हिन्दू कुछ समय के लिए एक दूसरे के प्रति बनवटी मित्रता तो स्थापित कर सकते हैं परन्तु स्थायी मित्रता नहीं । ; - रवीन्द्र नाथ वाडमय २४ वां खण्ड पृच्च्ठ २७५ , टाइम्स आफ इंडिया १७-०४-१९२७ , कालान्तर

मोहनदास करम चन्द्र गांधी
मेरा अपना अनुभव है कि मुसलमान कूर और हिन्दू कायर होते हैं मोपला और नोआखली के दंगों में मुसलमानों द्वारा की गयी असंख्य हिन्दुओं की हिंसा को देखकर अहिंसा नीति से मेरा विचार बदल रहा है ।
गांधी जी की जीवनी, धनंजय कौर पृष्ठ ४०२ व मुस्लिम राजनीति श्री पुरूषोत्तम योग

लाला लाजपत राय
मुस्लिम कानून और मुस्लिम इतिहास को पढ़ने के पश्चात मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि उनका मजहब उनके अच्छे मार्ग में एक रुकावट है । मुसलमान जनतांत्रिक आधार पर हिन्दुस्तान पर शासन चलाने हेतु हिन्दुओं के साथ एक नहीं हो सकते । क्या कोई मुसलमान कुरान के विपरीत जा सकता है ? हिन्दुओं के विरूद्ध कुरान और हदीस की निषेधाज्ञा की क्या हमें एक होने देगी ? मुझे डर है कि हिन्दुस्तान के ७ करोड़ मुसलमान अफगानिस्तान , मध्य एशिया अरब , मैसोपोटामिया और तुर्की के हथियारबंद गिरोह मिलकर अप्रत्याशित स्थिति पैदा कर देंगें ।

पत्र सी आर दास बी एस ए वाडमय खण्ड १५ पृष्ठ २७५

समर्थ गुरू राम दास जी
छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरू अपने ग्रंथ दास बोध में लिखते हैं कि मुसलमान शासकों द्वारा कुरान के अनुसार काफिर हिन्दू नारियों से बलात्कार किए गए जिससे दुःखी होकर अनेकों ने आत्महत्या कर ली । मुसलमान न बनने पर अनेक कत्ल किए एवं अगणित बच्चे अपने मां बाप को देखकर रोते रहे । मुसलमान आक्रमणकारी पशुओं के समान निर्दयी थे , उन्होंने धर्म परिवर्तन न करने वालों को जिन्दा ही धरती में दबा दिया ।

- डा एस डी कुलकर्णी कृत एन्कांउटर विद इस्लाम पृष्ठ २६७-२६

राजा राममोहन राय
मुसलमानों ने यह मान रखा है कि कुरान की आयतें अल्लाह का हुक्म हैं । और कुरान पर विश्वास न करने वालों का कत्ल करना उचित है । इसी कारण मुसलमानों ने हिन्दुओं पर अत्यधिक अत्याचार किए , उनका वध किया , लूटा व उन्हें गुलाम बनाया ।

वाङ्मय-राजा राममोहन राय पृष्ट ७२६-७२७

श्रीमति ऐनी बेसेन्ट
मुसलमानों के दिल में गैर मुसलमानों के विरूद्ध नंगी और बेशर्मी की हद तक तक नफरत हैं । हमने मुसलमान नेताओं को यह कहते हुए सुना है कि यदि अफगान भारत पर हमला करें तो वे मसलमानों की रक्षा और हिन्दुओं की हत्या करेंगे । मुसलमानों की पहली वफादार मुस्लिम देशों के प्रति हैं , हमारी मातृभूमि के लिए नहीं । यह भी ज्ञात हुआ है कि उनकी इच्छा अंग्रेजों के पश्चात यहां अल्लाह का साम्राज्य स्थापित करने की है न कि सारे संसार के स्वामी व प्रेमी परमात्मा का का । स्वाधीन भारत के बारे में सोचते समय हमें मुस्लिम शासन के अंत के बारे में विचार करना होगा ।

- कलकत्ता सेशन १९१७ डा बी एस ए सम्पूर्ण वाङ्मय खण्ड, पृष्ठ २७२-२७५

स्वामी रामतीर्थ
अज्ञानी मुसलमानों का दिल ईश्वरीय प्रेम और मानवीय भाईचारे की शिक्षा के स्थान पर नफरत , अलगाववाद , पक्षपात और हिंसा से कूट कूट कर भरा है । मुसलमानों द्वारा लिखे गए इतिहास से इन तथ्यों की पुष्टि होती है । गैर मुसलमानों आर्य खालसा हिन्दुओं की बढ़ी संख्या में काफिर कहकर संहार किया गया । लाखों असहाय स्त्रियों को बिछौना बनाया गया । उनसे इस्लाम के रक्षकों ने अपनी काम पिपासा को शान्त किया । उनके घरों को छीना गया और हजारों हिन्दुओं को गुलाम बनाया गया । क्या यही है शांति का मजहब इस्लाम ? कुछ एक उदाहरणों को छोड़कर अधिकांश मुसलमानों ने गैरों को काफिर माना है ।

