Vigyan aur Dharm !!!!!!!

English Translation

Shri Suta Gosvami said: In the dynasty of king Shalivahana, there were ten kings who went to the heavenly planets after ruling for over 500 years. Then gradually the morality declined on the earth. At that time Bhojaraja was the tenth of the kings on the earth. When he saw that the moral law of conduct was declining he went to conquer all the directions of his country with ten-thousand soldiers commanded by Kalidasa. He crossed the river Sindhu and conquered over the gandharas, mlecchas, shakas, kasmiris, naravas and sathas. He punished them and collected a large ammount of wealth. Then the king went along with Mahamada (Muhammad), the preceptor of mleccha-dharma, and his followers to the great god, Lord Shiva, situated in the desert. He bathed Lord Shiva with Ganges water and worshipped him in his mind with pancagavya (milk, ghee, yoghurt, cow dung, and cow urine) and sandalwood paste, etc. After he offered some prayers and pleased him.Suta Goswami said: After hearing the king’s prayers, Lord Shiva said: O king Bhojaraja, you should go to the place called Mahakakshvara, that land is called Vahika and now is being contaminated by the mlecchas. In that terrible country there no longer exists dharma. There was a mystic demon named Tripura (Tripurasura), whom I have already burnt to ashes, he has come again by the order of Bali. He has no origin but he achieved a benediction from me. His name is Mahamada (Muhammad) and his deeds are like that of a ghost. Therefore, O king, you should not go to this land of the evil ghost. By my mercy your intelligence will be purified. Hearing this the king came back to his country and Mahamada (Muhammad) came with them to the bank of the river Sindhu. He was expert in expanding illusion, so he said to the king very pleasingly: O great king, your god has become my servant. Just see, as he eats my remnants, so I will show you. The king became surprised when he saw this just before them. Then in anger Kalidasa rebuked Mahamada (Muhammad) “O rascal, you have created an illusion to bewilder the king, I will kill you, you are the lowest..."
That city is known as their site of pilgrimage, a place which was Madina or free from intoxication. Having a form of a ghost (Bhuta), the expert illusionist Mahamada (Muhammad) appeared at night in front of king Bhojaraja and said: O king, your religion is of course known as the best religion among all. Still I am going to establish a terrible and demoniac religion by the order of the Lord . The symptoms of my followers will be that they first of all will cut their genitals, have no shikha, but having beard, be wicked, make noise loudly and eat everything. They should eat animals without performing any rituals. This is my opinion. They will perform purificatory act with the musala or a pestle as you purify your things with kusha. Therefore, they will be known as musalman, the corrupters of religion. Thus the demoniac religion will be founded by me. After having heard all this the king came back to his palace and that ghost (Muhammad) went back to his place.
The intelligent king, Bhojaraj established the language of Sanskrit in three varnas - the brahmanas, kshatriyas and vaisyas - and for the shudras he established prakrita-bhasha, the ordinary language spoken by common men. After ruling his kingdom for 50 years, he went to the heavenly planet. The moral laws established by him were honored even by the demigods. The arya-varta, the pious land is situated between Vindhyacala and Himacala or the mountains known as Vindhya and Himalaya. The Aryans reside there, but varna-sankaras reside on the lower part of Vindhya. The musalman people were kept on the other side of the river Sindhu.
On the island of Barbara, Tusha and many others also the followers of Isamsiha were also situated as they were managed by a king or demigods.[SUP][4]


भविष्य पुराण में मुहम्मद का उल्लेख है पर वो उल्लेख कैसा है? ये आपने स्वयं
ही ऊपर अंग्रेजी में जो लिखा है, उसका पठन कर ही लिया है।

भविष्य पुराण में त्रिपुरासुर नाम के राक्षस का उल्लेख आया है
जिसे शंकर जी ने संहार कर दिया था वो मरुस्थल में महामाद नाम के राक्षस
के रूप में जन्म लेगा और पैशाचिक धर्म स्थापित
करेगा। अब यदि जो भाई-बहन भविष्य पुराण
की बात मानते हैं तो इन्हें ये भी मानना चाहिए
की मुहम्मद वही महामाद है जिसका उल्लेख भविष्य पुराण में त्रिपुरासुर
नाम के राक्षस के रूप में है।






[/SUP]

kya anaap-snaap baate likhte rahte hai rajpal ji aap.....aapko vivek se kaam lena chaiye..aur yeh be-fizull aur manghandh baato se door rahna chaiye...........
 
kya anaap-snaap baate likhte rahte hai rajpal ji aap.....aapko vivek se kaam lena chaiye..aur yeh be-fizull aur manghandh baato se door rahna chaiye...........


प्रशांत जी ! मनगढ़ंत नहीं है, प्रूफ के साथ लिखा है।
भविष्य पुराण का आप भी पठन कीजिये।
 
आप यह जान कर हैरान हो जायेंगे कि इस्लाम का 786 और कुछ नहीं बल्कि हम हिन्दुओं तथा विश्व का पहला एवं पवित्रम अक्षर ॐ है...!
तो उन्होंने एक काल्पनिक अल्लाह बना लिया और, वैदिक रीति के अनुसार ही दिन में 5 बार उनकी पूजा(आराधना) सुनिश्चित कर ली परन्तु , ""ओंकार"" के उच्चारण के बिना उन्हें अपने हर किये धरे पर पानी फिरता नजर आया क्योंकि उन्हें भी यह मालूम था कि ॐ ही साश्वत है और, अंतिम सत्य है...!
अपनी इस्लाम की इस विसंगति को दूर करने लिए उन्हें भी ॐ सरीखा ही कोई ""अदभुत और सर्वशक्तिमान"" अक्षर चाहिए था जो कि उन्हें नहीं मिला क्योंकि, पूरे ब्रह्माण्ड में ॐ एक ही है...!
इसीलिए उन्होंने लाचार होकर हमारे ""अदभुत और सर्वशक्तिमान"" अक्षर ॐ को ही अपना लिया परन्तु, उन्होंने ॐ के तीनों भागों को थोडा दूर दूर लिखा (उल्टा कर लिखा क्योंकि, अरबी और इस्लाम में सब चीज उल्टा कर ही लिखा जाता है) जिससे कि यह एक अंक ७८६ सरीखा दिखने लगा , जिसे उन्होंने जस के तस अपना लिया......!
इस तरह हम निर्विवाद रूप से यह साबित कर सकते हैं कि इस्लाम की पूजा (नमाज) पद्धति, उनका अल्लाह यहाँ तक कि उनका पवित्रतम अंक 786 हमारे वेदों से ही चुरा कर बनाया गया है और, इस्लाम कोई नया धर्म अथवा संप्रदाय नहीं है...!
 
