Yaadon Ke Pal

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Talash karoge

Nice one Vivek.....


humne kab kaha hume kisi ke aaane ki ass hai
khabar aaye the door se,kisi ko hamari talaash hai


Talash karoge koi mil bhi jayega magar hamare jaisa kaun tumhe chahega....
Tumhe chahat se dekhega jaroor magar wo hamari jaisi nazre kahan se layega...........:cool:
 
हमारा यूँ ही उस मोड़ पर मिल जाना
दिल मै अरमान जागता था
वो वक्ता गया जब आप को देख कर
दिल अपनी तकदीर पर इतराता था
 
koi to baat ho jo uss ko Khas kar de

main kisi aam si larki ka ho nahe sakta.:)









Jab unko meri yaad ne sataya hoga...
Tab unki aankh mein paani bhar aaya hoga....
Gila yeh nahi ki vo bhool gaye hum ko...
Gila yeh hai ki kisi aur ke liye humko bhulaya hoga....
 
aansou ko mai ne rok liya jo teri yaad mai behte the,
woh taaj mehal tod diya jis mai hum tum rehte the,
lekin ab hum ne dil ke darwaze par taalalaga dya,
ab waha koi nahi rehta jaha tum rehte the...
Na jaane Q abhi aapki yaad aa gayi,
Bina mausam ke hi Barsat aa gayi,
Maine chukar dekha jo bund ko to,
Har bund me aapki tasvir najar aagayi.
 
aansou ko mai ne rok liya jo teri yaad mai behte the,
woh taaj mehal tod diya jis mai hum tum rehte the,
lekin ab hum ne dil ke darwaze par taalalaga dya,
ab waha koi nahi rehta jaha tum rehte the...

Kahan aa kay ruknay thay rastay
Kahan moor tha usay Bhool Jaa

Woo jo mill gaya ussay yad rakh
Woo jo nahi milla usay Bhool Jaa

Woo teray NASEEB ke barishain
Kissi aur chhat pay baras gain

Dil-e-bay khabar meri bat suun
usay Bhool Jaa, usay Bhool Jaa
 
काश ये दिल बेकरार नही होता ,
काश की इसमे बेपनाह प्यार नही होता !

आँखे तो आपकी कुछ और ही कहती है,
पर काश होंठो पे इंकार नही होता !

यादों में आपकी जी रहे हे हम,
दिल का सोदा बार बार नही होता !

मोहबत पे हमें है एतबार,
वरना आज भी हमें इंतजार नही होता !!
 
Log Aksar Dua karte hai ki,
“Khuda Pyar karnewalo ko kabhi Juda Na karwaye”
Par Hum to kahenge ki
“Jo Na ho Kismat me Khuda us se Kabhi Na Milaye
 
jab unko meri yaad ne sataya hoga...
tab unki aankh mein paani bhar aaya hoga....
gila yeh nahi ki vo bhool gaye hum ko...
gila yeh hai ki kisi aur ke liye humko bhulaya hoga....

चाहत नहीं बदलती कभी वक्त के साथ
मोहब्बत तो क़यामत तक याद रहती है
देखे हुए किसी को ज़माना बीत गया
प्यासी निगांहों में यही फरियाद रहती है
 
posting some thing after a long time..

eh aasmaan wale zameen par uttar kar dekh,
hoti hai kaya judai tu bhi bichad kar dekh.......


साया बनकर तेरे साथ रहता हूँ हरदम
किसी तरफ़ दो कदम चल कर तो देख
तेरे माथे पर लिखा हूँ तकदीर की तरह
सपनों की दुनिया से निकल कर तो देख
 
koi to baat ho jo uss ko khas kar de

main kisi aam si larki ka ho nahe sakta.:)


कहने को तो वो इंसान बड़ा आम सा था
किसी की चाहत ने जिसे खास बना दिया
 
कोई वादा नहीं था मोहब्बत का लेकिन फ़िर भी
तुम्हे जिस शिद्दत से चाहा वो हमारी ही चाहत थी |
अब किस से गिला करे इश्क में कुर्बान होने का
ये हमारी ज़िन्दगी भी तो तुम्हारी ही अमानत थी ||
 
कोई वादा नहीं था मोहब्बत का लेकिन फ़िर भी
तुम्हे जिस शिद्दत से चाहा वो हमारी ही चाहत थी |
अब किस से गिला करे इश्क में कुर्बान होने का
ये हमारी ज़िन्दगी भी तो तुम्हारी ही अमानत थी ||

Vijay tumhara ye sher padh ker mujhe ek gana yaad aa raha hai...sorry i know its not a song thread...just writing 2 lines.......................................................................................................................................koi wada nahin kiya phir bhi,,,,,,,kyun tera intezaar rehta hai,,,,,,,bewajah jab qaraar mil jaye,,,,,,,dil bada beqarar rehta hai.
 
