ज़िन्दगी मेरी थी लेकिन अब तो
तेरे कहने में रहा करती है
शाम पड़ते ही किसी शख्स की याद
कूचा -ऐ -जान में सदा करती है
दिल चुराने का काम तेरी अदा करती है
तेरी बेरुखी हम दोनो को जुदा करती है ।
सोचा बहुत दूर चला जाउँ तेरी दुनियाँ से
कदम उठाना मुश्किल तेरी सदा करती है ॥