मस्जिद में औरतों पर पाबन्दी क्यों ?

विश्व के जितने भी बड़े धर्म है , सभी में उनके उपासना ग्रहों में पुरुषों के साथ स्त्रियों प्रवेश करने की अनुमति दी गयी है . जसे मंदिरों में अक्सर हिन्दू पुरुष अपनी पत्नियों और माता बहिनों के साथ पूजा और दर्शन के लिए जाते है . गुरुद्वारों में भी पुरुष -स्त्री साथ ही अरदास करते है . और चर्च में भी ऐसा ही होता है ,लेकिन कभी किसी ने इस बात पर गौर किया है कि पुरषों के साथ औरतें दरगाहों में तो जा सकती हैं ,लेकिन मस्जिदों में उनके प्रवेश पर पाबन्दी क्यों है .जबकि इस्लाम पुरुष और स्त्री की समानता का दावा करता है'इस प्रश्न का उत्तर हमें खुद कुरान और हदीसों से मिल जाता है .जिस पर संक्षिप्त में जानकारी दी जारही है .

1-मस्जिदें आतंकियों का अड्डा हैं
यदि हम विश्व दुसरे देशों के साथ होने वाली इस्लामी जिहादी आतंकी घटनाओं का विश्लेषण करें तो हमें पता चलेगा की जैसे जैसे आतंकवादी अपनी नयी नयी रणनीति बदलते जाते है ,वैसे वैसे ही मस्जिदों की निर्माण शैली में भी परिवर्तन होता रहता है , यदि आप सौ दो साल पहिले की किसी मस्जिद को देखें पाएंगे कि उसमे चारों तरफ ऊंची दीवार , मीनारें , गुम्बद और बीच में पानी का एक हौज होगा , और एक तरफ मिम्बर होगा जिस पर से इमाम खुतबा देता है .
लेकिन आजकल जो मस्जिदें बन रही हैं , उनके साथ दुकानें , रहने के लिए सर्व सुविधा युक्त कमरे और तहखानों के साथ भूमिगत सुरंगे भी बनायीं जाती है . जिस से गुप्त रूप से निकल भागने से आसानी हो .ऐसी ही मस्जिदों के तहखानों में हथियार छुपाये जाते हैं , जो दंगों के समय निकालकर प्रयोग किये जाते है . यही नहीं इन्हीं गुप्त सुरंगोंसे आतंकी आसानी से भाग जाते हैं .जबलपुर दंगों में ऐसी मस्जिदों से हथियार बरामद हुए थे. चूँकि मुसलमान जो भी आतंकी कार्यवाही करते हैं उसकी प्रेरणा कुरान से लेते हैं .और उसी की प्रेरणा से मस्जिदों में हथियार भी छुपाते रहते हैं , जैसे कुरान में कहा है ,

"और लोगों ने मस्जिदें इसलिए बना रखी हैं , कि वहां से लोगों को हानि पहुंचाएं ,और आपस में फूट डालें .और अपने विरोधियों पर घात लगाने की योजनायें बनाने का स्थल बनायें"सूरा - तौबा 9 :107

2-औरतें घर में नमाज क्यों पढ़ें
इसके सिर्फ दो ही कारण हो सकते हैं , एक तो यह की मुहम्मद एक चालाक व्यक्ति था , उसे पता था कि मस्जिदें फसाद जी जड़ होती हैं . और दंगों में अक्सर औरतें ही निशाना बनायीं जाती है . और बलात्कार करना जिहाद का एक प्रमुख हथियार है . मुहम्मद को दर था कि यदि औरतें मस्जिद जाएँगी तो वापसी में खुद मुस्लमान ही उनके साथ बलात्कार कर सकते है , इस लिए उसने यह हदीस सुना दी थी .
"अब्दल्लाह बिन मसूद ने कहा कि रसूल का आदेश है ,औरतों के यही उचित है कि वह यातो अपने घर के आँगन में नमाज पढ़ें , या घर के इसी एकांत कमरे में नमाज पढ़ा करें"सुन्नन अबू दाउद-जिल्द 1 किताब 204 हदीस 570

3-औरतों की बुद्धि अधूरी होती है
दूसरा कारण यह है कि मुहम्मद की सभी औरतें मुर्ख और अनपढ़ थीं , उसी कि नक़ल करके मुसलमान औरतों को शिक्षा देने के घोर विरोधी है , उनको डर लगा रहता है कि अगर औरतें पढ़ जाएँगी तो इस्लाम कि पोल खुल जाएगी .अक्सर जब औरतें पकड़ी जाती है तो वह जल्दी से राज उगल देती है .इसलिए अक्सर मुसलमान गैर मुस्लिम लड़की को फसाते है
"सईदुल खुदरी ने कहा कि रसूल ने कहा है औरतों दर्जा पुरुषों से आधा होता है ,क्योंकि उनकी बुद्धि पुरुषों से आधी होती है"बुखारी -जिल्द 3 किताब 48 हदीस 826

4-औरतें चुगलखोर होती हैं

दुनिया के सारे मुसलमान किसी न किसी अपराध में संलग्न रहते हैं . और मस्जिदों के इमाम बुखारी जैसे मुल्ले उनको उकसाते रहते हैं . सब जानते है कि अक्सर औरतें अपने दिल कि बातों को देर तक नहीं छुपा सकती है ,जिस से मुसलमानों को पकडे जाने का खतरा बना रहता है .इसलिए वह औरतों को मस्जिदों में नहीं जाने देते हैं
"सईदुल खुदरी ने कहा कि एक बार जब रसूल नमाज पढ़ चुके और मुसल्ला उठा कर एक खुतबा ( व्याख्यान ) सुनाया और कहा मैंने आज तक औरतों से अधिक बुद्धि में कमजोर किसी को नहीं देखा . क्योंकि उनके पेटों में कोई बात नहीं पचती है .यानि वह गुप्त बातें उगल देती हैं"बुखारी -जिल्द 2 किताब 24 हदीस 54
इसी विषय में जकारिया नायक ने बड़ी मक्कारी से कहा है कि केवल भारत में औरतों को मस्जिद में जाने पर पाबन्दी है . और दुसरे इस्लामी देशों में ऐसा नहीं है . लेकिन वास्तविकता तो यह्हाई कि जहाँ मुस्लिम औरतें जिहाद करती हैं उन देशों में औरतें मस्जिद में जा सकती है , और जब भारत में भी मुस्लिम आतंकी औरतों की संख्या अधिक हो जाएगी , यहाँ भी औरतें मस्जिदों में जाने लगेंगी . क्योंकि फिर छुपाने की कोई बात नहीं रहेगी . देखिये विडियो
Why ain't Women allowed in Mosques in India? Dr Zakir Naik