- भारतीय महापुरूषों की दृष्टि में इस्लाम पृष्ठ ३५-३६
 
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बाकी इतना पक्का हैं की इन कुरान वालो का जिनका एक ही देवता या खुदा हैं ने 33 करोड़ देवी देवता वाले हिन्दुओ पर सदियों राज किया हैं और आज भी रुला राखे स | इन मुसलमानों या ईसाईयों का हिन्दुओ पर राज का एक ही कारण हैं की इनका खुदा भगवान एक हैं और हमारे देवताओ की गिनती ही नहीं | खसम एक होना जरूरी स जिसके सो खसम होंगे उसका तो फेर हिंदुआ जिसा हाल होवेगा ही |

क्या बात करो हो जनाब...अब तो हमने ये गाड़े सूर भी छेत राखे हैं और वर्ल्ड रिकॉर्ड बना रखा है...ईसाई भी भगा रखे हैं...इनके हिंदुओं पर राज करने का कारण अगर इनका एक खुदा भगवान है तो फिर इनके छितने का कारण क्या है...?
 
भाई उपेंदर हो सके स मेरे त इतिहास का कोई पन्ना छुट गया हो जिसमे ये सब लिखा हो जो आपने कहा हैं |

राजपाल जी आपने इतने सारे हिन्दू नेताओ के तर्क दिए हैं अच्छी बात हैं | हाम ठहरे जाट बन्दे हामने माहरे जाट नेताओ की भाषा तावली समझ आवे स तो इब आप हामने सरदार भगत सिंह और चौ.छोटूराम की भाषा में और बताओ के उनने के किम्मे कहा स इनके बारे में |
 
यदि हिन्दू कहते हैं की हनुमान सूरज निगल गया था तो क्या वा भी मान लो ? राम बंदरों व भालुओं के सहारे लंका फ़तेह कर आया था तो क्या यह भी मान ले क्या ? बंदर भालू आज भी बहुत हैं देश में आप जीत के देखा दो पाकिस्तान को इन जानवरों के सहारे ?

बाकी इतना पक्का हैं की इन कुरान वालो का जिनका एक ही देवता या खुदा हैं ने 33 करोड़ देवी देवता वाले हिन्दुओ पर सदियों राज किया हैं और आज भी रुला राखे स | इन मुसलमानों या ईसाईयों का हिन्दुओ पर राज का एक ही कारण हैं की इनका खुदा भगवान एक हैं और हमारे देवताओ की गिनती ही नहीं | खसम एक होना जरूरी स जिसके सो खसम होंगे उसका तो फेर हिंदुआ जिसा हाल होवेगा ही |

भाई साहेब में धार्मिक आदमी कोणी पर जो आपने धार्मिक भाई हे चाहे कौनसे धरम का हो मेने कड़े मजाक भी नहीं बनाया.

एब आपका यो तर्क के बन्दर भालू ने नु नहीं करा पाकिस्तान नहीं जीता तो भाई वा इंदिरा गाँधी ने पाकिस्तान के २ फाड़ कर दिए हर surrender करवा दिया वो खुदा ने भी कीमे नहीं करा व कुरान पड़ोदी कीमे काम नहीं आई.

मुस्लमान माने हे भगवन निराकार हे बालक नहीं जाम सकता जबकि ईसाई माने हे के वो बालक जाम सके हे और jesus उसका बालक था तो इस इसाब ते इसयियाँ के तीन खसम होए(थे ट्रिनिटी), दुनिया पे एक राज फेर मुसलमान का होना चाहिए बस इसयियाँ ने ला राखी स इनकी कोइसा देश देख लो काल इ फोटो आ रही थी ये मुसलमाना के मुह पे मुते थे, खुदा ने फेर भी कीमे नहीं करा.