कुछ नहीं कहेंगे क्योंकि हर बात से अफसाना निकलेगा
जिसे अपना समझा आख़िर में वही बेगाना निकलेगा |
कई मुद्दतों से जो करता रहा है हर तरफ़ मेरी रुसवाई
यकीन है कि वो चेहरा मेरा जाना पहचाना निकलेगा ||
 
मेरे पास से गुज़र कर, मेरा हाल तक ना पूछा,
मैं ये कैसे मान जाऊँ, कि वो दूर जा कर रोये.
 
तेरी खुशबू का पता करती है
मुझ पे एहसान हवा करती है


शब् कि तन्हाई में अब तो अक्सर
गुफ्तगू तुझ से रहा करती है


दिल को उस राह पे चलना ही नहीं
जो मुझे तुझ से जुदा करती है


ज़िन्दगी मेरी थी लेकिन अब तो
तेरे कहने में रहा करती है


उस ने देखा ही नहीं वरना ये आँख
दिल का एहवाल कहा करती है


बेनियाज़ -ऐ -काफ -ऐ -दरिया अंगुश्त
रेत पर नाम लिखा करती है


शाम पड़ते ही किसी शख्स की याद
कूचा -ऐ -जान में सदा करती है


दुःख हुआ करता है कुछ और बयाँ
बात कुछ और हुआ करती है


अब्र बरसे तो इनायत उस की
शाख तो सिर्फ़ दुआ करती है


मसला जब भी उठा चिरागों का
फैसला सिर्फ़ हवा करती है





"परवीन शाकिर"
 
कौन आयेगा यहाँ कोई ना आया होगा
मेरा दरवाजा हवाओं ने हिलाया होगा


दिल -ऐ -नादाँ ना धड़क , ऐ दिल -ऐ -नादाँ ना धड़क
कोई ख़त ले कर पड़ोसी के घर आया होगा


गुल से लिपटी हुई तितली को गिराकर देखो
आंधियों तुम ने दरख्तों को गिराया होगा


'कैफ' परदेस में मत याद करो अपना मकान
अब के बारिश में उसे तोड़ गिराया होगा



कैफ भोपाली
 
देख लो ख्वाब मग़र ख्वाब का चर्चा ना करो
लोग़ जल जायेंगे सूरज की तमन्ना ना करो


वक़्त का क्या है किसी पल भी बदल सकता है
हो सके तुम से तो तुम मुझ पे भरोसा ना करो


किरचियाँ टूटे हुए अक्स की चुभ जायेंगी
और कुछ रोज़ अभी आइना देखा ना करो


अजनबी लगाने लगे ख़ुद तुम्हें अपना ही वजूद
अपने दिन रात को इतना भी अकेला ना करो


ख्वाब बच्चों के खिलौनों की तरह होते हैं
ख्वाब देखा ना करो ख्वाब दिखाया ना करो


बे -खयाली में कभी उंगलियाँ जल जायेंगी
राख गुज़रे हुए लम्हों की कुरेदा ना करो


मोम के रिश्ते हैं गर्मी से पिघल जायेंगे
धूप के शहर में 'आज़र' ये तमाशा ना करो




कफ़ील आज़र
 
काश ख़्वाबों ही में आ जाओ बहुत तन्हा हूँ


या मेरे ज़हन से यादों के दीये, गुल कर दो
मेरे एहसास की दुनिया को मिटा दो हम -दम,
रात तारे नहीं, अंगारे लिए आती है
इन बरसते हुए शोलों को, बुझा दो हम -दम,
दिल की धड़कन को सुला जाओ बहुत तन्हा हूँ l


अँधेरी रात में जब, चाँद खिलने लगता है
तुम्हारे प्यार के दीपक जलाके रोता हूँ,
तुम्हारे आने की, जब आस जाने लगती है
मैं इन चिरागों को ख़ुद ही बुझा के रोता हूँ,
जिंदगी ऎसी मिटा जाओ बहुत तन्हा हूँ l


सोचते सोचते जब, सोच भी मर जाती है
वक़्त के क़दमों की आहट को सुना करता हूँ,
अश्क थमाते हैं तो, आहों का धुआँ उठता है
रात भर यूँ ही तड़पता हूँ जला करता हूँ,
बार -ऐ -गम कुछ तो घटा जाओ बहुत तन्हा हूँ l



'न्याय शर्मा"

 
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