http:// www.youtube.com/ watch?v=XyyJ7iYh 3fw

कुछ दिन पूर्व हमारे प्रबुद्ध मित्र ने पूछा था कि औरतों को मस्जिदों में प्रवेश करने पर पाबन्दी क्यों है . इसलिए जल्दी में कुरान और हदीस के आधार पर उनके प्रश्न का उत्तर दिया जा रहा है . मुझे पूरा विश्वास है कि इस लेख को पढ़कर सभी लोग स्वीकार करेंगे कि मस्जिदें ही आतंकवादियों की शरणस्थल हैं . और वहीं से जिहाद की शिक्षा दी जाती है .

- http:// www.wikiislam.ne t/wiki/ Women_are_Defici ent_in_Intellig ence
 
क्या इस्लाम वाकई एक अलग और नया धर्मं है ? या फिर हिन्दू धर्मं का ही एक विकृत और तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया रूप ..

इस्लाम के अस्तित्व में आने के 1300 वर्ष हो जाने के बावजूद कई हिन्दू संस्कार, परम्परायें और विधियाँ आज भी पश्चिम एशिया में विद्यमान हैं। आईये देखते हैं कि कौन-कौन सी हिन्दू परम्परायें इस्लाम में अभी भी मौजूद हैं – हिन्दुओं की मान्यता है कि 33 कोटि देवताओं का एक देवकुल होता है, पश्चिम एशिया में भी इस्लाम के आने से पहले 33 भगवानों की पूजा की जाती थी। चन्द्रमा आधारित कैलेण्डर पश्चिम एशिया में हिन्दू शासनकाल के दौरान ही शुरु किया गया। मुस्लिम कैलेण्डर का माह “सफ़र” हिन्दुओं का “अधिक मास” ही है, मुस्लिम माह “रबी” असल में “रवि” (अर्थात सूर्य) का अपभ्रंश है (संस्कृत में “व” प्राकृत में कई जगह पर “ब” होता है)। मुस्लिम परम्परा “ग्यारहवीं शरीफ़”, और कुछ नहीं हिन्दू “एकादशी” ही है और दोनों का अर्थ भी समान ही है। इस्लाम की परम्परा “बकरीद”, वैदिक कालीन परम्परा “गो-मेध” और “अश्व-मेध” यज्ञ से ली गई है। संस्कृत में “ईद” का अर्थ है पूजा, इस्लाम में विशेष पूजा के दिन को “ईद” कहा गया है। संस्कृत और हिन्दू राशि चक्र में “मेष” का अर्थ मेमना, भेड़, बकरा होता है, प्राचीन काल में जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता था तब मांस के सेवन की दावत दी जाती थी। इसी परम्परा को आगे बढ़ाते हुए इस्लाम ने इसे “बकरीद” के रूप में स्वीकार किया है (उल्लेखनीय है कि हिन्दी में भी “बकरी” का अर्थ बकरी ही होता है)। जिस प्रकार “ईद” का मतलब है पूजा, उसी प्रकार “गृह” का मतलब है घर, “ईदगृह = ईदगाह = पूजा का घर = पूजास्थल, इसी प्रकार “नमाज़” शब्द भी नम + यज्ञ से मिलकर बना है, “नम” अर्थात झुकना, “यज्ञ” अर्थात पूजा, इसलिये नम + यज्ञ = नमज्ञ = नमाज़ (पूजा के लिये झुकना)। इस्लाम में नमाज़ दिन में 5 बार पढ़ी जाती है जो कि वैदिक “पंचमहायज्ञ” का ही एक रूप है (दैनिक पाँच पूजा – पंचमहायज्ञ) जो कि वेदों में सभी व्यक्तियों के लिये दैनिक अनुष्ठान का एक हिस्सा है। वेदों में वर्णन है कि पूजा से पहले, “शरीरं शुद्धयर्थं पंचगंगा न्यासः” अर्थात पूजा से पहले शरीर के पाँचों अंगों को गंगाजल से धोया जाये, इसी प्रकार इस्लाम में नमाज़ से पहले शरीर के पाँचों भागों को स्वच्छ किया जाता है।

इस्लाम में “ईद-उल-फ़ितर” भी मनाया जाता है, जिसका मतलब है “पितरों की ईद” या पितरों की पूजा, अर्थात पूर्वजों का स्मरण करना और उनकी पूजा करना, यह सनातन काल से हिन्दू परम्परा का एक अंग रहा है। हिन्दू लोग “पितर-पक्ष” में अपने पूर्वजों की आत्मा की शान्ति के लिये पूजा-हवन करते हैं उन्हें याद करते हैं यही परम्परा इस्लाम में ईद-उल-फ़ितर (पितरों की पूजा) के नाम से जानी जाती है। प्रत्येक मुख्य त्योहार और उत्सव के पहले चन्द्रमा की कलायें देखना, चन्द्रोदय और चन्द्रास्त देखना भी हिन्दू संस्कृति से ही लिया गया है, इस्लाम के आने से हजारों साल पहले से हिन्दू संकष्टी और विनायकी चतुर्थी पर चन्द्रमा के उदय के आधार पर ही उपवास तोड़ते हैं। यहाँ तक कि “अरब” शब्द भी संस्कृत की ही उत्पत्ति है, इसका मूल शब्द था “अरबस्तान” (प्राकृत में “ब” संस्कृत में “व” बनता है अतः “अरवस्तान”)। संस्कृत में “अरव” का अर्थ होता है “घोड़ा” अर्थात “घोड़ों का प्रदेश = अरवस्तान” (अरबी घोड़े आज भी विश्वप्रसिद्ध हैं) अपभ्रंश होते-होते अरवस्तान = अरबस्तान = अरब प्रदेश।

