When I felt like an idiot!!

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Good on your part Bro.... Nice gesture....

Bhai saahb peechle 1 mahine ki sabse acchi aur saahsi post. Aapne bilkul sahi kaha insaan duniya ko jhooth bol sakta hai par apne aapko nahi.
......
Aur aapki ye post auro ke liye, khaas taur ke choto ke liye source of inspiration hai. Auro ka bhi saahs badhta hai aisa dekh ki galti maan ne aur sudhaarne meinkoi burai nahi.

Salutations to u big bro :)

dear dev/sandeep,

i dont deserve any accolades,
:o i just followed the call of my conscience nd i'm more then pleased tht gud sense prevailed over me. hwever tks for yr soothing words. :)
 
तेवतिया जी,

में बहुत कुछ लिखने की मनस्तिथि में नही हूँ , परन्तु इतना अवश्य कहूँगा
आपके वय्क्तितव का ये पहलू देख कर मन प्रफुलित हो गया !

इन सब का पर्तिफल, "डेर सारी मन की शांति "

खुश रहो !

तेवतिया जी

मेरे लिए बनिया जाती के लोग उतने ही सम्मानीय हैं जितने की अपनी जाती के लोग!
मेरा इस जाती के लोगो के प्रति सम्मान और सम्बन्ध बहुत पुराना है
मेरी कुछ पुरानी यादे इस जाती के लोगों से जुड़ी हुई हैं , मैंने हाई स्कूल भी बनियो की संस्था, वैश हाई स्कूल रोहतक से पास की है / बनिया जाती के लोग भी जटोनो का बहुत सम्मान करते हैं , मुझे याद है चो. हर्नंद्राय उस स्कूल के ९० साल के इतहास में सबसे लंबे समय तक हेडमास्टर थे/ चो हर्नंद्राय अपने समय के सबसे सम्मानित अध्यापकों में से एक थे
लेकिन जाट स्कूल रोहतक में गन्दी राजनीति के चलते उन्होंने इस्तीफा दे दिया था / उस समय बनियों की संस्था ने उस महान अध्यापक को अपनी संस्था में लेजाकर बहुत बड़ा सम्मान किया था / और जाट स्कूल रोहतक उस के बाद कभी अपने पुराने स्थान को नही पा सका, आज तक भी !
में आप से ये विनती करना चाहता हूँ की सुध्खोर साहूकार और बनिया पर्यावाची शब्द नही हैं
जिसके कारण ही शायद इस जाती के लोग बदनाम रहे हैं
सुद्खोर जाट भी उतना ही खतरनाक है जितना की बनिया

मेरे गाओं में रिश्ते के एक ताऊ जी थे , वे सूद पर पैसा देते थे
लेकिन वे बहुत ही निरंकुश इंसान थे , एक बार उसने एक नाई को पैसे दे रखे थे
वो उन्हें बहूत ही तंग करता था
सुबह की चाय नाइयों के घर पर ही पिता था
आप अंदाजा लगा सकते हैं की सुबह जब कोई सुद्खोर घर पहुँच जाए तो उस परिवार पर क्या बीतती होगी

वे हमसे ज्यादा वय्व्हारी और संस्कारी हैं !

अतः आप इस बात को कृपया अपने मन मस्तिस्क से निकाल दें की मैंने आप का अपमान करने के लिए ऐसा कहा होगा !
आशा है आप मेरी बात समझ रहे होंगे !

Cheers!

Deshwal Sir आपके विचार जानकर मन को बहुत शांति मिली !!! :)
...
i mince no words to say tht u r a true asset for JL nd mankind...sir please keep enlightening us with yr valuable thoughts nd experiences. :)
...
और sir मेरे नाम के आगे जी लगाकर मुझे और लज्जित ना करें.:o...मैं इतना महान नहीं...example आप देख ही चुके हैं. :(:D
 
ke baat sarre itni suthri suthri baat kaise karan lag rahe ho. iss tagge me aake manne bhi kamme nasha saa ho gaya :D
 
ब्रह्म भाई

इब इतना deeddaan पे भी ना chaddao, में नही समझाता की में इतना काबिल हूँ
जो भी आसपास घटता है या घटा है वही सब महसूस कर, लिख देता हूँ
अपितु इसमे ऐसा कुछ नया या सृजनात्मक नही है , जिसके लिए मेरी इतनी प्रसंसा की जाए
आप को एक और राज की बात बता दू, यह सब लिखते हुए में अपने सबसे प्यारे इंसान का दिल दुखता हूँ
वो ये समझती है की ये उसके हिस्से का समय में इस खटर पटर में बरबाद करता हूँ हा हा हा ...

आप भी अब इस अपराधबोध के बोझ को उत्तर फेंको और साधारण व्यवहार करो !
आप ने कोई मानस ना मार रख्या !