भाई बात या नहीं हे किसा खुदा एक हे २ हे या ३ हे आदमी अपने दीमक त जीते हे अपनी बहादूरी टी आगे बड़े हे. लोग कवे हे जात खबी हिन्दू नहीं थे उनका भगवन एक
हे फलाना दिमका पर मेने हिंदुस्तान पे कड़े जट्टां का राज नहीं देखा. धरम बदलन त कुछ नहीं होता, सोच बदली होनी चाहिए और अपने धरम का विकास करते रहना चाहिए. में आज
बताऊँ हूँ ये मुसलमाना की सबते जयादा दुर्गति हों आली हे अगर इनने या आपकी कुरान नहीं बदली तो


 
भाई पाकिस्तान के दो टुकड़े नहीं न्यू बोल के हिन्दुस्तान के इन कुरान वालो ने तीन टुकड़े कर दिए चौथे टुकड़े की तैयारी चाल रही स और इस्ते ज्यादा के नास करेगी कुरान इब इस हिन्दुस्तान का | हिन्दुस्तान की धरती लेगे स ये कित्ते ओर त कोणी ल्याए थे वो तो पकिस्तान के दो टुकड़े करके हिन्दुस्तान न अपनी जात बचाई थी ना त और बेरा न कितने टुकड़े करते ये | अपनी धरती खुस्वा के कोई न्यू कहवे के उनके टुकड़े कर दिए तो इस बढाई के पीछे हिन्दू अपनी कमजोरी भी लकोवे स |
भाई मैंने एक बात और लिखी थी के ये धर्म चाहे कोइसा हो धर्म सिर्फ सियासत करण के काम आया करे | आदमी भगवान् खुदा मजहब के नाम त बहुत तावला भावुक हो स | जबकि आजतक किसे न नहीं बताई के भगवान् कौन स खुदा किसा दिखे स बस आखिर में एक बात कहदे स के एक ओंकार निराकार स | जो दिखा नहीं करे आदमी उसते बहुत डरा करे ना दिखन वाला चाहे भगवान् हो या फिर भुत | इस हिन्दू धर्म में तो इतने भगवाना के नाम दे दिए के इस धर्म के ठेकेदार न हिन्दू डरा डरा के मार दिए जम्मा |
एक मुसलमान आक्रमण करे स तो हिन्दू धर्म के ठेकेदार राजा न सलाह दे स के सारे मंदिर में कैठे हो जाओ जैसे ही वो मुस्लमान मंदिर में पाँव रखेगा अंधा हो जायेगा | उस मुसलमान न उस मंदिर में पाँव भी धरा सबकी रांगड़ भी बधाई सारा धन लुट्या और आखिर में जाता जाता भोले की मूर्ति ने भी ले गया | वा मूर्ति उसने काबे की सीढिया में लगवाई जिसपे त आज भी ये पाँव टेक टेक के जा स पर कोइसा भी अंधा होया हो तो बताओ |

बावली बात कोइसे धर्म के ग्रन्थ में हो उसका मजाक उड़ाया ही जायेगा |
 


बावली बात कोइसे धर्म के ग्रन्थ में हो उसका मजाक उड़ाया ही जायेगा |
Bilkul sahi baat..South mai Kerala mai ek mandir hai..usme loggan nai nirra dhan kattha kar rakha tha..jidd uski inquiry honn laagi arr bera laga ke kitte bhitaar poori tizori sai to pandat ji bole ke..Desh mai bhuchal aa jaga jai tizori kholi tai.Us tijori kholi mai $500 million ka sauda paya.Dharam ke chakkaran mai nyu bawla banya karein ye.ibbe wo paache si saii baba ka bhi nyu e bera laga tha.
 
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Till this wealth was there in side mandir it was safe and still in India, now this is not safe and soon this will be lost.
Rahi darne aur darane wali batein, agar batoon se hi kam chal jaye toh karodo rupiye security par kharach karne se bach jatein hain.
Aub baat aa gayee rudivaadita ki toh ye samajh lena ki aajkal bhi propaganda falaane mei jyada haath padhe likhe logon ka hi hai and media now a days doing the same. Truth is not what is hidden behind the news its still hidden and beyond our predictions
 
According to sanatan (aadi) Dharma GOD (AUM) (ultimate source of energy) is only one rest other are different form of energis (karod Devi aur Devta). All forms of energies need to be respected hawa, paani, kankar, pathar, pasu, pakshi, ped, paudhe, jeev jantu starting from anything like chinti, makode, saanp, bandar, flowers or whatever.
Each and every form of energy can do harm if not respected or not known to you, if have knowledge about the same that energy can be used for betterment and with respect. Brahmins or say padhe likhe in history too confused us like today they are doing the same.
Jantar, Mantar aur Tantar ke sahi mayene theek tarah se nahi bataye gaye aur confuse karte rahe.

Tantar means a gadget or a machine.

Jantar aur jantri means its technical manual in which all operating instructions (mantar) are given.