चन्द्रमा के बारे में विभिन्न नक्षत्रीय तारामंडलों और ब्रह्माण्ड की रचना के बारे में वैदिक विवरण कुरान में भी भाग 1, अध्याय 2, पैराग्राफ़ 113, 114, 115, 158 और 189 तथा अध्याय 9, पैराग्राफ़ 37 व अध्याय 10 पैराग्राफ़ 4 से 7 में वैसा ही दिया गया है। हिन्दुओं की भांति इस्लाम में भी वर्ष के चार महीने पवित्र माने जाते हैं। इस दौरान भक्तगण बुरे कर्मों से बचते हैं और अपने भगवान का ध्यान करते हैं, यह परम्परा भी हिन्दुओं के “चातुर्मास” से ली गई है। “शबे-बारात” शिवरात्रि का ही एक अपभ्रंश है, जैसा कि सिद्ध करने की कोशिश है कि काबा में एक विशाल शिव मन्दिर था, तत्कालीन लोग शिव की पूजा करते थे और शिवरात्रि मनाते थे, शिव विवाह के इस पर्व को इस्लाम में “शब-ए-बारात” का स्वरूप प्राप्त हुआ।

ब्रिटैनिका इनसाइक्लोपीडिया के अनुसार काबा की दीवारों पर कई शिलालेख और स्क्रिप्ट मौजूद हैं, लेकिन किसी को भी उनका अध्ययन करने की अनुमति नहीं दी जाती है, एक अमेरिकन इतिहासकार ने इस सम्बन्ध में पत्र व्यवहार किया था, लेकिन उसे भी मना कर दिया गया। लेकिन प्रत्यक्ष देखने वालों का मानना है कि उसमें से कुछ शिलालेख संस्कृत, पाली या प्राकृत भाषा में हो सकते हैं। जब तक उनका अध्ययन नहीं किया जायेगा, विस्तार से इस सम्बन्ध में कुछ और बता पाना मुश्किल है।
 
''आत्मा'' ने कहा कि कोई अल्लाह नही था.-कब्र मे जब लाश सड जायेगी,तब मुसलमान कैसे उत्तर देगे..क्योकि मुसल्मानो मे आत्मा नही होती है..-आप खुद देखिये ---भारत के मदरसो मे जन्नत के बारे मे यही पढाया जाता है-जन्नत ऐसी जगह है जहाँ पानी, दूध और शहद के दरिया हैं। इनसे नहरें निकलती हैं। जन्नत की औरतें इतनी खूबसरत हैं यदि उनमें से कोई औरत ज़मीन पर झाँके तो सूरज की रोशनी मिट जाए। (पृ. 9, नूरी तालीम)3. जो लोग जन्नत में जाएंगे, सदा तंदरुस्त रहेंगे और हमेशा जिंदा रहेंगे (पृ. 10, नूरी तालीम)4. सब अपने अमाल (कर्म) के हिसाब से जन्नत और दोज़ख में भेज दिए जाएंगे, जो मुसलमान अपने गुनाहों की वजह से दोज़ख में गिर पड़ेंगे, हमारे पैगम्बर उनकी सिफारिश करेंगे और दूसरे पैगम्बर गुनाहगारों की सिफारिश करेंगे और सारे मुसलमान जन्नत में चले जाएंगे और सभी काफिर दोज़ख में जाएंगे (पृ. 12, तलकीन ज़दीद)5. कब्र में भी सवाल-जवाब होंगे। मोमिन जवाब देगा - अल्लाह मेरा रब है, इस्लाम मेरा दीन है। काफिर जवाब नहीं दे सकेगा और इसलिए कब्र में काफिरों और गुनाहगारों का अंजाम होगा। (पृ. 13, तलकीन ज़दीद)6. वह कयामत के दिन जिं़दा करके सबके अमाल का हिसाब दे देगा और नेकी व बदी का बदला लेगा। (पृ. 26, इस्लामी तालिमात, पंजम के लिए)-------हिन्दी मे अर्थ जानने के बाद प्रश्न----१-इस्लाम पुनर्जन्म नही मानता है.इसलिये किसी को जन्नत नही मिलेगी.२-मुस्लमान जमीन मे गाड दिये जाते है.हड्डी को छोडकर बाकी सड जाता है.तब कौन जन्नत मे जायेगा...आत्मा को इस्लाम नही मानता है.आत्मा का ज्ञान मुहम्मद और अल्लाह को नही था.इसलिये कुरान मे नही लिखा.३-कब्र मे कौन सवाल जवाब करेगा..अल्लाह या फरिश्ते--दोनो को मुसल्मान नही पहचान सकते.क्योकि दोनो का कोई भी सुराग नही है.न फोटो न मुर्ती.भारत का विभाजन ''इस्लाम ''ने किया,देश को तोड्ने वाला देशद्रोही होता है,-के जज का --निर्णय--आत्मा की गवाही से सिद्ध होता है कि इस्लाम मजहब नही है.न तो कोई अल्लाह था..केवल आत्मा ही मरने के बाद बात कर सकती है.कोई भी मुसल्मानो से मरने के बाद पुछ ताछ नही करेगा.क्योकि सवाल करने वाला अल्लाह या फरिश्ता और जवाब देने वाला मुसल्मानो की आत्मा दोनो नही है.
 