में आपको एक सचि घटना जो मेरे सव्र्गीय दादा जी के साथ घटी थी के बारे में सुनाता हूँ और उसका सारांस यही है की कई बार बिना कुछ सोचे समझे ऐसा कुछ बोल देते हैं , जिसका साब्दिक अर्थ कुछ और होता है और बोलने वाल्ले का अभिप्राय कुछ और :

मेरे दादा जी रोहतक अनाज मंदी में किसी एक खास दूकान से ही खल बिनिले वगेरा लेते थे
एक दिन उस दूकानदार की साथ उनका किसी बात पर विवाद हो गया
वाद विवाद के चलते दादा जी के मुख से अनजाने में एक गाली निकल गई , जो की आज भी जमना के दोनों और आम बोलचाल की भासा में खूब इस्तेमाल होती है ..बेटी............
गाओं में इस का खूब इस्तेमाल भी होता है और लोग इससे सीरियस भी नही लेते
ऐसा ही कछ उस दिन भी हुआ था , दादा जी ने सायद वो गाली कई बार कह दी और लालाजी ने उसे दिल से लगा लिया
और झगडा बहुत बढ गया
आस पास के दूकानदार और ग्राहक भी कठे होगे ...खुस्सर फुसर सुरु होगी ..एक दो ने पूछा भाई के बात होगी
लाला जी बोल्या टेकचंद से ही पूछ ल्यो छोटी सी बात पे बेटी की गाल दे है, आर एक बे नही कई बे
जो दुकानदार दादा जी को सालों से जानते थे , आपस में बात कर रे की भाई तेक्क्चंद ते बहुत भला मानस से गाली गलोच ते ना करे !
लालाजी बोल्या टेकचंद ते ही पूछ ल्यो
मेरे दादा जी बोले, रे क्यों झूठी तोह्मद लावे से "मन्ने किस बेटी......" ते गाल देदी

सारे भीड़ में ठह्का उठया, वो लाला भी न्यू बोल्या ,चल्लो चालो आपना -२ काम करो , मेरे ते कोई गाल गुली ना दी इसने

इसलिय भाई इस बात को इब्ब भूल भी जा !



खुश रहो!
 
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ब्रह्म भाई

इब इतना deeddaan पे भी ना chaddao, में नही समझाता की में इतना काबिल हूँ
जो भी आसपास घटता है या घटा है वही सब महसूस कर, लिख देता हूँ
...Sir ye aap nahin, aapka बढअप्पन bol raha hai, thts so humble of U.

अपितु इसमे ऐसा कुछ नया या सृजनात्मक नही है , जिसके लिए मेरी इतनी प्रसंसा की जाए
आप को एक और राज की बात बता दू, यह सब लिखते हुए में अपने सबसे प्यारे इंसान का दिल दुखता हूँ
वो ये समझती है की ये उसके हिस्से का समय में इस खटर पटर में बरबाद करता हूँ हा हा हा ...
hmmm...so nice of u, wat n honest confession...sir, pls, carry on the gud work...kabhi mile to bhabhi ko mein samjha dunga :p
आप भी अब इस अपराधबोध के बोझ को उत्तर फेंको और साधारण व्यवहार करो !
आप ने कोई मानस ना मार रख्या !

में आपको एक सचि घटना जो मेरे सव्र्गीय दादा जी के साथ घटी थी के बारे में सुनाता हूँ और उसका सारांस यही है की कई बार बिना कुछ सोचे समझे ऐसा कुछ बोल देते हैं , जिसका साब्दिक अर्थ कुछ और होता है और बोलने वाल्ले का अभिप्राय कुछ और :

मेरे दादा जी रोहतक अनाज मंदी में किसी एक खास दूकान से ही खल बिनिले वगेरा लेते थे
एक दिन उस दूकानदार की साथ उनका किसी बात पर विवाद हो गया
वाद विवाद के चलते दादा जी के मुख से अनजाने में एक गाली निकल गई , जो की आज भी जमना के दोनों और आम बोलचाल की भासा में खूब इस्तेमाल होती है ..बेटी............
गाओं में इस का खूब इस्तेमाल भी होता है और लोग इससे सीरियस भी नही लेते
ऐसा ही कछ उस दिन भी हुआ था , दादा जी ने सायद वो गाली कई बार कह दी और लालाजी ने उसे दिल से लगा लिया
और झगडा बहुत बढ गया
आस पास के दूकानदार और ग्राहक भी कठे होगे ...खुस्सर फुसर सुरु होगी ..एक दो ने पूछा भाई के बात होगी
लाला जी बोल्या टेकचंद से ही पूछ ल्यो छोटी सी बात पे बेटी की गाल दे है, आर एक बे नही कई बे
जो दुकानदार दादा जी को सालों से जानते थे , आपस में बात कर रे की भाई तेक्क्चंद ते बहुत भला मानस से गाली गलोच ते ना करे !
लालाजी बोल्या टेकचंद ते ही पूछ ल्यो
मेरे दादा जी बोले, रे क्यों झूठी तोह्मद लावे से "मन्ने किस बेटी......" ते गाल देदी
...या हुई ने कती जाटां आली बात...every one out here know abt this true character of jaats nd the spoken language they often use...
...so softly said, with such innocence but carrying such gr8 in-depth of hidden humor tht lies within.

...ppl here r so big preachers...anyways...cut cut cut...lemme cut the crap here, wish u had posted this example earlier :(


सारे भीड़ में ठह्का उठया, वो लाला भी न्यू बोल्या ,चल्लो चालो आपना -२ काम करो , मेरे ते कोई गाल गुली ना दी इसने

इसलिय भाई इस बात को इब्ब भूल भी जा !

खुश रहो!

aur ab neeche hi dekh lo...i dont know where these words r directed... :confused::tamatar
...
not to exaggerate the matter further, i cannot stop saying tht "truth lies within"
...
...
There is a place on this virtual world called "Jat Land". I say its irony at it's fullest !!! :thappad:rolleyes::confused::p:tamatar
...the flip side of the coin do exists
...nd ppl talk abt my मनोवृति :p
.
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V
V
V

yes sir aur vaise bhi kahte hai na jiski uttar gayi loi oska kya karega koi.

BLESS U ALL !!!
 
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