Mantar means operating instructions as I mentiond above, If some one knows the mantar of any tantra can operate that in much better way.

agar kisi aise ke hath mein pad gaya jise mantar nahi aate woh ya toh tantar ka nuksaan kar bathaga ya apna nuksaan karwa lega.

I am not supporting here any Dharma but basics starts here. Hindu Muslim aur Charistian sab paida hone ke baad mein hi bante hain. Paida toh sab sanatani hi hote hai and what ever the GOD they are connected. Ye connection dhire dhire khatam ho jata hai external influence se.
GOD here G repersents as who Generates, O= Who Operates and D= who Destroys.

Why Distroys ??? because this is created, if no creation no distruction and that is only one the ultimate source of energy which can not be created and so above the rule of distruction.
 
Vigyan ne Dharm ko kabhi nahi nakara.

There are still things to be known. I came across a Ukranian Chief engineer who was writing books on physics by taking all equations in negative form by thinking that one or more planets may be there somewhere in universe which can have energy in negative forms and he was prooving that E is not equal to MC square.
There are lot many equations which are not yet proved and still imaginary.
By now we still dont know if everything is made of Atoms than how life came in that matter ( where matter meet with life). After life came in how that life meet with mind and start making choices like red and yellow colors are good.

So fellow Jat's, nothing to be taken seriously just do your work and do better for familly and community if anything complicated just leave it no headache.
 
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भाई बावली बात धरम में कोणी न तो में भी मानता इन बात ने. आप दो चीज़ां ने एक साथ जोड़ो हो. ये बावली बात आदमियां की फलयोदी स ये कित लिख राखी स मेने
नहीं बेरा मेने तो नु पड़ी थी करम करेगा तो फल मिलेगा. धरम में खोट होंदा तो इस धरम में गुरु गोविन्द हर दीन्बंदु जैसे लोग पैदा नहीं होते.

इस्लाम जहाँ जहाँ भी गया उसने सब मुसलामन बना दिए. ये अरब लोग पहले ३६५ मूर्तियों की पूजा किया करते, इरान इराक, अफगानिस्तान कोई मुस्लमान नहीं था पार
इनपे ज़ोर जबरदस्ती से या दुसरे तरीके से इनको मुस्लमान बना दिया गया. फिजी,त्रिनाद आदि देशों में लोग ईसाई बन गए. एक ये हमारी ही महान सबयता हे जिसने अपनी
पहचान नहीं खोयी और आज भी कायम हे न तो मेरा ना होंदा वजीर खान या विक्टर हार आपका होंदा रोबेर्ट या रहीम ये जो हिंदुस्तान के ३ टुकडे हुए हे ये करवाने वाले बहार के नहीं थे अपने ही थे. जिन्ना परिवार पहले हिन्दू था और उसका एक राईट हैण्ड जाट था. खेर एक बात को देखने के दो पहलु हो सकते हे. मेरा तो मानना बस यो हे के जागरूकता अपने धरम के लोगों में लानी चाहिए न के अपना धरम ही बदल लेना चाहिए बाकि राजनीती का तो मेने इतना बेरा कोणी

होंदा वजीर खान या विक्टर हार आपका होंदा रोबेर्ट या रहीम ये जो हिंदुस्तान के ३ टुकडे हुए हे ये करवाने वाले बहार के नहीं थे अपने ही थे. जिन्ना परिवार पहले हिन्दू था और उसका एक राईट हैण्ड जाट था. खेर एक बात को देखने के दो
पहलु हो सकते हे. मेरा तो मानना बस यो हे के जागरूकता अपने धरम के लोगों में लानी चाहिए न के अपना धरम ही बदल लेना चाहिए बाकि राजनीती का तो मेने इतना बेरा कोणी
 
This thread is all about Vigyan and Dharma or say Science and Religion. I agree and accept all bawli baat, if these things are connected to Violence and not to the humanity. What I don’t agree with you is that you connected violence only to Religion and not with Science. Science too brought lot many disaster to the mankind started from TNT,AK 47 to Atom Bomb, and still bringing in much larger way than Religion. What you want to say about Hiroshima and Nagasaki what sort of heroism was that. Good and bad cannot be separated from each other.


Science have limitation, the things can be proved by science are only those which we can measure like Length, width, hieght, temperature, speed, density, viscosity, time, potential, power, torque, velocity, pressure or vacuum, etc.



What cannot be measured by science like Emotions, happiness, grief, Spirit, depth of likeness or unlikeness, thoughts, etc and cannot be proved, so to understand all these becomes the parts of beliefs, in common all these beliefs form a particular religion. Religions are not a bad thing with in itself, people among this forms the group as violent and nonviolent.



If Religions only create violence than Science is not behind and creating much more than Religion. Hai naa ya bhi Bawli baat.
 
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