रमजान का प्रारम्भ हो चुका है,इस पर कुछ नहीं बोलूँगा। पर हाँ रमजान के पश्चात क्या होगा वो बता सकता हूँ। कुछ बानगी देखिये:- जब हरम (रमजान ) के महीने बीत जाऐं, तो ‘मुश्रिको’ को जहाँ-कहीं पाओ कत्ल करो, और पकड़ो और उन्हें घेरो और हर घात की जगह उनकी ताक में बैठो। फिर यदि वे ‘तौबा’ कर लें ‘नमाज’ कायम करें और, जकात दें तो उनका मार्ग छोड़ दो। निःसंदेह अल्लाह बड़ा क्षमाशील और दया करने वाला है।” (पा० १०, सूरा. ९, आयत ५,२
 
हलाल से हलाला तक !!
इस्लामी पारिभाषिक शब्दों में "हलाल , और "हलाला " यह ऐसे
दो शब्द हैं , जिनका कुरान और हदीसों में कई जगह प्रयोग
किया गया है . दिखने में यह दौनों शब्द एक जैसे लगते हैं .यह बात
तो सभी जानते हैं कि,जब मुसलमान किसी जानवर के गले पर
अल्लाह के नाम पर छुरी चलाकर मार डालते हैं , तो इसे हलाल
करना कहते हैं .हलाल का अर्थ "अवर्जित " होता है . लेकिन
हलाला के बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं .क्योंकि इस शब्द
का सम्बन्ध मुसलमानों वैवाहिक जीवन और कुरान के
महिला .विरोधी कानून से है .क्योंकि कुरान में अल्लाह के बनाये
हुए इस जंगली ,और मूर्खता पूर्ण कानून की आड़ में मुल्ले ,
मौलवी और मुफ्ती खुल कर अय्याशी करते हैं
इस बात को ठीक से समझने के लिए अल्लाह की औरतों के
प्रति घोर नफ़रत , और मुसलमानों की पारिवारिक स्थितियों के
बारे में जानना बहुत जरूरी है,मुसलमानों में दो दो , तीन तीन औरतें
रखना साधारण सी बात है . और फिर मुसलमान रिश्ते
की बहिनों से भी शादियाँ कर लेते हैं .और अक्सर संयुक्त परिवार
में रहना पसंद करते हैं .इसलिए पति पत्नी में झगड़े होते रहते हैं.
और कभी पति गुस्से में पत्नी को तलाक भी दे देता है .
चूंकि अल्लाह की नजर में औरतें पैदायशी अपराधी होती है ,
इसलए कुरान में पति की जगह पत्नी को ही सजा देने का नियम
है .यद्यपि तलाक देने के कई कारण और तरीके हो सकते हैं ,
लेकिन सजा सिर्फ औरत को ही मिलती है . इसे विस्तार से
प्रमाण सहित बताया गया है .जो कुरान और हदीसों पर आधारित
है .
1-तलाक कैसे हो जाती है
यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी के सामने तीन बार "तलाक " शब्द
का उच्चारण कर दे , या कहे की मैंने तुझे तीनों तलाक दे दिए ,
तो तलाक हो जाती है ..क्योंकि इस कथन को उस
व्यक्ति की कसम माना जाता है .जैसा की कुरान ने कहा है ,
" और अगर तुम पक्की कसम खाओगे तो उस पर अल्लाह जरुर
पकड़ेगा "सूरा - मायदा 5 :89
तलाक के बारे में कुरान की इसी आयत के आधार पर हदीसों में
इस प्रकार लिखा है ,
-"इमाम अल बगवी ने कहा है , यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी से
कहे की मैंने तुझे दो तलाक दिए और तीसरा देना चाहता हूँ , तब
भी तलाक वैध मानी जाएगी .और सभी विद्वानों ने इसे जायज
बताया है.(Rawdha al-talibeen 7/73"
" ﻓﺮﻉ ﻗﺎﻝ ﺍﻟﺒﻐﻮﻱ ﻭﻟﻮ ﻗﺎﻝ ﺃﻧﺖ ﺑﺎﺋﻦ ﺑﺎﺛﻨﺘﻴﻦ ﺃﻭ ﺛﻼﺙ
ﻭﻧﻮﻯ ﺍﻟﻄﻼﻕ ﻭﻗﻊ ﺛﻢ ﺇﻥ ﻧﻮﻯ ﻃﻠﻘﺘﻴﻦ ﺃﻭ ﺛﻼﺛﺎ ﻓﺬﺍﻙ
-"इमाम इब्न कदमा ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी से
कहे कि मैंने तुझे तीनों तलाक दे दिए हैं . लेकिन चाहे उसने यह बात
एक ही बार कही हो , फिर भी तलाक हो जायेगा .Al-Kafi
3/122
"
ﺇﺫﺍ ﻗﺎﻝ ﻟﺰﻭﺟﺘﻪ : ﺃﻧﺖ ﻃﺎﻟﻖ ﺛﻼﺛﺎ ﻓﻬﻲ ﺛﻼﺙ ﻭﺇﻥ ﻧﻮﻯ
ﻭﺍﺣﺪﺓ“
2-अल्लाह की तरकीब
ऐसा कई बार होता है कि व्यक्ति अपनी पत्नी को तलाक देकर
बाद में पछताता है , क्योंकि औरतें गुलामों की तरह काम
करती हैं , और बच्चे भी पालती हैं . कुछ पढ़ी लिखी औरतें
पैसा कमा कर घर भी चलाती है . इस इसलिए लोग फिर से
अपनी औरत चाहते है .
" हे नबी तू नहीं जनता कि कदाचित तलाक के बाद अल्लाह कोई
नयी तरकीब सुझा दे " सूरा -अत तलाक 65 :1
और इस आयत के बाद काफी सोच विचार कर के अल्लाह ने
जो उपाय निकाला है ,वह औरतों के लिए शर्मनाक है
 
