हरिद्वार में गंगा किनारे रमणीक हर-भरे सुंदर वातावरण मे एक हंस और हंसनी रहते थे| एक दिन हंसनी ने हंस से कहा कि यहाँ रहते काफी दिन हो गए चलो सैर के किए कही बाहर चलते है | हंस हंसनी को सैर कराने निकल पड़ा, शाम तक सैर करते रहे। शाम को जब वे रुके तो देखा कि नीचे रेगिस्तान था। वे एक सूखा पेड़ था उसी पर रात बिताने के लिए रुक गये। उसी पेड़ पर एक गिरगिट भी रहता था। हंसनी ने हंस से पूछा कि ये जगह रेगिस्तान कैसे बनी होगी।? हंस ने कहा कि शायद जरूर इस गिरगिट की वजह से हुआ होगा। ये सब उस गिरगिट ने सुना। जब सुबह हंस हंसनी जाने लगे तो उल्लू जोर जोर से चिल्लाने लगा कि ये हँस मेरी पत्नी को ले जा रहा है। इस बात को लेकर झगड़ा होने लगा। गाँव के सभी लोग इकट्ठा हो गए लोगों ने देखा कि वो तो बाकई हंसनी है और हंस की ही पत्नी है| पर गिरगिट नही माना और इस बात को लेकर फिर पंचायत बैठ गई। पंचों ने सोचा की हंस तो यहाँ से चला जायेगा लेकिन गिरगिट तो यही रहेगा इसलिए पंचो ने फैसला गिरगिट के पक्ष में दिया। दुखी होकर जब हँस जाने लगा तो पीछे से गिरगिट ने आवाज़ लगाई की अपनी हंसनी को तो साथ लेता जा। हँस ने कहा की ये तो अब तुम्हारी पत्नी है। गिरगिट बोला नहीं ये तो तुम्हारी ही पत्नी है। मैंने ये सब इसलिए किया था कि तुम्हें मालूम होना चाहिए कि यहाँ गाँव में गिलहरी, कोयल, मोर, सियार, हिरण, बाघ, शेर, हाथी सब तो हैं, पर ये रेगिस्तान मेरी बजह से नहीं बल्कि इन बगैर सोचे समझे आँखे बंद करके हंसनी को गिरगिट की पत्नी मानने वालो पंचों और उनके समर्थको की बजह से बना है।
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कहानी जैसे पंचों को नही.......