3-हलाला
तलाक़ दी हुई अपनी बीवी को दोबारा अपनाने का एक तरीका है
जिस के तहेत मत्लूका(तलाक दी गयी पत्नी ) को किसी दूसरे मर्द
के साथ निकाह करना होगा और उसके साथ हम बिस्तरी की शर्त
लागू होगी फिर वह तलाक़ देगा, बाद इद्दत ख़त्म औरत
का तिबारा निकाह अपने पहले शौहर के साथ होगा, तब जा कर
दोनों तमाम जिंदगी गुज़ारेंगे.हलाला के बारे में कुरान और हदीसों में
इस प्रकार लिखा है ,
और यदि किसी ने पत्नी को तलाक दे दिया , तो उस
स्त्री को रखना जायज नहीं होगा . जब तक वह
स्त्री किसी दूसरे व्यक्ति से सहवास न कर ले .फिर वह
व्यक्ति भी उसे तलाक दे दे . तो फिर उन दौनों के लिए एक दूसरे
की तरफ पलट आने में कोई दोष नहीं होगा "सूरा -
बकरा 2 :230
" ﻓَﺈِﻥ ﻃَﻠَّﻘَﻬَﺎ ﻓَﻠَﺎ ﺗَﺤِﻞُّ ﻟَﻪُ ﻣِﻦ ﺑَﻌْﺪُ ﺣَﺘَّﻰٰ ﺗَﻨﻜِﺢَ ﺯَﻭْﺟًﺎ ﻏَﻴْﺮَﻩُ ۗ
ﻓَﺈِﻥ ﻃَﻠَّﻘَﻬَﺎ ﻓَﻠَﺎ ﺟُﻨَﺎﺡَ ﻋَﻠَﻴْﻬِﻤَﺎ ﺃَﻥ ﻳَﺘَﺮَﺍﺟَﻌَﺎ ﺇِﻥ ﻇَﻨَّﺎ ﺃَﻥ
ﻳُﻘِﻴﻤَﺎ ﺣُﺪُﻭﺩَ ﺍﻟﻠَّﻪِ ۗ ﻭَﺗِﻠْﻚَ ﺣُﺪُﻭﺩُ ﺍﻟﻠَّﻪِ ﻳُﺒَﻴِّﻨُﻬَﺎ ﻟِﻘَﻮْﻡٍ
ﻳَﻌْﻠَﻤُﻮﻥَ 2:230
(नोट -इस आयत में अरबी में " ﺗﺤﻠّﻞ ﻟﻪُ 'तुहल्लिल लहु"शब्द
आया है , मुस्लिम इसका अर्थ "wedding " करते हैं ,
जबकि sexual intercourse सही अर्थ होता है .
इसी से " हलालाह ﺣﻼﻟﮧ " शब्द बना है . अंगरेजी के एक
अनुवाद में है "uptill she consummated intercourse
with another person "यानी जबतक किसी दूसरे व्यक्ति से
सम्भोग नहीं करवा लेती .)और तलाक शुदा औरत
का हलाला करवाकर घर वापसी को " रजअ ﺭﺟﻊ " कहा जाता है .
हलाला इस तरह होता है, पहले तलाकशुदा महिला इद्दत का समय
पूरा करे। फिर उसका कहीं और निकाह हो। शौहर के साथ उसके
वैवाहिक रिश्ते बनें। इसके बाद शौहर अपनी मर्जी से तलाक दे
या उसका इंतकाल हो जाए। फिर बीवी इद्दत का समय पूरा करे।
तब जाकर वह पहले शौहर से फिर से निकाह कर सकती है।
बड़े बड़े इस्लाम के विद्वान् तलाक शुदा पत्नी को वापिस रखने के
लिए हलाला को सही मानते हैं , देखिये (विडिओ )
Teen Talaaq aur Halala part 1
http://www.youtube.com/watch?v=APVNOo5p
Vg8
4-हलाला का असली उद्देश्य
हलाला का उद्देश्य पति पत्नी में सुलह कराना नहीं ,
बल्कि तलाक दी गयी औरत से वेश्यावृत्ति करना है , जो इन
हादिसों से साबित होता है ,
-"आयशा ने कहा कि रसूल के पास रिफ़ा अल
कुरैजी कि पत्नी आई और बोली , रीफा ने मुझे तलक दे दिया था .
और मैंने अब्दुर रहमान बिन अबू जुबैर से शादी कर ली , लेकिन
वह नपुंसक है , अब मैं वापिस रिफ़ाके पास जाना चाहती हूँ . रसूल
ने कहा जब तक अब्दुर रहमान तुम्हारे साथ विधिवत सम्भोग
नहीं कर लेता , तुम रिफ़ा के पास वापिस नहीं जा सकती .
" ﺇﻻ ﺇﺫﺍ ﻛﺎﻥ ﻟﺪﻳﻚ ﻋﻼﻗﺔ ﺟﻨﺴﻴﺔ ﻛﺎﻣﻠﺔ ﻣﻊ "
Bukhari, Volume 7, Book 63, Number 186
-"उम्मुल मोमिनीन आयशा ने कहा कि एक व्यक्ति ने
अपनी पत्नी से तीन बार तलाक कह दिया , और फिर से
अपनी पत्नी से शारीरिक सम्बन्ध बनाने की इच्छा प्रकट की .
रसूल ने कहा ऐसा करना बहुत बड़ा गुनाह है .. और जब तक
उसकी पत्नी किसी दुसरे मर्द का शहद और वह उसके शहद
का स्वाद नहीं चख लेते .
" ﺣﺘﻰ ﺍﻧﻬﺎ ﺫﺍﻕ ﺍﻟﻌﺴﻞ ﻣﻦ ﺍﻟﺰﻭﺝ ﺍﻵﺧﺮ ﻭﺫﺍﻗﻪ ﺍﻟﻌﺴﻞ
ﻟﻬﺎ "
Abu Dawud, Book 12, Number 2302
5-हलाला व्यवसाय
जिन मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में पति पत्नी में झगड़े होते रहते
हैं ,वहां मुल्ले मुफ्ती अपने दफ्तर बना लेते हैं , और साथ में दस
बीस मुस्टंडे भी रखते हैं .इनका काम फतवे देना होता है . चूँकि इस
विज्ञानं के युग में नेट , फोन ,और फेक्स जैसे साधन सामान्य
है , और उन्ही के द्वारा तलाक देने का रिवाज हो चला है . कई
बार मेल या फेक्स से औरत को तलाक की सूचना नहीं मिलती फिर
भी मुल्ले तलाक मानकर हलाला तय कर देते हैं .
देखिये देवबंद का फतवा
अगर इंसान शराब के नशे में अपनी बीवी को फोन पर तीन बार
तलाक बोल दे, लेकिन बाद में उसे पछतावा हो और वह तलाक न
चाहता हो ...तो क्या ऐसी सूरत में भी तलाक हो जाएगा’दारुल
उलूम देवबंद के फतवा विभाग दारुल इफ्ता से। इस पर मुफ्तियों ने
फतवा जारी किया है कि अगर तलाक नशे की हालत में
दिया गया हो, तो भी पति-पत्नी का रिश्ता खत्म हो जाएगा।
फोन पर दिया गया तलाक भी मान्य है। अगर ऐसा शख्स
अपनी बीवी के साथ रहना चाहता है तो हलाला के सिवाय कोई
दूसरा विकल्प नहीं है।
the Qazi can separate them both after analyzing
the case. Reference Sahih Bukhari 7:63:227 &
231
मुल्ले मुफ्ती फ़ोन से या इशारे से दी गयी तलाक को जिन
हदीसों का हवाला देते हैं , उन में से एक यह है ,
-"आयशा ने कहा कि एक व्यक्ति ने सिर्फ तीन तलाक देने
का इशारा ही किया था , और तलाक हो गयी , फिर
उसकी पत्नी ने दुसरे आदमी से शादी कर ली .और अपने पहले
पति के पास जाने की इच्छा प्रकट की . क्या ऐसा संभव है ?
रसूल ने कहा जब तक उसका दूसरा व्यक्ति उसे तीसरे आदमी से
सहवास नहीं नहीं करा देता , औरत पूर्व पति के पास
नहीं जा सकती .Bukhari, Volume 7, Book 63,
Number 187
 
कुरान समझाने के बजाए हमेशा रटवाया ही क्यों जाता है....?
क्या आप जानते हैं कि...... मदरसों में कुरान पढ़ाने और समझाने
के बजाए ... हमेशा रटवाया ही क्यों जाता है....????....????
आप यह जानकर आश्चर्यचकित हो जाएँगे कि .. कुरान
को रटवाने का बहुत बड़ा कारण है.....!
दरअसल... पर्दे के पीछे की सच्चाई यह है कि...... इस्लाम
सिर्फ अपने तथाकथित रसूल मुहम्मद और कुरान पर आधारित
है...... मतलब कि मुहम्मद साहब और कुरान ये दोनों इस्लाम के
आधारस्तम्भ हैं...!
अब... मुहम्मद साहब के बारे में तो कुछ बोलना ही बेकार है ....
क्योंकि मुहम्मद साहब तो इतने महान आत्मा और पराक्रमी पुरुष
थे कि ..... उन्होंने 65 साल के बुढ़ापे की आयु में भी ....
अपनी सगी एवं 9 साल की मासूम
बेटी फातिमा को ही अकेला पा कर निपटा दिया था...!!
(उन्ही का अनुकरण मुस्लिम आज भी कर रहे हैं) .
अब बच गया... कुरान.....
तो.... कुरान और वैज्ञानिकता में ""सांप-नेवले"" का वैर
है.......!
कहने का मतलब कि..... कुरान में वैज्ञानिकता ढूंढ़ने से
कहीं ज्यादा आसान है........ किसी गधे के सर पर सींग ढूंढ़
लेना.....!
वैज्ञानिकता के अलावा भी कुरान में
ऐसी विराधाभासी कहानियाँ लिखी हुई है कि ........
किसी ""दो पैसे"" जितना दिमाग वाला व्यक्ति भी कुरान पर
प्रश्नवाचक चिन्ह लगा देगा....!
जैसे कि ..... एक तरफ कुरान कहता है कि...... अल्लाह निराकार
है और सर्वव्यापी है.....!
वही है जिसने आकाशों और धरती को छह दिनों में पैदा किया;
फिर सिंहासन पर विराजमान हुआ। वह जानता है जो कुछ धरती में
प्रवेश करता है और जो कुछ उससे निकलता है और जो कुछ
आकाश से उतरता है और जो कुछ उसमें चढ़ता है। और तुम
जहाँ कहीं भी हो, वह तुम्हारे साथ है। और अल्लाह देखता है
जो कुछ तुम करते हो .............. Q57:04:
यहाँ तक तो ठीक है कि..... और समझ भी आता है कि ......
अल्लाह निराकार और सर्वव्यापी है.... (इसीलिए मुस्लिम
मूर्तियों की पूजा नहीं करते हैं .. की उनका कहना है कि...
निराकार को आकर नहीं देना है)
लेकिन.............. दूसरी ही जगह.... कुरान कहता है कि......
@ वह एक बड़े सिंहासन का स्वामी है ...............
...........सूरा अत तौबा 9 :129.
@ वह महाशाली एक सिंहासन पर बैठता है ...............
...सूरा अल मोमनीन 23 :116.
@ और फ़रिश्ते उसके किनारों पर होंगे और उस दिन तुम्हारे रब
के सिंहासन को आठ अपने ऊपर उठाए हुए होंगे .........
Q69:१७.
अब ... किसी मुर्ख को भी ये समझ में आ सकता है
कि...... ...जब अल्लाह निराकार है तो... सिंहासन पर कैसे
बैठता है..... और, अगर अल्लाह सिंहासन पर बैठता है तो..
निराकार कैसे है...????
इस तरह हम कह सकते हैं कि... इस्लाम अक्ल के दुश्मनों के लिए
ही है और..... शायद यही कारण है कि .....मदरसों में कुरान
समझाने के बजाए पूरी ताकत से रटवाया जाता है....!
नीचे फोटो में मैं मुल्लों की मूर्खता का एक प्रत्यक्ष उदाहरण
प्रस्तुत कर रहा हूँ ....!
नोट: लेख में इस्तेमाल की गयी सारी हदीसे और आयतें प्रमाणिक
हैं..... अतः अगर किसी भी सज्जन अथवा दुर्जन को लेख से


कोई शिकायत हो तो..... वो साबित करे....!
 
Rakesh Ji, namaskar,
Prayash acha hai lekin tarika galat. Kyon
Duniya mein kisi religion mein itani problems nahi jitani Muslim mein hain. Pure world mein kya karan hai ki terrorist sirf muslim hi sabse jayada involve hain. lets keep Dharam aside for a while, kya karan hai ki maulavi ko salry or sadhu ko gali. mere bhai ye to kuch rajpal jaise hain jo wastvikta bata rahe hain warna desh to dubta ja raha hai.Desh ke liye droh karne wali Ishrat to innocent jo ki teen investigating agency claim and Pragya Thakur still languishing in jail without a charge sheet even after 2 yrs. My dear first think why this biased thoughts arising in public.

O bhai Rajpal

Ek seedhi si baat bataun bera na kiski dharam ki kitab mein ke likh rakhya hai usme kitnee jhooth hain.
Tu in bata ki stayata sabit karan khatar vigyan ka sahara lewe hai .
 
[h=5]पैगम्बर मुहम्मद के चाचा शिव भक्त थे। जिनका नाम अबू था। और उसी ने एक किताब अल ओकुल में शिव भक्ति में ये कविता लिखी जो आज भी मौजूद है वहां के एक पत्थर पर हर हर महादेव लिखा हुआ है।[/h][h=5]
उस युग में अरब एक बड़ा व्यापारिक केन्द्र रहा था, इसी कारण देवों, दानवों और दैत्यों में इलावर्त के विभाजन को लेकर 12 बार युद्ध ‘देवासुर संग्राम’ हुए। देवताओं के राजा इन्द्र ने अपनी पुत्री ज्यन्ती का विवाह शुक्र के साथ इसी विचार से किया था कि शुक्र उनके (देवों के) पक्षधर बन जायें, किन्तु शुक्र दैत्यों के ही गुरू बने रहे। यहाँ तक कि जब दैत्यराज बलि ने शुक्राचार्य का कहना न माना, तो वे उसे त्याग कर अपने पौत्र और्व के पास अरब में आ गये और वहाँ 10 वर्ष रहे। साइक्स ने अपने इतिहास ग्रन्थ “हिस्ट्री ऑफ पर्शिया” में लिखा है कि ‘शुक्राचार्य लिव्ड टेन इयर्स इन अरब’। अरब में शुक्राचार्य का इतना मान-सम्मान हुआ कि आज जिसे ‘काबा’ कहते है, वह वस्तुतः ‘काव्य शुक्र’ (शुक्राचार्य) के सम्मान में निर्मित उनके आराध्य भगवान शिव का ही मन्दिर है। कालांतर में ‘काव्य’ नाम विकृत होकर ‘काबा’ प्रचलित हुआ। अरबी भाषा में ‘शुक्र’ का अर्थ ‘बड़ा’ अर्थात ‘जुम्मा’ इसी कारण किया गया और इसी से ‘जुम्मा’ (शुक्रवार) को मुसलमान पवित्र दिन मानते हैं।
[/h]
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******इस्लाम के दस नियम ********

यह कहावत सभी जानते है कि सोते हुए व्यक्ति को जगाना आसान होता है ,लेकिन जिसने सोने का ढोंग

कर रखा हो ,या जिसे नींद कि गोली दी गयी हो ,उसे जगाना मुश्किल होता है .नादान को समझाने पर

वह फ़ौरन समझ जाता है ,लेकिन जन पढ़े लिखे लोगों की अक्ल पर सेकुलर विचारों का पर्दा पड़ा हो ,
.....उनको समझाना कठिन है .यह


...........

"""अज का हिन्दू सिर्फ मैच देखने ,या बिग बोस जैसे फालतू सीरियल देखने में व्यस्त रहते हैं .और महिलाएं ऐसे सीरियल देखती रहतीं हैं ,जो समाज को तोड़ने के लिए बने हैं .यह एक सोची समझी योजना है ."""
 
मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक हिंसा की आड़ लेकर सांप्रदायिक हिंसा विरोधी विधेयक लाने की ताक में बैठी कांग्रेस ने हिंसा को रोकने और छेड़छाड़ पीड़ित हिन्दू बच्ची की रक्षा में शहीद भाईयों को न्याय देने से अखिल्लेश को आदेशित नहीं किया। सांप्रदायिक हिंसा का राजनितिक लाभ सपा,भाजप,कांग्रेस ने उठाया है।
सांप्रदायिक हिंसा का मूल स्त्रोत कुराण की उन २४ आयातों में है जिसे हिन्दू महासभा की मांग पर माननीय मेट्रो पोलिटिन न्यायालय देहली ने ३१ जुलाई १९८६ में विघातक,विद्वेषक माना है।उन्हें निकालकर संविधानिक समान नागरिकता लागु करना राष्ट्रिय एकात्मता के लिए महत्वपूर्ण तथ्य है।वैसे भी विश्व इस्लाम की शिकार धर्मान्तरित पूर्व हिंदुओ को शुध्दिकृत हिन्दू बनाया जाना चाहिए और उसके लिए हम तयार है।क्यों कि,कुराण शरीफ पारा-१ सूरे बकर आ.१ मे प्रारंभ मे लिखा है,"अल्लाह के नाम से निहायत दयावान मैहरबान है,अलिफ-लाम-मिम." इस आयात पर फुटनोट मे हिंदी भाष्यकार मौ.अहमद बशीर ने लिखा है,"आलीफ लाम मिम=हुरुफे मुक्तआत.इन तीनो अक्षरो का ज्ञान मुसलमानो को नही है तो इसका अर्थ यही है कि,वे कुराण समझने के लायक नही है.... अरबी व्याकरण के अनुसार लाम अक्षर 'वाउ' अक्षर मे बदल जाता है तब अलिफ लाम मिम मिलकर अलिफ,वाउ,मिम बन जाते है.अलिफ+वाउ=ओ उसमे मिम जोडणे से "ओम" बन जाता है जो ईश्वर का सर्वश्रेष्ठ मुख्य नाम है।ओम नाम से परमात्मा का स्मरण कुराण रचयिता ने किया है,सिपारे या सूरत के आरंभ मे इसका स्मरण कई जगह है.इसलिये सभी हिंदूओका कर्तव्य है कि,"वे मुसलमानो को परमात्मा कि उपासना व स्मरण, ओम के उच्चारण से करने की बात देवे क्यो कि,यही कुराण को स्वीकार है. यदि खुलकर ओम लिख दिया जाता तो अरेबी मुल हिंदुत्व से भिन्नत्व नही बन पाता।
राष्ट्रिय एकात्मता परिषद् और सांप्रदायिक हिंसा विरोधी विधेयक बनाते समय हमारी इन बातो का स्मरण रखने से राष्ट्रिय एकात्मता में वृध्दी होगी !
 
है कोई सच्चा मुसलमान जो मेरी बात का उत्तर दे?

जब कुरान मे लिखा है कि अल्लाह को प्रसन्न करने के लिए मोहम्मद ने अपने बेटे की बलि चढ़ाई थी तब से ईद मनाई जाती है तो फिर मुस्लिम बकरे की बलि क्यों चढाते हैं?
अपने बच्चे की क्यों नहीं?
 




" एक मस्जिद बनाने के लिए 27 हिन्दू और जैन मंदिर तोड़ दिए गए..!!! एक दिन दिल्ली में "कुतुबमीनार" घूमते समय इस पत्थर पर नजर पड़ गई तो आपके सामने रख दिया ।।"

​
 
Rajpal ji ko to bas mauka chahiye. Thread chahe koi bhi ho, sab copy paste kar de apne favorite topics pe - Modi and Muslims :)
 
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